प्रभाकर कुमार मिश्रा-
एक पुरानी पोस्ट.. जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर्स के अंतर को समझिए।
लोग जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर कंफ्यूज हैं। इनके बीच के अंतर को समझना होगा। (जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स के लिए जरूरी ज्ञान)।
कंटेंट क्रिएटर को पूरी आज़ादी है। वो कुछ भी बोल सकते हैं। किसी को भी बोल सकते हैं। बिना तथ्य के भी बोल सकते हैं। झूठ भी बोल सकते हैं। वो अपने सब्सक्राइबर्स की फरमाइश पर मुजरा (ये शब्द मैंने मोदी जी से उधार लिया है) भी कर सकते हैं। उन्हें पत्रकारिता से कुछ लेना देना नहीं होता है।
पत्रकारिता एक जिम्मेदारी भरा काम है। पत्रकार को सब कुछ लिखने या कुछ भी लिखने- बोलने की आज़ादी नहीं होती है। उनके लिए तथ्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उनके गलत लिखने, बोलने पर उनके खिलाफ उनके संस्थान और सरकार की तरफ से कार्रवाई हो सकती है। उनको समाज और देशहित का भी ख्याल रखना होता है। कुल मिलाकर वो दर्शकों की फरमाइश के मुताबिक़ ‘मुजरा’ नहीं कर सकते। (ये बात और है कि आजकल कुछ पत्रकार भी मुजरा करने लगे हैं)।
यूट्यूब के आने से आजकल कुछ पत्रकार भी कंटेंट क्रिएटर की तरह व्यवहार करने लगे हैं। उनको भी तथ्यों से कोई मतलब नहीं होता। कुछ भी बोलने लगे हैं। अब वो भी ‘मुजरा’ करने लगे हैं! इसलिए लोग जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं।
अगर मेरी बात पर भरोसा न हो तो जितने लोग पत्रकार से कंटेंट क्रिएटर बने हैं (मेन स्ट्रीम मीडिया से यूट्यूब पर गए हैं) उनके पहले की रिपोर्ट और आज की रिपोर्ट देख लीजिए। जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर के बीच का अंतर समझ में आ जायेगा।
एक बात और : अंग्रेजी में कहते हैं कि ‘Exceptions are always there’. मतलब अपवाद सब जगह होता है।
कुछ कंटेंट क्रिएटर बहुत बेहतर काम कर रहे हैं। वो पत्रकारिता की कमियों की भरपाई कर रहे हैं। हो सकता है उनके सब्सक्राइबर्स लाखों में न हों। लेकिन वो अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं। वो कौन हैं उनको पहचानना मुश्किल नहीं है।
(यह पोस्ट पिछले साल लिखा था! ऑपरेशन सिंदूर ने पत्रकार और कॉन्टेंट क्रिएटर के इस अंतर को बहुत हद तक मिटा दिया है!)
उदय चंद्र सिंह-
बिल्कुल सही। पत्रकारिता का असली आधार तथ्य, ज़िम्मेदारी और समाजहित होता है, जबकि कंटेंट क्रिएटर का मुख्य लक्ष्य ध्यान और व्यूज़ पाना होता है। पत्रकार अगर तथ्यों से हटेगा, तो उसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी, जबकि कंटेंट क्रिएटर के लिए सच-झूठ बस ‘कंटेंट’ होता है।
आज के दौर में जब यूट्यूब और सोशल मीडिया ने हर किसी को आवाज़ दी है, तो पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। लोगों को अब खुद सीखना होगा कि कौन तथ्यपरक सूचना दे रहा है और कौन सिर्फ सनसनी फैला रहा है।
असल में, ये दर्शकों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे मुजरा माँगने वाले दर्शक न बनें, बल्कि अच्छे काम को पहचानें और सपोर्ट करें। क्योकि अंततः, वही समाज बेहतर बनता है जहाँ सच की कदर हो, न कि सिर्फ शो का!
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