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सुख-दुख

इस केकड़े का नीला खून आदमियों के लिए बड़े काम का है!

सुभाष सिंह सुमन-

केकड़े की एक नस्ल है Horseshoe Crab. इसका खून होता है नीला. इंसानी नस्ल की उन्नति और प्रगति में इस नीले खून का बड़ा योगदान माना जाता है. इस नीले खून की खासियत है कि यह बैक्टीरिया को लेकर बहुत संवेदनशील होता है. बैक्टीरिया से संपर्क में आते ही यह खून जमने लगता है. इसी खासियत से यह मेडिकल साइंस में बहुत उपयोगी बन जाता है. कोई वैक्सीन जब डेवलप की जाती है तो इंसानों पर इस्तेमाल से पहले उसे इसी नीले खून से टेस्ट किया जाता है. जब क्लोटिंग नहीं होती है, तभी वैक्सीन को इंसानों पर इस्तेमाल के लिए सुरक्षित माना जाता है. इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कोविड वैक्सीन में भी हुआ था. इंजेक्टेबल एंटीबायोटिक दवाओं के लिए भी यह प्रक्रिया अनिवार्य होती है.

Horseshoe Crab के खून निकालने की प्रक्रिया की यह तस्वीर ChatGPT की मदद से बनाई गई है. यह सटीक तो नहीं है, लेकिन कुछ इसी तरह लैब में इनका नीला खून निकाला जाता है. इसके बाद केकड़ों को वापस उनके प्रवास स्थल के पास ही छोड़ दिया जाता है, लेकिन खून निकाले जाने के बाद बहुत सारे ये केकड़े मर जाते हैं.

यह बात मुझे आज ही पता चली. अचानक फीड में एक वीडियो आ गया सजेशन में, उसमें यह बात बताई गई थी. वीडियो देखते हुए मुझे वीगन बंधुओं की बहुत जोर से चिंता होने लगी. अब चूंकि आजकल फीड में कुछ भी आ जाता है और ज्यादातर सूचनाएं गड़बड़ होती हैं, तो मैंने क्रॉसचेक करने का इरादा किया. अनेकों प्रमाण तुरंत मिल गए. एक उदाहरण के लिए नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम का आर्टिकल नीचे डाल देते हैं.

अब इतनी मेहनत करने के पीछे का कारण बताता हूं. सबसे पहले तो इन जीवों का और इन्हें रचने वाली प्रकृति का आभार. प्रकृति ने सक्षम जीव की सुरक्षा के लिए ये साधन विकसित किया और उस सक्षम जीव ने नीले खून के रहस्य का उद्घाटन कर खुद की क्षमता के दायरे का विस्तार किया. इन सब के लिए मेहनत का हक बनता है. दूसरी वजह मजेदार है. यूं तो वीगन बंधुत्व अलग तरह की सनक की सवारी करता है, उनमें से ज्यादातर मानेंगे नहीं, लेकिन हकीकत है कि इस बात से बहुतेरे अबतक अनजान होंगे. उन्हें यह बताना फर्ज बनता है कि बंधुओं अबतक जो हुआ सो हुआ, अब आगे से इंजेक्टेबल एंटीबायोटिक और कोई वैक्सीन मत लेना. अगर इस तरह ही वीगन भसड़ कुछ कम हो तो प्रकृति पर उपकार हो जाएगा.

वीगनवाद नार्सिसिज्म की इंतहा है. इन्हें सिर्फ लिपिस्टिक नारीवाद से टक्कर मिल सकती है. दोनों के न होने या कम होने से समूची सृष्टि के सौंदर्य में कुछ वृद्धि तय है. 🙂

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