भ्रष्टाचार में लिप्त कोतवाल का ऑडियो हुआ वायरल, आप भी सुनें

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने की कवायद में लगी है लेकिन पुलिस प्रशासन सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला यूपी के बदायूँ जिले से सामने आया है। यहां तो पुलिस वाले ही अवैध कारोबारियों के राइट हैंड बन गए हैं. बदायूं जिले के तेजतर्रार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चन्द्रप्रकाश लापरवाही और भ्रष्टाचार के साक्ष्य सामने आने पर पुलिस कर्मियों को दंडित किये बिना छोड़ते नहीं हैं. इसके बावजूद कुछ पुलिस वाले वर्दी को दागदार बनाने का काम कर रहे हैं. कोतवाल साहब सट्टा बंद कराने की जगह रूपये लेकर स्वयं सट्टा करा रहे हैं. कोतवाल और दलाल के बीच हुई बात का चौंकाने वाला ऑडियो सामने आया है.

ये ऑडियो कस्बा बिसौली का है. बिसौली कोतवाली के प्रभारी राजेश कश्यप और एक आदेश नाम के व्यक्ति के बीच फोन पर हुई बातचीत में कासिम नाम के सटोरिये का जिक्र किया जाता है. आदेश नामक दलाल कोतवाल से कह रहा है कि दस हजार रूपये उसके पास आ गये हैं, बाकी जल्दी दे देगा. साथ ही दलाल यह भी सुझाव दे रहा है कि जिस प्रकार दबाव बनाये हुए हैं, वैसा ही दबाव बनाये रखिये. चीता मोबाईल कई चक्कर लगा रही है, जिससे डर कर अन्य स्थानों से भी रूपये आ जायेंगे.

कोतवाल राजेश कश्यप एक अन्य सटोरिये के बारे में कहते सुनाई दे रहे हैं कि वहां से भी दिलाइये, पहले चालीस हजार आते थे. इस पर दलाल कह रहा है कि पुराना वाला सटोरिया भाग गया, नया वाला 25 हजार से अधिक नहीं देगा. रुपये देने के लिए कोतवाल ने अपने फ़ॉलोअर के दो मोबाईल नंबर भी दलाल को नोट करवाये. साथ ही एक अन्य ऑडियो में राजेश कश्यप दलाल से कह रहे हैं कि वाशिंग मशीन लानी है, जल्दी रूपये दिलाइये. ऑडियो में यह भी बात सामने आई है कि पुलिस के दबाव बनाने पर सटोरिया एक अख़बार के रिपोर्टर के पास भी गया था, लेकिन रिपोर्टर ने सट्टे जैसे धंधे में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट मना कर दिया.

बताया जाता है कि राजेश कश्यप की कारगुजारियों के चलते तेजतर्रार एसएसपी चन्द्रप्रकाश ने राजेश कश्यप से थाने का कार्यभार छीन लिया था, लेकिन एक बड़े जनप्रतिनिधि के दबाव में राजेश कश्यप को बिसौली जैसी बड़ी कोतवाली का प्रभारी बना दिया गया. चूँकि कोतवाल राजनैतिक संरक्षक के चलते बने हैं, इसीलिए तेजतर्रार एसएसपी चन्द्रप्रकाश का डर उन्हें नहीं छू पा रहा है. सुनें आडियो…

बदायूं से अर्पित भारद्वाज की रिपोर्ट. Mo.No. 9627471177, 9627655895

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गुमला जिले में एक टीवी पत्रकार कर रहा है उगाही (सुनें टेप)

गुमला जिले में एक बड़े खबरिया चैनल के लोकल पत्रकार द्वारा लगातार पैसे की वसूली की बात सामने आ रही है। यह पत्रकार सरकारी स्कूलों में जा कर वहां के शिक्षकों को खबर चला देने की धमकी देकर रकम वसूल रहा है। एक स्कूल में जा कर इस पत्रकार ने अपने साथी पत्रकार के साथ मिल कर करीब 30 हजार रुपये की मांग की। पैसे न देने पर अंजाम भुगत लेने की धमकी भी दी। इस ऑडियो टेप में धमकी की बात साफ सुनाई दे रही है।

बिहार-झारखंड के एक प्रतिष्ठित चैनल के पत्रकार के द्वारा इस तरह की वसूली की सूचना मिलने से चैनल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई है। इससे पहले भी इस पत्रकार पर एक निजी विद्यालय के द्वारा पैसे की मांग करने को लेकर न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया था। इसके बाद किसी तरह मामले में समझौता कराया गया। टेप सुनने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें…

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राजद विधायक नीरज यादव ने प्रभात खबर के पत्रकार को गंदी-गंदी गालियां और जान से मारने की धमकी दी (सुनें टेप)

यह शख्स है विधायक नीरज यादव. यह कटिहार के बरारी से विधायक है. इस विधायक ने पत्रकार को फोन पर जिस तरह से धमकी दी है, वह बताता है कि नेता हमेशा चाहते हैं कि पत्रकार उनके अनुकूल रहे. अगर पत्रकार ने तटस्थ होकर या विरोध में कुछ लिख दिया तो नेता न सिर्फ आपा खो देता है बल्कि जान से मारने की धमकी भी देने लगता है. वह यह भी भूल जाता है कि वह जिस फोन पर यह धमकियां दे रहा है, उसी फोन में दूसरे साइड पर गाली सुनने वाले शख्स ने काल रिकार्डिंग के एप्प लगा रखे हैं जो उनकी सारी हरकत को दुनिया के सामने लाने की क्षमता रखता है.

विधायक महोदय की पत्रकार से बातचीत सुनिए. आपको समझ में आ जाएगा कि यह शख्स धमकी और गाली ज्यादा बकता है, बात कम करता है. ये विधायक जी बता रहे हैं कि वे रिपोर्टरी भी कर चुके हैं. उनका यह भी कहना है कि जो पत्रकार फोन पर बात कर रहा है, वह अगर सामने रहता तो थूर देते. विधायक जी बोले- ‘नीरज यादव क्या चीज है, बता देंगे’.

राजद यानि लालू जी की पार्टी के लोग वैसे भी पत्रकारों को पटाने या पीटने की कला में माहिर हैं. जो नहीं पटता, उसे ये लोग पीट डालते हैं. उसी क्रम में विधायक नीरज यादव ने यह हरकत की. कटिहार का लोकल राजद विधायक नीरज यादव ने एक पत्रकार से जैसे बात की, वह बता रहा है कि इस पार्टी के कैसे संस्कार हैं और यह पार्टी वाकई सामाजिक न्याय की पार्टी है, जैसा यह दावा करती है. बिहार में जमीनी पत्रकारों को क्या क्या सुनना पड़ता है, उसकी बानगी है ये टेप. सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

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सीएम योगी ने आईपीएस हिमांशु कुमार को निलंबित कर दिया

यूपी के युवा आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार को पुलिस विभाग के अंदर की पोल खोलना महंगा पड़ गया. उन्हें मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने निलंबित कर दिया है. कहा जा रहा है कि इस कदम के बाद यूपी को एक नया अमिताभ ठाकुर मिल गया है, हिमांशु कुमार के रूप में, बशर्ते हिमांशु कुमार अपनी लड़ाई पूरे जोश और दम के साथ लड़ सकें. संभव ये भी है कि वे मामले को रफादफा करा कर फिर से बहाल हो सकते हैं. हालांकि हिमांशु ने सस्पेंड होेने के बाद ट्विटर पर लिखा है कि सत्य की जीत होती है. यानि उन्होंने इरादे जता दिए हैं कि वे झुकेंगे नहीं.

आईपीएस हिमांशु कुमार ने यूपी में नई सरकार बनने के बाद आरोप लगाया था कि पुराने पुलिस अफसर नई सरकार को खुश करने के लिए अचानक यूटर्न ले चुके हैं और एक जाति विशेष के पुलिस कर्मियों को दंडि़त कर रहे हैं. नेशनल वायस चैनल के एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्रा ने हिमांशु कुमार से लंबी बातचीत की और उसका प्रसारण नेशनल वायस चैनल पर किया. इस बातचीत में हिमांशु ने खुलकर पुलिस विभाग के भ्रष्टाचार के बारे में बताया.

योगी आदित्‍य नाथ के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक आईपीएस अधिकारी हिमांशु ने डीजीपी पर जाति विशेष के अधिकारियों को ‘सजा’ देने का आरोप लगाया. जब मीडिया में उनके ट्वीट की चर्चा शुरू हुई तो सफाई देते हुए कहा कि लोगों ने गलत मतलब निकाला. यूपी कैडर के 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार फिरोजाबाद के एसपी थे. बयानों के बाद में उन्हें डीजी आफिस अटैच कर दिया गया. उन्‍होंने ट्वीट कर कहा था कि ‘कुछ वरिष्‍ठ अधिकारियों में उन सभी पुलिस कर्मचारियों को सस्‍पेंड / लाइन हाजिर करने की जल्‍दी है जिनके नाम में ‘यादव’ है.’

वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश मिश्रा ने रिपोर्ट दी कि ‘नोएडा और गाजियाबाद में 90 सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।’ मिश्रा के मुताबिक इन्‍हें ‘कारखास’ कहते हैं और आईपीएस-नेता मिलकर इनसे वसूली कराते थे।’ इसी ट्वीट पर हिमांशु ने जवाब देते हुए पूछा कि ‘आखिर डीजीपी ने मेरे द्वारा बिसरख नोएडा में फाइल की गई एफआईआर की सही से जांच कराने की इजाजत क्‍यों नहीं दी? आखिर डीजीपी कार्यालय अफसरों को जाति के नाम पर लोगों को परेशान करने के लिए मजबूर क्‍यों कर रहा है?’

यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार बिहार के मोतिहारी के रहने वाले हैं. हिमांशु पर उनकी पत्नी प्रिया सिंह ने पटना के महिला थाने में दहेज प्रताड़ना और मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया था. इनकी पत्नी प्रिया सिंह पटना की रहने वाली है. इन दोनों की 2014 में शादी हुई थी. लेकिन शादी के कुछ दिनों के बाद ही प्रिया ने मार्च 2015 में हिमांशु पर दहेज प्रताड़ना और मानसिक रूप से शोषण करने का आरोप लगाया था.

