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सुख-दुख

केबी माथुर : एक ऐसा संपादक जिसे मालिक छोड़ना नहीं चाहते थे!

राम धनी द्विवेदी

इस रविवार को मैं अपने अभिभावक, बड़े भाई और पूर्व संपादक श्री केबी माथुर जी से मिला। आजकल वह अपने पुत्र तन्‍मय के साथ कनाडा में रहते हैं लेकिन इन दिनों भारत आए हैं।

कई दिनों से उनसे मिलने की इच्‍छा थी। रविवार को फोन किया कि घर पर ही हैं, कोई प्रोग्राम तो नहीं है.. तो बोले नहीं घर पर ही हूं, आ जाओ। आधा घंटा में, मैं वैशाली के सनब्रीज टावर स्थित उनके आवास पर पहुंच गया।

बातचीत का सिलसिला चला कि दो घंटे कब बीत गए पता नहीं चला। श्री केबी माथुर ने ‘स्‍वतंत्र भारत’ से पत्रकारिता शुरू की और उसके बाद ‘अमृत प्रभात’ में आए। यहां वह समाचार संपादक के रूप में आए थे और तब वह सबसे कम उम्र के समाचार संपादक थे।

‘अमृत प्रभात’ में वह संपादक, महाप्रबंधक, निदेशक तक बने और सभी पदों पर एक साथ रहे। उनका सौम्‍य व्‍यक्तित्‍व सबको अपना बना लेता है। मेरे लिए तो वह संरक्षक की भूमिका में थे।

जब मैं 1995 में ‘अमृत प्रभात’ में समाचार संपादक बना तो उन्‍होंने मुझे असीमित अधिकार दिए और मेरे हर फैसले पर साथ थे। मेरी ग‍लतियों को भी वह हंस कर टाल जाते। वहां से वह इनकैन ग्रुप में और फिर वहां से मोनेट इंटरनेशनल में आ गए और निदेशक पीआर के रूप में 75 वर्ष की आयु तक उससे जुड़े रहे।

उनकी कंपनी के मालिक उन्‍हें छोड़ना नहीं चाहते थे लेकिन उम्र को देखते हुए उन्‍होंने खुद काम पर जाने से मना कर दिया। बाद में बेटे बहू के साथ रहने कनाडा चले गए। बीच-बीच में भारत आते रहते हैं।

मैंने उन्‍हें अपनी पुस्‍तक ‘हनुमत कौतुक’ दी। उन्‍होंने उसे पढ़ने और अपने विचार लिखने का वादा किया। कल फोन आया तो बताए कि आधा पढ़ गया हूं। साथ की फोटो उसी समय की है।

यह फोटो भाभी जी श्री मती कुमकुम माथुर ने खींची है।

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