दैनिक जागरण के फोटोग्राफर का पैसा लेते हो गया स्टिंग, देखें वीडियो

सबकी तस्वीरें खींचने वाले और स्टिंग करने वाले फोटोग्राफर का ही स्टिंग हो गया है. ये फोटोग्राफर दैनिक जागरण में कार्यरत है. नाम है जीतू सागर. दैनिक जागरण, गजरौला का छायाकार जीतू सागर बिजली बिल ठीक कराने के नाम पर रिश्वत लेते हुआ वीडियो में कैद. आरोप है कि बिजली बिल का भुगतान कराने के नाम पर 24000 रुपये की नगदी वसूली गई. Continue reading

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एक्सपोज इंडिया और अमर भारती का संयुक्त स्टिंग ऑपरेशन, चार राजस्व कर्मी निलंबित, मुकदमा दर्ज़

अपर मुख्य सचिव राजस्व चंचल तिवारी ने एक्सपोज़ इंडिया के स्टिंग को देखते ही फौरन एक्शन लिया और उन्होंने तत्काल बुलंदशहर के डीएम को निर्देश दिया कि घूसखोर कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करें। सूबे की राजधानी लखनऊ में बैठे शासन के अधिकारियों तक जब एक्सपोज इंडिया के स्टिंग की खबर पहुंची तो महकमे में हड़कंप मच गया। Continue reading

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‘जी हिंदुस्तान’ वालों ने कर दिया था ‘कोबरापोस्ट’ के पुष्प शर्मा का रिवर्स स्टिंग!

हाल ही में कोबरापोस्ट ने मीडिया वालों का स्टिंग दिखाया था. इस स्टिंग से सबको पता चला कि देश के ज्यादातर मीडिया संस्थान पैसे लेकर झूठी खबरें चलाने को तैयार हो गए. उस स्टिंग ऑपरेशन में यह भी दिखा कि मीडिया संस्थान पैसे लेकर प्रो हिंदुत्व की खबरें चलाने के लिए राजी थे. कोबरा पोस्ट के इस स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम ने जी ग्रुप के चैनल ‘जी हिंदुस्तान’ का भी स्टिंग किया लेकिन वो लोग शायद भांप गए और खुद को बचाते हुए ‘कोबरा पोस्ट’ के रिपोर्टर का ही रिवर्स स्टिंग कर डाला.  Continue reading

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रिपब्लिक टीवी के स्टिंग में भाजपा नंगा… करणी सेना को सरकारों ने दे रखी है हिंसा की खुली छूट

Girish Malviya : लीजिए वही हकीकत सामने आयी है जिसकी आशंका थी… ‘रिपब्लिक टीवी’ द्वारा किये गए स्टिंग में भाजपा के विधायक और महाराष्ट्र विधानसभा में मुख्य सचेतक राज पुरोहित ने कबूला है कि करणी सेना को उन्हीं की सरकार ने खुला छोड़ दिया, ताकि वे लोग राजस्थान में चुनाव जीत सकें… वे कहते हैं कि “सरकार उन्हें नुकसान पहुंचाने के मूड में नहीं है। अगर वाहन फूंके जाते हैं तो ये अच्छा है। भाजपा की अपनी मजबूरी है। यहां समर्थन का सवाल नहीं है। यह मजबूरी है। भाजपा के पास इसके अलावा क्या विकल्प है। वह उनके खिलाफ भी तो नहीं जा सकती? बड़े स्तर पर हिंदू लोग उन्हें समर्थन दे रहे हैं।”

आगे श्रीमान राज पुरोहित जी बोलते हैं कि “कई बार कुछ चीजें फैशनेबल बन जाती हैं। छह महीने पहले कौन जानता था करणी सेना को? लेकिन उन्होंने मुद्दा उठाया। 24-25 राजपूत विधायकों में से एक भी उनके साथ नहीं था। मगर जब हिंसा को जज्बातों से जोड़ा गया, तो आप जानते ही हैं कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं? यह राजनीति है। जज्बातों के आगे सारे कारण खो गए। मेरे नाम से मत छापना ये बात। यह राजनीति है।”

स्टिंग के आखिरी हिस्से में यह पूछे जाने पर कि यह मसला राजस्थान के चुनाव पर असर डालेगा? पुरोहित इस पर कहते हैं, “बिल्कुल। वे भाजपा के साथ जाएंगे। कारण यह है कि यह धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा है। यह दक्षिणपंथी विचारधारा से मेल खाता है और भाजपा की सोच दक्षिणपंथी है।”

क्या अब भी किसी को शक रह गया है कि इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर किसने खड़ा कर हिंसा ओर दहशतगर्दी को अपना पूरा बैकअप दिया है? शर्म आना चाहिए भाजपा को…

युवा पत्रकार गिरीश मालवीय की एफबी वॉल से.

Abhishek Srivastava : रिपब्लिक चैनल ने दुनिया का पहला मौलिक स्टिंग किया है। जिसे काटा है, उसे मीठा-मीठा दर्द हो रिया है कि चलो, कम से कम जनता को कन्फर्म तो हुआ कि करणी सेना के सब किये धरे के पीछे कमल का फूल है। अब चैन से सोएंगे, राजस्थान तो अपना हुआ! अब देखिएगा, गिरफ्तारी की स्पीड! राजपूतों का पहले उनके सहोदर भंसाली ने काटा, अब बीजेपी काटेगी। सारी वीरता गई ईवीएम में!

Amitaabh Srivastava : दो चैनलों के ओपिनियन पोल के मुताबिक देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार, पार्टी और उनकी नीतियों पर फ़िदा है। पीएम का इकबाल बुलंद है और करणी सेना का हौसला। अब अगर कुछ हिंसा-विंसा हो भी जाय हिंदू हित के नाम पर तो पिनपिनाइये मत। लोग खुश हैं- आल इज वेल।

वरिष्ठ पत्रकार द्वय अभिषेक श्रीवास्तव और अमिताभ श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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यूपी की एक जेल के भीतर की रीयल जिंदगी देखें… क्या कुछ नहीं होता यहां… देखें वीडियो

झांसी जेल में सजा काट चुके कुछ कैदियों ने अंदर बनाए गए वीडियो को रिपोर्टर मधुर यादव को सौंपा…..  झांसी के पत्रकार मधुर यादव  ने जोरदार खुलासा किया है. उन्होंने झांसी की जेल के भीतर के रीयल फुटेज पब्लिक डोमन में लेकर आए हैं. इन फुटेज को देखने से पता चलता है कि जेल के भीतर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वीडियो से साफ जाहिर है कि जेल के अंदर दुकानें सजती हैं जहां कैदियों को जिला कारगार प्रशासन की मदद से ऊंचे दामों में सामान बेचा जाता है.

इन दुकानों पर बीड़ी सिगरेट, गुटखा, मिठाईयां और कच्ची शराब मिलती है. जेल के अंदर कैदियों को मोबाइल फोन ले जाने की छूट दी जाती है. झांसी जेल में सजा काट चुके कई कैदियों ने सजा के दौरान जेल के अंदर की हालत का मोबाइल पर वीडियो बनाते हुए स्टिंग कर लिया. झांसी जेल से सजा काट चुके कैदियों ने बाहर आकर स्टिंग का वीडियो रिपोर्टर मधुर यादव को सौंप दिया. इन भूतपूर्व कैदियों का कहना है कि जेल में ऐसा कोई अवैध काम नहीं है जिसे न किया जाता हो.

कैदियों द्वारा दिये गये वीडियो को देखने से पता चलता है कि जेल के अंदर जलेबी, शराब, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट,  सब्जी आदि धड़ल्ले से बिकती है और इनकी कीमत पहले से ही तय रहती है. हर रोज जेल प्रशासन को इस व्यापार से 1 लाख रुपए से ऊपर की कमाई होती है. जेलर कैदियों को उनकी काबिलियत के हिसाब से काम देता है. पूरी जेल को पुलिस नहीं बल्कि फिल्मों की तरह राइटर और लंबरदार चलाते हैं. इनकी संख्या करीब 40 के आस-पास है. हर बैरिक में 2 राइटर और लंबरदार को रखा जाता है. 

राइटर एक प्रकार से आला अधिकारी के पीए का काम करते हैं और लंबरदार के पास एक डंडा होता है जो पूरी जेल में घूम-घूम कर कमजोर कैदियों पर अत्याचार करता है. झांसी जेल में लगभग 1500 कैदी हैं जबकि यहां 470 कैदी रखने की ही व्यवस्था है. जेल के अंदर हाई क्वालिटी मोबाइल से लेकर कैदियों के पास सारे ऐश और आराम के समान होते हैं.

