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भारतीय बाज़ार को समझ नहीं आया मोदी का अमेरिका दौरा, भयानक गिरावट!

Share market : 5.18 ट्रिलियन डॉलर के शिखर मार्केट कैप से, हम अब 3.99 ट्रिलियन डॉलर पर हैं। यह मार्केट कैप में 23% की गिरावट है।

शेयर बाज़ार में हाहाकार है। नए इंवेस्टर भाग रहे हैं । पिछले महीने अब तक की रिकॉर्ड संख्या में SIP बंद हुआ है। जिस तरह को लगातार गिरावट है उसका असर अगले कुछ दिनों में शेयर बाज़ार से बाहर भी दिखेगा । मंदी का दौर शुरू हो सकता है!

शेयर बाजार में हाहाकार! डर साफ़ महसूस किया जा सकता है! एक उपभोग बढ़ाने वाले बजट और ब्याज दर में कटौती के बावजूद, शेयर बाजार आम निवेशकों की बचत को कम कर रहा है । अब यह स्पष्ट है कि जहां नीति निर्माता ट्रंप की नीतियों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरे प्रभाव को कम आंक रहे हैं, वहीं बाजार ऐसा नहीं कर रहा है। स्टॉक मार्केट इन नीतियों से पड़ने वाले प्रभाव को दोहरी मार के रूप में देख रहे हैं, जिनमें कॉर्पोरेट आय में गिरावट और मैक्रोइकॉनॉमिक मंदी शामिल है। रिटेल निवेशक एक बियर बाजार से जूझ रहे हैं, क्योंकि लगभग 70% मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अपने हाल के उच्च स्तर से 30% नीचे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल ही में संपन्न अमेरिका दौरे के बाद भारतीय शेयर बाजार में भयंकर गिरावट देखी गई है। इस दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा की, जिससे भारतीय निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की नई टैरिफ नीति ने भारतीय शेयर बाजार को अस्थिर कर दिया है। BSE Sensex और Nifty दोनों ने बड़ी गिरावट दर्ज की, जिसने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। विशेष रूप से, ट्रंप के ऐलान के बाद कि वे जिस देश पर जितना टैरिफ लगेगा वैसा ही टैरिफ उस देश पर लगाएंगे, ने भारतीय बाजार को बड़ा झटका दिया है।

मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, व्यापार, रक्षा और टेक्नोलॉजी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन टैरिफ के मुद्दे पर कोई स्पष्ट परिणाम नहीं निकला। इसके परिणामस्वरूप, निवेशकों की उम्मीदें टूट गईं और बाजार में अविश्वास का माहौल देखा गया।

एक विश्लेषक ने कहा, “मोदी जी के अमेरिका दौरे से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन ट्रंप की नीति ने सारे अनुमानों को गलत साबित किया है। अब भारतीय कंपनियां और निर्यातक अधिक महंगाई और व्यापारिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।”

भारतीय बाजार के प्रमुख सूचकांकों में से एक, BSE Sensex, 575 अंकों की गिरावट के साथ 22,833 पर कारोबार कर रहा है, जबकि Nifty 200 अंक गिरकर 22,833 पर पहुँच गया। विशेष रूप से, अडानी ग्रुप के शेयरों में भी महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जिसमें अडानी ग्रीन 3 प्रतिशत और अडानी पोर्ट 4.57 प्रतिशत गिरा है।

यह स्थिति भारत की वैश्विक व्यापारिक रणनीति और आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपने व्यापार साझेदारों के साथ नए समझौतों पर काम करना होगा और घरेलू बाजार को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने होंगे।


वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की ये टिप्पणी भी पढ़िये-

जिसकी आशंका थी वही हुआ। डर था कि कहीं प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दबाव में न आ जाएं और सरेंडर न कर दें। यात्रा की समाप्ति पर ये साफ़ दिख रहा है कि ट्रम्प ने मोदी पर भरपूर दबाव डाला और ऐसा लगता है कि उस दबाव के सामने वे झुक भी गए।

इसका एक संकेत तो ये है कि ट्रम्प ने मोदी के सामने ही बराबरी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया और मोदी चुप रहे।

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और भारत को उसी से तेल-गैस खरीदना चाहिए। उन्होंने ये नहीं कहा कि वे ईरान और रूस से भी सस्ता तेल भारत को देंगे।

इसी तरह एकतरफा तौर पर ये घोषणा भी कर दी कि अमेरिका भारत को एफ 35 लड़ाकू विमान बेचेगा। इन तमाम घोषणाओं पर मोदी खामोश रहे।

खुशामदी अंदाज़ में मागा, मिगा और मेगा की बात करते हुए उन्होंने ये ज़रूर कहा कि 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना करना है।

ज़ाहिर है कि ट्रम्प ने मोदी को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया। लेकिन मोदी की फ़ज़ीहत तो तब हुई जब संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार ने उनसे अडानी के बारे में सवाल पूछ लिया।

पत्रकार ने पूछा कि क्या ट्रम्प के साथ मीटिंग में अडानी पर भी बातचीत हुई।

इस प्रश्न को सुनते ही मोदी जी हिल गए। उनकी बॉडी लैंग्वेज गड़बड़ा गई। सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय वे लोकतांत्रिक देश और वसुधैव कुटुंबकम की बात करने लगे।
इसके बाद हाथ नचाकर कहा कि ये अडानी का निजी मामला है और दो मुखिया के बीच बातचीत में ऐसे मुद्दों पर बात नहीं होती।
सवाल उठता है कि अडानी से जुड़े सवाल पर मोदी जी इतना परेशान क्यों हो गए…..क्या उन्होंने इस तरह के सवाल की उम्मीद नहीं की थी…..

क्या इस सवाल का जवाब उनके पास नहीं था…..क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अडानी पर लग रहे आरोप निजी मामला हो सकता है….ख़ास तौर पर तब जबकि उनका नाम भी इससे जोड़ा जा रहा हो…..

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