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इस साल भी वो फीस अदा नहीं कर सका, इस साल भी गरीब के बच्चे नहीं पढ़े!

महेश शर्मा-

(पार्ट टू)

कानपुर। कानपुर लिट-फेस्ट के दूसरे सत्र में इसके बाद बज्मे शायरी में कवि / शायर आशू मिश्रा , बिलाल सहारनपुरी, सोहराब ककराला ने अपने कलाम सुनाए । कार्यक्रम का संचालन कवयित्री भावना मिश्रा ने किया। बिलाल सहारनपुरी ने सुनाया …जिन में भरा हो झूठ वो किस्से नहीं पढ़े / जाकर मुशायरों में लतीफे नहीं पढ़े । इस साल भी वो फीस अदा नहीं कर सका / इस साल भी गरीब के बच्चे नहीं पढ़े। उन्होंने अपने शानदार शायरी से समा बांध दिया।

बदायूं से आए सोहराब ककराला ने जिन्दगी के सफर में इतनी फुर्सत भी नहीं के एक पल आराम कर ले, जुल्फें शायादार में बैठ के तह में समंदर में बना हूं मोती, कितनी पस्ती में गया हूं मैं बुलंदी के लिए मोहब्बत बेटियों के साथ डोली में हुई रुखस, तकोई रिश्ता निभा दे तो एक कप चाय मिलती है।

बरेली के आशू मिश्रा ने अपनी कई चर्चित कविताएं सुनाई। तीसरा सेशन – आम बात खास बात को समर्पित रहा। इस सेशन में अतुल तिवारी ने पत्रकार सोपान जोशी के सात उनकी सद्य प्रकाशित किताब ‘मैंगिफेरा इंडिका – A Biography of Mango’ पर बातचीत की।

सोपान ने कहा कि आम दरअसल उर्दू के लफ़्ज़ ‘आवाम’(जनता) का एकवचन है। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि मैं ‘शेष’ का पत्रकार हूँ मुख्य या खास से दूर हूँ। मेरी सोच का केंद्र आम है। आम को उन्होंने फ्रूट ऑफ़ इंडिया कहा। अतुल तिवारी ने कहा कि आम के छिलके में गोल्ड के ट्रेसेज़ होते हैं और इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में भी किया जाता है। सोपान ने कहा कि पेंटिंग में नकली तस्वीरों की पहचान में भी आम का इस्तेमाल किया जाता है।

यह कितबाद 5 से भी अधिक सालों के शोध के बाद लिखी गई। सोपान ने कहा कि आम का जिक्र की पुराणों और उपनिषद में है पर वेदों में नहीं है। आम से बुद्ध और कामदेव दोनों का संबंध है। कालिदास के शाकुंतलम में भी आम का ज़िक्र है और कामसूत्र में भी। कामसूत्र में इसे प्रेमियों के फल के रूप में वर्णित किया गया है। यह दरअसल कामसूत्र की 64वीं कला है, जिसे कलमकारी कहा गया है। उत्तर भारत आम के मामले में सबसे गरीब है। क्योंकि यहाँ के आम जेनीटिकली कमजोर होते हैं, आम दरअसल पूर्वी भारत का फल है।

दक्षिण भारत में लोग बड़ी मेहनत से आम उगाते हैं, जबकि उत्तर में ऐसा नहीं है। मुगलों ने अमराई की सांकृति को बढ़ने दिया और अंग्रेजों मे अमराइयों को काटने का सिलसिला शुरू किया। सोपान ने बताया कि मुगल शासक बाबर पौधों का बेहद शौकीन था।
चौथा सेशन – एक साहित्य प्रेमी अभिनेता-इस सेशन में थिएटर के अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता जी के साथ सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ जी ने बात की।

सूर्यमोहन जी ने उनसे नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के अनुभवों पर की सवाल पूछे और यह भी पूछा कि उस वक्त निर्देशकों का कलकारों पर कैसा दबाव होता था। इसके बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में राजेन्द्र जी की यात्रा पर बात की, की सीरियल्स में उन्होंने काम किया, वह अनुभव क्या रहा और इस पड़ाव से उनकी यात्रा किस तरह बदली। आखिर में सूर्यमोहन जी ने उनसे उनकी हालिया यात्रा के बारे में बात की, जिसमें वह सोशल मीडिया पर तमाम कवियों की बेहतरीन कविताएं अपने खास अंदाज़ में पढ़ते हैं। इसके बाद राजेन्द्र गुप्ता ने कइ मार्के की कविताओं का पाठ किया जिस पर सुनने वालों ने जमकर तालियाँ बजाईं।

पाँचवाँ सेशन – अभिजीत घोषाल एंड बैंड-इस सेशन के कलाकार अभिजीत घोषाल दरअसल 11 बार के सारेगामा विजेता रहे हैं। उन्होंने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से सभी का दिल मोह लिया। एक तरफ़ जहाँ उन्होंने बॉलीवुड के कई सुपरहिट गाने सुनाए, वहीं दूसरी ओर अपने कम्पोज़ किए हुए भी कई गीत प्रस्तुत किए। भजन से लोगों को एक अलग आयाम में पहुंचाया और दूसरी ओर संस्कृत में भी संगीतमय प्रस्तुति दी।


पहला पार्ट पढ़ें-

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