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आज के अखबार : जबरन बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस लाने का वादा, सीमा को ‘अभेद्य’ बनाने का दावा

संजय कुमार सिंह

घुसपैठियों के नाम पर चुनाव लड़कर गंगोत्री से गंगासागर तक फैल चुकी भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री शुवेन्दु अधिकारी अवैध बांग्लादेशियों को सीधे बीएसएफ को सौंपेंगे (देशबन्धु)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश की सीमा अभेद्य होगी (नवोदय टाइम्स)। अखबार के अनुसार उन्होंने कहा है, हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे बल्कि प्रत्येक घुसपैठिये को ढूंढ़कर देश से बाहर भेजेंगे। देशबन्धु वाली खबर द टेलीग्राफ में कल ही थी और आज द टेलीग्राफ में इस मामले में तीसरी खबर है, सरकार ने जबरन बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस लाने का वादा किया है लेकिन इसमें जांच की शर्त भी है। निश्चित रूप से यह बांग्लादेश के साथ संबंध का मामला है और एक गंभीर मुद्दा है। इसपर तीन अखबारों में तीन तरह की खबरें हैं। इन खबरों में जल्दबाजी भी दिख रही है और सही खबर देने की चिन्ता का अनुमान आप खुद लगा सकते हैं। यह सब तब है राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं और वर्तमान में भी वे भारत में ही सुरक्षित प्रवास कर रही हैं। उनके भारत छोड़ने के बारे में कोई खबर नहीं है। आप जानते हैं कि बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद भारत ने सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग की नीति अपनाई है। इसी के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 17 फरवरी 2026 को ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। ओम बिरला ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र सौंपा था। खबरों के अनुसार, उन्हें जल्द से जल्द भारत आने का निमंत्रण दिया गया है।

नागरिकों के मामले में नागरिकता संशोधन अधिनियम के अनुसार, जो गैर-मुस्लिम प्रवासी (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई) धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 से पहले बांग्लादेश से भारत आ गए थे, वे नागरिकता के लिए पात्र हैं। जो लोग इस श्रेणी में नहीं आते और अवैध रूप से घुसे हैं, उन्हें वापस भेजा जाता है। इसके नियम हैं, शुवेन्दु अधिकारी ने नए नियम या आदेश दिए हैं। यह सब तब जब भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वासन दिया है कि अवैध प्रवासी होने के शक में बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस लाया जाएगा। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को आश्वासन देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में “8-10 दिन” लग सकते हैं। मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि इसे मिसाल के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि इन मामलों पर विचार इनमें शामिल “विशिष्ट तथ्यों” के कारण किया जा रहा है। मेहता ने कहा कि जिन लोगों को वापस लाया जाएगा, उनकी “निरंतरता” उनकी नागरिकता निर्धारित करने के लिए की जाने वाली जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी। मेहता ने पीठ को बताया, “सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। उनकी स्थिति और जांच के परिणाम के आधार पर, हम आवश्यक कदम उठाएंगे।”

जाहिर है कि सरकार ने जबरदस्ती और जल्दबाजी की, ऐसे लोगों को वापस भेज दिया जिन्हें वापस लाना पड़ रहा है और गलती स्वीकार करने, उसे दोहराए नहीं जाने की जगह कहा जा रहा है कि निरंतरता जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी। लेकिन बगैर जांच भेज कैसे दिया गया – यह मुद्दा ही नहीं है। आम आदमी की सुनवाई अगर सुप्रीम कोर्ट में होगी तो वह क्या-क्या मांग करे और देश, नागरिकता व जान बचाए या जबरदस्ती करने वालों को सजा दिलाए? लेकिन मुख्य न्यायाधीश क्या कर रहे हैं? आम जनता के लिए सवाल उठाने वालों को कॉकरोच और पैरासाइट कहने का हाल का उनका बयान है मतदाता सूची से लोगों का नाम हटाने के लिए एसआईआर और उससे भी सत्तारूढ़ भाजपा की बात नहीं बनी तो लॉजिकल डिसक्रिपेंसी और फिर भी चुनाव में गड़बड़ी के आंकड़े के बावजूद चुनाव रद्द करना तो छोड़िए जो वोट नहीं दे पाए उनके लिए आश्वासन के अलावा कुछ नहीं है। अब जो बांग्लादेश वापस किए गए उसपर भी कुछ नहीं। सुप्रीम कोर्ट तो जो चाहे करे, जो करे वह ठीक ही होगा लेकिन खबर? आप देख और समझ सकते हैं। मुझे इस मामले में पहले पन्ने पर यही तीन खबरें मिलीं। आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी या नरेन्द्र मोदी पहले की सरकारों पर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने और वोटर बनाने का आरोप लगाते रहे हैं। केंद्र में 2014 से उनकी सरकार होने के बावजूद राज्यों में घुसपैठियों को संरक्षण मिलने का आरोप है। एसआईआर में कितने घुसपैठिए मिले उसका जवाब नहीं है, जो ‘वापस’ भेजे गए वे जबरदस्ती और गलत ढंग से भेजे गए, सुप्रीम कोर्ट ने लाखों मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया, लॉजिकल डिसक्रिपेंसी जैसे मामले देखने के लिए ट्रिब्यूनल बनाए, उससे भी काम नहीं हुआ, उसके एक जज ने इस्तीफा दिया लेकिन मामला अभी तक नहीं बना है। सब चल रहा है। ना सुप्रीम कोर्ट अपेक्षित कार्रवाई कर रहा है ना कायदे से खबरें हो रही हैं।

Newspaper front page with headline 'SC recalls harsh remarks made over textbook row' and a photo of stacked papers.
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सुप्रीम कोर्ट की सख्तटिप्पणी : पहले स्पष्टीकरण और अब वापस लिया जाना।  

दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल से संबंधित वार्ता के लिए मुख्य मंत्री शुवेन्दु अधिकारी दिल्ली आए, प्रधानमंत्री और अमितशाह से मिले। आप जानते हैं कि राज्यों का मामला राज्य के मुख्यमंत्री को राज्य स्तर पर निपटाना चाहिए लेकिन मुख्यमंत्री दिल्ली आकर बात कर रहे हैं जब प्रधानमंत्री बचत करने की अपील कर चुके हैं। सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री की तस्वीर शेयर करके यह सब दावा किया जाता रहा है पर खबर बिल्कुल सामान्य छपी है जैसे जरूरी कवायद हो। आप जानते हैं कि शुवेन्दु अधिकारी भाजपा में तृणमूल से ही आयातित हैं। उनपर भ्रष्टाचार के आरोप नरेन्द्र मोदी ने ही लगाए थे। उसका क्या हुआ पता नहीं है लेकिन शुवेन्दु अब भाजपाई  मुख्यमंत्री हैं। मंत्रिमंडल के संबंध में उनसे राय लेते हैं सरकारी खर्च पर दिल्ली आकर। कहने की जरूरत नहीं है कि यह सब मुख्य न्यायाधीश और चुनाव आयोग के सहयोग और सहमति से संभव हुआ है। मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मामले सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं और आज खबर है कि पाठ्य पुस्तक पर भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही आदेश बदल दिया है। आप समझ सकते हैं कि इससे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के प्रति क्या संदेश जा रहा होगा। द हिन्दू में आज यह खबर प्रमुखता से है। दि इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, नए बने और तेजी से चर्चा में रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सोशल मीडिया हैंडल) स्थापित करने वाले अभिजीत दिपके के अनुसार, उनके परिवार को धमकी दी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस में कल छपी खबर के अनुसार, सरकार को कॉकरोच पार्टी के हैंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नजर आ रहा था और उसने एक्स से कहा है कि इसे ब्लॉक कर दिया जाए। मुझे लगता है कि अखबारों में इसकी खबर नहीं के बराबर छपी है जबकि इसे जितनी तेजी से लोकप्रियता मिली वह अपने आप में रिकार्ड है। सरकार समर्थक इससे स्पष्ट तौर पर परेशान नजर आए। अखबार ने कल ही लिखा था कि कॉकरोच जनता पार्टी का इंस्टा अकाउंट भी बंद किया जा सकता है। मुझे लगता है कि अकाउंट बंद हुआ या चल रहा है – यह खबर आज पहले पन्ने पर हो सकती थी। पर दिखी नहीं।  

देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इसके बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता पर सरकार और सरकार समर्थकों की प्रतिक्रिया आज अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं होना मायने रखता है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, पेपर लीक नहीं होने का दावा शर्मनाक। कांग्रेस ने मांग की है कि नीट पेपर लीक की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लें। इधर, खबर यह भी कि एक नई गिरफ्तारी के साथ अभी तक इस मामले में 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। यह सब 2024 में भी हुआ था लेकिन फायदा क्या हुआ? अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, संपन्न परिवारों के बच्चे आरक्षण लेते रहे, तो इससे कभी निकल नहीं पाएंगे। आप जानते हैं कि जाति के आधार पर आरक्षण में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण जोड़ा जा चुका है और उसके दुरुपयोग की भी शिकायत है। अव्वल तो जाति आधारित आरक्षण का संबंध आर्थिक स्थिति से नहीं होना चाहिए लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का एक वर्ग है तो आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को इसमें क्यों शामिल किया जाए। जाहिर है, यह सब अभी तक तय नहीं हुआ है और आरक्षण का मकसद भी पूरा नहीं हुआ है। जो भी हो, यह खबर के लिए खबर है और ऐसी खबरें काम की खबरों को कमजोर करने के काम आती हैं।

अमर उजाला की सेकेंड लीड दूसरी सरकारी खबर है, सरकार को 2.87 लाख करोड़ का लाभांश देगा आरबीआई। यह खबर आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड है। सुप्रीम कोर्ट की ही खबर को लीड बनाना हो तो आज यूएपीए मामले में जमानत की अपील का मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ को भेजे जाने की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह लीड है। शीर्षक है, यूएपीए की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की राय बंटी हुई, विचार के लिए बड़ी पीठ। द हिन्दू की लीड भी यही है लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड अलग है। केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधि केंद्र शासित प्रदेश के लिए निर्वाचित संस्था बनाने पर सहमत हुए। यहां मुझे दिल्ली का मामला याद आता है। दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और भाजपा इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करती रहती थी। 12 साल से केंद्र में सत्ता में है पर अब यह मुद्दा ही नहीं है। लद्दाख में ऐसी ही संस्था बनाकर क्या लाभ होगा मालूम नहीं लेकिन राज्यपालों के जरिए राज्यों में और उप राज्यपाल के जरिए दिल्ली में केंद्र की भाजपा सरकार जो सब करती रही है उसमें राज्यपाल का पद खत्म करने की भी मांग हो रही है लेकिन गंगोत्री से गंगासागर तक जीत चुकी भाजपा अपने संवैधानिक संरक्षकों की मेहरबानी का लाभ उठा रही है। और अब यह पुरानी बात है। इन खबरों बीच एक खबर दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में पानी की कमी की है। इसके अनुसार परेशान लोग इस गर्मी में कई दिन से नहा नहीं पाए हैं या कहीं और नहाने जाना पड़ रहा है। देश की राजधानी में डबल इंजन की सरकार के बावजूद आम लोगों की यह हालत है जबकि नए डबल इंजन वाले बांग्लादेश की हालत पहले पढ़ चुके हैं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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