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आज के अखबार : खबरें बता रही हैं कि ‘सरकार’ हेडलाइन मैनेजमेंट के साथ भ्रम भी फैला रही है

संजय कुमार सिंह

आज हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए की गई खबरें देखिए – रेल मंत्री ने आनंद विहार और नई दिल्ली स्टेशन का दौरा किया। गिरिराज सिंह जैसे वरिष्ठ नेता नागरिकों के एक वर्ग को ‘नमकहराम’ कहने जैसे बयान देते हैं और सरकार की लोकप्रियता बनी हुई है। लोग बेरोजगार हैं, गरीब हो रहे हैं, मर रहे हैं, सरकारी राशन पर जी रहे हैं – तब भी। दूसरी ओर, फैक्ट चेकर की रिपोर्ट का खंडन। कहा, भ्रम फैलाने वाली रिपोर्ट, मोहम्मद जुबैर ने तमाम अखबारों की पोस्ट का कोलाज पोस्ट कर कहा, लगभग सभी समाचार चैनलों ने बताया कि यात्री ट्रेन से गिरे, लेकिन @Central_Railway का कहना है कि कर्मभूमि एक्सप्रेस से कोई यात्री नहीं गिरा और यह कल शाम नासिक और ओढ़ा के बीच हुई एक दुर्घटना थी जो रेल पटरियों पर अतिक्रमण (बिना इजाजत मौजूदगी) के कारण हुई। इस सिलसिले में ज़ी न्यूज की एक खबर दिलचस्प है। दोपहर एक बजे ही खबर दी थी, नासिक रेल दुर्घटना, ट्रेन स्लो हुई तो चढ़ने लगे…दिवाली-छठ पर बिहार जा रहे तीन लोगों के साथ दर्दनाक हादसा। खबर कहती है, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बिहार जाने वाली जिस ट्रेन में वे थे या पकड़ने की कोशिश कर रहे थे उससे गिर गए। दो लोगों की मौत हो गई और 19 अक्तूबर सुबह तक एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। नासिक रोड रेलवे स्टेशन के पास ये लोग अचानक कर्मभूमि एक्सप्रेस से गिर गए। शनिवार रात नासिक रोड रेलवे स्टेशन के पास लोकमान्य तिलक टर्मिनस, मुंबई से रक्सौल (बिहार) जा रही कर्मभूमि एक्सप्रेस से तीन युवकों के गिरने की खबर मिली थी। इस हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। तीसरे घायल युवक का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। वैसे, कर्मभूमि एक्सप्रेस नासिक स्टेशन पर नहीं रुकती है। फिर भी ट्रेन स्लो हुई तो तीन यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने लगे. इसी दौरान वे ट्रेन की चपेट में आ गए। देशबन्धु में छपी खबरों के अनुसार, सूरत में टिकट के बावजूद यात्री ट्रेन में सवार नहीं हो पाए। मृतक यात्रियों और घायल के बारे में लिखा है, सामान्य डिब्बे में सफर कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा है कि भीड़भाड़ के कारण यात्री ट्रेन से गिर गए। बताया जा रहा है कि तीनों यात्री सामान्य डिब्बे में सफर कर रहे थे। आप जानते हैं कि रेलवे टिकट कटवाने के समय बीमा करता है और जनधन खाता खोलने वालों को भी बीमे का लाभ देने की खबर छपी थी। मौत को लेकर इतना भ्रम रहेगा तो बीमा किसे मिलेगा और मिलता होता तो कभी, कहीं खबर होती, प्रचार भी हो सकता था। लेकिन मुझे तो नहीं दिखा। आपको दिखा क्या?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ‘एक देश, एक चुनाव’ पर पर्याप्त गंभीर लगते हैं। अभी तक उन्होंने चुनाव जीतने की हर संभव कोशिश की है और चुनाव जीतते रहे भी हैं। हालत यह हो गई है कि सरकार चुनाव हारने के लिए तैयार नहीं लगती है। ऐसे में एक देश एक चुनाव हो गया तो नरेन्द्र मोदी या तबके प्रधानमंत्री क्या करेंगे? चुनाव जीतने और इसके लिए 11 साल से लगातार चुनाव मोड में रहना चाहे गलत न हो पर सच यह है कि छठ पर बड़ी संख्या में लोग बिहार जाते हैं। इसकी जानकारी होने, 12,000 विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा, स्टेशन, प्लैटफॉर्म पर भारी भीड़ और सब कुछ होने के बावजूद दो लोगों का मर जाना। बात इतनी ही नहीं है, सरकार फैक्ट चेक करवा रही है। तमाम सही खबरों को भ्रम फैलाने वाला कहा जाता रहा है और तमाम झूठी खबरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई नहीं होने की खबर नहीं होती है वह अलग। वैसे तो सरकार का बचाव, पुरानी घोषणाएं सब खबर हैं। लेकिन जीएसटी में कमी, उसका प्रचार, बचत उत्सव की तैयारियों का संदेश और बिहार में चुनाव जीतने की रणनीतियां। हाल के प्रचार रहे हैं। इनमें प्रधानमंत्री का काम क्या है और कौन से काम चुनाव जीतने की कोशिश में किए गए होंगे – का हिसाब लगाने निकलें तो लगता है कि ऑपरेशन सिन्दूर भी चुनावी कोशिश थी। इस बार बिहार में दीवाली और छठ का समय चुनावों का भी समय है। तथ्य है कि इन दिनों देश भर में कमाने वाले बिहार के लोग वापस जाते हैं और छठ के बाद लौटते हैं। यह वर्षों से चला आ रहा है। इस बीच बिहार के लिए विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा हुई और मुझे लगा था कि इस बार का चुनाव जीतने की कोशिश में सरकार ने यह भी कर दिया। लेकिन कल रेल हादसे की खबर मिली और आज यह खबर पहले पन्ने पर वैसे नहीं है जैसे होनी चाहिए। खासकर 12 हजार विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा, हादसे से जुड़ी ट्रेन का नाम कर्मभूमि एक्सप्रेस होना और बिहार में चुनाव होने के कारण। वैसे भी, यही कारण खबर को दिलचस्प बनाते हैं। आइए, आज देखें- समझें कि सरकार और प्रचारकों ने हेडलाइन मैनजेमेंट के लिए क्या सब किया है। 