कैदी पसंद का खुद खाना खुद बनाते हैं

जो ज्यादा पैसे वाले होते हैं उनके लिए तो अंदर ही खाने की व्यवस्था हो जाती है। लेकिन मीडियम क्लास के कैदी जेल से मिलने वाले खाने में रोटियां ज्यादा लेते हैं। फिर उन्हें सुखाकर ईंधन के काम में लाते हैं। पूरी जेल में अलग-अलग जगह कैदी अपनी पसंद का खाना बनाते हुए दिख जाएंगे। जेल के अंदर 150 रुपए किलो के हिसाब से जलेबी मिल जाती है और बालूशाही का एक पीस 10 रुपए का मिलता है। इसकी कीमत जेलर तय करता है।

जन्म दिन पर बाहर से आता है केक

कैदी पैसे देने में सक्षम है तो उसके जन्मदिन पर बाकायदा बाहर से केक और दूसरे सामान मंगाए जाते हैं। इसकी उन्हें मुंह मांगी कीमत देनी पड़ती है। पूरी जेल में एक बिजनेस की तरह नेटवर्क चलता है। यदि कोई नया कैदी आता है तो उससे मशक्कत न कराने के नाम पर 300 रुपए वसूले जाते हैं। यदि कैदी पैसे वाला है तो 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक मशक्कत न कराने के नाम पर ले लिए जाते हैं। कैदी जब जेल के अंदर पैसे लेकर जाते हैं तो उनसे 10 पर्सेंट कमीशन वसूला जाता है। आरोप है कि ये सब सुपरिटेंडेंट राजीव शुक्ला, जेलर कैलाश चंद्र और डिप्टी जेलर संदीप भास्कर के इशारे पर होता है।

जेल के अंदर इन कैदियों का है वर्चस्व

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का झांसी जेल में जलवा है. जेल प्रशासन के संरक्षण में मुन्ना बजरंगी के गुर्गे आनंद लेते हैं.  जेल के अंदर एक सत्येंद्र है। यह गरौठा थानाक्षेत्र का रहने वाला है। मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। यह सुपरिंटेंडेंट का राइटर है। इसकी बैरक में 56 इंच की एलसीडी टीवी लगी हुई है। अपने पास गलैक्सी ए5 मोबाइल रखता है। यह जेल के अंदर कैंटीन चलवाता है। इसका मंथली इनकम 50-60 हजार रुपए महीने है। कैंटीन में एक लाख रुपए की रोज की बिक्री है।

गोलू नाम का युवक भी जेल में बंद है। ये मऊरानीपुर थानाक्षेत्र का रहने वाला है। मर्डर केस में आजीवन सजा काट रहा है। इसका काम है कैदियों को उनके रिश्तेदारों से मिलाई कराना और पर हेड 20 रुपए उनसे लेना। इसमें से वो खुद 5 रुपए रखता है, बाकी 15 रुपए जेलर के पास जाते हैं। जेल में बंद जितेंद्र मर्डर केस में आजीवन कारावास काट रहा है। इसके पास खाद्य सामग्री का चार्ज रहता है। यह अपने नेटवर्क द्वारा कैदियों के लिए आई सरकारी सामग्री को बाहर मार्केट में बिकवा देता है। इसका कमीशन इससे लेकर जेल प्रशासन तक पहुंचता है। जेल में बंद छोटे श्रीवास मर्डर केस में आजीवन सजा काट रहा है। इसका काम है जेल के अंदर जुआ खिलवाना और ब्याज पर कैदियों को पैसा बांटना। जेल में बंद कौशल रावत जेलर का राइटर है। यह सिर्फ जेलर का आदेश मानता है। जेलर के इशारे पर कैदियों को पीटता है।

इन वीडियोज और आरोपों के बारे में झांसी जिला कारागार के सुपरिटेंडेंट राजीव शुक्ल का कहना है कि उनके संज्ञान में वीडियो आया है. इसकी जांच कराई जा रही है. पता किया जा रहा है कि यह वीडियो कब का है और किन परिस्थितियों में बनाया गया है. यह पुष्टि हो जायेगी, तभी आगे कुछ कह पाना ठीक होगा.

देखें झांसी जेल के भीतर का हाल….

झांसी से मधुर यादव की रिपोर्ट. संपर्क : 8853719246 या madhuryadav376@gmail.com

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गुमला जिले में एक टीवी पत्रकार कर रहा है उगाही (सुनें टेप)

गुमला जिले में एक बड़े खबरिया चैनल के लोकल पत्रकार द्वारा लगातार पैसे की वसूली की बात सामने आ रही है। यह पत्रकार सरकारी स्कूलों में जा कर वहां के शिक्षकों को खबर चला देने की धमकी देकर रकम वसूल रहा है। एक स्कूल में जा कर इस पत्रकार ने अपने साथी पत्रकार के साथ मिल कर करीब 30 हजार रुपये की मांग की। पैसे न देने पर अंजाम भुगत लेने की धमकी भी दी। इस ऑडियो टेप में धमकी की बात साफ सुनाई दे रही है।

बिहार-झारखंड के एक प्रतिष्ठित चैनल के पत्रकार के द्वारा इस तरह की वसूली की सूचना मिलने से चैनल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई है। इससे पहले भी इस पत्रकार पर एक निजी विद्यालय के द्वारा पैसे की मांग करने को लेकर न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया था। इसके बाद किसी तरह मामले में समझौता कराया गया। टेप सुनने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें…

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जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।

अब एमडी आशुतोष मोहन से जब उनके मोबाइल नंबर 9893024599 पर पैसे या पेपर की मांग की जाती है तो वो गाली गलौज कर असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैं इस ऑडियो को मीडिया के सभी लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ ताकि और लोग इन चोरों के झाँसे में ना आयें। सभी लोग सुनिए कि दैनिक जागरण जैसे न्यूज़ पेपर का मैनेजिंग डायरेक्टर किस भाषा में बात करता है। टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/2B3lSdN8y_A

अवधेश कुमार
awadhesh.vnews@gmail.com
छतरपुर
मध्य प्रदेश

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ब्लैकमेलिंग के तीन लाख रुपये देने से मना करने पर पत्रकार ने धमकाया- अब तो तेरे से पांच लाख लूंगा (सुनें टेप)

Yashwant Singh :  ये पत्रकार है या माफिया…  सच कहूं तो जब पहली बार ये टेप सुना तो मैं खुद सहम गया. कोई पत्रकार इतना ढीठ / इतना आपराधिक प्रवृत्ति का कैसे हो सकता है. पहली बार ऐसा कोई पत्रकार सुन रहा हूं जो तीन लाख रुपये की रंगदारी / ब्लैकमेलिंग न देने वाले से कह रहा है कि अब तो पांच लाख लूंगा…

बाप रे… लगने लगा है कि पत्रकारिता अब माफियागिरी में तब्दील होने लगी है… ये टेप मेरे ह्वाट्सअप पर किसी ने भेजा है… किस जगह का है, कौन पत्रकार है, यह अभी पता नहीं चल सका है… कृपया किसी को मालूम हो तो मेरी मदद करे ताकि इस भेड़िए की शिनाख्त हो सके और इस पर थूका जा सके…

टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/cQEJ7vH6YkI

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Pankaj Gupta यशवंत भाई ये कोई नई बात नही है हर जिले हर कस्बे में इस तरह के लोग मिल जायेंगे जो सिर्फ और सिर्फ ब्लैक मेलिंग ही करते है अफ़सोस तो इस बात पर होता है कि बड़े बड़े बैनर चाहे वो प्रिंट से हो या इलेक्ट्रॉनिक से उन्हें अपने यहाँ स्थान दिए हुए है

Mahabir Singh Khatri ये तो छोटा है, 100 करोड़ वाले का क्या हुआ, अब supplements or antibiotic सॆ काम नहीं चलेगा, surgery करनी पड़ेगी.

Syed Mazhar Husain यशवंत भाई ऐसे माफिया किस्म के लोग जिन्होंने पत्रकारिता का चोला ओढ़ रक्खा है और जिनका काम ब्लैकमेलिंग के सिवा कुछ भी नहीं है बहुतायत है

Virendra Pandey मजहर चाचा, आपके शहर ऐसा कुछ ज्यादा ही है।

Syed Mazhar Husain बिलकुल आप भी जानते फिर लिख भेजिए यशवंत भाई को मैं तो दूर हु वरना लिखता ज़रूर

Yashwant Singh बात लिखने से सिर्फ नहीं बनेगी. बिना प्रमाण कोई भी किसी लिखे को खारिज कर मानहानि बता सकता है. इनका इलाज ऐसे टेप ही हैं. स्टिंग कराइए.

