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फर्जी आंकड़ों के दम पर भारत की भूख छिपा रही मोदी सरकार – रिपोर्ट

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स जैसी संस्थाओं की रिपोर्टों में हेरफेर करने का बड़ा आरोप लगा है. जबकि सच्चाई यह है कि 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही मोदी सरकार के भारत की स्थिति तमाम वैश्विक रिपोर्टों में इस वक्त बेहद खराब स्तर पर है.

पूरी कहानी समझने के लिए हमें दो साल पीछे यानी 2020 में चलना पड़ेगा. मोदी सरकार ने भारत को खराब रेटिंग देने वाले वैश्विक सूचकांकों का मुकाबला करने के लिए एक वॉर रूम की स्थापना की थी. 30 से ज्यादा वैश्विक सूचकांकों की समीक्षा की गई और 19 मंत्रालयों को रैंकिंग की खिलाफत करने और खुद के लिए बढ़िया माहौल बनाने का काम सौंपा गया.

इस पूरे काम के नेतृत्व की जिम्मेदारी कैबिनेट सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेशों के तहत नीति आयोग को मिली.

सबसे उपर हिट लिस्ट में था ग्लोबल हंगर इंडेक्स. भारत इस सूचकांक पर लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है. मुख्य रूप से बच्चों में कुपोषण के स्तर पर. इसे लेकर हुए एक सवाल पर तत्कालीन डब्ल्यूसीडी मंत्री स्मृति ईरानी ने सूचकांक को बकवास बताते हुए जवाब दिया था- “अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह भी भूखी हैं.”

मोदी सरकार की तरफ से वैश्विक रिपोर्टों के प्रकाशकों को पत्र लिखकर दावा भी किया गया कि उनकी कार्यप्रणाली गलत है. अधिकारियों ने अपने-अपने मुताबिक इसके तर्क दिए थे.

हालांकि, ग्लोबल हंगर इंडेक्स के प्रकाशकों ने मापदंडों को बदलने या सरकार द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक स्त्रोतों का उपयोग करने के सरकारी अनुरोधों का पालन करने से इनकार कर दिया.

जब सेटिंग नहीं हुई तो सरकार ने गरीबी सूचकांक का अपना खुद का एक एडिशन तैयार कर लिया, मैट्रिक्स को बदल दिया, और गरीबी में कमी के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया.

यह 2024 के चुनावों में देखा गया. अधिकारियों द्वारा तैयार एक संदिग्ध दावा पेश कर बताया गया कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के सत्ता में आने के बाद से 25 करोड़ लोग गरीबी से बच गए. इस दावे को खुद मोदी ने कई बार दोहराया.

रिपोर्टर्स कलेक्टिव द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कई बातों और आंकड़ों पर प्रकाश डाला गया है. जैसे- सरकार के आंतरिक रिकॉर्ड के हवाले से लिखा गया है कि सरकार में कानून के शासन में विफलताएं और गरीबी के आंकड़ों में हेराफेरी की गई है, सरकार के अंदर किसी के भी काम में कोई जवाबदेही भी नहीं है.


वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने यह रिपोर्ट शेयर कर लिखा है- शानदार पत्रकारिता है। कम से कम पत्रकार लोग तो इसे ट्वीट करें। और जरूर रिपोर्टर्स कलेक्टिव को दिल खोल कर सपोर्ट करें। वैसे तो भारत की जनता के टैक्स और जीएसटी के पैसे से सरकार के पास विज्ञापन देने के लिए धन होता है मगर वो धन गोदी चैनलों को पत्रकारिता नहीं करने के लिए दिया जाता है।

गोदी मीडिया की हालत ये है कि ऐसी शानदार रिपोर्ट पर न तो कार्यक्रम कर सकता है और न हिंदी के अखबार इसे छाप सकते हैं । लेकिन इस ख़बर को केवल यहाँ शेयर न करें, आम लोगों को भी बताएँ।


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1 Comment

1 Comment

  1. Shailesh Srivastava

    December 22, 2024 at 9:39 pm

    रवीश कुमार कितना ईमानदार है यह बात किसी भी व्यक्ति से भारत के किसी भी चौराहे पर खड़े होकर पता लगाया जा सकता है। जिसका सगा भाई बलात्कार का आरोपी है स्वयं रवीश कुमार तमाम भारत विरोधी संस्थानों के साथ संलिप्त है।
    ऐसे दलालों की बात को आगे रखना भड़ास अपने कार्यों पर प्रश्न चिह्न लगवाता है।
    ऐसे दलालों के प्रति भड़ास को सावधान रहने की आवश्यकता है।
    शैलेश श्रीवास्तव
    गाजियाबाद

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