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विकलांगों का समेकित विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना बड़ी चुनौती : निशीथ राय

NISHITH

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. निशीथ राय ने कहा कि विकलांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है और वह इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। राजधानी में 100 से अधिक एकड़ में फैला शिक्षा का यह केंद्र देश ही नहीं विश्व का ऐसा पहला विश्वविद्यालय है, जहां विकलांग छात्र-छात्राओं को 50 फीसदी तथा दृष्टिहीनों को 25 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। डॉ. राय ने कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले दिनों में विकलांगों के लिए कई तरह के बेहतरीन कार्यक्रम चलाएगा, जिसके जरिये विकलांगों के जीवन में गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

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लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. निशीथ राय ने कहा कि विकलांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है और वह इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। राजधानी में 100 से अधिक एकड़ में फैला शिक्षा का यह केंद्र देश ही नहीं विश्व का ऐसा पहला विश्वविद्यालय है, जहां विकलांग छात्र-छात्राओं को 50 फीसदी तथा दृष्टिहीनों को 25 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। डॉ. राय ने कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले दिनों में विकलांगों के लिए कई तरह के बेहतरीन कार्यक्रम चलाएगा, जिसके जरिये विकलांगों के जीवन में गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

कुलपति ने विशेष बातचीत के दौरान विकलांगों के लिए चलाए जाने वाले कई कार्यक्रमों के बारे में खुलकर बातचीत की। वह कहते हैं कि उनकी कोशिश विकलांगों के लिए ‘इंस्टीटयूट फॉर मेडिकल साइंसेज फॉर रिसर्च’ स्थापित करना है। उन्होंने कहा, “प्रदेश भर में विकलांगों के लिए कोई अस्पताल नहीं है, जहां उनका इलाज हो सके। कई संस्थानों में अलग-अलग व्यवस्था जरूर है, लेकिन वहां भी विकलांगों को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखकर एक ऐसा संस्थान खोलने पर विचार किया जा रहा है, जहां इन लोगों को मेडिकल की शिक्षा देने के अतिरिक्त उनके इलाज की भी व्यवस्था हो।” वह कहते हैं कि यह काम थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन इस दिशा में काम हो रहा है और मुख्यमंत्री से भी बातचीत चल रही है।

डॉ. राय ने बताया कि विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां 50 फीसदी सामान्य बच्चे पढ़ते हैं तो 50 फीसदी विकलांगों को भी शिक्षा का अवसर मिलता है। इससे एक फायदा यह होता है कि सामान्य तरह के बच्चों के साथ ही वह आसानी से घुलमिल जाते हैं और दोनों तरह के बच्चों के भीतर पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित होती है। कुलपति ने कहा, “हमारी कोशिश यही है कि विकलांगों का समेकित विकास हो, ताकि उन्हें भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।”

ज्ञात हो कि डॉ. राय को राज्य सरकार की ओर से 28 जनवरी, 2014 को पांच वर्ष के पूर्णकालिक कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया था। वह विश्वविद्यालय के प्रथम पूर्णकालिक कुलपति के रूप में काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री इस विश्वविद्यालय बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जबकि राज्यपाल की भूमिका यहां ‘विजिटर’ के रूप में रखी गई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नए कार्यक्रम चलाने के लिए भी कई जगह बातचीत चल रही है। सांकेतिक भाषा के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लंकाशायर के ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर साइन लैंग्वेज एंड डेफ स्टडीज’ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है। इसी की तर्ज पर ‘इंडियन साइन लैंग्वेज एंड डेफ स्टडीज’ की शुरुआत की जा रही है। इसमें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स का संचालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विकलांगों के पुनर्वास के लिए ‘सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट’ स्थापित किया जा रहा है। इस कोशिश का उद्देश्य विकलांगों के लिए होने वाले पुनर्वास कार्यो के लिए इसे नोडल एजेंसी बनाना है।

कुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय में जल्द ही ‘सेंटर फॉर जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन’ की शुरुआत की जाएगी, जहां डिग्री और डिप्लोमा दोनों तरह के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। डॉ. राय ने बताया, “हमारी कोशिश है कि हर विद्यालय में एक अध्यापक ऐसा हो, जो विकलांगों का खास ख्याल रखे। इसके लिए हम प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) से बातचीत कर रहे हैं। हर विद्यालय में विकलांगों के लिए एक अध्यापक रखने और उस अध्यापक को शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय की ओर से प्रशिक्षित दिए जाने की योजना है।”

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