Virendra Pandey ओके बॉस, मैं आपको भेजूंगा स्टिंग क्लिप ।

Vivek Dutt Mathuria कुछ अपवाद स्वरूप भले लोगों की बात छोड़ दी जाए तो पत्रकारिता दलाली के लिए बेहतर पेशा साबित हो रहा है। नौकरशाही दलाल पत्रकारों को अपने संसाधन के रूप में उपयोग करना सीख गई है…. पूरा सूचनातंत्र उनकी मुट्ठी में है। दलाल पत्रकार जनद्रोही, लोकतंत्रद्रोही और संविधानद्रोही हैं जो देश समाज को लूटने वाले भ्रष्ट तंत्र के जड़ खरीद गुलाम है…. उनके कुकृत्यों से कोई मरे उनका कोई लेना-देना नहीं…बस दलाली न मर जाए

Singhasan Chauhan वाह रे पत्रकारिता …..

Neelesh Misra My god.

Sanjaya Kumar Singh इससे तो ‘पत्रकारिता’ सीखनी पड़ेगी। उधार सीखाए तो कमाएगा। लोग कमाकर डबल चुकाएंगे। तीन लाख देने में आना-कानी करने पर सीधा पांच लाख कर दिया। बता रहा है कि पुलिस प्रशासन सब पत्रकारों के अंडर में काम करते हैं – बड़ा वाला पत्रकार है ये तो …

Shashank Mishra जहाँ तक मेरा मानना है ये पत्रकार नहीं हो सकता ….

Neeraj Sharma Kon patrkar hai..

Ganesh Dubey Sahaj हर घर रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊं

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यूपी के कैबिनेट मंत्री ने फोन पर गाली दी तो भड़क उठा दरोगा (सुनें टेप)

यूपी में जंगलराज का आलम ये है कि एक तरफ अफसर बेलगाम हैं तो दूसरी ओर मंत्री. हर कोई अपने से नीचे वाले को गरियाने, सताने में लगा है. ताजा मामला यूपी के कैबिनेट मंत्री राममूर्ति वर्मा से जुड़ा है जिन्होंने फोन पर एक दरोगा को मां की गाली दे दी तो भड़के दरोगा ने पूरी शिद्दत से न सिर्फ प्रतिरोध दर्ज कराया बल्कि मंत्री जी को गाली न देने की नसीहत तक दे दी.

मंत्री ने जब देख लेने की धमकी दी तो दरोगा ने कह दिया कि वह चाहें तो खुशी से किसी दूसरे जनपद में उसका ट्रांसफर करा दें, उसे कोई दिक्कत नहीं.  दरोगा का नाम संजय यति है जो अम्बेडकरनगर के इब्राहिमपुर थाने पर तैनात है. मंत्री और दरोगा संवाद सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=7Ky7HhbqBHI

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”Zee न्यूज़ के फ़र्ज़ी रिपोर्टर ने मुझे धमकी दी, सुनें टेप”

सेवा में
श्रीमान्
संपादक भड़ास4मीडिया / ज़ी न्यूज़ /  वासिंद्र मिश्रा जी / न्यूज़ नेशन चैनल

महोदय,

मैं अजय कुमार पाण्डेय S/O श्री सुरेन्द् नाथ पाण्डेय, सलेमपुर भुलनिया, शाहगंज, जौनपुर ज़िले का मूल निवासी हूँ। Zee न्यूज़ और news nation के नाम पर जौनपुर जिले के शाहगंज में कुछ फ़र्ज़ी पत्रकार तमाम लोगो,स्टिकर, बैनर लगाकर जनता और अधिकारियो को गुमराह करते है। जो जिले में नियुक्त रिपोर्टेरो की जानकारी और उनकी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में भी है, जहाँ वे चैनल के नाम के साथ तमाम फ़ोटो बैनर बनवाकर पोस्ट करते रहते भी है।

चंचल जायसवाल द्वारा अपने आपको फ़र्ज़ी शाहगंज पत्रकार संघ का अध्यक्ष और ज़ी न्यूज़ का रिपोर्टर बताया जाता है । आपको बताना चाहूँगा चंचल जायसवाल बैंक ओफ़ बरोडा शाहगंज शाखा से लोन लिया…जिसे जमा न कर पाने पर..बैंक ने पुरे शाहगंज में बड़े बकायादारों का नाम लौडस्पीकर में announce करवाया । इसी बदनामी का बदला लेने के लिए चंचल जायसवाल ने फेसबुक पर मेनेजर के खिलाफ एक फर्जी खबर पोस्ट कर दी। जब महिला ने बैंक मेनेजर को चप्पलो से पीटा….शीर्षक से। जब बैंक मेनेजर ने मनिहानि की बात कही तो जाकर चंचल जैसवाल ने बैंक मेनेजर से लिखित रूप से माफ़ी मांग ली.. । फर्जी पत्रकार की जब यह बात पत्रकारो को पता चली तो लोगो ने इसकी आलोचना की।

हम भी उनके पोस्ट को शेयर करके पत्रकारिता को कलंकित करने वाला उनका सारा राज खोल दिए…वे अपनी बाइक पर ज़ी न्यूज़ का लोगो लगाकर फेसबुक पर भी भौकाल के लिए पोस्ट करते रहे। कई बार हमने ज़िले में नियुक्त zee न्यूज़ के रिपोर्टर अजीत सिंह से बात की पर उनकी मिलीभगत से यह मामला चलता रहा । फेसबुक देखिए जहाँ फर्जी रिपोर्टरो की फ़ोटो भी है। हमने जनता को जागरूक करने और प्रशासन से इनके फर्ज़ीवाड़े लिए करवाई करने के लिए भी कहा है।

आज न्यूज़ नेशन के एक ऐसे फ़र्ज़ी रिपोर्टर का कारनाम सामने आया जो चौराहो रेलवे स्टेशनों पर धलल्ले से अपना बड़ा बड़ा बैनर लगवाये मिले। फेसबुक पर किसी ने पोस्ट करके हमे टैग किया…एक मित्र द्वारा पूंछा गया क्या ये हकीकत में है हमने कहा नही। इसके बाद हमने अपने फेसबूक पर एक आवश्यक सुचना नाम से इस तरह के फर्जीवाड़े से सचेत रहने के लिए जनता  से कहा। साथ ही डीएम , एसपी जौनपुर से भी निवेदन किया ऐसे भ्रामक लोगो के खिलाफ कारवाही करने का कास्ट करे। जिससे क्रोधित होकर चंचल जैसवाल ने हमे 2 बार फोन करके हमारे नम्बर 9453866464 पर चंचल ने अपने नम्बर 8858810101 से फ़र्ज़ी मुकदमो में फंसाने की धमकी दी।

श्रीमान् जी आपसे निवेदन है की हमारी बात को आप Zee news और news nation चैनल तक पहुँचाने के साथ ही…ऐसे फर्जीवाड़े के खिलाफ उठाये गए हमारे कदम में सहयोग करे। हमने तत्काल जौनपुर डीएम, एसपी,और लखनऊ के डीजीपी के व्हाट्सएप्प पर एप्लीकेशन भेजकर पुरे मामले से अवगत करा दिया है। कृपया मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करे ताकि ….ऐसे फर्जी लोगो द्वारा मुझे और मेरे परिवार को किसी फर्जी मामले में फंसाकर परेशांन न किया जाये। आप सभी की अति कृपा होगी।

आपको धमकी का दोनों ऑडियो भेज रहा हूँ कृपया इसे सार्वजानिक करके……मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करें…

टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें :

call recording one

call recording two

चंचल जैसवाल की शाहगंज कोतवाली में अच्छी पकड़ के चलते उनके खिलाफ कोतवाली में कोई भी कारवाही मेरे द्वारा करवा पाना नामुमकिन है।। ऑडियो रिकार्डिंग में चंचल खुद कह रहे है इसके पहले हमने प्रीतम सिंह पत्रकार के ऊपर मुकदमा दर्ज करवाके फाइनल रिपोर्ट भी लगवा दी है। चंचल जायसवाल द्वारा बैंक मेनेजर को लिखा गया सुलहनामा भी संलग्न है। ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन भी अपने – अपने नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े पर ध्यान देने का कष्ट करे । ज़िले वाले लोग पैसे लेकर जनता को लूटने के लिए ऐसे लोगो को बढ़ावा देते है। यदि ऐसा नही है तो ज़िले में नियुक्त पत्रकार इनकी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में होते हुए भी इनके फर्जीवाड़े पर ध्यान क्यों नही देता है.

