पत्रकार की खाल में दलाल… (सुनें आडियो टेप)

कहते है एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है. यही हाल छत्तीसगढ़ में जांजगीर चांपा के मीडिया जगत का है. एक ओर जमीनी स्तर पर पत्रकारिता करने वाले पत्रकार बे-वजह सताए जा रहे हैं तो दूसरी ओर चौथे स्तंभ के नाम पर समाज का ठेका लेने वाले व गलत कार्यों के नाम पर धन अर्जित करने वाले पत्रकार धन कुबेर बनते जा रहे हैं. नर्सिंग होम एक्ट का धौंस दिखाकर जांजगीर के दो दलाल पत्रकारों ने पामगढ़ के एक चिकित्सक से दस हजार रूपए ऐंठ लिए.

देश और प्रदेश के दो मीडिया बैनर का नाम सामने आया है. ईटीवी के स्ट्रिंगर अविनाश पटेल और पत्रिका संवादाता संजय राठौर के नाम का खुलासा हुआ है. एक पत्रकार ने ईटीवी न्यूज में खबर प्रसारित करने के नाम पर रकम वसूला तो दूसरे ने पत्रिका अखबार का नाम लिया. कुल मिलाकर जांजगीर चांपा जिला में दलाली चरम पर है. दलाली का सच इस आडियो टेप में है. आप भी सुनें.

अंकुर तिवारी की रिपोर्ट. संपर्क: tiwariankur893@gmail.com


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Comments on “पत्रकार की खाल में दलाल… (सुनें आडियो टेप)

  • यह तो है ही | वहीँ दूसरी और बिहार की बात करें तो यहाँ डॉ. भीमराव ambedkar और बुद्ध के तस्वीर लगाकर और उनकी आदर्शों का बाजार में भांजा कर अपनी पेट पलने के लिए एक अखबार बाजार में आएं | जिसका नाम रखा गया —– दैनिक न्यायमार्ग |
    अति महत्वकांक्षी सोंच रख पहले झूठा विज्ञापन दैनिक न्यायमार्ग समाचार पत्र में छापा गया | जब सम्बंधित कम्पनियों को इस बात का पता चला तो अख़बार के मालिक से इसका कारन पूछा | तब संपादक भय से अख़बार के मालिक सह संपादक प्रभुनाथ आज़ाद ने विज्ञापन लगाना बंद कर दिया | बिहार की राजधानी पटना में यह अखबार किसी तरह चला एक दो महीने चला और फिर कामगारों को उसकी मज़दूरी देने में आनाकानी करने लगा | मज़दूरी मांगने वाले कामगारों को झूठे केश में फंसने की धमकी और जान मरवा देने के धमकी देकर भगा दिया | कुछ तो भय से भाग गए और कुछ तो अपनी मज़दूरी लेने के आश में डटे हैं | मज़दूरी यानि की सैलरी देने के डर से मिस्टर आज़ाद मोबाइल रिसीव नहीं करते हैं और यदा कदा दूसरे स्रोत से बात भी हो गए तो ऑफिस के एक मैडम प्रियंका से ले लेने की बात करते हैं | अब तनिक सोचिये —— मीडिया हाउस में काम करने वाले कामगारों की इस्थिति क्या होगी | और दूसरी और अख़बार के मालिक सह संपादक मालामाल होकर नुक्सान की दुहरी देने लगे तो ऐसे में क्या करना चाहैए ऐसे ठगों को |
    इस अखबार से कौन – कौन जुड़े थे
    मनोज कुमार यादव उर्फ मनोज कुमार सिंह —– बतौर प्रबंध संपादक —- यह व्यक्ति अपने को साधना न्यूज़ के बिहार झारखण्ड के प्रमुख बता कर दैनिक न्यायमार्ग में कामगारों से काम लिए करते थे \ जब सैलरी देने की बात हुए तो उलटे पैर खिसक गए—– इनकी कहानी जानिए —- यह व्यक्ति पहले आज अखबार में काम करता था \\\\ वहां भी नहीं टिका तो कुछ दिन राजनितिक किया और फिर कतिपय इलेक्ट्रॉनि मीडिया से जुड़ा और जुगाड़ तंत्र के माध्यम से रूपये कमाने और रातो रात आमिर बनने का सपना मन में पल लिया | तब एक पागल प्रभुनाथ कुमार आज़ाद मिला जिसे तनिक भी मीडिया जगत का कोई जानकारी नहीं है और मौका मिलते ही मनोज कुमार यादव उर्फ मनोज कुमार सिंह ने डोरा दाल दिया \
    —–
    संपादक —— अपने नाम को शार्ट में कहते हैं — पी के आज़ाद भारतीय —— पूरा नाम है —प्रभुनाथ कुमार आज़ाद भारतीय \\\\\\ मतलब आज़ाद बनने की सोंच और भारत के नागरिक बनने का सपना \\\ लेकिन इनके पास दोनों में से ही कोई आदर्श नहीं है | ———- अखबार निकालने के पहले इनका अपराधिक छवि रहा है \\\\ पटना जैसे शहर में कई लोगों का रुपया का कर्जदार है और जेल के दरवाजे तक \\\\\\ पुलिस ने कई बार इनके गिरेबान में सुधर जाने की धमकी दे डाली है | किन्तु ठग धोखेबाज मोनसिकता वाले चरित्र अब तक ठगते रहें हैं |
    कामगारों को सैलरी नहीं देने पर क्या हुआ —–
    दैनिक भास्कर प्रिंटिंग प्रेस यानि की दैनिक भास्कर अख़बार के प्रिंटिंग हाउस से दैनिक न्यायमार्ग छापना बंद कर दिया ||| बकाया नहीं बुगतान होने पर आउट जॉब देखने वाले कर्मी दैनिक भास्कर प्रभंधन से दण्डित हुए | मतलब दैनिक न्यायमार्ग के पास अखबार छप्पन के लिए पैसे भी नहीं है |

    एजेंसी देने के नाम पर वेंडरों से लिए गए रूपये को वापस माँगा जाने लगा है | वेंडरों का मोबाइल कॉल आने पर मोबाइल रिसीव नहीं किया जा रहा है |

    संपादक एक लड़की प्रियंका के नाम मैडम कह कह कर लोगो को अपने पीछे घुमा रहा है | प्रियंका कौन है —— यह लड़की आई जी एम एस पटना में डॉक्टर एस सिंह के छोटी बहन हैं |

    अब क्या हो रहा है ——-
    पटना के अपराधिक छवि वाले व्यक्तियों को जमा कर कामगारों को उनके सैलरी नहीं देने की रणनीति बना रहें हैं और कामगारों के बाहर ही बाहर धमकाया जा रहा है \ जिससे kamgar अपनी सैलरी मांगने से भयभीत हो रहे हैं | अगर कोई सैलरी लेने के लिए अपनी जान भी देने को तैयार हैं तो उन्हें कई पर्कार की खामिया गिनकर दो हज़ार रूपये लेकर चलते बनने के बात की जाते है |

    मीडिया जगत के बंधुओं इस अखबार के लिए काम करने वाले कामगारों को क्या सैलरी मिल पायेगी और ऐसे ठग संपादक सह मालिको के लिए कालापानी की जेल में जगह होगी क्या \\\\ ऐसे कई सवाल उपज रहें हैं | आगे और भी

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