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मोदी को तेल लगाने में झूठ गढ़ने का कीर्तिमान स्थापित करते भारतीय मीडिया के लोग!

शीतल पी सिंह-

ये भारत का सर्कुलेशन और वाणिज्य के लिहाज से सबसे बड़ा अंग्रेजी अखबार है। सभी दूतावासों में पहुंचता है। इसके समेत तमाम टीवी चैनलों ने मोदीजी को नोबेल पुरस्कार विजेता होने के मुहाने पर खड़ा कर दिया था।

इसके पहले वे कश्मीर फ़ाइल्स को आस्कर पुरस्कार के लिए चयनित करा चुके थे। मोदीजी के समय में हमारे मीडिया का मतलब सिर्फ फेकन्यूज होता चला गया है।

नोबेल पुरस्कार के मामले में संबंधित विदेशी व्यक्ति भारत दौरे पर था और हमारे मीडिया के चाटुकारों ने उसको मोदीजी को नोबेल पुरस्कार के लायक सिद्ध करने वाले प्रश्नों से शर्मिंदा कर दिया।
उसने सज्जनतावश ऐसे सवालों को सीधे नहीं नकारा क्यूंकि वह हमारे देश में था और शिष्टाचार निबाहती भाषा में जवाब दे रहा था।

आखिर उसे सामने से आकर इस फ़ूहड़पन पर सच इन्हीं के मुंह पर थूकना पड़ा क्योंकि हमारे मीडिया ने उसके हवाले से ही स्वयं झूठ गढ़ लिया था। लेकिन वह राहुल गांधी तो नहीं था कि जिसे जबरन उसके न कहे बयान पर सूली पर चढ़ा दिया जाता!

मूल खबर-

भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा मोदी को तेल लगाने में फेक न्यूज़ फैलाने में जुटा!

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