धन्यवाद

याचिकाकर्ता

अजय पाण्डेय

पत्रकार
शाहगंज, जौंनपुर ।
Ajay Pandey
Jaunpur (U.P)
Mobile   :  9453-86-6464 , 9454-86-6464
jnp.ajaypandey@gmail.com

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मीडिया में आए नए लोगों के लिए स्टिंग और ब्लैकमेलिंग वाली पत्रकारिता बन गई है मजबूरी!

Sanjaya Kumar Singh : नए पत्रकारों के लिए क्या करें, क्या नहीं… जानना जरूरी… फरीदाबाद में पत्रकार पूजा तिवारी की मौत के मामले में कहा जा रहा है कि ब्लैकमेलिंग का आरोप लगने के बाद वह अवसाद में थी और इसीलिए उसने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या कर लेने से ब्लैकमेलिंग का मामला कम नहीं होता पर जिस ढंग से उसके अलग-थलग पड़ जाने के मामले सामने आ रहे हैं उसमें क्या यह जरूरी नहीं है कि मीडिया संस्थान स्टिंग (जोखिम वाली रिपोर्टिंग) करने करवाने के बारे में अपने नियम बनाए और घोषित करे। क्या इसमें सरकार और समाज की कोई भूमिका नहीं है। अव्वल तो मेरा मानना है कि गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 ही बेजरूरत है और एक तरफ इसका अपेक्षित लाभ नजर नहीं आ रहा है तो दूसरी तरफ इसके दुरुपयोग के कई मामले हैं।

ऐसे कुछ और कानून हैं जिनका उपयोग कम, दुरुपयोग ज्यादा होता है। इसलिए नए पत्रकारों को ऐसे मामलों में काम करने से पूर्व सतर्क रहना चाहिए और पढ़ाई के दौरान उन्हें इन बातों की भी जानकारी दी जानी चाहिए। पर पत्रकारिता के धंधे में पैसे नहीं होने के कारण जो लोग पत्रकारिता पढ़ाकर अपना परिवार चला रहे हैं, वे इन बुराइयों को क्योंकर बताने लगे। इसका नतीजा यह है कि पत्रकारिता ‘पढ़’ कर इस पेशे में आने वालों को भी इस पेशे की बुराइयों, खतरों और जोखिमों की जानकारी लगभग नहीं होती है। निश्चित रूप से इसका कारण यह है कि पत्रकारिता का कोई निश्चित पाठ्यक्रम ही निर्धारित नहीं है। इसके नुकसान ही हैं। पर नुकसान झेलने वाला इस धंधे में फंसने के बाद पुराने लोगों की नाराजगी नहीं लेना चाहेगा और पुराने लोग अपने धंधे का नुकसान क्यों करें। वह भी तब जब कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में नए आने वाले पत्रकार दिशाहीन और लक्ष्य हीन हैं। पत्रकारिता से समाज सुधारने के सपने लेकर इस पेशे में आया युवा समाज की बुराइयों का शिकार हो जाए यह कम अफसोसनाक नहीं है।

मेरा मानना है कि मीडिया को जानने वाले पुराने लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे नए पत्रकारों के लिए – क्या करें और क्या नहीं तैयार करें जिसमें उन्हें ऐसी स्टोरी करने से बचने की सलाह दी जानी चाहिए। हो सकता है पूजा से यह स्टोरी वसूली के लिए ही कराई गई हो और उसका उपयोग किया गया हो। यह अलग बात है कि कामयाबी नहीं मिली और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा या उसकी हत्या कर दी गई। भविष्य में पूजा जैसों को इससे बचाने के लिए यह काम कैसे किया जा सकता है, इस पर विचार होना चाहिए। पत्रकारिता की पढ़ाई कराने वाले कुकरमुत्ते की तरह उग आए मीडिया शिक्षण संस्थान लाखों रुपए की फीस लेते हैं जबकि शुरुआती नौकरी 10 हजार रुपए महीने की भी मुश्किल से मिलती है। ऐसे में नए लोगों के लिए स्टिंग और ब्लैकमेलिंग वाली पत्रकारिता बहुत आसान और मजबूरी भी है। खासकर तब जब मीडिया संस्थानों पर भी ऐसा करने का आरोप हो। इसमें कौन किसका उपयोग करेगा और कौन फंस जाएगा यह सुनिश्चित करना वैसे भी मुश्किल है।

अंशकालिक संवाददाता से स्टिंग कराने में मीडिया संस्थान को लाभ ही लाभ है जबकि संवाददाता को अक्सर नाम या श्रेय भी नहीं मिलता है। स्टोरी हिट होती है तो चैनल का नाम होता है। नहीं चली या उसमें खामियां हों तो संवाददाता बदनाम होता है। कोई एफआईआर हो जाए, जिसके खिलाफ स्टोरी की जाए, वह मोर्चा खोल ले तो मीडिया संस्थान हाथ झाड़ ले और सीधे कह दे कि संबंधित व्यक्ति हमारा संवाददाता ही नहीं है। कोई खतरा जोखिम हो तो उसकी भरपाई नहीं ही होनी है। दूसरी ओर, मीडिया में स्टिंग का उपयोग खूब हो रहा है। जो प्रसारित हो रहे हैं वही कम नहीं हैं, जिन्हें प्रसारित नहीं करके सौदा कर लिया गया, उसकी संख्या भी कम नहीं होगी।

इसलिए जरूरी है कि मीडिया में नए आने वालों को पूरे मामले की जानकारी दी जाए। भावी पीढ़ी के लिए कुछ करना जरूरी है। मीडिया में काम करते हुए कई बार मनुष्य की संवेदनाएं वैसे भी कम हो जाती हैं। ऐसे में मीडिया मालिकों को अपने कर्मचारियों के मरने, बीमार होने और अवसाद में चले जाने की चिन्ता नहीं है तो यह काम समाज को करना होगा। समाज अभी तक मीडिया ट्रायल से ही परेशान है पर अभी की स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री भी मीडिया ट्रायल के शिकार हैं। बात-बात पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री अपनी डिग्री के मामले में चुप हैं तो दूसरी ओर, तरह-तरह की खबरें छप रही हैं। भिन्न कारणों से प्रधानमंत्री को इसकी परवाह नहीं है तो आम आदमी परवाह करके भी क्या कर पाएगा। यह भी विचारणीय है।

जनसत्ता अखबार में लंबे समय तक वरिष्ठ पद पर रहे वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से. इस स्टेटस पर पत्रकार प्रतिमा का पठनीय कमेंट इस प्रकार है….

Pratima Rakesh देहरादून के अल्पकालिक अनुभव के आधार पर आपकी बात अक्षरशः प्रामाणिक मानती हूँ ! मैंने ड्रग्स पर एक स्टोरी किया पल्टनबाजार से लेकर राजपुर रोड तक ड्रग पैडलर्स का पीछा करते हुए तंग गली के मुहाने तक पहुँची! सरकारी नेम्पेलेट न लगी होती (प्राइवेट गाड़ी पर) तो जाने क्या होता. लेकिन संथानीय संपादक जी ने जो तीन नशीली चीज़ें मैं ले आई थी, अपने एक प्रिय संवाददाता के साथ गड़प करते हुए कहा- अरे मैडम क्यों खामखां रिस्क लेती हैं.. और मेरी सारी मेहनत मिट्टी में तो नहीं, स्थानीय सम्पादक जी के पेट में चली गई…! No evidence to prove!

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हरीश रावत का स्टिंग : चैनल मालिक उमेश शर्मा यहां पत्रकार कम, भाजपा के आदमी ज्यादा लग रहे हैं

Yashwant Singh : हरीश रावत के स्टिंग से दो बातें साफ हो गई हैं. एक तो यह कि उत्तराखंड पूरी तरह लूटखंड है. सीएम तक बोलता है कि पच्चीस क्या तीस करोड़ कमा लो, मैं आंखें बंद किए रहूंगा. साथ ही ये भी कि स्टिंग करने वाले पत्रकार ने स्टिंग करने के बाद उसे तुरंत चैनल पर नहीं चलाया बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बागियों को उसे दिया ताकि पहले वे स्टिंग का राजनीतिक फायदा उठा सकें. मतलब ये कि समाचार प्लस चैनल के मालिक उमेश शर्मा यहां पत्रकार कम, भाजपा के आदमी ज्यादा लग रहे हैं. यानि सारा कुछ भाजपा के इशारे पर उन्होंने किया?