कोर्ट ने इनकी इस मामले में अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था. पटना हाई कोर्ट की ओर से यूपी सरकार को हिमांशु के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे लेकिन, यूपी की अखिलेश सरकार लगातार हिमांशु को बचाती रही, ऐसा आरोप है. इस मामले पर आईपीएस हिमांशु ने ट्वीट कर बताया था कि उनकी पत्नी 10 करोड़ रुपए के लिए ब्लैकमेल कर रही हैं.

हिमांशु ने यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद पुलिस विभाग में हुए तबादले पर प्रश्न उठाया था. यूपी की योगी सरकार द्वारा सस्पेंड किए जाने के बाद हिमांशु ने अपने ट्वविटर अकाउंट पर लिखा-सत्य की जीत होती है. 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार फिलहाल डीजी ऑफिस से जुड़े हुए हैं. कुछ दिन पहले ही एसपी फिरोजाबाद के पद से इनका ट्रांसफर डीजी ऑफिस में कर दिया गया था. यूपी पुलिस का कहना है कि हिमांशु को अनुशासनहीनता के लिए सस्पेंड किया गया है.

आईपीएस हिमांशु कुमार और नेशनल वायस चैनल के एडिटर इन चीफ के बीच की बातचीत सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=wF1993jy7AI&t=352s

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अखिलेश राज में मंत्री रहे विजय मिश्र ने धमकाया तो पत्रकार ने दिया खाने भर जवाब (सुनें टेप)

गाजीपुर जिले से सपा राज में एक मंत्री हुआ करते थे, धर्मार्थ कार्य मंत्री, विजय मिश्रा. जब अखिलेश यादव ने इनका टिकट काट दिया तो ये बसपा में भाग खड़े हुए लेकिन वहां भी टिकट नहीं मिला और न ही अपनी सीट से बसपा के प्रत्याशी को जिता पाए. एक रोज आधी रात को ये पूर्व मंत्री विजय मिश्रा ने पूरे मूड में आकर गाजीपुर जिले के एक पत्रकार को फोन लगा दिया. ये पत्रकार कभी विजय मिश्र को चुनाव जिताने में जोरशोर से आगे थे. बाद में चुनाव जीतने और मंत्री बनने के बाद विजय मिश्र ने अपने हर उस गैर-ब्राह्मण कार्यकर्ता / करीबी के साथ जो किया, वही सुनील सिंह उर्फ सुनील कुशवाहा के साथ भी किया यानि अपमानित कर किनारे कर दिया.

सुनील ठीकठाक बैकग्राउंड वाले हैं. अच्छी खासी जमीन है और शहर के पॉश इलाके में बढ़िया मकान है. खुद के पास लाइसेंसी रिवाल्वर भी है. सो, उन्होंने अपने आनलाइन पोर्टल के जरिए विजय मिश्र के कारनामों की पोल खोलनी शुरू कर दी. बताया जाता है कि ये जो फोन विजय मिश्र ने किया, वह किसी तरह चाहते थे कि सुनील स्वीकार कर लें कि उन्होंने ही उनके खिलाफ इशारों इशारों में फेसबुक पर काफी कुछ लिखा है. पर सुनील ने कुबूल नहीं किया और न ही उत्तेजित होकर कुछ ऐसा कहा जिससे विजय मिश्र को उनके खिलाफ रिपोर्ट लिखाने का मौका मिल जाता.

हालांकि कहा जा रहा है कि विजय मिश्र ने फोन करने से कुछ रोज पहले सारे स्क्रीनशाट और सारा लेखन इकट्ठा करते हुए पुलिस में सुनील के खिलाफ तहरीर दे दी थी लेकिन पूरे लेखन से यह नहीं साबित हो रहा था कि यह सब विजय मिश्र के खिलाफ ही लिखा गया है. इस कारण उन्हें फोन करके और उकसा करके सुनील से ही यह कुबूल कराना उचित लगा कि उसी ने लिखा है ताकि सुनील के खिलाफ केस मजबूत हो सके और पुलिस कार्रवाई करा सकें. पर सुनील ने कबूलना तो दूर, करीब 40 मिनट की बातचीत में ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे उनके खिलाफ कोई मसाला मिल सके. उल्टे पूरी बातचीत से पूर्व मंत्री विजय मिश्र बहुत सारे मामलों में जरूर एक्सपोज हो गए. पूरा टेप सुनते हुए एक तरफ आपको सुनील की हाजिरजवाबी से कहीं कहीं हंसी आएगी तो मंत्री के व्यवहार बात रवैये से सत्ता-सिस्टम से जुड़े रहे लोगों के चरित्र के पीछे का स्याह सच समझ आएगा.

पत्रकार सुनील ने मंत्री जो को खाने भर जवाब दिया है, ये तो सच है. पत्रकार सुनील की हाजिरजवाबी का आप भी लोहा मान जाएंगे, साथ ही बहादुरी का भी. करीब पौन घंटे के इस आडियो को सुनते हुए आप बोर कतई नहीं होंगे. बीच-बीच में लगेगा जैसे आप कपिल शर्मा का कामेडी शो देख रहे हों. सुनील गाजीपुर लाइव नामक न्यूज पोर्टल के संपादक हैं. सुनील को बाद में यह आडियो वायरल न करने के लिए धमकाया गया. पत्रकार सुनील ने पूर्व मंत्री और उनके इशारे पर धमकाने वालों के खिलाफ लिखित शिकायत पुलिस को दे दी है.

आडियो सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें…. आडियो सुनते हुए स्क्रीन पर जो तस्वीर आप देख रहे होंगे, वही हैं माननीय पूर्व मंत्री विजय मिश्र…

ज्ञात हो विजय मिश्र वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के भतीचे हैं और कहा जाता है कि अच्युता जी ने ही मुलायम सिंह यादव से अपने करीबी रिश्ते के चलते विजय मिश्र को टिकट दिलवाया था. विजय मिश्र गाजीपुर से चंद सैकड़ा वोटों से जीते और मंत्री बन गए. लेकिन वह अपने पूरे कार्यकाल में परफार्म बिलकुल नहीं कर पाए. गाजीपुर में उन्होंने अपने उन कार्यकर्ताओं को काफी परेशान किया जो चुनाव जिताने में तो खुलकर तन मन धन से साथ थे लेकिन इनके मंत्री बनने के बाद इनकी उपेक्षा के शिकार होकर अलग-थलग हो गए. बताया जाता है कि विजय मिश्र ने मंत्री रहते हुए अपने कई कार्यकर्ताओं के यहां छापे मरवाए या उन्हें जेल में डलवाया या फर्जी केसों में फंसवाया. उनकी कोशिश थी कि उनके जो भी कार्यकर्ता उनसे नाराज होकर कुछ कह कर रहे हैं, उन्हें इतना आतंकित पीड़ित प्रताड़ित कर दो कि वह शांत होकर बैठ जाए या उनके चरणों में समर्पण कर दे. फिलहाल तो आप लोग इस टेप का आनंद लीजिए और देखिए कि हमारे देश के हंसते-मुस्कराते नेताओं का आधी रात के बाद चाल-चरित्र बोली-बानी अंदाज इरादों का क्या हाल होता है….

गाजीपुर से सुजीत कुमार सिंह उर्फ प्रिंस की रिपोर्ट.

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यूपी में भाजपा विधायक ने सीओ को धमकाया

यूपी में भारी बहुमत पाने वाली भाजपा की छवि पर पलीता लगाने का काम उसके कुछ नए बने विधायकों ने शुरू कर दिया है. सत्ता के नशे में चूर इन विधायक महोदय को मर्यादा का खयाल नहीं है. इस आडियो में सुनिए एक भाजपा विधायक (सवायजपुर, हरदोई) की सीओ (शाहाबाद, हरदोई) से बातचीत. लोग इस टेप को सुनकर कहने लगे हैं कि लगता है यूपी के अच्छे दिन आ गए हैं… टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

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दुनियादारी की हाय हाय में कुछ पल संगीत, भजन, बुद्धत्व, मोक्ष, मुक्ति के नाम…

Yashwant Singh : आज मोबाइल से फोटो वीडियो डिलीट कर रहा था तो एक वीडियो बचा लिया. यह वीडियो मैंने अपने मोबाइल से इंदौर में बनाया था. मौका था वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र शाह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम का. इस वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड किया.

आपके लिए पेश है… ”जरा हलके गाड़ी हांको, मेरे राम गाड़ी वाला…”. इस कबीर भजन को मालवा की मिठास में लपेट कर परोस रहे हैं भेरु सिंह चौहान… दुनियादारी की हाय हाय में कुछ पल संगीत, भजन, बुद्धत्व, मोक्ष, मुक्ति के नाम… सुनें यह प्यारा कबीर भजन… नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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इस आडियो टेप के कारण चली गई अंकित पांडेय की नौकरी, आप भी सुनें

दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत अंकित पांडेय की नौकरी चली गई, वजह बना एक आडियो टेप. इस टेप में अंकित बहुत सारी बातें करते हुए दिख रहे हैं. हालांकि ये बातें कुछ भी अलग नहीं है क्योंकि आमतौर पर रिपोर्टर अपने बासेज के बारे में फील्ड में अपने भरोसेमंद लोगों से ऐसे ही बतियाता है, भड़ास निकालता है.

लेकिन आज कल काल रिकार्डिंग सबके फोन में है और जिस अपने भरोसे वाले सज्जन से आप दिल की गुबार फोन पर निकाल रहे हैं, कभी उनसे आपकी खटक गई तो वो वह टेप जारी कर आपकी बैंड बजवा सकता है. दिल्ली में केजरीवाल सरकार के मंत्री के साथ यही हुआ था. उनके पीए ने ही नाराज होकर उनका सेक्स वीडियो वायरल कर दिया था और उनका मंत्रिपद चला गया.