सबसे पहले 12 हजार ट्रेन चलाने की खबर। 23 सितंबर 2025 की एनडीटीवी डॉट इन की खबर के अनुसार, (इसे मैंने जानबूझ कर अनुवाद नहीं किया है क्योंकि अभी इसमें काम की बात यही है कि रेल मंत्री ने कहा था कि रेलवे तैयारी कर रही है। इसी खबर में कहा गया है कि 10,000 विशेष ट्रेन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। आप जानते हैं कि वास्तव में ट्रेन चलाने, अधिसूचना जारी करने और तैयारी करने में फर्क होता है। मैं नहीं जानता कि वास्तव में कितनी ट्रेन चली। कोई खबर या विज्ञापन तो नहीं ही दिखा। एआई से पता चला, रिपोर्ट में यह भी है कि “ट्रेनें” शब्द का अर्थ केवल नए ट्रेन नंबरों से नहीं बल्कि नई सेवाओं/ट्रिप्स से हो सकता है। “12,000” संख्या लक्ष्य या घोषणा के रूप में है, लेकिन सत्य-तथ्य सूची (रास्ता-ट्रेन-नंबर के साथ) सामान्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मिली। कुछ स्रोतों ने “12,000 ट्रेन सर्विसेज” का शब्द प्रयोग किया है, जो कि “12,000 अलग ट्रेनों” जैसा नहीं हो सकता। पिछले वर्ष की ट्रेन संख्या में भी विविधता है — 7,724 या 7,990 जैसी संख्याएँ विभिन्न स्रोतों में मिल रही हैं।

अब आइए, देखें कि हादसे के बाद क्या हुआ। खबरों के अनुसार हादसा शनिवार रात नौ बजे के करीब हुआ। इतवार को खबर छपी थी। खबर को कमजोर करने, छपने से रोकने के लिए की जाने वाली सरकारी कार्रवाई का विवरण तो नहीं ही मिल सकता है लेकिन खबरों से भी इसका पता चलता है। उदाहरण के लिए एनडीटीवी डॉट इन की 19 अक्तूबर 2025 की एक खबर का शीर्षक है, 12,000 स्पेशन ट्रेनें, 12 लाख कर्मी, मंत्री का औचक निरीक्षण… दिवाली-छठ पर घर जा रहे लोगों की सेवा में सरकार। इसमें कहा गया है, रविवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आनंद विहार रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। एक दिन पहले वो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की व्यव्सथा देखने पहुंचे थे। इसमें गौर करने वाली बात है कि ऊपर की खबर के अनुसार हादसा एक दिन पहले हुआ था और 19 को सुबह यह खबर आई गई थी कि हादसे के शिकार लोगों में से एक जिन्दा है, बचा रहा तो सत्य बता सकता है और औचक निरीक्षण की कार्रवाई उसके बाद हुई। पहले के निरीक्षण का भी हवाला है। संभव है, पहले इसे प्रचारित करने की आवश्यकता नहीं समझी गई हो या खबर की तरह प्रचारित नहीं किया गया हो। यह खबर रात नौ बजकर नौ मिनट की है। सरकार समर्थक ऑप इंडिया डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार, भारतीय रेलवे ने ‘फैक्ट-चेकर’ मोहम्मद जुबैर के दावों और मीडिया रपटों का खंडन किया है कि भीड़ भरी ट्रेन से गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, स्पष्ट किया कि वे ट्रेन में नहीं थे। इस दौरान रेल मंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को रेलवे के 12 लाख कर्मचारियों की मदद करनी चाहिए.. इनके खिलाफ अभियान नहीं चलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने वीडियो या गलत वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