राजनीतिक इशारों पर स्टिंग करने वालों का हश्र अतीत में क्या क्या हुआ, सबको पता है. कई स्टिंगबाजों ने कांग्रेस के इशारे पर लगातार भाजपा के नेताओं और भाजपा की सरकारों का स्टिंग किया. जब भाजपा को मौका मिला तो उसने सारे स्टिंगबाजों को एक एक करके टांग दिया. तो, पत्रकार के रूप में हमें किसी को यह मौका नहीं देना चाहिए कि वह किसी के पालतू या किसी के पार्टी के बतौर काम करने का लेबल लगा सके. ऐसा करके तात्कालिक फायदा, नाम, दाम तो खूब मिलता है लेकिन लांगटर्म में इसका अंजाम बुरा होता है.

बात हो रही थी उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत के स्टिंग की. चर्चा तो और भी कई किस्म की है कि ऐसे स्टिंग करके उसकी पूरी कीमत वसूलने और इसके जरिए अच्छी खासी प्रापर्टी खड़ी करने की पूरी लंबी परंपरा रही है इस पत्रकार कम व्यवसायी कम लायजनर उमेश कुमार की. निशंक जब सीएम थे तब वो खुद उमेश शर्मा पर स्टिंग के आड़ में ब्लैकमेलिंग के आरोप लगा चुके हैं. साथ ही उमेश को सबक सिखाने के लिए दर्जनों सही गलत मुकदमे दर्ज करा चुके हैं. लेकिन आज वही निशंक खड़े हैं उमेश के साथ, क्योंकि इनकी पुरानी अदावत सेटल हो चुकी है और दोनों मिलकर तीसरे यानि कांग्रेस के हरीश रावत को निपटाने में लगे हुए हैं. इनके साथ खड़े हैं हरीश रावत से खार खाए बागी कांग्रेसी विजय बहुगुणा और उनके हाईटेक लेकिन कनफ्यूज बेटे साकेत बहुगुणा. विजय बहुगुणा के शासनकाल में उमेश शर्मा पर हर किस्म की अपार कृपा बरसी, साकेत बहुगुणा के सौजन्य से. वो दोस्ती यारी कायम है और उस नमक का कर्ज चुकाने के लिए काम कर रहे हैं उमेश शर्मा, ऐसा लोग कह रहे हैं.

फेसबुक पर एक पेज है UP-UK Live लाइव नाम से. इसने उमेश शर्मा को लेकर कई पोस्टें पब्लिश की हैं जिससे स्टिंग के दूसरे पक्ष की सच्चाई को जाना जा सकता है. यह पेज उमेश शर्मा को एक्सपोज करने का काम ज्यादा कर रहा है, उमेश द्वारा किए गए स्टिंग पर बात कम कर रहा है. मेरी निजी राय है कि उमेश ने जिन भी हालात में स्टिंग किया और जिन भी हालात में यह सार्वजनिक किया, सड़ते राजनीतिक सिस्टम के शीर्षतम करप्ट चेहरे को तो उजागर कर ही दिया है. यह काम सराहनीय है, क्योंकि इससे जनता की ट्रेनिंग स्कूलिंग ठीकठाक हो गई है और बजबजाते सिस्टम की सच्चाई सामने हाजिर है.

हो सकता है यह स्टिंग भाजपा ने कराया हो, सत्ता की लड़ाई के अंतरविरोधों के कारण सार्वजनिक कराया गया हो, लेकिन स्टिंग तो है जबरदस्त. हम अगर स्टिंग पर फोकस करें तो हाल के दिनों का यह शानदार स्टिंग है. जब सारी की सारी मीडिया चुप्पी साधे तमाशा देख रही या फिर सत्ता के इशारे पर सत्ता सुंदरम टाइप खबरें दिखा छाप रही हैं तो एक शख्स बड़ा धमाका कर पूरे सिस्टम को चैलेंज कर देता है, बेनकाब कर देता है. भले ही किसी एक मामले में किया हो, लेकिन किया तो.

हालांकि यही शख्स जब उत्तर प्रदेश पर केंद्रित होता है तो मुख्यमंत्री के जय जयकार से आगे नहीं बढ़ पाता, वहां वह सत्ता से अपनी परम नजदीकी दिखाता है. वह सत्ता के सारे बुरे कामों से आंखें मूंदे रहता है.

यही उमेेश शर्मा की पर्सनाल्टी का अंतरविरोध है. या तो वह सत्ता को साधे रखते हैं या फिर ठीक से न सधे तो सत्ता को नेस्तनाबूत करने में जुट जाते हैं ताकि अगली सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर सकें. दोनों ही हालात में वह अपना फायदा देखते हैं. इसी अपने फायदे चक्कर में कुछ ऐसा काम, कुछ ऐसे स्टिंग कर करा जाते हैं जिससे जनता को फायदा होता है, क्योंकि शीर्षतम सत्ता एक्सपोज होती है. तो ऐसे स्टिंग की तारीफ की जानी चाहिए.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर सिर पर पीएम का हाथ हो तो सीएम से पंगा लेना कोई बड़ी बात नहीं. इस बात में कुछ सच्चाई भी है क्योंकि उमेश इस समय सत्रह से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते हैं. दो दो राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से मिले भांति भांति के सुरक्षा गार्डों से घिरा शख्स बिना केंद्र के संरक्षण और इशारे पर इतना बड़ा जोखिम नहीं ले सकता.

कुल मिलाकर उमेश कुमार ने समाचार प्लस और खुद को जबरदस्त टीआरपी दिलाई और पूरे देश की नजरें इन दोनों पर केंद्रित हुईं, यह भी कम बड़ी बात नहीं है. किसी का भी मूल्यांकन करने के लिए उसके सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. सिर्फ बुराई बुराई लिख कह देने से बात तार्किक नहीं रह जाती. उमेश में लाख बुराइयां हों लेकिन उसने जिस अंदाज में एक सीएम का स्टिंग किया व उसे सार्वजनिक कर भूचाल ला दिया, वह जबरदस्त है.

UP UK Live FB Link one

UP UK Live FB Link Two

UP UK Live FB Link Three

UP UK Live FB Link Four

UP UK Live FB Link Five

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com

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जी न्यूज के इस संवाददाता को खबर रोकने के लिए चाहिए फ्लैट या दस लाख रुपए! (सुनें टेप)

हरिद्वार के जी न्यूज संवाददाता नरेश गुप्ता द्वारा एक प्रापर्टी डीलर से एक फ्लैट या 10 लाख रूपये की मांग करते हुए ब्लैकमेल किये जाने की एक आङियो क्लिप इन दिनों हरिद्वार में खूब चर्चा का विषय बनी हुई है. इसमें जी न्यूज संवाददाता प्रापर्टी डीलर से विवादित जमीन की खबरें न दिखाने की एवज में एक फ्लैट या 10 लाख रुपये की मांग कर रहा है. वह उस व्यक्ति को साफ साफ इशारों में कह रहा है कि यदि वह न मानेगा तो वह खेल बिगाड़ देगा.

करीब 13 मिनट से ज्यादा की इस बातचीत में रिपोर्टर कह रहा है कि वह कई बार पहले भी फोन कर चुका है पर आपने फोन नहीं उठाया तो मैंने खबर तो भेज दी थी पर बहुत हल्की बनाकर भेजी थी. उसके पास इस विवादित जमीन से संबंधित सारे कागजात है और वह इस पर बड़ा प्रोगाम भी बना सकता है. करोड़ों रुपये की कीमत की इस जमीन को लेकर दो तीन पक्षों में काफी वक्त से विवाद चल रहा है. हरिद्वार में प्राइम जगह पर स्थित इस जमीन पर कई लोगों की नजर है. जी न्यूज संवाददाता नरेश गुप्ता स्वयं प्रापर्टी की धंधा करता है और कुमार प्रापर्टी डीलर के नाम से वह उसी आफिस से यह कारोबार करता है जिस आफिस से वह अपना पत्रकारिता का धंधा करता है.