इसी तरह रिपोर्टर अंकित पांडेय की नौकरी जाने का कारण बन गया यह आडियो. आप भी सुनें, नीचे क्लिक करें :

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अंबाला के APRO हरदीप सिंह ने दी ट्रिब्यून के फोटोग्राफर प्रदीम मैनी को दी गाली और की बदसलूकी (सुनें टेप)

प्रदीप मैनी

प्रदीप मैनी दैनिक ट्रिब्यून अम्बाला के फोटो जर्नलिस्ट हैं. उन्हें अम्बाला के एपीआरओ हरदीप सिंह ने 14 फरवरी को अम्बाला अनाज मंडी में अम्बाला विधायक असीम गोयल जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बदसलूकी की और गाली दी. हरदीप ने आरोप लगाय कि यह पत्रकार उसके कहने पर कोई प्रोग्राम अटेंड नहीं करता. हरदीप ने सबके सामने कहा- ” साले, तेरी मान्यता रद्द कराता हूँ अभी, लेटर लिखता हूं.”

जब ये बातें वो प्रदीप मैनी को बोल रहे थे उस समय प्रदीप अपने संस्थान फ़ोन कर रहे थे. हरदीप ने जो बोला वो भी उस बातचीत में रिकॉर्ड हो गया.  बाद में वहां मौजूद कुछ पत्रकारों ने हरदीप से कहा कि आप के कहने का यह ढंग उचित नहीं है. अम्बाला के एपीआरओ हरदीप सिंह द्वारा फोटो पत्रकार को बेइज्जत किया जाना और साला कहकर गाली देना मीडियाकर्मियों को नागवार गुजरा. आहत पत्रकार ने सीएम मनोहर लाल से शिकायत की है. घमंड में चूर एपीआरओ ने मान्यता रद्द करवाने की धमकी दी थी. वह डीसी के कार्यक्रम की कवरेज नहीं करने पर नाराज था.

अम्बाला उपायुक्त कार्यालय और डीपीआरओ विभाग में पत्रकारों को धमकाने व गलियां देकर प्रताड़ित करने के मामले को मीडियाकर्मी भूलना नहीं चाहते. वे इसके आरोपियों को दंड दिलवाना चाहते हैं. दैनिक ट्रिब्यून के प्रेस फोटोग्राफर प्रदीप मैनी को बदतमीजी व गुंडागर्दी की सारी हदें पार करते हुए एपीआरओ हरदीप सिंह ने न केवल तू तड़ाक करके बेइज्जत किया बल्कि मौके पर मौजूद पत्रकारों की मौजूदगी में कई बार साला कहकर गालियां तक दे डाली.

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मैनी ने अपनी शिकायत में बताया कि बीती 14 फरवरी 2017 को जब वो अम्बाला के विधायक असीम गोयल का कार्यक्रम कवर करने के लिए गए तो वहां मौजूद एपीआरओ हरदीप सिंह ने उनसे बदसलूकी की. साथ ही उन्हें धमकी भी दे डाली कि साले तू सभी सरकारी कार्यक्रम कवर नहीं करता इसलिए मैं तुम्हारी मान्यता रद्द करवा दूंगा. एपीआरओ हरदीप सिंह ने पत्रकार से उनकी मान्यता का आईडी कार्ड भी मौके पर माँगना शुरू कर दिया जबकि वो इसके लिए अधिकृत ही नहीं है, न ही वो ऐसा कर सकता था.

गालीगलौज और आपसी झड़प की बातचीत को आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके सुन सकते हैं :

https://youtu.be/SIWBPHrN3M0

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यूपी के इस दरोगा ने खुद खोल दी अपनी पोल (सुनें टेप)

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में एक दरोगा और डॉयल-100 सिपाही के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है। इस ऑडियो में दारोगा ने डॉयल-100 के सिपाही से अपने अवैध कामकाज में दखल न देने की हिदायत दी है। इस तरह दरोगा ने खुद ही अपने तमाम अवैध कामकाज की पोल खोलकर रख दी है। दरोगा का नाम राकेश शर्मा है जो मूरतगंज पुलिस चौकी में प्रभारी के बतौर तैनात है। दरोगा की वायरल ऑडियो ने पुलिस महकमे को शर्मशार कर दिया है।

मूरतगंज हाइवे पर तैनात डॉयल-100 के सिपाही अकबर खां से बातचीत के दौरान दरोगा ने अपने तमाम अवैध सिस्टम में दखल न देने की हिदायत दी है। ऑडियो वायरल होने के बाद कौशांबी पुलिस के अफसर उस डॉयल-100 सिपाही के खिलाफ ही कार्यवाही की कवायद कर रहे है जिसने दरोगा की शर्मनाक करतूत को टेप किया है। कौशांबी के नेशनल हाइवे पर मूरतगंज पुलिस चौकी स्थापित है। हाइवे से गुजरने वाले वाहनों से अवैध वसूली की जाती है। प्रतिबंधित मवेशी से लदे वाहन ही नहीं बल्कि अवैध मिट्टी बालू व गिट्टी से लदी ओवरलोड गाड़ियां भी पुलिसिया सिस्टम को सलाम करके ही गुजरती हैं।

वायरल ऑडियो में डॉयल-100 के सिपाही अकबर खां ने सूचना के बाद प्रतिबंधित मवेशी से लदे वाहन को रोकने की हिमाकत की तो वाहन चालक मुरारगंज चौकी प्रभारी की हनक पर अभद्रता पर उतारू हो गया। डॉयल-100 सिपाही ने जब चौकी प्रभारी से बात की तो दरोगा ने साफ शब्दों में सिस्टम में न दखल देने की हिदायत दी। दरोगा ने कहा कि जितना भी अवैध कार्य हो रहा है वो सब थाना व पुलिस चौकी के सिस्टम में है और इस बात की जानकारी मुझे व मेरे इंस्पेक्टर को भी है। सिस्टम में किसी भी प्रकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

धारा सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : scribe.dsyadav@gmail.com

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सुनिए टेप, यूूपी में दरोगा बेकसूर दलित को छोड़ने के लिए 50 हजार रिश्वत मांग रहा

यूपी के चित्रकूट जिले के राजापुर थाने के एक दरोगा ने कछिया गांव के एक दलित को छोड़ने के एवज में पचास हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इससे संबंधित ऑडियो इन दिनों वायरल हुआ है। कछिया गांव की महिला ने गुरुवार 10 नवम्बर को गांव थाने में हाजिर होकर दलित जयराम पर छेड़खानी करने का आरोप लगाया तो गनीवां पुलिस चौकी के इंचार्ज दिनेश कुमार सिंह ने उस दलित से सात हजार रुपये लेकर उसका शांति भंग में चालान कर दिया।

जब वह शुक्रवार को उपजिला मजिस्ट्रट राजापुर की अदालत से रिहा हुआ तो दूसरे दिन (शनिवार) पुलिस ने उसी महिला से प्रार्थना पत्र लेकर बलात्कार के कथित आरोप में उसे हिरासत में ले लिया और जब रिश्वत का इंतजाम नहीं हो पाया तो उसे 17 नवंबर को  राजापुर थाने की पुलिस ने जेल भेज दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सच में उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया है तो उसे 24 घंटे के भीतर समक्ष न्यायालय के समक्ष पेश किया चाहिए, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया और पैरवी कर रहे उसके परिजनों से जरिए फोन पर दरोगा दिनेश कुमार सिंह पचास हजार रुपये देने पर छोड़ने की बात कहते रहे हैं। यह आडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में वायरल हुई है जिसे अपर पुलिस अधीक्षक चित्रकूट को भी ‘व्हाट्सऐप’ के जरिए भेजा गया है।

इस मामले में पुलिस अधीक्षक चित्रकूट दिनेश पाल सिंह का कहना है कि ‘ऑडियो की जांच कराई जाएगी, अगर उपनिरीक्षक दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।’ लेकिन कोई भी पुलिस अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि जो व्यक्ति पहले की तहरीर में छेड़छाड़ का आरोपी बनाया जाता है, वही दूसरी तहरीर में (घटना दिनांक, समय व घटनास्थल वही) उसी महिला से दुष्कर्म करने का आरोपी कैसे बना दिया गया? और पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार तो कर लेती है, किन्तु न्यायालय या सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना उसे छह दिन तक पुलिस लॉकप में कैसे बंद किए रही? 

टेप सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/NCWpMQZdEgc

R. Jayan की रिपोर्ट.

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अतुल अग्रवाल फिर सुर्खियों में, अबकी उन्हीं के वेब चैनल के पत्रकार ने दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

अतुल अग्रवाल अपने कर्मों से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. ताजा मामला ठगी और गाली खाने का है. अपने वेब न्यूज चैनल हिंदी खबर में अतुल अग्रवाल ने यूपी का स्थानीय संपादक अमितेश श्रीवास्तव को बनाया था. अमितेश ने अतुल के कहने पर पैसे भी चैनल में लगाए. अतुल अग्रवाल की फितरत है कि वह इस्तेमाल करने के बाद आदमी को किनारे कर देते हैं और दूसरे को पकड़ लेते हैं. इसी क्रम में उन्होंने आजतक चैनल से निकाले गए अनूप श्रीवास्तव को हिंदी खबर यूपी का स्थानीय संपादक बना दिया और अमितेश को साइ़डलाइन कर दिया.

जो अमितेश कभी ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल में ठीकठाक हैसियत में हुआ करते थे, अतुल अग्रवाल के कहने पर उनके नए चैनल में आए और तन मन धन से काम किया. लेकिन जब अतुल ने अमितेश के साथ ठगी, धोखाधड़ी और विश्वासघात कर दिया तो अमितेश आग बबूला हो गए. उन्होंने अतुल अग्रवाल को जमकर गालियां दी. इस पूरे टेप में खास बात है दो पत्रकारों की गाली-गलौज की भाषा.