अमर उजाला में आज एक जनरल खबर है, दिवाली-छठ से पहले रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर उमड़ी भीड़। स्टेशनों में प्रवेश के लिए यात्रियों को घंटों करना पड़ा इंतजार। इस खबर के साथ कर्मभूमि एक्सप्रेस हादसे की छोटी सी सिंगल कॉलम की खबर है। देशबन्धु में रेलवे ने यात्रियों से की अपील के तहत शीर्षक है, दरवाजों पर खड़े होकर यात्रा न करें। यहां यह बताना अप्रासंगिक नहीं होगा कि 1990 के दशक के शुरू में एक दफा स्लीपर क्लास में मेरा कंफर्म रिजर्वेशन था और नई दिल्ली स्टेशन पर जब मैं अपनी बोगी में पहुंचा तो घुसने की जगह नहीं थी। ऐसे ही एक दफा इलाज के लिए दिल्ली आए एक लड़के और उसके परिवार छोड़ने स्टेशन पहुंचा तो पाया कि पूरी बोगी में तिल रखने की जगह नहीं थी। इलाज करवाकर लौट रहे लड़के के पूरे हाथ पर प्लास्टर चढ़ा था और वह चढ़ने की कोशिश भी नहीं कर सकता था। रिजर्वेशन उसका भी कंफर्म था। ऐसे में 2025 में रेलवे की इस अपील का मतलब मैं तो नहीं समझ पा रहा हूं। नवोदय टाइम्स में शीर्षक है, भीड़ भरी ट्रेन से गिरकर दो युवकों की मौत। लेकिन ऑप इंडिया की खबर रेलवे के स्पष्टीकरण पर आधारित है। यह रिपोर्टिंग की मुश्किलें बताता है लेकिन रिपोर्टर बेचारे इसपर भी नहीं लिख पाते हैं। हालांकि यह अलग मामला है। इंडियन एक्सप्रेस में रेल हादसे की खबर पहले पन्ने पर तो नहीं है लेकिन गिरिराज सिंह पहले पन्ने पर फोटो के साथ मुस्कुरा रहे हैं। लीड का शीर्षक है, हिन्सा के बाद लद्दाख वार्ता वापस पटरी पर, 22 अक्तूबर को फिर शुरू होगी। यही द हिन्दू और हिन्दुस्तान टाइम्स की भी लीड है। एचटी की सेकेंड लीड दिल्ली की हवा के बेहद खराब होने की खबर है जो दिल्ली के अखबारों में तो लीड होनी ही चाहिए थी। खासकर हरित पटाखे चलाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और बाजार में सभी तरह के पटाखे उपलब्ध होने और आराम से खरीदे जा सकने वाली खबरों के बाद। दि एशियन एज की लीड और चिन्ता बिहार चुनाव में इंडिया ब्लॉक की परेशानी है। अखबार की आज की लीड यानी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खबर यह सूचना है कि इंडिया ब्लॉक प्रयास कर रहा है कि कांग्रेस और झामुमो सीटों को लेकर नरम हों। कोलकाता के द टेलीग्राफ की लीड गिरिराज सिंह का बयान है। शीर्षक से बताया गया है कि भाजपा की गालियों में अब नमकहराम नया जुड़ गया है। द हिन्दू में दिल्ली की मुख्यमंत्री की अपील सिंगल कॉलम में है। खबर है, दिल्ली की हवा जहरीली हुई तो मुख्यमंत्री ने सिर्फ हरित पटाखों के उपयोग की अपील की। निश्चित रूप से आज यह दिल्ली की लीड होनी चाहिए थी।

फोटो मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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