इस आडियो में नरेश गुप्ता ने राजू ओबराय नामक प्रापर्टी डीलर से यह भी कहा है कि उसी ने इससे पहले हरिद्वार के एक बड़े प्रापर्टी डीलर राकेश गोयल का भी खेल बिगाड़ दिया था. राकेश हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की 144 बीघा भूमि खरीद रखी है पर उस पर आज तक घुस नहीं पाया क्योंकि स्याना बन रहा था. गुप्ता ने यह भी कहा कि उसके साथ साधना न्यूज रिपोर्टर  (वर्तमान में इंडिया न्यूज के साथ) धर्मेन्द्र चौधरी और दोनों कैमरामैन भी हैं. बस एक फ्लैट या 10 लाख रुपये का इंतजाम करवा दो. कुछ साल पहले नरेश गुप्ता को जी न्यूज से एक पेट्रोल पंप मालिक से 35 हजार रुपये मांगने की शिकायत सही पाये जाने पर चैनल ने हटा दिया था. 4 महीने बाद हरिद्वार के बड़े सफेद वस्त्र धारण करने वाले संत ने वापसी करवाई थी. यह संत जी न्यूज मालिक सुभाष चन्द्रा के करीबी हैं.

आडियो टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=QtP9K3RdFPs

हरिद्वार से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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वेद प्रताप वैदिक बोले- अरनब गोस्वामी बहुत नीच आदमी है (देखें वीडियो)

वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार हैं. काफी सुलझे हुए पत्रकार माने जाते हैं. भाषा और विचार के स्तर पर संतुलित माने जाते हैं. लेकिन अरनब गोस्वामी को लेकर उनका गुस्सा ऐसा फूटा कि उन्होंने अरनब गोस्वामी को ना जाने क्या क्या कह दिया, वह भी पूरी मीडिया के सामने. उपर दिए गए तस्वीर पर क्लिक करिए और वीडियो देखिए.

टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से किसी वरिष्ठ पत्रकार ने इतना गुस्सा पहली बार जाहिर किया है. इस वीडियो को लेकर लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हैं :  https://www.youtube.com/watch?v=mUrI5Fp-YyM

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आजतक के कई बड़े पत्रकार 26 को यूपी विधानसभा में होंगे पेश, जाएंगे जेल या मिलेगी माफी?

Ambrish Kumar : मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित आजम खान को लेकर हुए स्टिंग आपरेशन में मीडिया खासकर इलेक्ट्रानिक चैनल के कई पत्रकारों को 26 फरवरी को विधान सभा में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं. इन पत्रकारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 a, 295 a, 200, 463, 454, 465, 469 और 471 लगाई गई है. इतनी बड़ी संख्या में संभवतः पहली बार चैनलों के पत्रकार विधान सभा में पेश होंगे.

विधान सभा चाहे तो उन्हें माफ़ भी कर सकती है. बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने उन सभी चैनल वाले पत्रकारों पर राष्ट्रद्रोह की धारा लगाने को भी कहा है जिन्होंने फर्जी स्टिंग के जरिए आजम खान को फंसाने का प्रयास किया. इन पत्रकारों को अब 26 फरवरीको विधान सभा में भी पेश होना है क्योंकि इन्हें विधान सभा की समिति ने दोषी पाया है.

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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सेल्फी प्रकरण पर जागरण के रिपोर्टर का सवाल सुनते ही आगबबूला हुई बुलंदशहर की डीएम, मां-बहन कह कह के जमकर हड़काया, सुनें यह टेप

बुलंदशहर में एक डीएम हैं. चंद्रकला नाम से. उनके साथ एक लड़के ने सेल्फी ली, बिना उनकी सहमति. इससे नाराज डीएम ने उस युवक को जेल भिजवा दिया. इस प्रकरण पर जब दैनिक जागरण के रिपोर्टर ने डीएम से पूरा घटनाक्रम जानना चाहा, डीएम का पक्ष जानना चाहा तो डीएम साहिबा इस कदर आग बबूला हुईं कि जागरण के रिपोर्टर को उसकी मां बहन का हवाला दे दे कर जमकर हड़काया.

पूरा टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=6L2etDR3Rxk


इस प्रकरण को दूसरा पक्ष जानने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें…

जबरन सेल्फी लेने वाले मनचले को जेल भिजवाने वाली डीएम चंद्रकला के पीछे क्यों पड़ा है दैनिक जागरण?

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पैसे मांग कर इस न्यूज चैनल ने युवा पत्रकार का दिल तोड़ दिया (सुनें टेप)

सभी भाइयों को मेरा नमस्कार,

मैं एक छोटा सा पत्रकार (journalist) हूँ और 4 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूँ। इस बदलते दौर में मुझे नहीं लगता कि मैं कभी अच्छा पत्रकार बन पाउँगा। मेरा सपना था कि मैं भी एक सच्चा पत्रकार बनूँगा पर अब तो पत्रकारिता का मतलब ही बदल चुका है। पहले पत्रकारिता एक मिशन था परन्तु अब ये करप्ट व कारपोरेट बन चुकी है। सभी जानते हैं कि मीडिया में काम करने के लिए अच्छी पहचान या बहुत पैसा होना चाहिए। आज पत्रकार बनना बहुत ही आसान हो गया है क्योंकि पत्रकार बनने के लिये चैनल को आप के तजुर्बे और आपकी योग्यता की जरूरत नहीं है। उन्हें तो जरूरत है आप से मिलने वाले मोटे पैसे की।

कुछ बड़े और अच्छे चैनल भी हैं जो पढ़े-लिखे व अनुभवी पत्रकारों को मौका देते हैं, काम का पैसा भी देते हैं, परन्तु ना के बराबर। ज्यादातर चैनल की खुली लिस्ट है जो कि सिक्योरिटी अमाउंट के रूप में जमा करनी पड़ती है। पी.सी.आई. (Press Council of India) के अनुसार पत्रकार बनने के लिए आपकी योग्यता पत्रकारिता में 12+ डिग्री/डिप्लोमा या तजुर्बा होना चाहिए, परन्तु कुछ बड़े चैनल तो ऐसे भी हैं जिन्होंने 10वीं पास भी पत्रकार नियुक्त कर रखे हैं।

और तो और, मोटा पैसा लेने के बाद भी काम करने का पैसा (salary) भी नहीं देते हैं। अगर मेरी बात गलत है तो सभी पत्रकारों के सैलरी अकॉउंट की जांच करवा लीजिये। हाँ, मेरी बात सही है। मैं जो कुछ बता रहा हूँ, वो एक कड़वा सत्य है। अब सवाल ये है कि जो पत्रकार मोटा पैसा चैनल को देकर नियुक्त होते हैं, बदले में काम के पैसे (salary) भी नहीं लेते हैं तो फिर उनके घर कैसे चलते हैं? कौन उठाता है इनके खर्च और फिर कहाँ से खरीदते है बड़ी-बड़ी लक्जरी गाड़ियाँ?

ऐसा भी नहीं है कि बड़े चैनलों में काम करने वाले सभी पत्रकार अमीर घर से ताल्लुक रखते हैं या फिर शौकिया पत्रकारिता कर रहे हैं। ज्यादातर का  उद्देश्य नाम के साथ-साथ पैसा कमाना होता है। फिर क्या है इसका कारण….?

-आज बिक रहे हैं पत्रकार और बिक रही है उनकी पत्रकारिता
-आज पत्रकार समाज को सत्य दिखाने की जगह सत्य छुपाने में जुटे हुए हैं
-क्या यही है संविधान के चौथे स्तम्भ का काम.
-समाज में बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ही समाज में बड़े-बड़े गलत काम कर रहे हैं.
-अपने संविधान का चौथा स्तम्भ (PRESS) आँखे बंद करके बैठा हुआ है.