बात तो सामान्य और शिष्ट तरीके से भी हो सकती है लेकिन हिंदी पट्टी के सामंती चेतना वाले पत्रकार या तो पैर पूजन जानते हैं या फिर माकानाका करना. बीच में रेशनल / डेमोक्रेटिक होकर जीना बतियाना कतई नहीं जानते. अतुल अग्रवाल पर हिंदी खबर चैनल चलाने के दौरान कई किस्म के आरोप कई लोगों ने लगाए जिसमें उगाही से लेकर सेक्सुअल एब्यूज तक के मामले हैं. माना जा रहा है कि अमितेश श्रीवास्तव अब उमेश कुमार और प्रवीण साहनी वाले चैनल समाचार प्लस में लौट सकते हैं, यह इन टेपों में बातचीत से भी जाहिर है. फिलहाल तो ये गालीगलौज भरा टेप सुनिए. नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें :

पार्ट 1

https://www.youtube.com/watch?v=CsCrWsxR6uw

पार्ट 2

https://www.youtube.com/watch?v=vQG1_JOUoGg

अतुल अग्रवाल के बारे में ज्यादा जानने के लिए इसे भी पढ़ सकते हैं…

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जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।

अब एमडी आशुतोष मोहन से जब उनके मोबाइल नंबर 9893024599 पर पैसे या पेपर की मांग की जाती है तो वो गाली गलौज कर असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैं इस ऑडियो को मीडिया के सभी लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ ताकि और लोग इन चोरों के झाँसे में ना आयें। सभी लोग सुनिए कि दैनिक जागरण जैसे न्यूज़ पेपर का मैनेजिंग डायरेक्टर किस भाषा में बात करता है। टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/2B3lSdN8y_A

अवधेश कुमार
awadhesh.vnews@gmail.com
छतरपुर
मध्य प्रदेश

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ब्लैकमेलिंग के तीन लाख रुपये देने से मना करने पर पत्रकार ने धमकाया- अब तो तेरे से पांच लाख लूंगा (सुनें टेप)

Yashwant Singh :  ये पत्रकार है या माफिया…  सच कहूं तो जब पहली बार ये टेप सुना तो मैं खुद सहम गया. कोई पत्रकार इतना ढीठ / इतना आपराधिक प्रवृत्ति का कैसे हो सकता है. पहली बार ऐसा कोई पत्रकार सुन रहा हूं जो तीन लाख रुपये की रंगदारी / ब्लैकमेलिंग न देने वाले से कह रहा है कि अब तो पांच लाख लूंगा…

बाप रे… लगने लगा है कि पत्रकारिता अब माफियागिरी में तब्दील होने लगी है… ये टेप मेरे ह्वाट्सअप पर किसी ने भेजा है… किस जगह का है, कौन पत्रकार है, यह अभी पता नहीं चल सका है… कृपया किसी को मालूम हो तो मेरी मदद करे ताकि इस भेड़िए की शिनाख्त हो सके और इस पर थूका जा सके…

टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/cQEJ7vH6YkI

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Pankaj Gupta यशवंत भाई ये कोई नई बात नही है हर जिले हर कस्बे में इस तरह के लोग मिल जायेंगे जो सिर्फ और सिर्फ ब्लैक मेलिंग ही करते है अफ़सोस तो इस बात पर होता है कि बड़े बड़े बैनर चाहे वो प्रिंट से हो या इलेक्ट्रॉनिक से उन्हें अपने यहाँ स्थान दिए हुए है

Mahabir Singh Khatri ये तो छोटा है, 100 करोड़ वाले का क्या हुआ, अब supplements or antibiotic सॆ काम नहीं चलेगा, surgery करनी पड़ेगी.

Syed Mazhar Husain यशवंत भाई ऐसे माफिया किस्म के लोग जिन्होंने पत्रकारिता का चोला ओढ़ रक्खा है और जिनका काम ब्लैकमेलिंग के सिवा कुछ भी नहीं है बहुतायत है

Virendra Pandey मजहर चाचा, आपके शहर ऐसा कुछ ज्यादा ही है।

Syed Mazhar Husain बिलकुल आप भी जानते फिर लिख भेजिए यशवंत भाई को मैं तो दूर हु वरना लिखता ज़रूर

Yashwant Singh बात लिखने से सिर्फ नहीं बनेगी. बिना प्रमाण कोई भी किसी लिखे को खारिज कर मानहानि बता सकता है. इनका इलाज ऐसे टेप ही हैं. स्टिंग कराइए.

Virendra Pandey ओके बॉस, मैं आपको भेजूंगा स्टिंग क्लिप ।

Vivek Dutt Mathuria कुछ अपवाद स्वरूप भले लोगों की बात छोड़ दी जाए तो पत्रकारिता दलाली के लिए बेहतर पेशा साबित हो रहा है। नौकरशाही दलाल पत्रकारों को अपने संसाधन के रूप में उपयोग करना सीख गई है…. पूरा सूचनातंत्र उनकी मुट्ठी में है। दलाल पत्रकार जनद्रोही, लोकतंत्रद्रोही और संविधानद्रोही हैं जो देश समाज को लूटने वाले भ्रष्ट तंत्र के जड़ खरीद गुलाम है…. उनके कुकृत्यों से कोई मरे उनका कोई लेना-देना नहीं…बस दलाली न मर जाए

Singhasan Chauhan वाह रे पत्रकारिता …..

Neelesh Misra My god.

Sanjaya Kumar Singh इससे तो ‘पत्रकारिता’ सीखनी पड़ेगी। उधार सीखाए तो कमाएगा। लोग कमाकर डबल चुकाएंगे। तीन लाख देने में आना-कानी करने पर सीधा पांच लाख कर दिया। बता रहा है कि पुलिस प्रशासन सब पत्रकारों के अंडर में काम करते हैं – बड़ा वाला पत्रकार है ये तो …

Shashank Mishra जहाँ तक मेरा मानना है ये पत्रकार नहीं हो सकता ….

Neeraj Sharma Kon patrkar hai..

Ganesh Dubey Sahaj हर घर रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊं

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यूपी में मंत्री ने अफसर को दी मां-बहन की गालियां (सुनें टेप)

यूपी में समाजवार्दी पार्टी की सरकार के मंत्री बेलगाम हैं और पूरा जंगलराज कायम कर रखा है. अखिलेश यादव अपनी इमेज के सहारे इलेक्शन जीतने की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके मंत्री उनकी लुटिया डुबाने के लिए कमर कसे हैं. तभी तो आए दिन मंत्रियों के कारनामों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. ताजा मामला सपा सरकार के एक राज्यमंत्री की दबंगई का है.

खबर है कि एक राज्यमंत्री ने कुशीनगर में जिला पंचायत के ठेके के बंटवारे को लेकर अपर मुख्य अधिकारी (जिला पंचायत) को माँ-बहन की खूब गालियां दी. इस गालीबाजी से संबंधित आडियो सामने आया है. यह आडियो जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी के मोबाइल में रिकार्ड हुआ. इसमें चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी उमेश पटेल को भद्दी-भद्दी गाली दे रहे हैं. डर के चलते अपर मुख्य अधिकारी पूरे मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. आडियो सुनने के लिए नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/z5bCZ0J3gjU

कुशीनगर से शकील अहमद की रिपोर्ट.

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यूपी के कैबिनेट मंत्री ने फोन पर गाली दी तो भड़क उठा दरोगा (सुनें टेप)

यूपी में जंगलराज का आलम ये है कि एक तरफ अफसर बेलगाम हैं तो दूसरी ओर मंत्री. हर कोई अपने से नीचे वाले को गरियाने, सताने में लगा है. ताजा मामला यूपी के कैबिनेट मंत्री राममूर्ति वर्मा से जुड़ा है जिन्होंने फोन पर एक दरोगा को मां की गाली दे दी तो भड़के दरोगा ने पूरी शिद्दत से न सिर्फ प्रतिरोध दर्ज कराया बल्कि मंत्री जी को गाली न देने की नसीहत तक दे दी.

मंत्री ने जब देख लेने की धमकी दी तो दरोगा ने कह दिया कि वह चाहें तो खुशी से किसी दूसरे जनपद में उसका ट्रांसफर करा दें, उसे कोई दिक्कत नहीं.  दरोगा का नाम संजय यति है जो अम्बेडकरनगर के इब्राहिमपुर थाने पर तैनात है. मंत्री और दरोगा संवाद सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=7Ky7HhbqBHI

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”Zee न्यूज़ के फ़र्ज़ी रिपोर्टर ने मुझे धमकी दी, सुनें टेप”

सेवा में
श्रीमान्
संपादक भड़ास4मीडिया / ज़ी न्यूज़ /  वासिंद्र मिश्रा जी / न्यूज़ नेशन चैनल

महोदय,

मैं अजय कुमार पाण्डेय S/O श्री सुरेन्द् नाथ पाण्डेय, सलेमपुर भुलनिया, शाहगंज, जौनपुर ज़िले का मूल निवासी हूँ। Zee न्यूज़ और news nation के नाम पर जौनपुर जिले के शाहगंज में कुछ फ़र्ज़ी पत्रकार तमाम लोगो,स्टिकर, बैनर लगाकर जनता और अधिकारियो को गुमराह करते है। जो जिले में नियुक्त रिपोर्टेरो की जानकारी और उनकी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में भी है, जहाँ वे चैनल के नाम के साथ तमाम फ़ोटो बैनर बनवाकर पोस्ट करते रहते भी है।

चंचल जायसवाल द्वारा अपने आपको फ़र्ज़ी शाहगंज पत्रकार संघ का अध्यक्ष और ज़ी न्यूज़ का रिपोर्टर बताया जाता है । आपको बताना चाहूँगा चंचल जायसवाल बैंक ओफ़ बरोडा शाहगंज शाखा से लोन लिया…जिसे जमा न कर पाने पर..बैंक ने पुरे शाहगंज में बड़े बकायादारों का नाम लौडस्पीकर में announce करवाया । इसी बदनामी का बदला लेने के लिए चंचल जायसवाल ने फेसबुक पर मेनेजर के खिलाफ एक फर्जी खबर पोस्ट कर दी। जब महिला ने बैंक मेनेजर को चप्पलो से पीटा….शीर्षक से। जब बैंक मेनेजर ने मनिहानि की बात कही तो जाकर चंचल जैसवाल ने बैंक मेनेजर से लिखित रूप से माफ़ी मांग ली.. । फर्जी पत्रकार की जब यह बात पत्रकारो को पता चली तो लोगो ने इसकी आलोचना की।

हम भी उनके पोस्ट को शेयर करके पत्रकारिता को कलंकित करने वाला उनका सारा राज खोल दिए…वे अपनी बाइक पर ज़ी न्यूज़ का लोगो लगाकर फेसबुक पर भी भौकाल के लिए पोस्ट करते रहे। कई बार हमने ज़िले में नियुक्त zee न्यूज़ के रिपोर्टर अजीत सिंह से बात की पर उनकी मिलीभगत से यह मामला चलता रहा । फेसबुक देखिए जहाँ फर्जी रिपोर्टरो की फ़ोटो भी है। हमने जनता को जागरूक करने और प्रशासन से इनके फर्ज़ीवाड़े लिए करवाई करने के लिए भी कहा है।

