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साहित्य

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने किया वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक का विमोचन

वाराणसी। गंगा की लहरों पर जब बनारस की सांझ उतरती है, तब समय मानो थम सा जाता है। इस ठहरी हुई सांझ ने पत्रकारिता के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। काशी की ऐतिहासिक संस्था नागरीप्रचारिणी सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय परिसर में वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की बहुचर्चित पुस्तक ‘जर्नलिज्म AI’ का भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन राज्यसभा के उपसभापति एवं प्रसिद्ध पत्रकार श्री हरिवंश के कर-कमलों से संपन्न हुआ।

यह आयोजन न केवल एक किताब का विमोचन था, बल्कि यह विचार, चेतना और पत्रकारिता की आत्मा को भविष्य की भाषा में लिखने का एक ऐतिहासिक प्रयास था। ‘जर्नलिज्म AI’ पुस्तक उस संक्रमणकालीन पत्रकारिता पर केंद्रित है जहां तकनीक का प्रभुत्व है, लेकिन संवेदना की आवश्यकता भी उतनी ही प्रासंगिक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ शाम में हुआ, जिसमें बनारस, दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों से आए पत्रकारों, लेखकों, शिक्षाविदों, कलाकारों और विद्यार्थियों की भागीदारी रही। उद्घाटन के उपरांत श्री हरिवंश जी ने लोकार्पण संबोधन में कहा, “पत्रकारिता का भविष्य तकनीकी उपकरणों से जुड़ा अवश्य है, लेकिन उसकी आत्मा मनुष्य की संवेदना, उसकी नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी में ही निहित है। विजय विनीत की यह पुस्तक आने वाले समय के पत्रकारों के लिए एक दिशा-संकेत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता केवल सत्ता का प्रतिरोध नहीं, समाज की आत्मा की आवाज है। आज, जब डेटा और एल्गोरिद्म पत्रकारों के औजार बनते जा रहे हैं, तब ज़रूरत है विवेकपूर्ण उपयोग की और यही चेतावनी यह पुस्तक देती है।

सभा के प्रधानमंत्री और कवि आलोचक व्योमेश शुक्ल ने अपने गहरे भाषण में कहा, “नागरीप्रचारिणी सभा की मिट्टी वह पवित्र भूमि है जहां से आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। आज उसी मंच से पत्रकारिता के भविष्य को लेकर एक नई चेतना का प्रस्फोट हो रहा है। ‘जर्नलिज्म AI’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि यह डिजिटल युग में मनुष्य की उपस्थिति को रेखांकित करने वाली रचना है।”

उन्होंने सभा के ऐतिहासिक महत्व, संग्रहालय की दुर्लभ पांडुलिपियों और हिंदी शब्दों की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि पर भी विचार रखे। व्योमेश शुक्ल का वक्तव्य एक सांस्कृतिक-साहित्यिक यात्रा थी, जिसने सभागार को भावुक कर दिया।

इसके पश्चात् प्रख्यात साहित्यकारा डॉ. सुमन केशरी ने अपने चर्चित नाटकों ‘गांधारी’ और ‘हिडिंबा’ से भावपूर्ण अंश प्रस्तुत किए। यह प्रस्तुति नारी दृष्टि से इतिहास को देखने का एक अनूठा प्रयास था, जिसे दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर सुना।

शाम का अंतिम चरण था पं. साजन मिश्र और स्वरांश मिश्र का शास्त्रीय गायन, जिसमें तबले पर अभिषेक मिश्र और संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। संगीत की इस अंतिम प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की।

‘जर्नलिज्म AI’ हिंदी में पत्रकारिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संबंध पर आधारित संभवतः पहली गंभीर पुस्तक है। इसमें लेखक विजय विनीत ने बताया है कि पत्रकार आज केवल कलम या कैमरे का नहीं, बल्कि डेटा और मशीन लर्निंग का भी सहयोगी है। लेकिन इस परिवर्तनशील समय में पत्रकार को अपनी ज़मीन और मूल्य नहीं छोड़ने चाहिए।

वे लिखते हैं, “तकनीक सहायक है, लेकिन पत्रकारिता की आत्मा मनुष्य ही रहेगा।”

पुस्तक को देशभर के पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और छात्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सभापति अनुराधा बनर्जी ने कहा कि ‘जर्नलिज्म AI’ हिंदी समाज की बौद्धिक उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वहीं वरिष्ठ आलोचक आचार्य विवेक दास, वरिष्ठ नागरिक के. एन. त्रिपाठी, और प्रो. सुधाकर सिंह ने पुस्तक की विषयवस्तु और प्रस्तुति की सराहना की।

कार्यक्रम में तीन प्रमुख पुस्तकों का लोकार्पण एक साथ किया गया—

  1. जर्नलिज्म AI’ – विजय विनीत
  2. ‘कविता क्या है’ – आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  3. ‘पंच परमेश्वर और ईश्वरीय न्याय’ – प्रेमचंद

इन तीनों पुस्तकों ने इस आयोजन को साहित्यिक-तकनीकी समागम का प्रतीक बना दिया।

17 जुलाई 2025 की यह सांझ बनारस की उन सांझों में शामिल हो गई, जो केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति बन जाती हैं। ‘जर्नलिज्म AI’ का यह लोकार्पण न केवल पत्रकारिता की आत्मा को भविष्य की भाषा में अनुवादित करने का साहसिक प्रयास है, बल्कि यह बनारस की उस परंपरा को भी आगे बढ़ाता है जो अतीत में भविष्य देखती है।

यह कार्यक्रम साहित्य, पत्रकारिता और चेतना का महाकुंभ बन गया – जहां शब्दों की गूंज, विचारों की तपिश और बनारस की आत्मा एक साथ जीवित हो उठी।

बनारस में वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक ‘जर्नलिज़्म AI’ का लोकार्पण नागरी प्रचारिणी सभा में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने किया। इस अवसर पर मंच पर डॉ. अनुराधा बनर्जी, आचार्य विवेक दास, के. एन. त्रिपाठी, प्रो. सुधाकर सिंह, प्रकाश उदय और डॉ. केसरी नारायण त्रिपाठी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पुरुषोत्तम अग्रवाल, डॉ. लेनिन रघुवंशी और दयानंद सिंह भी उपस्थित रहे। आयोजन में श्रीयुक्त रामऔतार मिश्र और सौरभ जी की प्रमुख भूमिका रही।

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