सभी को पता है, अगर कोई संविधान के चौथे स्तम्भ का हिस्सा बनना चाहता है या फिर प्रेस में काम करना चाहता है तो ज्यादातर चैनल की रेट लिस्ट ये होती है…

1) अगर नेशनल चैनल तो 5,00,000 से 2,00,000
2) अगर रीजनल चैनल तो 2,00,000 से 50,000

और लोकल चैनल या न्यूज़ पेपर/मैगजीन की तो बात ही क्या करें, इनकी तो पत्रकार बनाने की पूरी दुकान है। जो आये सो पाये। पैसा दे जाओ और संविधान के चौथे स्तम्भ का हिस्सा बन जाओ। अब सवाल ये है कि पैसा देकर और बिना सेलरी के पत्रकार क्यों काम करने को तैयार हो जाते हैं? क्योंकि चैनलों की शर्तें, सिक्यूरिटी अमाउंट के रूप में मोटा पैसा देने को जो लोग तैयार होते हैं वो ज्यादातर खनन माफिया, शिक्षा माफिया, भूमाफिया, सट्टा चलाने वाले, जुआ खिलाने वाले, अवैध शराब ठेका चालक, चरस विक्रेता, अन्य गलत धंधे करने वालों के आदमी होते हैं। ये लोग ही पैसा देकर चैनल लाते हैं और अपने नीचे किसी को रख लेते हैं जो उनके लिए मीडिया का काम करता रहता है और उनके गलत काम में प्रशासन के द्वारा सहयोग करता है।

जो मैंने लिखा है वह एक कड़वा सत्य है। मैने 4 वर्षों में ही समझ लिया भारत के संविधान के चौथे स्तम्भ (press) का सच। परन्तु मेरा सवाल है उनसे जो पत्रकारिता में वरिष्ठ हैं। मेरा सवाल है उन बड़े चैनलो अथवा समाचारपत्र के संपादकों से जो समाज को सुधारने का जिम्मा लेते हैं, जो समाज को सत्य दिखाते हैं। क्या वे कभी अपने घर में चल रही इस बुराई को बदल पाएंगे? जिससे किसी का सपना अधूरा ना रह पाए और समाज का सत्य जनता के सामने आ पाए। अगर कोई भाई मेरे विचारो से सहमत हो तो मुझे कॉल भी कर सकता है। इसी post को मैंने Agra के local वाट्सअप ग्रुप में डाला था तो कई पत्रकारों ने गालियाँ दी और मेरा अपमान भी किया।

सुनिए वो टेप जिसमें एक बड़े चैनल के पदाधिकारी से मेरी बातचीत है जो नौकरी देने के बदले पैसे मांग रहे हैं… नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=8pdyx-w-a08

अजय कुमार

शिकोहाबाद

उत्तर प्रदेश

संपर्क : फोन 7078004666 मेल ajay.bnanews@gmail.com

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डीएम ने सीजीएम से फोन कर कहा- अखबार में ढेर सारी चीजें छपती हैं जो सब वसूली टाइप रहती हैं (सुनें टेप)

धंधेबाज मीडिया के सच को अधिकारी भी अच्छी तरह जानते हैं लेकिन बस वह आन द रिकार्ड इस पर कुछ नहीं बोलते. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के डीएम नीरज बंसोड़ ने यहां के सीजीएम प्रभाकर ग्वाल से फोन पर बातचीत में मीडिया को लेकर अपनी राय का खुला मुजाहरा कर दिया. डीएम साब ने सीजीएम साब से कहा कि अखबारों की बातों का वह संज्ञान लेकर एफआईआर आदि न किया करें क्योंकि अखबारों में तो बहुत सी चीजें छपती हैं जो सब वसूली टाइप रहती है.

हालांकि डीएम की इस नसीहत का मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस रूप में बुरा मान गए कि यह तो सरासर अदालती काम में हस्तक्षेप है. कोई डीएम कैसे किसी सीजीएम को कह सकता है कि वह किस खबर का संज्ञान लें और किसका न लें. पूरा मामला तूल पकड़ चुका है और बातचीत का यह टेप वायरल हो गया है. इस मामले में राजस्थान पत्रिका में छपी जो खबर है, उसे दिया गया है. साथ ही नीचे टेप दिया जा रहा है जिसे आप सुन सकते हैं.

अगर उपरोक्त आडियो फ्लैश फाइल न सुन पा रहे हों तो नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक कर बातचीत की रिकार्डिंग सुनें>

https://www.youtube.com/watch?v=HYbt6zV2LMU

इन्हें भी पढ़ सुन सकते हैं>

आईपीएस सिकेरा से पत्रिका के संपादक महेंद्र ने माफीनामा छापने का वादा किया (सुनें टेप)

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खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

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पत्रकारों को हमेशा धमकाते रहने वाले मध्य प्रदेश के बदतमीज वन मंत्री डा. गौरीशंकर शेजवार के तीन आडियो-वीडियो टेप सुनें

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लीजिए साहब, एक सपाई युवा नेता ने डीएसपी को फोन पर कह दिया- ‘तेरी मां की xxx , औकात हो तो आ जाओ, मैं बूथ कब्जा कर रहा हूं’ (सुनें टेप)

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शिवराज के मंत्री ने पत्रकार को हड़काया- ”अखबार और मालिक दोनों पर केस करूंगा, ठिकाने लगा दूंगा” (सुनें टेप)

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‘आजतक’ का पत्रकार मनोज सट्टेबाज की रिहाई और मेले में सट्टा चलाने के लिए थानेदार से सिफारिश कर रहा (सुनें टेप)

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यूपी में जी मीडिया और राजस्थान में समाचार प्लस के संवाददाता मांग रहे पैसे (सुनें टेप)

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भाजपा जिलाध्यक्ष टिकट देने के लिए दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहा (सुनें टेप)

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दूरदर्शन के दो अधिकारियों की बातचीत हुई लीक, कैसे होती है सेटिंग-गेटिंग, जानें (सुनें टेप)

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जानिए, कैसे ब्लैकमेल करते हैं ये दैनिक भास्कर वाले… (सुनें टेप) …रिपोर्टर ने संपादक के लिए प्राचार्य से मांगी LED

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अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

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सुदर्शन न्यूज में काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने महेश का भांडा फोड़ दिया (सुनें टेप)

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आपको मैनेज किया था, फिर कैसे छप गई आपके अखबार में खबर (सुनें टेप)

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आईपीएस सिकेरा से पत्रिका के संपादक महेंद्र ने माफीनामा छापने का वादा किया (सुनें टेप)

Navniet Sekera : भगवान से भी तेज UP.Patrika.com … अभी अभी एक नयी जानकारी आई है , कि उपरोक्त न्यूज़ दिनाँक Patrika news network Posted: 2015-12-25 17:07:54 IST से स्पष्ट है कि यह न्यूज़ 25 दिसंबर को शाम को 5 बजकर 7 मिनट 54 वें सेकंड में अपलोड की गयी…

स्वतः स्पष्ट है कि घटना यदि सच है तो एक या दो दिन पूर्व की फीनिक्स मॉल की होगी.. जबकि मेरा परिवार 25 दिसंबर की रात में 11.15 बजे का शो देखने वेव मॉल गया था..  मैं तो गया ही नहीं था.. इस आडियो को सुनें… पूरे सच का खुलासा हो जाएगा…. नीचे लिंक पर क्लिक करें>

https://www.youtube.com/watch?v=nwSu0LWKYyE

आईपीएस और आईजी नवनीत सिकेरा के फेसबुक वॉल से.

मूल खबर>

पत्रिका वालों ने की बदमाशी, आईपीएस नवनीत सिकेरा के बारे में सरासर झूठी खबर छाप दी

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खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

: गुंडों को लेकर रात में पत्रकार के घर पर बोला धावा : यूपी के जंगल राज में सबसे ज्यादा बेलगाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हैं. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने बारिश में बिना वाइपर लगे बस चलाने की लिखित शिकायत गाजीपुर जिले में पदस्थ रोडवेज अधिकारी से की तो अधिकारी ने बदतमीजी करते हुए अपने नेतृत्व में रोडवेजकर्मियों के साथ हमला बोल दिया. इस मामले में अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर 36 घंटे बाद तब दर्ज की जब लखनऊ से एफआईआर दर्ज किए जाने के लिए दबाव डलवाया गया. यह मामला अभी पुराना भी नहीं पड़ा था कि यूपी के फर्रूखाबाद जिले से एक नया मामला सामने आ गया है. यहां के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने एक पत्रकार को फोन कर धाराप्रवाह गंदी गंदी गालियां दीं.

अखिलेश यादव का यह बेलगाम अधिकारी फोन कर पत्रकार को धमकाता है और फिर गंदी गालियां देता है. टेप सुनेंगे तो कहेंगे कि ऐसी गाली तो कोई नशेड़ी ही दे सकता है जिसे होश न हो कि वह किससे क्या बात क रहा है. जनपद फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चन्द्र मिश्रा को डीएम ने बीते दिनों पंचायत चुनाव के मतगणना के दौरान मीडिया कर्मियों के सामने जमकर हड़काया था और एफआईआर कराने व जेल भेजने तक की चेतावनी देते हुए कार्यालय में उपस्थित होने को कहा था.

