आशीष खेतान भी छोड़ चले, ‘आप’ अब चाटुकारों का समूह!

Anurag Anant : अरविंद केजरीवाल ने सिद्ध कर दिया है, जनभावनाओं को वो अनाथ खेत मानते हैं और जब मन करता जोत लेते हैं, जब मन करता है। कुछ बो देते हैं, फसल काट लेते हैं, गाय-भैंस छोड़ देते हैं चरने के लिए। विकास की थोथी अभिधारणा रचने में लगे हुए बौनों आदमियों का समूह …

जब केजरी पार्टी ‘पीटी’ जा रही थी तो कांग्रेसी उपदेश देते थे, अब कांग्रेसी ‘मारे’ जा रहे तो आपिये आइना दिखाने लगे!

Sheetal P Singh : अनुभवी लोग… अहमद पटेल पर बन आई तो अब बहुतों को लोकतंत्र याद आ रहा है ………आना चाहिये पर शर्म भी आनी चाहिये कि जब बीते ढाई साल यह बुलडोज़र अकेले केजरीवाल पर चला तब अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेसी राज्यपाल के अधिकारों के व्याख्याकारों की भूमिका में क्यों थे? जब एक बेहतरीन अफ़सर राजेन्द्र कुमार को सीबीआई ने बेहूदगी करके सिर्फ इसलिये फँसा दिया कि वह केजरीवाल का प्रिंसिपल सेक्रेटरी था तब भी लोकतंत्र की हत्या हुई थी कि नहीं? जब दिल्ली के हर दूसरे आप विधायक को गिरफ़्तार कर करके पुलिस और मीडिया परेड कराई गई तब भी यमुना दिल्ली में ही बह रही थी! तब कांग्रेसी बीजेपी के साथ टीवी चैनलों में बैठकर केजरीवाल को अनुभवहीन साबित कर रहे थे! अब अनुभव काम आया?

चंदा और सरकारी धन के खर्च का हिसाब क्यों नहीं देती ‘आप’?

आम आदमी पार्टी का ताज़ा विवाद गौर तलब है. इससे एक बार फिर टीम अन्ना और अरविंद केजरीवाल की चौकड़ी के भ्रष्टाचार से लड़ने के उन खोखले दावों की पोल खुल कर सामने आ गई है, जो वे पिछले 5 सालों से करते आ रहे थे. कपिल मिश्रा के आरोपों से पहले दिल्ली से लेकर पंजाब तक आम आदमी पार्टी पर तरह-तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं. भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के दौरान खुद अन्ना हजारे ने केजरीवाल द्वारा चंदे का हिसाब नहीं देने का सवाल उठाया था. उससे भी पहले यह सच्चाई सबके सामने आ चुकी थी कि केजरीवाल सरकार का 9 लाख रूपया दबा कर बैठे थे.

दिल्ली में निगम चुनाव ‘आप’ हारी तो विधानसभा का मध्यावधि चुनाव संभव

Akhilesh Akhil : दिल्ली में मध्यावधि चुनाव की संभावना! क्या दिल्ली में विधानसभा चुनाव समय से पहले भी हो सकते हैं? निगम चुनावों में अगर आप का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो उसमें तोड़फोड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। माना जा रहा है कि आप के कई विधायक टूट सकते है। इसके अलावा आप के 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में लाभ के पद का मामला लंबित है। अगर इनकी सदस्यता ख़त्म हो गयी तो जाहिर मध्यावधि चुनाव संभव है। माना जा रहा है कि 21 विधायकों पर जल्द ही फैसला होना है।

इस हार के लिए केवल केजरीवाल और सिसोदिया जिम्मेदार हैं

Asrar Khan : दिल्ली के राजौरी गार्डन विधान सभा उप चुनाव में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की शर्मनाक हार और भाजपा की जीत तथा कांग्रेस का दूसरे स्थान पर आना शायद इस बात का संकेत हो सकता है कि आम आदमी पार्टी जल्द ही ख़त्म हो जाएगी और कांग्रेस एवं भाजपा फिर से यहां की मुख्य पार्टियां बन जाएंगी…

दिल्ली में ‘आप’ सरकार को न कुचला गया तो बीस वर्षों तक भाजपा यहां सत्ता में न आ पाएगी!

