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अब दैनिक जागरण ने हिंदुस्तान को दिया घुमा के – अरे वो तो जनम का झूठा है, मैं हूं, मैं ही हूं नंबर वन

कहा था न कि हिंदुस्तान ने लखनऊ में अपने को नंबर एक बताते हुए दैनिक जागरण और अमर उजाला पर प्रहार किया है तो इसकी प्रतिक्रिया भी जरूर होगी। और दैनिक जागरण ने हिंदुस्तान के नंबर वन के दावे को झुठलाते हुए एक बार फिर अपने प्रतिद्वंद्वी पर तमाचेदार टिप्पणी की है। जागरण ने लिखा है कि उसका दावा बेतुका है। झूठ के पांव नहीं होते।

 

कहा था न कि हिंदुस्तान ने लखनऊ में अपने को नंबर एक बताते हुए दैनिक जागरण और अमर उजाला पर प्रहार किया है तो इसकी प्रतिक्रिया भी जरूर होगी। और दैनिक जागरण ने हिंदुस्तान के नंबर वन के दावे को झुठलाते हुए एक बार फिर अपने प्रतिद्वंद्वी पर तमाचेदार टिप्पणी की है। जागरण ने लिखा है कि उसका दावा बेतुका है। झूठ के पांव नहीं होते।

 

दैनिक जागरण तो लखनऊ में 1,33,667 कापियां बेचता है, जबकि हिंदुस्तान की सिर्फ 97,214 प्रतियां बिक रही हैं। जागरण ने भी ये दावा हिंदुस्तान की तरह ही एबीसी (ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए किया है। अपने को हिंदुस्तान से आगे बताने के लिए उसने और भी ढेर सारी बातें पाठकों को पढ़वाने की कोशिश की है। आश्चर्य है कि उसने अपने एक अन्य बड़े प्रतिस्पर्द्धी अमर उजाला के बारे में मुंह बंद रखा है। इससे लगता है कि इन दोनो जागरण और अमर उजाला रणनीति बनाकर हिंदुस्तान से टक्कर लेना चाहते हैं। (चित्र में जागरण की नंबरवन वाली विरुदावली की खबर और विज्ञापनी फोटो)

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1 Comment

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  1. haal naidunia

    April 13, 2015 at 2:27 pm

    उतरने लगी आनंद की मेहंदी,
    दबाव में लगातार गलत निर्णय
    कर रहे हैं पांडे

    भास्कर से हाल ही में बड़ी उम्मीद से इंदौर नईदुनिया में लाए आनंद पांडे की मेहंदी उतरने लगी है… ऊंची और बड़ी बातों से अपनी मार्केटिंग कर रहे पांडे नईदुनिया में आ तो गए पर काम के दबाव से दो ही महीनों में सांसे फूलने लगी है… पांडे के दबाव में आने की एक बड़ी और है… गलत साथियों का चयन… पांडे के साथ रायपुर भास्कर में काम कर रहे मनोज प्रियदर्शी को मोटी सेलेरी देकर नईदुनिया लाया गया… भाषा ज्ञान और अंग्रेजी में कमजोरी के बावजूद उन्हें सेंट्रल डेस्क का प्रभारी बना दिया… स्वाभाविक था प्रतिभाशाली लोग परेशान होने लगे… भरे संपादकीय हॉल में जब सेंट्रल डेस्क के वरिष्ठ सहयोगी सचींद्र श्रीवास्तव ने मनोज को उनके कमजोर न्यूज सेंस पर आईना दिखाया तो पांडे के प्रिय पात्र प्रियदर्शी हत्थे से उखड़ गए… दोनों में जमकर तू-तू मैं-मैं हुई… सचींद्र तब और दुखी हो गए जब बेकसूर होने के बाद भी पांडे ने उन्हें आड़े हाथ लिया… अच्छे लोगों पर नजरें जमाए बैठे भास्कर ने मौके का फायदा उठाया और काम के जानकार सचींद्र को तुरंत ऑफर दे दिया… सचींद्र ने भी जमकर शॉट मारा, पद और पैसे में प्रमोशन के साथ अपना भाग्य भास्कर से जोड़ लिया… ऐसी ही कहानी उज्ज्वल शुक्ला की है… पंडित जी ने पिछले 10 सालों से नईदुनिया से नाता जोड़ रखा था… पांडे परिवार से सार्वजनिक भिडंत होने के बाद उन्होंने सधा हुआ वक्तव्य जारी किया – यदि हाड़तोड़ मेहनत के बाद जिल्लत ही सहनी हो तो ज्यादा पैसे व बड़े पद के ऑफर को क्यों ठुकराया जाए… नईदुनिया सेंट्रल डेस्क पर ऑनलाइन एडिटिंग-पेजमेकि  ंग का यह आजमाया खिलाड़ी अब भास्कर की ओर से बेटिंग कर रहा है… अब कहानी में थोड़ा आक्रामक घुमाव है… सेंट्रल डेस्क की पुरानी साथी सीमा शर्मा ने पांडे जी के पहियों से सीधा पंगा लिया… पूरे संपादकीय के सामने मनोज प्रियदर्शी का ऐसा पानी उतारा कि एकबारगी तो सभी को सांप सूंघ गया… सीमा ने तर्क के साथ अपनी बात भी रखी, तार्किक परिणाम भी निकाला… असर देखिए अब उनके नाम से, उनसे जुड़ी सारी बातें अपने आप सध जाती हैं… अब जोर का झटका धीरे से… नईदुनिया की मिट्टी में पले बढ़े मधुर जोशी ने सेलरी और थुक भरा तमाचा इस्तीफे के रूप में दे मारा… जोशी जी की सुबह अब भास्कर के उजाले में हो रही है… जानकारी के लिये बता दूं कि गजेंद्र मिटिंग से गालियां देकर नहीं गया। बस उसने पांडे की गालियां खाने से इंकार कर दिया और तमीज से बात करने की नसीहत दे डाली। जबकि पांडे को जूते लगाये जाने चाहिये थे। ऐसे ही जो जयेंद्र जी को जानता है वो सपने में भी नहीं सोच सकता कि वे गलती करें और उनको भाफी मांगना पड़े। एक मूर्ख और जाहिल को यदि किसी समझदार का हेड बनाया जाएगा तो समझदार जयेंद्र जी की तरह खुद को किनारे कर लेगा। गधे को घोड़े पर सवार होते देखना है तो अभी नईदुनिया आ जाओ।

    खुफिया विभाग पर पांडे खर्च कर रहे डेढ़ लाख रुपए महीना

    शोले का मशहूर पात्र हरिराम नाई आपको याद ही होगा… ठीक यही भूमिका में इन दिनों काम कर रहे हैं सेंट्रल डेस्क के मनोज प्रियदर्शी, सिटी डेस्क के नितिन शर्मा और रिपोर्टर प्रमोद त्रिवेदी… तीनों का कुल वेतन करीब डेढ़ लाख रुपए महीना है… लेकिन जिम्मेदारी है केवल सूचना संग्रह… कहां क्या हो रहा, कौन क्या कर रहा, किसने किससे कितनी देर क्या बात की, पल-पल के अपडेट पर नजर रखना और सीधे सिंहासन तक खुफियापंथी करना… जिम्मेदार पद-मोटा वेतन और काम केवल हरिराम नाई का… बस यही वजह है कि इन दिनों ये तीनों पूरी टीम के निशाने पर हैं… कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन कोई सिरफिरा कोई बड़ी खबर दे दे…

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