नई विज्ञापन नीति पर लखनऊ में गृहमंत्री राजनाथ से मिलकर संपादकों और पत्रकारों ने जताया विरोध

पीएम को संबोधित 5 सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा 

लखनऊ : डीएवीपी द्वारा जारी 2016 की नई विज्ञापन नीति को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिले से आये आक्रोशित समाचार पत्र संचालक, पत्रकार 21 जून को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास 4 कालिदास मार्ग पर मिलने पहुंचे तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश से जारी हुई 2016 की नई नीति को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए इसे स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति पर कुठाराघात बताया. आक्रोशित पत्रकारों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 5 पांच सूत्रीय ज्ञापन भी केंद्रीय गृहमंत्री को सौंपा. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले पर गंभीरता पूर्वक विचार किये जाने का आश्वासन देते हुए अखबार संचालकों व पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को 28 जून को दिल्ली बुलाया है.

ज्ञात हो कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देशन में द्रश्य प्रचार निदेशालय ‘डीएवीपी’ द्वारा 15 जून को एक पत्र जारी किया गया था जिसमें एबीसी और आरएनआई का प्रमाण पत्र 25 हजार प्रसार संख्या से अधिक वाले समाचार पत्रों के लिए अनिवार्य किया गया है एवं अन्य तमाम ऐसी शर्तें दी गयी हैं जिसके चलते देश के 80 फीसदी अख़बारों का संचालन ही रुक जायेगा. 2016 की इस नई नीति के संज्ञान में आते ही देश भर के पत्र संचालकों पत्रकारों समाचार एजेंसी संचालकों में खासा आक्रोश व्याप्त हो गया है.

अखबार संचालकों का मानना है कि इस नई विज्ञापन नीति के लागू होने के बाद केवल राष्ट्रीय समाचार पत्रों को ही अब केंद्र एवं राज्य सरकारों के विज्ञापन जारी हो सकेंगे तथा 80 फीसदी समाचार पत्र डीएवीपी की विज्ञापन सूची से बाहर हो जाएंगे. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने पहुंचे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये समाचार पत्र संचालकों व पत्रकारों में प्रमुख रूप से नावेद शिकोह लोहिया टाइम्स, रामानंद शास्त्री सिटी टाइम्स, रिजवान चंचल ‘रेड फाइल, अलीम खान जनजागरण मीडिया मंच, शिवशंकर त्रिपाठी ऊर्जा टाइम्स, संजय चतुर्वेदी, नबाब सिद्दीकी सलारे आवाज़ गोंडा, जुबेर ahmad कबीर टाइम्स, अमान अब्बास दैनिक सहाफत, राजीव कुमार, सुभाष यादव, राकेश शुक्ला, विमलेश पाण्डेय हेरल्ड टाइम्स सहित दर्जनों समाचार पत्र संचालक पत्रकार समाचार एजेंसी संचालक मौजूद रहे.

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Comments on “नई विज्ञापन नीति पर लखनऊ में गृहमंत्री राजनाथ से मिलकर संपादकों और पत्रकारों ने जताया विरोध

  • Modi Govt dwara uthaya gaya yah kadam “Sarahneeya” hai. Ab aise sabhi “Chhutbhaiyye Akhbar aur uskey karindey” dwara Blackmailing ka Dhanda bund ho jayega… Itna hi nahi, 100-200 copy chhap ker inkey malik Govt se Mota Advt. Wasool kerte hain aur apney workers ko kuchh bhi nahin dete. Adhikansh Akhbar to apna chhota sa Daftar khol leta hai aur Printing kissi dusri jagah kerwata hai… Lagat kuchh nahin, par Kamai dher sari… Inki Nakel Kasni behad Zaroori ho gai thhee. Ye kaam to bahut pahle hi honi chahiye thhi. par BJP Govt ne aise “Dussahsik kadam” utha ker Bahuton ka bhala kiya hai…. Ye jitney bhi Sampadak Rajnath ji se milne gaye, ye Sampadak-cum-Malik hain, aur Inhin ki Fati Padi Hai….kyonki inka “Gorakh-Dhanda” bund hone wali hai.

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