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आयोजन

आईआईएमसी 1994-95 बैच के साथियों का गुलाबी नगरी जयपुर में हुआ जमावड़ा!

विकास मिश्रा-

यह 50 साल की उमर पार कर चुके नौजवानों का मेला है। महामिलन है आईआईएमसी यानी भारतीय संचार संस्थान नई दिल्ली के सहपाठियों का। इस बार फिर 1994-95 बैच के साथियों का जमावड़ा हुआ गुलाबी नगरी जयपुर में।

29 साल पहले हम आईआईएमसी से निकले थे। यानी एक पीढ़ी बीत गई। हमारा बैच अद्भुत रहा है। पहली बात तो यही है कि लगातार डेढ़ दशक से हम लोग सालाना मिलन समारोह आयोजित करते हैं और सभी साथी उसमें जुटते हैं। हमारे तमाम साथियों के बालों में सफेदी आ चुकी है तो कई साथियों के बालों ने साथ छोड़ दिया है। चार साथी अविवाहित भी हैं। मोस्ट इलेजबल बैचलर।

इस आयोजन की खास बात है कि जब हम मिलते हैं तो माहौल हमें 1994-95 के उसी दौर में ले जाता है। हंसी-ठिठोली, चुहलबाजी, एक दूसरे को पहले की तरह चिढ़ाना और फिर ठहाके लगना। तभी मैंने ऊपर लिखा 50 साल के नौजवान। कुछ ही घंटे के आयोजन के बाद लगा जैसे पूरे तन-मन की ओवरहॉलिंग हो गई है। आनंद से लबालब होकर लौटे।

इस बार के आयोजन की बागडोर फिर हमारी प्रिय साथी अमृता के हाथों में थी। इतना शानदार आयोजन अकेले अपने दम पर किया कि मेरा तो सिर उसके आगे झुक गया। इसकी एक तस्वीर गवाह भी है। देश के जाने माने पत्रकार, लेखक और साहित्यकार अमरेंद्र किशोर के हाथ में कैमरा था और उसने गजब की फोटोग्राफी की।

अमरेंद्र ने बड़ी मेहनत से दो वीडियो भी बनाया था, जिसे बड़ी स्क्रीन पर चलाया गया। एक था हम लोगों के महामिलन की तस्वीरों का दोस्ती पर आधारित गानों के साथ। दूसरा वीडियो हमारे साथी नलिन चौहान पर था, जो कोरोना काल में घर से निकला तो अब तक वापस नहीं आया। ये दोनों वीडियो अगली पोस्ट में डालूंगा।

आयोजन में जयपुर में पहली बार इंटरनेट तकनीक लाने वाले अजय डाटा, अभिनेता संजय सरदाना और मिस इंडिया ग्लैम सौम्या गुप्ता ने भी शिरकत की। कालबेलिया नृत्य करने वाली और लोक गायकों की टोली भी थी। खूब गाने बजे और लड़कियों ने कमाल की नृत्य प्रस्तुति दी। इन नृत्यांगनाओं के साथ सौम्या गुप्ता ने भी डांस किया तो हमारे कई साथी भी खूब थिरके।

हमारे प्रिय बैचलर साथी मनोज बाबू तो आनंद के सागर में गोते ही लगाने लगे थे। उन्होंने खूब वीडियो बनाए और सौम्या-मुकेश जी की बात को इंटरव्यू की तरह रिकॉर्ड करके पोस्ट भी किया।

हमारे बैच की साथी शालिनी जोशी किन्हीं कारणों से पिछले आयोजनों में नहीं आ सकी थीं। पिछले दो बार से जयपुर में आईं। पहली बार तो सामना उलाहनों से हुआ था, इस बार उलाहने कम थे और आनंद ज्यादा। सुप्रिय, संगीता, उत्पल और कुछ अन्य मित्र नहीं आ पाए, सबकी कमी बहुत खली। पहली बार कमलेश मीणा ने शिरकत की। तोहफे में हम सभी को छोटे-छोटे हाथी उपहार में दिए। 29 साल बाद कमलेश से मिलना यादगार रहा। जयपुर से हम लोग ढेर सारी मीठी यादों के साथ लौटे, जिसकी मिठास को अभी तक चुभला रहे हैं।

एक बार फिर मैं फेसबुक से जुड़े सभी दोस्तों से कहना चाहता हूं कि जिंदगी का क्या भरोसा, कब सांसें साथ छोड़ जाएं। दुनियादारी से फुर्सत कहां मिलने वाली है, लेकिन फिर भी फुर्सत निकालिए, पुराने मित्रों से मिलिए। बातें कीजिए, गप्प मारिए, उलाहने दीजिए, चिढ़ाइए, पिनकाइए, खूब हंसिए और खूब हंसाइए। मित्रों का साथ जीवन सात्विक रसायन है और ऑक्सीजन भी।


अमरेन्द्र किशोर-

जब संगीत और नृत्य के भी रंग दिखे। यह दस्तूर है और हमारी फ़ितरत भी– मिलना और उत्सव मनाना। हम सहपाठियों का हर साल मिलना तय है। सहपाठी का मतलब 30 साल पुराने अपने साथ पढ़े लिखे लोग जो #IIMC के #Hindijournalism के हमारे बैच के संगी हैं। बीते दिनों अपने वार्षिक जलसे का आयोजन जयपुर के Tavern Glass Lounge and CurryHouse में आयोजित किया गया।

मिलना- जुलना, भोजन-भात के अलावा राजस्थान के लोक गायक, कालबेलिया संगीत का हमने भरपूर आनंद उठाया। कुछ मित्र नहीं आये, उनकी कमी खल रही थी, लेकिन उनकी भी विवशता थी।

इस अवसर पर हमारे अभी तक के करीब 10 सालों के सालाना मिलन की यादगार तस्वीरों वाली एक वीडियो फ़िल्म भी दिखाई गई और अपने लापता सहपाठी नलिन चौहान को बेहद उम्मीदों के साथ एक दूसरी फिल्म के जरिये याद किया गया, कि वह जरूर लौटेगा।

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