आज न्यूज़ नेशन के एक ऐसे फ़र्ज़ी रिपोर्टर का कारनाम सामने आया जो चौराहो रेलवे स्टेशनों पर धलल्ले से अपना बड़ा बड़ा बैनर लगवाये मिले। फेसबुक पर किसी ने पोस्ट करके हमे टैग किया…एक मित्र द्वारा पूंछा गया क्या ये हकीकत में है हमने कहा नही। इसके बाद हमने अपने फेसबूक पर एक आवश्यक सुचना नाम से इस तरह के फर्जीवाड़े से सचेत रहने के लिए जनता  से कहा। साथ ही डीएम , एसपी जौनपुर से भी निवेदन किया ऐसे भ्रामक लोगो के खिलाफ कारवाही करने का कास्ट करे। जिससे क्रोधित होकर चंचल जैसवाल ने हमे 2 बार फोन करके हमारे नम्बर 9453866464 पर चंचल ने अपने नम्बर 8858810101 से फ़र्ज़ी मुकदमो में फंसाने की धमकी दी।

श्रीमान् जी आपसे निवेदन है की हमारी बात को आप Zee news और news nation चैनल तक पहुँचाने के साथ ही…ऐसे फर्जीवाड़े के खिलाफ उठाये गए हमारे कदम में सहयोग करे। हमने तत्काल जौनपुर डीएम, एसपी,और लखनऊ के डीजीपी के व्हाट्सएप्प पर एप्लीकेशन भेजकर पुरे मामले से अवगत करा दिया है। कृपया मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करे ताकि ….ऐसे फर्जी लोगो द्वारा मुझे और मेरे परिवार को किसी फर्जी मामले में फंसाकर परेशांन न किया जाये। आप सभी की अति कृपा होगी।

आपको धमकी का दोनों ऑडियो भेज रहा हूँ कृपया इसे सार्वजानिक करके……मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करें…

टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें :

call recording one

call recording two

चंचल जैसवाल की शाहगंज कोतवाली में अच्छी पकड़ के चलते उनके खिलाफ कोतवाली में कोई भी कारवाही मेरे द्वारा करवा पाना नामुमकिन है।। ऑडियो रिकार्डिंग में चंचल खुद कह रहे है इसके पहले हमने प्रीतम सिंह पत्रकार के ऊपर मुकदमा दर्ज करवाके फाइनल रिपोर्ट भी लगवा दी है। चंचल जायसवाल द्वारा बैंक मेनेजर को लिखा गया सुलहनामा भी संलग्न है। ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन भी अपने – अपने नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े पर ध्यान देने का कष्ट करे । ज़िले वाले लोग पैसे लेकर जनता को लूटने के लिए ऐसे लोगो को बढ़ावा देते है। यदि ऐसा नही है तो ज़िले में नियुक्त पत्रकार इनकी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में होते हुए भी इनके फर्जीवाड़े पर ध्यान क्यों नही देता है.

धन्यवाद

याचिकाकर्ता

अजय पाण्डेय

पत्रकार
शाहगंज, जौंनपुर ।
Ajay Pandey
Jaunpur (U.P)
Mobile   :  9453-86-6464 , 9454-86-6464
jnp.ajaypandey@gmail.com

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IAS Amit Kataria ने Journalist Kamal Shukla को धमकाया- ‘दो कौड़ी का आदमी, साले, कीड़े, चूजे, मच्छर, मक्खी… तुझे तो ऐसे ही मसल दूंगा’ (सुनें टेप)

अमित कटारिया, कलक्टर, बस्तर (फोटो सौजन्य : फेसबुक)

छत्तीसगढ़ में तैनात आईएएस और आईपीएस विवादों में रहते हैं. दमन करने से लेकर धमकाने तक के लिए. बस्तर जिले के कलक्टर अमित कटारिया काला चश्मा पहनकर पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने के मामले में कुख्यात रहे तो अब यही आईएएस एक पत्रकार बुरी तरह और गंदी भाषा में धमकाने के लिए चर्चा में है. दरअसल जेएनयू से कई प्रोफेसर बस्तर के एक गांव में गरीबों से मिलने और सामाजिक अध्ययन करने गए थे. उन्होंने बातचीत में ग्रामीणों को नक्सलियों और राज्य की पुलिस दोनों से दूर रहकर खुद का जीवन बेहतर करने की सलाह दी थी. मौके की ताक में बैठे रहने वाली रमन सरकार के कारिंदों ने गांव वालों को चढ़ाया, भड़काया और उनसे इन प्रोफेसरों के खिलाफ शिकायत ले ली कि ये लोग ग्रामीणों को भड़का रहे थे.

इस शिकायत को डीएम अमित कटारिया ने अपने फेसबुक वॉल पर डाल दिया और मीडिया को इस तरह ब्रीफ किया गया मानों प्रोफेसर लोगों ने गांव वालों को नक्सलियों के साथ मिलजुल कर लड़ने का गुर दिया हो. ऐसा ही कुछ हर जगह छपा और ऐसा ही राज्य मशीनरी ने प्रचारित किया. इसी मसले को लेकर पत्रकार कमल शुक्ला ने डीएम अमित कटारिया को फोन किया और गंदी मानसिकता के तहत प्रोफेसरों को बदनाम किए जाने की शिकायत की. इतना सुनकर आईएएस अमित कटारिया आपा खो बैठा और लगा पत्रकार को धमकाने. पूरी बातचीत सुनिए और सोचिए कि जिन्हें जनता का सेवक कहा जाता है, वो खुद को किसी सद्दाम हुसैन से कम नहीं समझते.

लोकतंत्र में आईएएस – आईपीएस नामक प्रजाति किस कदर रक्षक से भक्षक कैटगरी में शिफ्ट हो रही है, इसकी मिसाल यह टेप है. कायदे से तो कलक्टर को विनम्रता पूर्वक पत्रकार द्वारा कहे गए शब्द पर आपत्ति प्रकट कर फोन काट देना चाहिए था. आखिर पद की गरिमा भी होती है. लेकिन आईएएस अमित कटारिया ने सड़क छाप मवालियों वाली भाषा का इस्तेमाल कर अपना ओरीजनल चेहरा दिखा दिया. आप इस आईएएस से कैसे जनप्रिय और निष्पक्ष अधिकारी होने की उम्मीद कर सकते हैं जो थोड़ा सा आरोप लगने पर इस कदर बिलबिला जाता कि अपने पद गरिमा दायित्व सब कुछ को भूल कर धमकाने लग जाता है.

टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें….

https://www.youtube.com/watch?v=VxJH8p7Tmr0

बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें….

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जी न्यूज के इस संवाददाता को खबर रोकने के लिए चाहिए फ्लैट या दस लाख रुपए! (सुनें टेप)

हरिद्वार के जी न्यूज संवाददाता नरेश गुप्ता द्वारा एक प्रापर्टी डीलर से एक फ्लैट या 10 लाख रूपये की मांग करते हुए ब्लैकमेल किये जाने की एक आङियो क्लिप इन दिनों हरिद्वार में खूब चर्चा का विषय बनी हुई है. इसमें जी न्यूज संवाददाता प्रापर्टी डीलर से विवादित जमीन की खबरें न दिखाने की एवज में एक फ्लैट या 10 लाख रुपये की मांग कर रहा है. वह उस व्यक्ति को साफ साफ इशारों में कह रहा है कि यदि वह न मानेगा तो वह खेल बिगाड़ देगा.

करीब 13 मिनट से ज्यादा की इस बातचीत में रिपोर्टर कह रहा है कि वह कई बार पहले भी फोन कर चुका है पर आपने फोन नहीं उठाया तो मैंने खबर तो भेज दी थी पर बहुत हल्की बनाकर भेजी थी. उसके पास इस विवादित जमीन से संबंधित सारे कागजात है और वह इस पर बड़ा प्रोगाम भी बना सकता है. करोड़ों रुपये की कीमत की इस जमीन को लेकर दो तीन पक्षों में काफी वक्त से विवाद चल रहा है. हरिद्वार में प्राइम जगह पर स्थित इस जमीन पर कई लोगों की नजर है. जी न्यूज संवाददाता नरेश गुप्ता स्वयं प्रापर्टी की धंधा करता है और कुमार प्रापर्टी डीलर के नाम से वह उसी आफिस से यह कारोबार करता है जिस आफिस से वह अपना पत्रकारिता का धंधा करता है.

इस आडियो में नरेश गुप्ता ने राजू ओबराय नामक प्रापर्टी डीलर से यह भी कहा है कि उसी ने इससे पहले हरिद्वार के एक बड़े प्रापर्टी डीलर राकेश गोयल का भी खेल बिगाड़ दिया था. राकेश हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की 144 बीघा भूमि खरीद रखी है पर उस पर आज तक घुस नहीं पाया क्योंकि स्याना बन रहा था. गुप्ता ने यह भी कहा कि उसके साथ साधना न्यूज रिपोर्टर  (वर्तमान में इंडिया न्यूज के साथ) धर्मेन्द्र चौधरी और दोनों कैमरामैन भी हैं. बस एक फ्लैट या 10 लाख रुपये का इंतजाम करवा दो. कुछ साल पहले नरेश गुप्ता को जी न्यूज से एक पेट्रोल पंप मालिक से 35 हजार रुपये मांगने की शिकायत सही पाये जाने पर चैनल ने हटा दिया था. 4 महीने बाद हरिद्वार के बड़े सफेद वस्त्र धारण करने वाले संत ने वापसी करवाई थी. यह संत जी न्यूज मालिक सुभाष चन्द्रा के करीबी हैं.

