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अंदरूनी राजनीति के चलते हिमाचल में फिसड्डी नंबर वन बना दैनिक जागरण

हिमाचल प्रदेश में पाठकों को जोड़ने में अब तक फिसड्डी सबित हुआ दैनिक जागरण इन दिनों सत्ता के तीन धड़ों में बंटा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि अंदरूनी राजनीति व मतलब की पत्रकारिता के मामले में अव्वल दैनिक जागरण में यह बात कोई नई नहीं है। मगर जिस तरह से हिमाचल में फ्लाप होने के बावजूद यहां की हालत बनी हुई है उससे विश्व का नंबर वन ग्रुप होने का दावा करने वाले इस अखबार के अच्छे दिन आते नहीं दिख रहे।

हिमाचल प्रदेश में पाठकों को जोड़ने में अब तक फिसड्डी सबित हुआ दैनिक जागरण इन दिनों सत्ता के तीन धड़ों में बंटा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि अंदरूनी राजनीति व मतलब की पत्रकारिता के मामले में अव्वल दैनिक जागरण में यह बात कोई नई नहीं है। मगर जिस तरह से हिमाचल में फ्लाप होने के बावजूद यहां की हालत बनी हुई है उससे विश्व का नंबर वन ग्रुप होने का दावा करने वाले इस अखबार के अच्छे दिन आते नहीं दिख रहे।

पहले जागरण में निशिकांत ठाकुर के बाद एनई को ही प्रदेश का प्रभारी माना जाता था, मगर अब ठाकुर साहब के युग का अंत होने के बाद हालात बदल गए हैं। अब विष्णुकांत त्रिपाठी का राज है। वे यहां के चेहरे तो नहीं बदल पाए हैं, मगर चेले बदल दिए हैं। एनई का कार्य देख रहे नवनीत शर्मा का इन दिनों बुरा हाल है। उनके तहत काम करने वालीं राज्य ब्यूरो प्रमुख रचना गुप्ता को हिमाचल का संपादक बना दिया गया है। इससे नवनीत शर्मा की हालत बगले झांकने जैसी हो गई है।

इसके अलावा यूनिट के जीएम राहुल मित्तल भी बीच में अपनी टांग अड़ाए हुए हैं। वह यूनिट के बजाय आजकल एडिटोरियल को ही चला रहे हैं। उन्हें अखबार के बाकी विभागों से ज्यादा खबरों की चिंता लगी रहती है। प्रदेश के सबसे कम बिकने वाले इस राष्ट्रीय दैनिक की दुर्दशा में उनका भी पूरा योगदान बताया जाता है। वहीं अब मैडम जी का राज भी शुरू हो चुका है। उनके रहते शिमला में जागरण के सर्कुलेशन की हालत सब जानते हैं। अब संपादक बनकर वॉट्सएप्प पर खूब सक्रिय दिखती हैं। प्रदेश भर के इंचार्ज वॉट्सएप्प पर बने ग्रुप में एक-दूसरे की क्लास लगने से रोज पानी-पानी होते हैं।

ऐसे में जागरण को संभाल रही तिकड़ी के बीच कर्मचारी बूरी तरह फंसे हुए हैं। जो मैडम की बात काटने की जुर्रत करते हैं या कर चुके हैं उनका बुरा हाल है। उधर, पर कतरे जाने से नवनीत शर्मा का कवि ह्रदय आज कल उदासी की कविताएं उगल रहा है। उनके लिए अब प्रदेश में कहीं ठिकाना भी तो नहीं दिख रहा। फिर भी वे अपने चिरपरिचित अंदाज में कुछ न कुछ तो करने वाले हैं ही। ग्रुप एडिटर विक्रांत त्रिपाठी से पुराने दिनों में दिखाए गए तेवर अब उनके लिए मुसीबत बन गए हैं। चर्चा है कि अब जागरण की टक्कर डीएनएस से है। बाकी अखबार तो इससे आगे ही निकलते नजर आ रहे हैं।

 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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1 Comment

1 Comment

  1. mohit

    July 25, 2014 at 7:20 am

    ye vishnu tripathi dainik jagran ka nash kra dega. or jb tak malik jagage tb tak bhut der ho jaygi.

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