Om Thanvi : दिल्ली में आप सरकार के दो वर्षों के कामकाज पर हिंदुस्तान टाइम्स में छपा वृहद सर्वे बताता है कि लोग मानते हैं राजधानी में भ्रष्टाचार घटा है और शिक्षा, चिकित्सा, जल-आपूर्ति और बिजली-प्रबंध के क्षेत्रों में बेहतर काम हुआ है। और, दिल्ली सरकार की यह छवि दो वर्षों तक नजीब जंग की अजीब हरकतों के बावजूद बनी है, जिन्होंने केंद्र सरकार की गोद में बैठकर निर्वाचित शासन के काम में भरसक रोड़े अपनाए।

गुजरात में ‘आप’ की लहर, सूरत की सफल रैली से भाजपा नेताओं को आए पसीने

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह सूरत में हैं. वहां से उन्होंने जो हालात बयान किया उससे तो यही लगता है कि आम आदमी पार्टी की अंदरखाने गुजरात में लहर है. भारतीय जनता पार्टी के कुशासन, भ्रष्टाचार और दमन से सिहरे हुए गुजरात के लोग अब केजरीवाल के शरण में जा रहे हैं. सूरत रैली में उमड़ी भीड़ ने काफी कुछ स्पष्ट कर दिया है. शीतल कहते हैं- ”इस भीड़ का असर मौक़े पर मौजूद लोगों से सैकडों गुना ज्यादा उस अवाम पर होगा जो डराया हुआ है और दूर से बैठकर इसकी कामयाबी की दुआएँ पढ़ रहा है”.

‘आप’ सिद्धू को सीएम का चेहरा बना रही तो इससे उसकी दरिद्रता ज़ाहिर होती है : ओम थानवी

Om Thanvi : क्या आप पार्टी सचमुच नवजोत सिद्धू को पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा बना रही है? अगर ऐसा है तो इससे आप पार्टी की दरिद्रता ही ज़ाहिर होती है। जैसा कि सुनते हैं, पंजाब में पार्टी की ज़बरदस्त साख पहले ही क़ायम हो चुकी है। फिर सिद्धू उसे क्या भोगने आ रहे हैं? ‘आप’ भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा से दूर रहते हुए पनपी पार्टी है। जबकि सिद्धू हिंसा के ऐसे मामले में शामिल रहे हैं, जिसमें उनके ही शहर के एक नागरिक को जान से हाथ धोना पड़ा था।

सम-विषम के नाम पर आम जनता को परेशान करने के लिए अड़ गई आम आदमी पार्टी की सरकार

Sanjaya Kumar Singh : पत्नी और सरकार के आगे तर्क!! दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए जांच के तौर पर शुरू की जा रही सम विषम नंबर की कारों को सम विषम तारीखों को ही चलने देने के फैसले की घोषणा में इतनी छूट है कि – यह प्रयोग सफल हो या असफल कोई खास मतलब नहीं है। सम-विषम नंबर के नाम पर असल में दिल्ली की आबादी को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। एक आबादी जो इससे बेसर है। चाहे वह वीआईपी हो या मोटरसाइकिल चलाने वाली या महिलाएं। दूसरी आबादी इससे प्रभावित होने वालों की है और यह दिल्ली में रोज दफ्तर आने जाने वालों का है जो सबसे ज्यादा परेशानी झेलेगी। चूंकि मामला स्थायी नहीं है इसलिए परेशानी और ज्यादा है। वरना परेशान होने वाला अपने लिए कोई इंतजाम करता।

‘आप’ सरकार ने दिल्ली में श्रम विभाग के अफसरों को चोर मीडिया मालिकों को सबक सिखाने की खुली छूट दी

Yashwant Singh : दिल्ली राज्य में कार्यरत मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने को लेकर श्रम विभाग ने मीडिया हाउसों को धड़ाधड़ चांटे मारना शुरू कर दिया है. ऐसा दिल्ली की केजरीवाल सरकार की सख्ती के कारण हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने श्रम विभाग के अफसरों को साफ-साफ कह दिया है कि किसी का मुंह न देखें, कानूनन जो सही है, वही कदम उठाएं.