आडियो टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=QtP9K3RdFPs

हरिद्वार से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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वेद प्रताप वैदिक बोले- अरनब गोस्वामी बहुत नीच आदमी है (देखें वीडियो)

वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार हैं. काफी सुलझे हुए पत्रकार माने जाते हैं. भाषा और विचार के स्तर पर संतुलित माने जाते हैं. लेकिन अरनब गोस्वामी को लेकर उनका गुस्सा ऐसा फूटा कि उन्होंने अरनब गोस्वामी को ना जाने क्या क्या कह दिया, वह भी पूरी मीडिया के सामने. उपर दिए गए तस्वीर पर क्लिक करिए और वीडियो देखिए.

टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से किसी वरिष्ठ पत्रकार ने इतना गुस्सा पहली बार जाहिर किया है. इस वीडियो को लेकर लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हैं :  https://www.youtube.com/watch?v=mUrI5Fp-YyM

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सेल्फी प्रकरण पर जागरण के रिपोर्टर का सवाल सुनते ही आगबबूला हुई बुलंदशहर की डीएम, मां-बहन कह कह के जमकर हड़काया, सुनें यह टेप

बुलंदशहर में एक डीएम हैं. चंद्रकला नाम से. उनके साथ एक लड़के ने सेल्फी ली, बिना उनकी सहमति. इससे नाराज डीएम ने उस युवक को जेल भिजवा दिया. इस प्रकरण पर जब दैनिक जागरण के रिपोर्टर ने डीएम से पूरा घटनाक्रम जानना चाहा, डीएम का पक्ष जानना चाहा तो डीएम साहिबा इस कदर आग बबूला हुईं कि जागरण के रिपोर्टर को उसकी मां बहन का हवाला दे दे कर जमकर हड़काया.

पूरा टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=6L2etDR3Rxk


इस प्रकरण को दूसरा पक्ष जानने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें…

जबरन सेल्फी लेने वाले मनचले को जेल भिजवाने वाली डीएम चंद्रकला के पीछे क्यों पड़ा है दैनिक जागरण?

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ये भ्रष्टाचार है.. गरीब बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक… मीडिया कृपया इन बच्चों की मदद में सामने आए… (सुनें टेप)

लखनऊ। अभी कुछ दिनों पूर्व ही बीटीसी-2014 के सत्र में ट्रेनिंग हेतु विद्यार्थियों ने कॉउंसलिंग कराया था। जिन बच्चों को लखनऊ डाइट मिला उनका तो ठीक है मगर जिन बच्चों को लखनऊ के 31 प्राइवेट कॉलेज मिले हैं। वो बच्चे अपने नसीब पर रो रहे हैं। बच्चों का आरोप है की उन्होंने निर्धारित फीस (41000/- इकतालीस हजार रूपये) पहले ही डिमाण्ड ड्राफ्ट के रूप में लखनऊ डाइट निशातगंज में जमा करा दिया है।

इसके वावजूद जब वो आबंटित कॉलेज पर अपने नामांकन हेतु डाइट से प्राप्त अल्लोटमेंट लैटर लेकर वहाँ जा रहे हैं तो कॉलेज वाले बिल्डिंग, लैब आदि के नाम पर मनमानी डोनेशन 20 से 35 हजार प्रति वर्ष के हिसाब से अलग से मांग रहे हैं।

कुछ कॉलेजों ने तो फोन करके विद्यार्धियों को रिश्वत का पैसा साथ लेकर ही नामांकन कराने आने के लिए आदेश दे दिया है। लखनऊ के एक कॉलेज की रिश्वत की मांग करने की रिकॉर्डिंग भी मेरे पास उपलब्ध है। लगभग सभी कॉलेज ऐसा ही कर रहे हैं। बच्चों का आरोप है की इस मामले में डाइट लखनऊ के अधिकारी भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनका कहना है की सम्बंधित डायरेक्टर और सचिव दोनों ही कॉलेज वालों से मिले हुए हैं।

डाइट पर चक्कर काटती एक लड़की के अविभावक ने मुझे बताया की पहले ही बिटिया के नामांकन हेतु 41000 रूपये जुटाने में अपने बीबी के गहने बेच चूका हूँ। अब कॉलेज वाले 21 हजार माँग रहे हैं। ये पैसे कहाँ से लाऊँ समझ नहीं आ रहा है की अब क्या बचूँ। क्या उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे ही बेटियों और छात्रों को शिक्षित करना चाहती है की गरीब अविभावक एक बच्चे को पढ़ाने में पूरा लूटकर सब कुछ बेचने पर मज़बूर हो जाए? अभी तक यह न्यूज़ मीडिया में क्यों नहीं दिखाई दे रही है यह भी अपने आप में एक प्रश्न चिन्ह बना हुआ है।

रिश्वतखोरी से संबंधित टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें>> Youtube.com/watch?v=2tjcpG3WdFI

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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‘आजतक’ का पत्रकार मनोज सट्टेबाज की रिहाई और मेले में सट्टा चलाने के लिए थानेदार से सिफारिश कर रहा (सुनें टेप)

गाजियाबाद से एक बड़ी खबर आ रही है. एक आडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि थाना विजय नगर प्रभारी सुरेन्द्र यादव एवं चैनल ‘आज तक’ के पत्रकार मनोज के बीच हुई फोन वार्ता है. इस वायरल हुए ऑडियो में आजतक का पत्रकार मनोज हिरासत में लिये गये एक सट्टेबाज को छोड़ देने के लिए अपील कर रहा है. साथ ही वह सट्टेबाज को मेले में सट्टा चलाने देने की सिफारिश कर रहा है.

थाना प्रभारी सुरेंद्र यादव पूरी कड़ाई से मनोज की सिफारिश को नकार रहा है और कह रहा है कि उसके इलाके में जो गलत करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=zP2GlcK9w40

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बुलंदशहर आईटीआई कांड में प्रिंट मीडिया किस तरह हुआ मैनेज, सुनें ये तीन टेप

यूपी के बुलन्दशहर जिले में घटित हुए आईटीआई कांड में प्रिंट मीडिया जमकर मैनेज किया गया… बुलन्दशहर के आईटीआई में सामूहिक नकल के मामले में यूं तो दबाव बढ़ने के बाद आखिर अब पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मीडिया को कैसे मैनेज किया गया, इसका अंदाजा इन तीन आडियो टेप से लगाईये। कैसे रूपयों के दम पर दैनिक जागरण सहित तीन प्रमुख अखबारों को खरीदा गया। इतना ही नहीं बढ़िया ढंग से कलम की कलयुगी बाजीगर मैनेज भी हुए। पत्रकारिता के नाम पर दलाली का यह नमूना भर है। नकल माफिया डीएम बी.चन्द्रकला तक को गरिया रहे हैं। आडियो में नम्बर एक अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण का नाम भी है।

दरअसल दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ सुमनलाल कर्ण जोकि पहले रिपोर्टर रहे थे, वह पहले शिक्षा की बीट देखते थे। आईटीआई में उनके अच्छे संबंध हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने कई लोगों को आईटीआई भी करायी। आडियो में जिस कपिल का नाम आ रहा है वह हिन्दुस्तान अखबार में रिपोर्टर है। दरअसल 6 अगस्त को नगर के सागर आईटीआई केंद्र पर परीक्षा से पूर्व ट्रेड थ्यौरी के पेपर को आउट करके उत्तर हल किए जा रहे थे। शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर ओर सीओ ने छापा मारकर नकल का भंडाफोड़ किया और भारी मात्रा में प्रश्न पत्र व उत्तर पुस्तिकाएं बरामद कीं। मौके से पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया।

मामला मैनेज होता रहा। डीएम बी. चन्द्रकला के संज्ञान में आया तो उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी हुई। आईटीआई के प्रधानाचार्य संजय किशोर, एके पांडे ओर दुश्यंत को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पेपर आउट करने के बदले मिले 4 लाख रूपये भी प्रधानाचार्य से बरामद कर लिए। इस मामले में वीआईआईटी इंजीनियरिंग कालेज के विजय कौशिक, शिवचरन इंटर कालेज के अशोक शर्मा, महेन्द्र चौधरी ओर सुरेन्द्र शर्मा फरार हैं। आडियो टेप बता रहे हैं कि कैसे इस मामले में मीडिया को मैनेज करके मोड़ दिया जा रहा था। आडियो की बातचीत आइटीआइ के प्रधानाचार्य और इंजीनियरिंग कालेज के विजय कौशिक के बीच है। आरोपियों के मोबाइल से मिले इन आडियो टेप को इन्वेस्टीगेशन का पार्ट भी बनायेगी। टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए तीनों यूट्यूब लिंक को एक-एक कर क्लिक करिए और सुनिए :

(1) https://www.youtube.com/watch?v=GkRbaOVd6Jw

(2) https://www.youtube.com/watch?v=ZSNJMNEWzxU

(3) https://www.youtube.com/watch?v=m3G0X0ihIp0

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यूपी में जी मीडिया और राजस्थान में समाचार प्लस के संवाददाता मांग रहे पैसे (सुनें टेप)

: जी मीडिया का संवाददाता बाबा से मांग रहा है पांच लाख रुपये : समाचार प्लस राजस्थान के संवाददाता ने स्कूल संचालक से मांगे पैसे : इलाहबाद के पास है कौशाम्बी. यहां कुछ ऐसे लोग हैं जो मीडिया को बेच रहे हैं. कौशाम्बी में पत्रकार हैं अजय कुमार जो कथित तौर पर जी न्यूज़ में काम कर रहे हैं. इन महाशय ने तीन कैमरामैन भी रख लिया है. ये पूरा गिरोह मिलकर खबर के चलाने रोकने के नाम पर मोटी रकम की डिमांड कर रहे हैं. एक बाबा से रिपोर्टर अजय कुमार और उनके एक सहयोगी की बातचीत का आडियो वायरल हुआ है. इसमें अजय के सहयोगी धारा यादव ने बाबा से खबर न चलवाने के नाम पर जी मीडिया को विज्ञापन देने के लिए 500000 रुपये की मांग की. अजय कुमार पर शराब के नशे में बिजली विभाग के जेई से मारपीट की मामला मंझनपुर कोतवाली में दर्ज हो चुका है. टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=bUP6J2nn4_Y

उधर, राजस्थान के बूंदी जिले के हिण्डोली तहसील में टीपू सुल्तान नाम का एक संवाददाता है जो समाचार प्लस राजस्थान चैनल में काम करता है. आरोप है कि बूंदी शहर से लेकर हिण्डोली कस्बे के सभी निजी स्कूलों को यह धमकाता रहता है और उनसे पैसे मांगता है. यह संवाददाता स्कूल वालों पर नियम कानून तोड़कर स्कूल चलाने का आरोप लगाता है और स्टिंग करके चैनल पर चलाने की बात कहता है. इस सबका मकसद अवैध वसूली करना होता है. ऐसे ही एक केस में संवाददाता का आडियो लीक हो गया और पूरी बातचीत वायरल हो गई. इस टेप के बाद बूंदी शहर में समाचार प्लस विवादों में आ गया है. इस ऑडियो में संवाददाता टीपू सुल्तान और स्कूल संचालक के बीच बातचीत है. टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=aSMQtjoTal0

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भाजपा जिलाध्यक्ष टिकट देने के लिए दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहा (सुनें टेप)

घटना उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की है. BJP जिलाध्यक्ष जगदीश तिवारी ने एक व्यक्ति से टिकट दिलाने के बदले दो लाख रुपये रिश्वत मांगा था. घूस की उनकी बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया है. इसके बाद भाजपा ने जगदीश तिवारी को पद से हटा दिया.

भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश तिवारी को पदमुक्त कर उनकी जगह उदयन पालीवाल को प्रभारी जिलाध्यक्ष बनाया गया है. टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=0ZppDeDRRQs

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विज्ञापन के लिए दैनिक भास्कर का मार्केटिंग प्रतिनिधि धमका रहा है व्यापारी को (सुनिए टेप)

बड़े नेता, बड़े अफसर, बड़ी कंपनियां अगर खुलेआम वसूली, रिश्वतखोरी, उगाही करें तो उनके खिलाफ कार्रवाई एक लाख में एकाध मामलों में ही होती है, वह भी तब जब इनके बीच आपसी झगड़े हो जाएं. अन्यथा सब दोनों हाथ से संविधान, कानून और नैतिकता की धज्जियां उड़ाते हुए मुद्रा मोचन में लगे रहते हैं. इन डकैतों की सेहत पर असर इसलिए भी नहीं पड़ता क्योंकि पुलिस, कोर्ट और सिस्टम इनकी रक्षा में जुट जाता है, बचाने में जुट जाता है. ताजा मामला दैनिक भास्कर का है. इस अखबार के मार्केटिंग के लोग किस तरह व्यापारियों को धमकाते हैं, विज्ञापन के लिए, इसे नीचे दिए गए टेप वाले लिंक पर क्लिक करके सुना जा सकता है.

राजस्थान स्थित कोटा जिले के गुमानपुरा के एक व्यापारी को विज्ञापन के लिए दैनिक भास्कर का मार्केटिंग प्रतिनिधि धमका रहा है. वो खुद बोल रहा है कि दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका दोनों डाकू हैं. इसने विज्ञापन ना देने पर उल्टी खबर छापने की धमकी दी. इससे पता चलता है कि मीडिया वाले पैसे मिलने पर चुप रहते हैं और पैसे न दिए तो उल्टी खबर दिखाने लगते हैं. इसका एक सटीक उदहारण कुछ दिन पहले भी देखा जा चुका है. कोटा के मेयर महेश के नालंदा में चल रहे अवैध काम का कवरेज करने गए पत्रकारों को मेयर के लोगों ने बंदी बना लिया. इसकी FIR भी दर्ज़ है लेकिन अख़बार में यह खबर नहीं छपी क्योंकि विज्ञापन के माध्यम से पैसा फेककर मीडिया का मुँह बंद कर दिया गया था. अब आप बताओ इसे बिकाऊ मीडिया नहीं बोलोगे तो और क्या बोलोगे.

टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=vD73IgSceOo

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जानिए, कैसे ब्लैकमेल करते हैं ये दैनिक भास्कर वाले… (सुनें टेप) …रिपोर्टर ने संपादक के लिए प्राचार्य से मांगी LED

दैनिक भास्कर होशंगाबाद के सीनियर रिपोर्टर अभिषेक श्रोती ने यूनिट के संपादक अतुल गुप्ता के लिए रिश्वत में 70 हज़ार रुपये की LED मांगी है. रिपोर्टर ने यह LED ज़िले के शासकीय स्कूल पिपरिया के प्राचार्य से आगे खबर नहीं छापने और अभी तक छापी गई खबर में प्राचार्य सरयाम के विरुद हुई कार्रवाई को कलेक्टेर व जिला शिक्षा अधिकारी से फाड़कर फिकवाने के लिये मांगी है. यह खुलासा प्राचार्य द्वारा की गयी रिकॉर्डिंग में सामने आया है. रिपोर्टर द्वारा रिश्वत मांगने के बाद प्राचार्य ने इस रिकॉर्डिंग को सार्वजानिक की है.

प्राचार्य और रिपोर्टर की मोबाइल पर हुई करीब 12 मिनट की बातों में रिपोर्टर स्पस्ट शब्दों में प्राचार्य से कह रहा है कि मैंने आपकी खबर को 3 दिन से रुकवाकर रखा हुआ है. मैंने सामने वाले (संपादक) से कमिटमेंट कर रखा है और आप इसे पूरा नहीं कर रहे हो. आप अगर कमिटमेंट पूरा नहीं करोगे तो आपकी रिलीविंग कभी नही होंगी. साथ ही आपकी जाँच को कलेक्टर और डीईओ से बोलकर आप पर तत्काल कार्यवाही करवा दूंगा. वहीं बेबस प्राचार्य अपनी बीमारी का हवाला देकर रिपोर्टर से टाइम मांग रहा है. 

प्राचार्य ने इसकी शिकायत भास्कर प्रबंधन, कलेक्टर, स्थानीय मीडिया, डीईओ से भी की है लेकिन संपादक और रिपोर्टर पर कार्यवाही करने की बजाये सब के सब मामले को दबाने में लगे हुए हैं. इस मामले में दैनिक भास्कर होशंगाबाद के लोग यह कहते फिर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा उपर से फोन ही आयेगा, इससे आगे कुछ नही होगा क्योंकि उगाही का माल तो मालिकों तक भी जाता है. साथ ही भास्कर वालों की पूरी कोशिश है कि सारे मामले को रफा दफा कर दिया जाए.

भास्कर को पलीता लगाने की सोच चुके रिपोर्टर और संपादक की पहले भी कई बार भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है लेकिन प्रबन्धन ने सभी पर पर्दा डाल दिया है. कुछ महीने पहले भी शहर के कुछ स्थानीय लोगों ने लिखित में भास्कर प्रबन्धन को शिकायत कर बताया था कि कैसे अखबार से जुड़े लोग पैसे लेकर बड़ी बड़ी खबरों को रोक देता है. नगरपालिका से 2 लाख रुपये महीना बंधा हुआ है जिसका सबूत भी लोगों ने दिया था. इसके अलावा एक खबर रुकवाने के एवज में इनकी कार के चारों टॉयर बदलने की भी खूब चर्चा थी. लेकिन प्रबन्धन ने कार्यवाही नहीं की.

भास्कर की नेशनल HR हेड रचना कामरा ने भास्कर के सभी कर्मचारियों को पर्सनल पोर्टल पर एक नोटिस जारी कर कहा था कि यदि कोई भी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है या कंपनी की पालिसी के खिलाफ कोई भी काम करता है तो उसे तत्काल कंपनी से हटा दिया जायेगा. लेकिन होशंगाबाद यूनिट में ऐसा होता दिख नहीं रहा है. यहाँ के संपादक के इशारों पर सारे रिपोर्टर सभी विभाग की खबरों में जमकर तोड़ी करते हैं. ऐसा लगता है कि कंपनी के डायरेक्टरों ने संपादकों और रिपोर्टरों को जमकर उगाही की छूट दे रखी है और उसका हिस्सा मालिकों निदेशकों तक भी जाता है. बहरहाल अब देखना ये है कि प्राचार्य की यह रिश्वत वाली रिकॉर्डिंग कार्यवाही के लिए पर्याप्त सबूत के तौर पर भास्कर प्रबंधन मानता है या नहीं.

ये है टेप…

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

अगर आप उपरोक्त टेप न सुन पा रहे हों तो इसे डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं: Bhaskar Audio


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अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

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सुदर्शन न्यूज में काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने महेश का भांडा फोड़ दिया (सुनें टेप)

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आपको मैनेज किया था, फिर कैसे छप गई आपके अखबार में खबर (सुनें टेप)

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यह रहा जगेंद्र हत्याकांड के कातिल के फोन कॉल का ऑडियो सच, खुदकुशी का दावा सफेद झूठ

मुख्‍यमंत्री और उनकी पुलिस का कहना है कि जागेन्‍द्र सिंह दाह-हत्‍याकाण्‍ड की अभी जांच की जाएगी। लेकिन इसके पहले ही मैं आप मित्रों को सुना-दिखा रहा हूं कि किस तरह घेर कर मारा गया था जाबांज पत्रकार जागेन्‍द्र सिंह। मैं दे रहा हूं इससे जुड़े पुख्‍ता प्रमाण, जबकि हमारे मुख्‍यमंत्री ऐलान कर चुके हैं कि जांच के बाद ही किसी पर कोई कार्रवाई की जाएगी। पेश है उस रोंगटे खड़े कर देने वाले काण्‍ड के एक अभियुक्‍त की अपने एक परिचित से हुई बातचीत का ब्‍योरा—- 

एक परिचित:- हांय

अमित भदौरिया:- जो आप, हांय, पीतम को जा काम करके निपटाय द्यौ। 

एक परिचित:- आंय ?

अमित भदौरिया:- ठीक है, अभी तो खाली जे प्रोग्राम में लगे रहेंगे। कल इसको निपटाय द्यौ। बस, कल से लेकर परसों तक मिलकर। ठीक है ?

एक परिचित:- अच्‍छा अच्‍छा

अमित भदौरिया:- ठीक है

एक परिचित:- चलो ठीक है

अमित भदौरिया:- और कुछ मत करो

एक परिचित:- आंय आंय अांय ?

अमित भदौरिया:- पुलिस-वुलिस नहीं है, पुलिस नहीं है। ठीक है ?

एक परिचित:- ठीक है, तुम समझो ? 

