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वरिष्ठ पत्रकार जे डे हत्याकांड : हाईकोर्ट ने 4 दोषियों की सजा पर रोक लगाने और जमानत देने से इनकार किया

मुंबई। वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे (J Dey) की हत्या के मामले में दोषी चार लोगों को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगाने और जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है।

सोमवार को जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंकड की खंडपीठ ने कहा कि, “हमने इसके पर्याप्त कारण दर्ज किए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सजा निलंबित करना और जमानत देना उचित नहीं है।”

हालांकि कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन इस फैसले के बाद चारों दोषी अब हाईकोर्ट में अपील पर अंतिम सुनवाई पूरी होने तक जेल में ही रहेंगे।

2011 में हुआ था पत्रकार जे डे का मर्डर

यह मामला जून 2011 में मुंबई के पवई इलाके में पत्रकार ज्योतिर्मय डे की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। जे डे उस समय मुंबई के एक प्रमुख दैनिक अखबार में एडिटर (इन्वेस्टिगेशन) के पद पर कार्यरत थे।

2018 में ट्रायल कोर्ट ने इस हत्याकांड में चार आरोपियों — निलेश शेडगे उर्फ बाबलू, सचिन गायकवाड़, अभिजीत शिंदे और मंगेश आगवाने उर्फ मंग्या — को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

क्या थे आरोप?

  • जांच में सामने आया कि
  • शेडगे और शिंदे हथियार खरीदने के लिए नैनीताल गए थे।
  • गायकवाड़ ने जे डे की गतिविधियों पर नजर रखी और शूटरों के लिए बाइक उपलब्ध कराई।
  • आगवाने मुख्य शूटर सतीश कालिया के साथ था।
  • चारों पर हत्या की साजिश में मदद करने, हथियार और वाहन की व्यवस्था कराने और शूटरों की सहायता करने का आरोप साबित हुआ।

छोटा राजन का पहला बड़ा केस

यह वही केस है, जिसमें अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को पहली बार दोषी ठहराया गया था। उसे 2015 में इंडोनेशिया के बाली से प्रत्यर्पित किया गया था।

जे डे कौन थे?

56 वर्षीय ज्योतिर्मय डे मुंबई के नामी क्राइम रिपोर्टर थे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड पर दो चर्चित किताबें लिखीं —

  • Khallas: An A-to-Z Guide to the Underworld
  • Zero Dial: The Dangerous World of Informers

बताया जाता है कि जे डे अपनी तीसरी किताब ‘Chindi: Rags to Riches’ पर काम कर रहे थे, जिसमें उन्होंने छोटा राजन को “चिंदी” यानी छोटा-मोटा अपराधी बताया था। माना जाता है कि इसी बात से नाराज होकर छोटा राजन ने उनकी हत्या का आदेश दिया था।

अब अदालत के ताजा फैसले से साफ है कि चारों दोषी जेल में ही रहेंगे, जब तक हाईकोर्ट उनकी अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता।

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