दिलीप खान-
एक एग्ज़िट पोल आया है जर्नो मिरर का. पहली बार नाम सुना, तो मैंने तलाशने की कोशिश की कि ये कौन लोग हैं. इनके एग्ज़िट पोल में महागठबंधन की सरकार बन रही है, ज़ाहिर है महागठबंधन के समर्थक इसको ऐग्रेसिवली शेयर कर रहे हैं.
कहीं पर कोई मैथोडोलॉजी नहीं दिखी. इसकी एक वेबसाइट है, जोकि न्यूज़ वेबसाइट है. इसने अपना एग्ज़िट पोल इंस्टाग्राम पर शेयर किया. वेबसाइट तलाशी, तो वहां कुछ नहीं है.
मुझे इतना समझ में आता है कि न्यूज़ वेबसाइट के लिए अपने बूते एग्ज़िट पोल करना इस देश में मुमकिन नहीं है. उसे इसके लिए अलग तरह के प्रोफ़ेशनल हायर करने पड़ेंगे या फिर किसी ऐजेंसी से कोलैब करना पड़ेगा. ज़्यादातर न्यूज़ प्लैटफ़ॉर्म दूसरा रास्ता चुनते हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं, अभी उन वजहों पर नहीं जाते.
इसी जर्नो मिरर के एग्ज़िट पोल वाले फ़िगर को ‘उल्टा चश्मा’ नामक यूट्यूब चैनल ने दिखाया और उसमें दावा किया गया कि यह 200 रिपोर्टर के आकलनों पर आधारित है.
इस तरह दो एग्ज़िट पोल इस चुनाव में ऐसे हैं जो असल में एग्ज़िट पोल हैं ही नहीं. सही-ग़लत होना अलग चीज़ है, लेकिन मामूली डिसक्लेमर देना चाहिए कि इस तरह के पोल का आधार क्या है!
दैनिक भास्कर ने भी यही किया है. उसने अपने रिपोर्टर्स के आकलन को पब्लिश किया और सारे चैनल उसे एग्ज़िट पोल बताकर बेच रहे हैं. इस पर अलग से लिख चुका हूं.
जर्नो मिरर के उलट भास्कर एनडीए को जिता रहा है. इस डेविएशन को देखिए. रिपोर्टर का एक जत्था एक तरफ़ है, दूसरा दूसरी तरफ़. यही है कहानी एग्ज़िट पोल की!
कोई एजेंसी है पोल डायरी. एक्ज़िट पोल के बाद कल पहली बार नाम सुना. इसी ने बिहार में एनडीए को 200+ सीटें दी हैं. थोड़ी खुदाई की, तो देखा कि इसका फ़ेसबुक पेज 2018 में और ट्विटर पेज 2017 के आख़िरी महीनों में बना.
6 लोग मिलकर फ़ेसबुक पेज मैनेज करते हैं, फिर भी 2,000 फ़ॉलोअर हैं. इसने जो पहला विज्ञापन दिया उसे फ़ेसबुक ने ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड’ के उल्लंघन के तहत हटा दिया. दूसरा विज्ञापन 100 रुपये का दिया. कुल 10 में से इसके 5 विज्ञापन गाइडलाइन का पालन नहीं करने की वजह से फ़ेसबुक से डिलीट हुए.
इसी से पता चल गया कि यह एजेंसी कैसे काम करती होगी! इस पेशे में काम करने वाले लोग विज्ञापन वग़ैरह चलाने में माहिर होते हैं. इसे न विज्ञापन देना आता है और न पैसे ख़र्च करना.
ख़ैर, इसका पिछला रिकॉर्ड चेक किया. इसका अनुमान असम में उल्टा साबित हुआ, पश्चिम बंगाल में भी उल्टा निकला. पंजाब, महाराष्ट्र हर जगह नतीजों से कोसों दूर रहा. मैंने जहां तक देखा, उसमें बिना किसी अपवाद के इसका हर एक्ज़िट पोल ग़लत था.
फिर भी इसने हिम्मत करके कल ट्विटर (एक्स) पर अपना एक्ज़िट पोल डाल दिया. थोड़ा तल्ख़ हो जाएगा, लेकिन अपने यहां का मीडिया ऐसी फेंकी गई हड्डियों पर भूखे-बौराए कुत्तों की तरह टूट पड़ता है. कोई क्रेडिबिलिटी नहीं रह गई है. देखने की कोशिश तक नहीं करता कि एक्ज़िट पोल के नाम पर कूड़ा बेचने वाली संस्था कौन है!