अमित भदौरिया:- अभी हैं नोएडा में। जो करियो कि हमें हमें रखे धरो धोखे में। और हो गे। हमने अपनी मां कसम खायी है, आप से का कहें हम। ठीक है ? मतलब जे ना होनो चाहिये कि हमने अपनी मां कसम खायी है और मां की कसम खाकर कहते हैं। ठीक है ?

एक परिचित:- ठीक है

अमित भदौरिया:- हमने आपको बता दई। जे कि कल काम में लग गये, कपड़ा धोने में। अब निश्चिंत रहो, इस काम को मना ना करो। ठीक है ?

एक परिचित:- ठीक है ठीक है ठीक है

अमित भदौरिया:- जा भों—-वाले के। काण्‍ड और सूपड़ा साफ कराओ। ठीक है ?

एक परिचित:- ठीक है………………………………………………….( और फिर फोन कट जाता है )

सुन लिया आपने मुख्‍यमंत्री जी ! कि जागेन्‍द्र सिंह को लेकर जो भी सूचनाएं आपके पास हैं, बिलकुल गलत हैं।

यह है जागेन्‍द्र सिंह की हत्‍या का जाल बुनने वाली फोन-कॉल का लिप्‍यान्‍तरण, जिसमें जागेन्‍द्र सिहं को निपटा देने की साजिश की गयी थी।

जबकि आपकी पुलिस का दावा है कि जागेन्‍द्र सिंह ने आत्‍मदाह किया था ना ? 

लेकिन हकीकत यह है कि आपका यह दावा सरासर झूठ है। आपने इस मामले के अभियुक्‍तों को छुट्टा घूमने की खुली इजाजत दी दी ना ? नतीजा यह हुआ कि आपकी इसी पुलिस ने असल तथ्‍योंं-प्रमाणों की ओर से अपनी आंखें ही मूंद ली हैं। आपका खुला संरक्षण ही आपकी पुलिस के हौसले बढ़ाने के लिए पर्याप्‍त हो गया और इसके बाद पुलिस ने इस असली काण्‍ड की ऐसी की तैसी करते हुए नकली कहानी गढ ली। इतना ही नहीं, जागेन्‍द्र की मित्र शालिनी से भी यह कहला दिया कि जागेन्‍द्र सिंह ने आत्‍मदाह किया।

मेरे पास हैं प्रमाण। ठोस प्रमाण। 

इन प्रमाणों के आधार पर साबित कर सकता हूं कि जागेन्‍द्र सिंह ने हर्गिज आत्‍मदाह नहीं किया था। बल्कि हकीकत यह है कि उसकी हत्‍या की गयी थी।

कभी जागेन्‍द्र का शिष्‍य अमित कुमार भदौरिया पर जागेन्‍द्र ने मृत्‍यु-पूर्व बयान में आरोप लगाया है कि मंत्री राममूर्ति वर्मा की साजिश से पुलिस कोतवाल श्रीप्रकाश राय और अमित भदौरिया और गुफरान समेत अनेक अपराधियों ने उसे पहली जून को जिन्‍दा फूंका था। अब उसी अमित से पूछिये, वह बतायेगा कि जागेन्‍द्र सिंह के साथ उसने क्‍या किया था। आपकी पुलिस के संरक्षण में अमित फरार बताया जा रहा है। उससे पूछिये कि पिछली 29 मई-2015 यानी जागेन्‍द्र के दाह-हत्‍याकाण्‍ड के ठीक दो दिन पहले अमित ने किस से यह बातें की थीं, जिनका तस्‍करा मैंने ऊपर किया है।

जागेन्‍द्र सिंह के खिलाफ अमित भदौरिया ने 12 मई-15 शाम एक विवाद पर घटना के दो दिन बाद एक झूठी एफआईआर दर्ज करायी थी। इसमें शाहजहांपुर का कोतवाल श्रीप्रकाश राय, जो आपके चहेते मंत्री राममूर्ति वर्मा का खासमखास है, ने बाकायदा एक साजिश बुनी थी। राममूर्ति वर्मा ने कभी जागेन्‍द्र सिंह के शिष्‍य अमित भदौरिया को अपने पक्ष में तोड़ लिया था और कोतवाल श्रीप्रकाश सिंह आदि पुलिसवालों की मिलीभगत में जागेन्‍द्र की घेराबन्‍दी शुरू कर दी थी।

इस बातचीत में अमित ने साफ-साफ कह दिया था कि बस एक-दो दिन में ही काम-तमाम हो जाना है। अब सबसे अहम सवाल तो यह है कि आखिरकार कौन सा वह काम था, जिसे पूरा करने में अमित भदौरिया पुलिस की चिन्‍ता नहीं कर रहा था ? अमित किस का काम-तमाम करने की तैयारी कराना चाहता था ? आखिर वह क्‍या काम था जो इसी समय-अवधि में पूरा हो गया, और जागेन्‍द्र सिंह को जिन्‍दा जला दिया गया ?

मेरे पास अमित की एक बातचीत का भी ब्‍योरा है, जिसे अमित ने अपने एक मित्र से बातचीत में कुबूला है कि उसे पकड़ लिया गया है। यह ठीक उसी वक्‍त की फोन-कॉल का ब्‍योरा है, जब जागेन्‍द्र को पकड़ लिया गया है। इस फोन ब्‍योरा में अमित ने साफ-साफ कुबूल कर लिया है कि जागेन्‍द्र सिंह जल चुका है।

और मित्रों। अब मैं इस बातचीत को पुलिस को देने की तैयारी में हूं। 

आपका क्‍या ख्‍याल है मेरे दोस्‍त ?

कुमार सौवीर के एफबी वाल से

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टी न्‍यूज चैनल ने जारी किया ऑडियो टेप, आंध्रा की सियासत में भूचाल, राव पर रिपोर्ट, नायडू मोदी से मिलेंगे

नोट फॉर वोट की आंच ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को लपेटे में लिया है। एक ऑडियो टेप में दावा किया गया है कि वोट के बदले नोट केस में पकड़े गए टीडीपी विधायक रेवंत रेड्डी को पूरी तरह से सीएम नायडू का समर्थन प्राप्त था। तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस के दफ्तर से चलने वाले चैनल टी न्‍यूज ने रविवार को एक ऑडियो टेप जारी किया। चैनल का दावा है कि इसमें नायडू मनोनीत विधायक एल्विस स्टीफन्सन से ‘कमिटमेंट’ की बात कर रहे हैं। उनका खयाल रखने का भरोसा भी दिला रहे हैं। यह बातचीत तेलंगाना विधान परिषद की 5 सीटों पर हुए हालिया चुनाव के संदर्भ में हुई थी। नायडू के एडवाइजर पी. प्रभाकर का कहना है कि यह ऑडियो फर्जी है। नायडू के दो विधायकों ने अवैध फोन टैपिंग का आरोप लगाते हुए सोमवार को तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव के खिलाफ विजयवाड़ा में एफआईआर भी दर्ज कराई। 

नायडू नौ जून को प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर फोन टैप कराए जाने के खिलाफ शिकायत करेंगे। इस ऑडियो टेप में एक व्यक्ति दूसरे शख्स को फोन लगाता है और कहता है कि ‘बाबू गारू’ आपसे बात करना चाहते हैं। चैनल का दावा है कि जिन्हें फोन किया गया है, वे एलविस स्टीफन्सन हैं। वहीं, बाबू गारू के मायने सीएम चंद्रबाबू नायडू से हैं। जब ‘बाबू गारू’ फोन पर आते हैं तो स्टीफन्सन से उनके हालचाल पूछते हैं। फिर कहते हैं- ‘मुझे ब्रीफ किया गया है। मैं आपके साथ हूं, आप फिक्र न करें। हर तरह की जरूरत के लिए मैं आपके साथ हूं। आपसे जो कुछ कहा गया है, उसका सम्मान किया गया है। आप अपने हिसाब से फैसला करें। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। यह हमारा कमिटमेंट है। हम मिलकर काम करेंगे।’ चैनल का कहना है कि नायडू चाहते थे कि स्टीफन्सन टीडीपी प्रत्याशी के पक्ष में वोटिंग करें।

इस ऑडियो टेप से पहले तेलंगाना के एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक और ऑडियो-वीडियो टेप जारी किया था। उस टेप में टीडीपी विधायक रेड्डी बाबू गुरु’ के तौर पर नायडू का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि आंध्र प्रदेश के सीएम ने उन्हें इस काम के लिए नियुक्त किया है। बता दें कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने टीडीपी के विधायक रेवानाथ रेड्डी को मनोनीत विधायक एलविस स्टीफेन्सन को रिश्वत देने के मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि स्टीफन्सन के वोट बदले उन्हें पांच करोड़ रुपए देने की डील तय हुई थी। इसमें से 50 लाख रुपए दिए जा रहे थे। उसी दौरान टीडीपी विधायक को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

नायडू पर अारोप लगने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, ”कैश फॉर वोट को लेकर यदि चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ आए ऑडियो टेप में सच्चाई है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।” कैश फॉर वोट मामले में आंध्र और तेलंगाना के सीएम एक दूसरे को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि राव के इशारे पर ही नायडू के खिलाफ टेप जारी किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि जो इस मामले में शामिल होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। राव दो बार राज्यपाल से जाकर मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उन्हें नायडू के खिलाफ जांच की मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलने पर एसीबी नायडू को समन भेजेगी।

इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 की धारा 5 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को फोन टैप कराने का अधिकार है। लेकिन टैपिंग सिर्फ देशहित में, आपात परिस्थितियों में या जन सुरक्षा के मकसद से ही होनी चाहिए। वहीं इंडियन टेलीग्राफ रूल्स 1951 के नियम 419 ए के मुताबिक राज्यों में गृह सचिव को फोन टैपिंग के आदेश देने का अधिकार है। गृह सचिव के आदेश की कैबिनेट सचिव, कानून सचिव और टेलीकॉम सचिव द्वारा समीक्षा करना जरूरी है। राव के खिलाफ अगर जांच हुई तो यह मुद्दा उठेगा कि उन्होंने किस प्रावधान के तहत दूसरे राज्य के सीएम की बातचीत टैप कराने के आदेश दिए थे?

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