क्या ‘प्याज’ घोटाला छिपाने के लिए दिया गया फुल पेज का विज्ञापन?

नई दिल्ली: प्याज को लेकर घोटाले के आरोपों से घिरी दिल्ली सरकार ने घोटाले के आरोपों को नकार दिया है. लेकिन आज केजरीवाल सरकार ने अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन छापकर आजतक चैनल पर निशाना साधते हुए बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. बीजेपी ने कहा है कि करोड़ों का विज्ञापन देकर सरकार ने प्याज घोटाला छुपाने की कोशिश की है. केजरीवाल सरकार पर सस्ते में प्याज खरीदकर जनता को महंगा बेचने का आरोप लगा है. बड़ा सवाल ये है कि प्याज में घोटाला हुआ या नहीं.

प्‍याज घोटाले का आरोप लगने पर केजरीवाल सरकार ने आजतक न्‍यूज चैनल पर निशाना साधते हुए अखबारों में निकाला पूरे पेज का विज्ञापन

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में केजरीवाल सरकार पर कम दामों में प्‍याज खरीदकर ज्‍यादा दामों में बेचने के आरोप लगने के बाद आप की सफाई आई है। उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते हुए कहा कि हमने प्‍याज 32.86 रुपए में खरीदे और बाजार में अपनी जेब से पैसे भरते हुए कम कीमत पर बेचे। जबकि केंद्र सरकार 33 रुपए में खरीदा प्‍याज ज्‍यादा दामों में बेच रही थी। उन्‍होंने आरोप लगाया कि यह सब लोगों का ध्‍यान हटाने के लिए किया जा रहा है। मीडिया को कागज दिखाते हुए उन्‍होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हमने केंद्र की एजेंसी एसफएसी से प्‍याज खरीदे थे।

बड़बड़िया न्यूज चैनलों की अब कड़ी निगरानी करेगी दिल्ली सरकार

मीडिया पर आम आदमी पार्टी को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाने के चंद रोज बाद अब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने तय किया है कि वह तमाम न्यूज चैनलों के कॉन्टेंट पर कड़ी निगाह रखेगी । दिल्ली सरकार ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे टीवी चैनलों पर ब्रॉडकास्ट होने वाले कॉन्टेंट को मॉनिटर करें। इस संबंध में डायरेक्टरेट ऑफ इन्फर्मेशन ऐंड पब्लिसिटी (डीआईपी) के अधिकारियों को जारी आदेश में कहा गया है कि वे सुबह 9 बजे से रात 11 बजे के बीच टीवी चैनलों पर प्रसारित कॉन्टेंट को मॉनिटर करें।

आशू के आंसू : उस दिन तो साढ़े तीन सौ घरों के चूल्हे बुझ जाने पर भी नहीं रोए थे आशुतोष

जब आईबीएन7 से साढ़े तीन सौ लोग निकाले गए थे और इनके घरों का चूल्हा अचानक ठंडा पड़ गया था तब मैनेजिंग एडिटर पद पर आसीन आशुतोष के आंसू तो छोड़िए, बोल तक नहीं फूटे थे. धरना प्रदर्शन सब हुआ लेकिन आशुतोष चुप रहे. आजकल वे अक्सर टीवी शोज में कहते रहते हैं कि मैं नौकरी छोड़कर राजनीति में आया… पर हम लोगों को पता है कि आशुतोष को निकाला जाना था… कारपोरेट में एक वाक्य होता है स्मूथ एक्जिट. यानि लात मार कर निकाले जाने से पहले सम्मानजनक तरीके से खुद छोड़ देने की प्रक्रिया. 

‘आप’ से बाहर किए गए योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार और अजित झा

वही हुआ जिसकी आशंका थी. तानाशाही दिखाते हुए सत्ता के नशे में चूर अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी से प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आनंद कुमार और अजित झा को निकाल बाहर कर दिया है. इन सभी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और घोर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है. इसके पहले इन नेताओं को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इन नेताओं को पार्टी से निकाले जाने का फैसला लेने का नाटक राष्ट्रीय अनुशासन समिति ने किया. समिति का कहना है कि वह कारण बताओ नोटिस के लिए मिले जवाब से संतुष्ट नहीं है.

आशीष खेतान के लिखे पेड न्यूज पर ‘तहलका’ को तीन करोड़ रुपये मिले थे!

इन दिनों आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान जब तहलका मीडिया हाउस में पत्रकार हुआ करते थे तो उन्होंने एस्सार कंपनी के पक्ष में पेड न्यूज लिखा था. इस पेड न्यूज के एवज में तहलका को तीन करोड़ रुपये मिले थे. ये आरोप लगाए हैं ‘आप’ के बागी नेता प्रशांत भूषण ने. उन्होंने पार्टी नेता आशीष खेतान पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि 2 जी मामले में खेतान ने एस्सार के समर्थन में लेख लिखा था, जिसके एवज में तहलका को तीन करोड़ रुपए मिले थे.

‘आप’ के बागी अभी अलग पार्टी नहीं बनाएंगे, छह माह तक देशव्यापी अभियान का फैसला

गुड़गांव : आम आदमी पार्टी की चेतावनी के बावजूद मंगलवार को यहां योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण गुट के ‘स्वराज संवाद’ में हजारों कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। कार्यकर्ताओं का मत था कि आम आदमी पार्टी में रहते हुए योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को ‘स्वराज’ के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। फैसला किया गया है कि आप से अलग होकर नई पार्टी नहीं बनाई जाएगी। पार्टी में रहकर ही स्वराज के लिए आवाज बुलंद की जाएगी। अब आगामी छह महीने तक पार्टी का यह असंतुष्ट धड़ा देशव्यापी अभियान चलाएगा।

‘स्वराज संवाद’ में कुलदीप नैयर, अरुणा, मेधा समेत ‘आप’ के 100 बागी भी शिरकत करेंगे

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) के बागी गुट ने दावा किया कि अगले हफ्ते उनकी ओर से बुलाए गए ‘स्वराज संवाद’ नाम के कार्यक्रम में प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय के साथ-साथ 100 से ज्यादा ऐसे लोकसभा उम्मीदवार शामिल होंगे जिन्होंने पार्टी के टिकट पर पिछला आम चुनाव लड़ा था ।

योगेंद्र यादव ने पूछा- स्वराज का मंत्र लेकर चली इस यात्रा का ‘स्व’ कहीं एक व्यक्ति तक सिमट कर तो नहीं रह जायेगा?

Yogendra Yadav : आज एक सवाल आपसे… अमूमन अपने लेख के जरिये मैं किसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करता हूँ। लेकिन आज यह टेक छोड़ते हुए मैं ही आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ। देश बदलने की जो यात्रा आज से चार साल पहले शुरू हुई थी उसकी दिशा अब क्या हो? पिछले दिनों की घटनाओं ने अब इस सवाल को सार्वजनिक कर दिया है। जैसा मीडिया अक्सर करता है, इस सवाल को व्यक्तियों के चश्मे से देखा जा रहा है। देश के सामने पेश एक बड़ी दुविधा को तीन लोगो के झगड़े या अहम की लड़ाई के तौर पर पेश किया जा रहा है। ऊपर से स्टिंग का तड़का लगाकर परोसा जा रहा है। कोई चस्का ले रहा है, कोई छी-छी कर रहा है तो कोई चुपचाप अपने सपनों के टूटने पर रो रहा है। बड़ा सवाल सबकी नज़र से ओझल हो रहा है।

दिल्ली से बाहर निकलते ही केजरीवाल के मंत्री Gopal Rai ने लाल बत्ती लगी कार धारण कर ली

Yashwant Singh : केजरीवाल के एक मंत्री Gopal Rai लाल बत्ती लगी कार से अपने गांव गए थे. क्या बुरा है भाई. वीवीआईपी कल्चर सिर्फ दिल्ली में खत्म करने का वादा था. कोई यूपी बिहार का नाम थोड़े लिया था ‘आप’ ने. वैसे भी, जंगली प्रदेश यानि यूपी में लाल बत्ती लगी कार से नहीं जाएंगो तो अफसर लोग से लेकर नेता लोग अउर जनता लोग तक इनको मंत्री ही नहीं मानेंगे. इसलिए जैसा देस वैसा भेष. दूसरे, गोपाल जी को अपने गांव के लोगों को भी तो एक बार दिखाना था कि देखो, हम मंत्री बन गया हूं, लाल बत्ती वाला… पों पों पों पों…

जानिए, अंकित लाल ने क्यों दिया ‘आप’ के सोशल मीडिया प्रमुख पद से इस्तीफा

अंकित लाल ने आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है. इस तरह उन्होंने आम आदमी पार्टी के फेसबुक ग्रुप की एडमिनशिप छोड़ दिया है. इसके पीछे क्या कारण रहे, इसे अंकित लाल ने एक पत्र के जरिए स्पष्ट किया है जो उन्होंने फेसबुक पर शेयर किया है. अंकित ने आहत मन से पार्टी संग अपने सफर को याद किया और कार्यकर्ताओं के नाम चिट्ठी लिखी जिसमें अन्ना आंदोलन से लेकर केजरीवाल के दूसरी बार सत्तारोहण व झगड़े का जिक्र है. अंकित की मूल चिट्ठी अंग्रेजी में है.

लव, सेक्स, धोखा और आप…. : ‘आप’ अब राजनीतिक दल नहीं, बल्कि गैंग है…

70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 67 विधायक अरविन्द केजरीवाल के हैं. ये सबको मालूम है. कमाल का बन्दा है ये केजरीवाल. क्या सहयोगी, क्या विरोधी. सबको ठिकाने लगा देता है. क्या अपने- क्या पराये. “जो हमसे टकराएगा-चूर चूर हो जाएगा” के मंत्र का निरंतर जाप करता हुआ ये शख़्स ज़ुबाँ से भाईचारे का पैगाम देता है, मगर, वैचारिक विरोधियों को चारे की तरह हलाल करने से बाज नहीं आता.

आम आदमी पार्टी ने लोगों की उम्मीदें तोड़ दीं, सड़क पर उतरे कवि नरेश सक्‍सेना

लखनऊ : वरिष्‍ठ कवि नरेश सक्‍सेना ने कहा कि अन्ना आंदोलन और उसके बाद आप पार्टी के गठन से बहुत से लोगों में जो उम्‍मीदें जगी थीं, वे बहुत जल्‍दी ही टूट गई हैं और अब ये स्‍पष्‍ट होता जा रहा है कि ये भी दूसरी पार्टियों की ही डगर पर चल रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने लात-घूसे के बीच योगेंद्र, प्रशांत, आनंद और अजित को राष्ट्रीय कार्यपरिषद से निकाला

दिल्ली : दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर शनिवार को कापसहेड़ा में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत भूषण और योंगेद्र यादव, अजीत झा और प्रोफेसर आनंद कुमार को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया गया है। प्रस्ताव पर 200 सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिए। केजरीवाल धड़े का मानना है कि इन चारो नेताओं ने केजरीवाल को ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाने के लिए साजिश रची। बैठक में जमकर लात-घूंसे भी चले, जिससे कई एक घायल हो गए। योगेंद्र यादव के समर्थक रमजान चौधरी को बाउंसर्स ने उठा कर पटक दिया। उनके पैर की हड्डी टूट गई। एक और नेता का पैर टूट गया। आरोप है कि बैठक हॉल में तीन दर्जन से अधिक बाउंसर्स तैनात किए गए थे।

आम आदमी पार्टी की बैठक के दौरान धक्कामुक्की के बाद धरने पर बैठे योगेंद्र यादव

आप में दुर्दिन क्यों ?

दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को आज जो दुर्दिन देखने को मिल रहे हैं, उनके लक्षण स्पष्टतः पार्टी के जन्म से ही परिलक्षित होने लगे थे हालांकि वे दृष्टव्य होने के बावजूद अनदेखी किये जाने के फलस्वरूप नासूर बन गये। राम नवमी पर 28 मार्च को राष्ट्रीय परिषद – आप की बैठक में वह कथित नासूर विस्फोटक रूप ले सकता है।

‘आप’ का वार सोशल मीडिया के आरपार : ट्विटर पर सिसौदिया, फेसबुक पर योगेंद्र-प्रशांत का पत्राचार

नई दिल्ली : सत्ता में आने के बाद से ही मीडिया से सोशल मीडिया तक छाया हुआ आम आदमी पार्टी का अंदर-बाहर का जमा-जुबानी घमासान शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की होने वाली बैठक से ठीक पहले गुरुवार शाम चरम पर पहुंच गया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि योगेंद्र और भूषण केजरीवाल को हटाने पर अड़े हैं। मैं इसके खिलाफ हूं लेकिन अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी को फैसला करने दें। योगेंद्र यादव ने फेसबुक पर लिखा कि जिस चिट्ठी को उनका इस्तीफा बताया जा रहा है, वह दरअसल कुछ मांगों को लेकर लिखा गया एक नोट था। इस नोट में हमने कहा था कि अगर हमारी पांच मांगें मान ली जाती हैं, तो हम इस्तीफा दे देंगे। क्या हमारी ये मांगें पूरी हुई हैं। 

अबे चिरकुट आपियों, खुद को अब मोदी-भाजपा से अलग कैसे कहोगे…

Yashwant Singh : चोरकट केजरी और सिसोदिया का असली रूप आया सामने.. दिल्ली में पानी के दाम में 10 परसेंट वृद्धि। अबे चिरकुट आपियों, मोदी-भाजपा से खुद को अलग अब कैसे कहोगे। सत्ता पाकर तुम लोग भी आम जन विरोधी हो गए! अरे करना ही था तो चोर अफसरों के यहाँ छापे मरवाकर उनकी संपत्ति जब्त कराते और उस पैसे को बिजली पानी में लगाते। जल बोर्ड के करप्ट अफसरों और पानी माफिया की ही घेराबंदी कर देते तो इनके यहाँ से हजार करोड़ निकल आता। पर अमेरिकी फोर्ड फाउंडेशन के धन पर करियर बनाने वाले इन दोनों नेताओं से अमेरिकी माडल के पूंजीवाद से इतर काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

‘आप’ में घमासान जारी : केजरी का स्टिंग करने वाले राजेश गर्ग निकाले गए, कुमार विश्वास को लीगल नोटिस

आम आदमी पार्टी यानि ‘आप’ में आपसी घमासान जारी है. आम आदमी पार्टी ने बागी नेता और पूर्व विधायक राजेश गर्ग को पार्टी से निकाल बाहर कर दिया है. पार्टी का कहना है कि राजेश ने पार्टी के खिलाफ काम किया. एक टेप पिछले दिनों मीडिया में लीक किया गया जिसमें राजेश गर्ग और केजरीवाल की बातचीत थी. इसमें केजरीवाल कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की बात कर रहे थे.

उजागर हुआ AAP के स्टिंग में शामिल संपादक का नाम, अन्ना बोले-अरविंद ने देश का विश्वास तोड़ा

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और मनीष सिसोदिया का स्टिंग करने का दावा करने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद शुक्रवार को टेप जारी करने के वादे से मुकर गए। आसिफ का कहना है कि स्टिंग में एक संपादक की बातचीत भी शामिल है और वह नहीं चाहते कि उनकी बदनामी हो। उधर, कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहमम्द खान दो दिनों से संजय सिंह के स्टिंग होने का दावा कर रहे हैं. लेकिन सबूत सामने नहीं रख रहे. हां दोनों नेता इस बात को जरूर कबूल रहे हैं कि नोएडा में एक पत्रकार के घर पर मुलाकात हुई थी. अब सवाल ये है कि स्टिंग जारी नहीं करने के पीछे क्या मंशा केवल उस पत्रकार की नौकरी बचाने की है या फिर माजरा कुछ और है ?