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शिवसेना-बीजेपी बैठक कवर करने गए पत्रकारों को होटल प्रबंधन ने गेट के बाहर रोका, देर रात तक खड़े-खड़े हलकान हुए मीडियाकर्मी

Dhiraj wrote: “कुत्तों को प्रवेश, लेकिन पत्रकारों को नहीं। पत्रकारों की स्थिति कुत्तों से भी बदतर है, इसका अनुभव कल रात बांद्रा के एक पंचसितारा होटल में आया। हालांकि इस होटल का नाम भी मैं लेना नहीं चाहता, लेकिन होटल प्रबंधन की मानसिकता पता चले इसलिए बता देता हूं, होटल का नाम है sofitel। कल रात शिवसेना बीजेपी और अन्य दलों के नेताओ की सीटों के बंटवारे के लिए बैठक इस होटल में थी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ प्रिंट के दो पत्रकार उपस्थित थे। सभी गेट के बाहर खड़े थे। बीकेसी ऐसा इलाका है जहां दिन में खाने के लाले पड़ते है तो रात को क्या हालत होती होगी इसका अंदाजा आप लगा सकते है। काफी देर रुकने के बाद होटल में जाकर कॉफी पीने की इच्छा कुछ पत्रकारों को हुई।

Dhiraj wrote: “कुत्तों को प्रवेश, लेकिन पत्रकारों को नहीं। पत्रकारों की स्थिति कुत्तों से भी बदतर है, इसका अनुभव कल रात बांद्रा के एक पंचसितारा होटल में आया। हालांकि इस होटल का नाम भी मैं लेना नहीं चाहता, लेकिन होटल प्रबंधन की मानसिकता पता चले इसलिए बता देता हूं, होटल का नाम है sofitel। कल रात शिवसेना बीजेपी और अन्य दलों के नेताओ की सीटों के बंटवारे के लिए बैठक इस होटल में थी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ प्रिंट के दो पत्रकार उपस्थित थे। सभी गेट के बाहर खड़े थे। बीकेसी ऐसा इलाका है जहां दिन में खाने के लाले पड़ते है तो रात को क्या हालत होती होगी इसका अंदाजा आप लगा सकते है। काफी देर रुकने के बाद होटल में जाकर कॉफी पीने की इच्छा कुछ पत्रकारों को हुई।

साहिल जोशी, उमेश कुमावत आदि पत्रकार अंदर जाने लगे तो रोक दिया गया। कहा पत्रकारों को अंदर इजाजत नहीं है। बिना कैमरा अंदर कॉफी शॉप में ग्राहक के रूप में जाने से रोक दिया गया। काफी बहस के बाद भी अंदर नहीं छोड़ा गया। एक महिला पत्रकार को टॉयलेट जाना था, पुरुष पत्रकार तो बाहर भी हल्का हो सकते थे, लेकिन महिला पत्रकार क्या करती? सिक्योरिटी गार्ड से रिक्वेस्ट करने के बाद उसने अंदर फ़ोन पर मैनेजर से बात की और जिस तरह एक कैदी को ले जाते है उस तरह वह उस महिला पत्रकार के साथ टॉयलेट तक गया और फिर उसे बाहर ले आया ताकि वो कॉफी शॉप में न जाये।

पत्रकार मुंबई के लगभग हर पंचसितारा होटल में जाते है, लेकिन इतने बुरी तरह कभी अपमानित नहीं हुए। कुत्तो को अंदर छोड़ा जा रहा था, लेकिन पत्रकारों को केवल पत्रकार होने की वजह से जेब से पैसे खर्च कर भी कॉफी पीने नहीं छोड़ रहे थे। कुछ पत्रकार डायबिटीज से त्रस्त थे उन्हें थोड़ी थोड़ी देर कुछ खाना जरुरी था, जो वो नहीं कर पा रहे थे। भारतीयों को होटल में प्रवेश मिले इसलिए टाटा ने ताज होटल का निर्माण किया, लेकिन आजाद हिंदुस्तान में हिंदुस्तानी मालिक के होटल में हिंदुस्तानियो को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था।

इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर इस होटल के मालिक और प्रबंधन का विरोध करने में मदद करें। प्रकरण गंभीर आहे…

 

पत्रकार धीरज भारद्वाज के फेसबुक वॉल से।

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1 Comment

1 Comment

  1. manoj thakur

    September 30, 2014 at 5:34 am

    patarkar bhi nirlajj wahin pe ruke rahe .
    wapis aate aur hotel pe koi bhadhia si story banate . but uske liye bhi toh talent chahiye na and presence of mind toh must hai

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