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मोदी सरकार इंटरनेट को फ्री स्पेस की बजाय रेगुलेटेड स्पेस बनाने की तैयारी में!

आईटी रूल्स 2021 में संशोधन पर सरकार ने मांगे सुझाव, 14 अप्रैल तक भेज सकते हैं फीडबैक

इंटरमीडियरी और डिजिटल मीडिया पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी, MeitY ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिस

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 में प्रस्तावित संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। मंत्रालय ने 30 मार्च 2026 को जारी नोटिस में कहा है कि ये संशोधन इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने और डिजिटल मीडिया के नियमन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं।

मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित बदलावों का मकसद इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह बनाना है। साथ ही मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण, एडवाइजरी और निर्देशों के अनुपालन को मजबूत करना भी इन संशोधनों का प्रमुख लक्ष्य है। इसके जरिए डिजिटल मीडिया से जुड़े कंटेंट पर निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने की योजना है।

ड्राफ्ट संशोधनों में पार्ट दो के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि डेटा रिटेंशन से जुड़े नियम अन्य कानूनों के प्रावधानों को प्रभावित नहीं करेंगे। इसके अलावा इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स के लिए मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और कोड ऑफ प्रैक्टिस का पालन अनिवार्य किया जा सकता है।

वहीं पार्ट तीन के तहत डिजिटल मीडिया से जुड़े प्रावधानों की लागू होने की सीमा को स्पष्ट किया गया है। इसमें यह भी प्रस्ताव है कि इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी की शक्तियों का विस्तार किया जाए ताकि वह केवल शिकायतों तक सीमित न रहकर मंत्रालय द्वारा भेजे गए मामलों पर भी विचार कर सके।

मंत्रालय ने कहा है कि ये संशोधन प्रक्रियात्मक और स्पष्टीकरणात्मक प्रकृति के हैं, जिनका उद्देश्य कानूनी स्पष्टता बढ़ाना और नियमों के पालन को अधिक प्रभावी बनाना है। खासकर न्यूज और करंट अफेयर्स से जुड़े कंटेंट की निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

सरकार ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है और आम लोगों, मीडिया संस्थानों, टेक कंपनियों तथा अन्य हितधारकों से इसमें सुझाव देने की अपील की है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्राप्त सुझाव गोपनीय रखे जाएंगे ताकि लोग बिना किसी झिझक के अपनी राय दे सकें।

फीडबैक भेजने की अंतिम तिथि 14 अप्रैल 2026 तय की गई है और इच्छुक व्यक्ति ईमेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

सरल भाषा में समझें तो सरकार इस बदलाव के ज़रिए इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ज्यादा कंट्रोल और जवाबदेही लाना चाहती है।

सबसे आसान तरीके से बात करें तो सरकार के इरादे ये हैं:

1. सोशल मीडिया और वेबसाइट्स को ज्यादा जवाबदेह बनाना

फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर (X) जैसे प्लेटफॉर्म अब यह नहीं कह पाएंगे कि “हम सिर्फ प्लेटफॉर्म हैं”। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां कंटेंट के लिए ज्यादा जिम्मेदारी लें।

2. सरकार के निर्देश मानना अनिवार्य करना

अगर सरकार कोई गाइडलाइन, एडवाइजरी या आदेश देती है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे मानना ही पड़ेगा। अभी कई बार ये चीजें ढीली रहती हैं, उसे सख्त करना लक्ष्य है।

3. न्यूज और करंट अफेयर्स कंटेंट पर खास नजर

सरकार खासतौर पर न्यूज से जुड़े कंटेंट पर निगरानी बढ़ाना चाहती है, चाहे वो किसी मीडिया हाउस ने डाला हो या आम यूजर ने।

4. शिकायत से आगे बढ़कर खुद भी कार्रवाई की ताकत

अब तक कई मामलों में कार्रवाई शिकायत आने पर होती थी। सरकार चाहती है कि उसकी कमेटी खुद भी मामलों को उठाकर जांच कर सके।

5. डेटा और रिकॉर्ड संभालकर रखने की जिम्मेदारी

प्लेटफॉर्म्स को यूजर डेटा और रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में इस्तेमाल किया जा सके।

सरकार इंटरनेट को “फ्री स्पेस” से थोड़ा हटाकर “रेगुलेटेड स्पेस” बनाना चाहती है, जहां

प्लेटफॉर्म्स ज्यादा जिम्मेदार हों

सरकार के पास ज्यादा ताकत हो

और कंटेंट, खासकर न्यूज, पर कड़ी नजर रखी जा सके!

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