टीवी कार्यक्रम और विज्ञापन के बीच चलो चलें जुमले बनाएं

Sanjaya Kumar Singh : दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का दिन था। मैं दिन भर घर पर ही था लेकिन जिससे भी बात हुई सबका यही कहना था कि आम आदमी पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही है। शाम में सोचा एक्जिट पॉल देख लिया जाए। शाम 6:00 बजे टीवी ऑन किया और चैनल सर्फ करते हुए देखा कि इंडिया टीवी पर अजीत अंजुम Ajit Anjum एंकरिंग कर रहे थे। इसी पर रुक गया। 6:20 होने तक लगने लगा कि मैं खबरें देख रहा हूं या विज्ञापन। पुराना अनुभव यह रहा है कि एक चैनल पर विज्ञापन आता है तो दूसरे पर भी विज्ञापन ही आ रहा होता है और चैनल बदलने का कोई लाभ नहीं मिलता।

उल्टे आप जो देख रहे होते हैं वह छूट जाता है और आप कुछ नया देखने लगते हैं। अंत में लगता है कि आपने ना विज्ञापन देखे ना कोई खबर या चर्चा। इसलिए, सोचा आज समय नोट किया जाए और एक्जिट पॉल पर चर्चा भी देख ही लूं। कार्यक्रम शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद दिन में तीन बजे तक के आंकड़ों के अनुसार एक्जिट पोल की खबर आई कि आम आदमी और भाजपा में कड़ी टक्कर है और आम आदमी पार्टी भाजपा से आगे है।

कांग्रेस को मिले वोटों का प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव से कम हुआ है और वह ज्यादातर आम आदमी पार्टी के पक्ष में गया है। वोटों का प्रतिशत भाजपा का भी बढ़ा है पर उससे सीटें नहीं बढ़ने वाली हैं। बाद में जो आंकड़े आए उससे पक्का हो गया कि वोटों का प्रतिशत बढ़ने के बाद भी भाजपा की सीटें कम होंगी और आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना है। पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस भी नुकसान में रही है और उसकी सीटें 0-2 के बीच रहने की उम्मीद है। इतनी सी जानकारी मुझे डेढ़ घंटे में मिली। बीच-बीच में कांग्रेस और भाजपा के प्रतिनिधियों तथा विनोद शर्मा और मधुकर उपाध्याय के विचार जानने को मिले। हालांकि ये कभी खुलकर बोल नहीं पाए। जैसे ही कोई बोलना शुरू करता था ब्रेक लेने का समय आ जाता था। और एंकर ने काफी समय ब्रेक लेने में ही जाया कर दिया। आइए देखें कितनी देर प्रोग्राम देखने के लिए मुझे कितनी देर विज्ञापन झेलने पड़े।

ब्रेक शुरू ब्रेक खत्म विज्ञापन कार्यक्रम
6:23      6:29   06      11
6:40      6:47   07      05
6:52      6:59   07      13
7:12      7:19   07       03
7:22      7:29   07      11
7:40      7:47   07      04
7:51     8:00    नोट नहीं किया
कुल (मिनट में)     41      47

खबर तो कुछ ही मिनट की थी बाकी तथाकथित चर्चा और वह भी 41 मिनट विज्ञापन में 47 मिनट। यह स्थिति तब है जब हम डीटीएच कनेक्शन के लिए अच्छा खासा पैसा देते हैं और इसमें मनोरंजन कर भी होता है। टेलीविजन पर समाचारों और चर्चा की हालत तथा गुणवत्ता तो लगातार खराब हो ही रही है पैसे देकर विज्ञापन देखना और उसपर मनोरंजन कर देना ज्यादा नहीं चलने वाला है। मेरे घर में तीन केबल कनेक्शन थे अब एक ही रह गया है। फिलहाल ऐसा तो नहीं लग रहा है कि मैं यह इकलैता कनेक्शन भी बंद करा दूंगा पर मेरी ही तरह अगर और लोग भी तीन से एक कनेक्शन पर आ गए हों तो टीवी पर विज्ञापन और विज्ञापन के बीच टीवी के कार्यक्रमों का भविष्य भी चर्चा का विषय हो सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

‘भड़ास ग्रुप’ से जुड़ें, मोबाइल फोन में Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *