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दुनिया हिंदी बोल रही तो हम क्यों शरमाएं : कोश्यारी

मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के कार्यक्रम में बोले राज्यपाल, कहाः हिंदी के विकास में गैर हिंदी भाषियों की भूमिका महत्वपूर्ण

मुंबई : हिंदी के विकास में गैर हिंदीभाषियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए देश के संसद में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए कोई विधेयक लाने की जरूरत नहीं है। हिंदी पूरे देश की सम्पर्क भाषा है। यह बात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कही। राज्यपाल विश्व हिंदी दिवस के मौके पर मुंबई हिंदी पत्रकार संघ की तरफ से आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में हिंदी बोली जा रही हैं। हमें भी हिंदी बोलने में शरमाने की जरुरत नहीं है।

शुक्रवार की शाम मुंबई विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए श्री कोश्यारी ने कहा कि महात्मा गांधी जी गुजराती भाषी थे पर उन्होंने हिंदी के विकास के बहुत कार्य किया। उन्होंनें कहा कि गुजरात के रहने वाले स्वामी दयानंद मथुरा में रहे और हिंदी के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के पत्रकारों को हिंदी बोलने में हीन भावना नहीं महसूस करनी चाहिए। आज दुनिया हिंदी जानती-समझती है। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदी भाषियों ने भी हिंदी के विकास में अहम योगदान दिया है। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी किसी भी व्यक्ति पर थोपी नहीं जा सकती है।

हिंदी के बड़े संपादक बने मराठीभाषी पराडकर

राज्यपाल ने कहा हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत गैर हिंदी भाषी क्षेत्र कलकत्ता से हुई थी। मूल रुप से महाराष्ट्र के रहने वाले बाबूराव विष्णु पराडकर हिंदी के बड़े संपादक रहे। उन्होंने कहा कि हिंदी के पत्रकारों को हिंदी भाषा को लेकर हीनभावना नहीं पालनी चाहिए। आज भी हिंदी अखबारों के पाठक और हिंदी समाचार चैनलों के दर्शकों की संख्या बहुत ज्यादा है। कोश्यारी ने कहा कि मैंने 1964 में हिंदी से एमए किया था। किसी अंग्रेजी स्कूल-कालेज में जाता हूं और हिंदी में बात करता हूं तो वहां के छात्र बहुत खुश हो जाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी आज नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मॉरिशस तक पहुंच गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान हिंदी फिल्मों का है। पाकिस्तान सहित कई देश आज हिंदी बोल रहे हैं, लेकिन हमें हिंदी बोलने में शर्म आ रही है।

हिंदी भाषी पत्रकारों को उन्होंने सलाह दी कि हिंदी के अलावा प्रादेशिक भाषाएं भी सिखें। इससे हिंदी के विकास में और सहयोग मिलेगा। इस दौरान राज्यपाल ने वरिष्ठ पत्रकार प्रीतम सिंह त्यागी, अश्विनी मिश्र, अभिलाष अवस्थी, हरीश पाठक और हिंदी सेवी प्रवीण जैन को हिंदी सेवा सम्मान प्रदान किया। इसके पहले मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, महासचिव विजय सिंह कौशिक, सचिव अभय मिश्र, सह सचिव राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, कार्यकारिणी सदस्य हरिगोविंद विश्वकर्मा, अखिलेश तिवारी व अशोक शुक्ल ने राज्यपाल श्री कोश्यारी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया।

हिंदी के विकास में बालीवुड की भूमिका खास

इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा ‘बॉलीवुड और हिंदी’ में भाग लेते हुए ‘लगान’, ‘गंगाजल’, ‘राजनीति’, ‘स्वदेश’ जैसी फिल्मों और ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ जैसे टीवी धारावाहिक से पहचान बनाने वाले अभिनेता दयाशंकर पांडेय ने कहा कि बॉलीवुड के लोग भले ही हिंदी को सम्मान न देते हो पर इस बात में कोई दो राय नहीं कि हिंदी फिल्मों ने पूरी दुनिया को हिंदी सिखाई है। हमें दुखी होने की जरुरत नहीं है। हिंदी हर जगह फैल रही है। वरिष्ठ पत्रकार संजय प्रभाकर ने कहा कि बाजार पर हिंदी का कब्जा है। हिंदी फिल्मों की वजह से दूसरे देशों का पर्यटन बढ़ रहा है। इस लिए वहां के लोग हिंदी सिखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों ने हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में सबसे बड़ी भूमिका निभाई हैं।

पत्रकार से फिल्म पटकथा लेखक बने ‘इंडियन’, ‘काबिल’, ‘क्रिस-3’, ‘जन्नत’ जैसी फिल्मों के पटकथा-संवाद लेखक संजय मासूम ने कहा कि फिलहाल तो बॉलीवुड में हिंदी की स्थति अच्छी नहीं है। अब संवाद-पटकथा रोमन में लिखी जाती है और देवनागरी की उपेक्षा होती है। उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन, रितिक जैसे सितारे देवनागरी लिपि में ही पटकथा-संवाद मांगते हैं। पर संतोष की बात है कि हिरो को संवाद तो हिंदी में ही बोलना पड़ता है। मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा करुणा शंकर उपाध्याय ने कहा कि दुनिया के कई विकसित देशों ने अपनी मातृभाषा के बल पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि भाषा का संस्कृति से गहरा संबंध है। भाषा खत्म होगी तो संस्कृति भी समाप्त हो जाएगी।

हिंदी पखवाडा की जरुरत क्यों : कृपाशंकर

पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इस देश की भाषा के लिए हिंदी पखवाडा मनाना पड़ता है। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के महासचिव विजय सिंह ने कहा कि हिंदी फिल्मों से लाखों-करोड़ कमाने वाले फिल्मी सितारे आखिर हिंदी को क्यों सम्मान नहीं देना चाहते। कार्यक्रम का संचालन अभय मिश्र और हरिगोविंद विश्वकर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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