डीएम ने यह निर्देश तब दिया जब उनसे मीडिया कर्मियों ने रुपये लेकर पत्रकारों को पास दिये जाने की शिकायत की थी. इस खबर को एक स्थानीय वेब पोर्टल एफबीडी न्यूज ने चलाया. इसी बात पर गुस्साये पूरन चन्द्र मिश्रा ने अपने मोबाइल नम्बर 9453005387 से बेब पोर्टल के सम्पादक आनंद भान शाक्य को रात 9.49 बजे फोन कर 1.04 मिनट तक धमकाते हुए गंदी गंदी गालियां दीं. वे पत्रकार की एक बात नहीं सुन रहे थे.

दबंग अधिकारी का इतने से भी मन नहीं भरा तो वह अपने 4 गुंडों के साथ रात 10 बजे सम्पादक के आवास पर भी पहुंच गया और यह कहकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया कि बाहर निकलो तो मैं तुम्हे खबर छापने का नतीजा दे दूं. उसने जान से मारने तक की धमकी दी. पुलिस ने अधिकारी का मामला होने के कारण रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया.  एएसपी ने भी यह कहकर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया कि वह मामले की पहले सीओ सिटी से जांच करायेंगे. एफबीडी न्यूज के सम्पादक ने बीते माह ही डीएम से सूचनाधिकारी की लिखित व मौखिक शिकायत की थी कि वह प्रेस नोट उपलब्ध नहीं कराते.

सुनें गालियों वाला टेप :

https://www.youtube.com/watch?v=JqWvgbigVqg


इसे भी पढ़ें>> 

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

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पत्रकारों को हमेशा धमकाते रहने वाले मध्य प्रदेश के बदतमीज वन मंत्री डा. गौरीशंकर शेजवार के तीन आडियो-वीडियो टेप सुनें

चाल, चरित्र, चेहरा, संस्कृति, राष्ट्र जैसे शब्दों से खुद को जोड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी की जब सरकार बन जाती है तो इसके नेता सारे शब्द और मर्यादा भूल जाते हैं. मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को ही ले लीजिए. इस सरकार के मंत्री न सिर्फ बेलगाम हैं बल्कि अहंकार के चरम पर पहुंच गए हैं. खुद को प्रभु समझने लगे हैं. ये भूल गए हैं कि ये किसी लोकतंत्र में हैं जहां सबकी अपनी मर्यादा है और खासकर जनप्रतिनिधि व मंत्री होने के नाते इन पर ज्यादा जिम्मेदारी है.

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार की एक मंत्री एक बच्चे को लात मार देती हैं. बाद में मंत्री जी आजतक चैनल के रिपोर्टर को सेट करके उस बच्चे को शराबी घोषित कराने के लिए फर्जी न्यूज आइटम तैयार करवाने में जुट जाती हैं.

इसी तरह एक अन्य मंत्री लगातार पत्रकारों से बदतमीजी करते रहते हैं. चीखने चिल्लाने और औकात देख लेने की बात करने वाले ये मंत्री हैं डा. गौरी शंकर शेजवार. इनके पास वन मंत्रालय है. इनकी धमकियों से मध्य प्रदेश के पत्रकार आजिज आ चुके हैं. इन पत्रकारों ने मंत्री जी के आडियो वीडियो भड़ास के पास भेजे हैं जिन्हें यहां अपलोड किया जा रहा है. शिवराज शासनकाल में पत्रकारों की सबसे ज्यादा दुर्गति है. मर्डर से लेकर धमकी तक आम बात है.

शिवराज सिंह चौहान की सरकार के मंत्री ने कई पत्रकारों को बुरी तरह हड़काया है. सत्ता के दम्भ में चूर शिवराज सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने नवदुनिया अखबार में कार्यरत राजीव शर्मा से लेकर टाइम्स नाऊ के पत्रकारों तक को धमकियां दी हैं. मंत्री शेजवार धमकी ही नहीं देते बल्कि कह डालते हैं कि वह अख़बार और मालिक दोनों को ठिकाने लगा दूंगा. एक तरह से यह तो हत्या की धमकी है.

मंत्री के आडियो-वीडियो तीन टेप सुनने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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ये भ्रष्टाचार है.. गरीब बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक… मीडिया कृपया इन बच्चों की मदद में सामने आए… (सुनें टेप)

लखनऊ। अभी कुछ दिनों पूर्व ही बीटीसी-2014 के सत्र में ट्रेनिंग हेतु विद्यार्थियों ने कॉउंसलिंग कराया था। जिन बच्चों को लखनऊ डाइट मिला उनका तो ठीक है मगर जिन बच्चों को लखनऊ के 31 प्राइवेट कॉलेज मिले हैं। वो बच्चे अपने नसीब पर रो रहे हैं। बच्चों का आरोप है की उन्होंने निर्धारित फीस (41000/- इकतालीस हजार रूपये) पहले ही डिमाण्ड ड्राफ्ट के रूप में लखनऊ डाइट निशातगंज में जमा करा दिया है।

इसके वावजूद जब वो आबंटित कॉलेज पर अपने नामांकन हेतु डाइट से प्राप्त अल्लोटमेंट लैटर लेकर वहाँ जा रहे हैं तो कॉलेज वाले बिल्डिंग, लैब आदि के नाम पर मनमानी डोनेशन 20 से 35 हजार प्रति वर्ष के हिसाब से अलग से मांग रहे हैं।

कुछ कॉलेजों ने तो फोन करके विद्यार्धियों को रिश्वत का पैसा साथ लेकर ही नामांकन कराने आने के लिए आदेश दे दिया है। लखनऊ के एक कॉलेज की रिश्वत की मांग करने की रिकॉर्डिंग भी मेरे पास उपलब्ध है। लगभग सभी कॉलेज ऐसा ही कर रहे हैं। बच्चों का आरोप है की इस मामले में डाइट लखनऊ के अधिकारी भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनका कहना है की सम्बंधित डायरेक्टर और सचिव दोनों ही कॉलेज वालों से मिले हुए हैं।

डाइट पर चक्कर काटती एक लड़की के अविभावक ने मुझे बताया की पहले ही बिटिया के नामांकन हेतु 41000 रूपये जुटाने में अपने बीबी के गहने बेच चूका हूँ। अब कॉलेज वाले 21 हजार माँग रहे हैं। ये पैसे कहाँ से लाऊँ समझ नहीं आ रहा है की अब क्या बचूँ। क्या उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे ही बेटियों और छात्रों को शिक्षित करना चाहती है की गरीब अविभावक एक बच्चे को पढ़ाने में पूरा लूटकर सब कुछ बेचने पर मज़बूर हो जाए? अभी तक यह न्यूज़ मीडिया में क्यों नहीं दिखाई दे रही है यह भी अपने आप में एक प्रश्न चिन्ह बना हुआ है।

रिश्वतखोरी से संबंधित टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें>> Youtube.com/watch?v=2tjcpG3WdFI

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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बर्बाद फसल दिखाने आई गरीब महिला को हड़का रहे इस कलेक्टर ने चार जूते मारने लायक काम किया है या नहीं? (देखें वीडियो)

एबीपी न्यूज में स्पेशल करेस्पांडेंट ब्रजेश राजपूत ने एक वीडियो फेसबुक पर शेयर किया है. साथ ही यह भी बताया है कि इस वीडियो के एबीपी न्यूज पर चलने के फौरन बाद वीडियो में दिख रहे खलनायक अफसर के ट्रांसफर का आदेश आ गया. वीडियो में खलनायक अफसर एक गरीब किसान महिला को हड़का रहा है. यह किसान महिला जनसुनवाई में अपनी सूखी फसल दिखाने लाई थी और फसल दिखाते ही अफसर इस महिला पर बिगड़ पड़ा.

पहले पढ़िए ब्रजेश राजपूत ने फेसबुक पर क्या लिखा है और फिर देखिए वो वीडियो जिसे उन्होंने एफबी पर अपनी पोस्ट के साथ शेयर किया है. वीडियो देखकर पक्का आपका खून खौल उठेगा. ऐसे संवेदनहीन अफसरों को क्या चौराहे पर खड़े करके चार जूते नहीं मारने चाहिए ताकि बाकी अफसरों में खौफ पैदा हो सक? इन अफसरों को पद और पैसा आखिर मिलता किस बात के लिए है? कि ये आम जन से बदतमीजी करें? जब भी कोई अफसर इस किस्म की बेहूदा हरकत करे, फौरन उसे मोबाइल में शूट कर ऐसे ही पब्लिक डोमेन में लाने की जरूरत है ताकि इनके भीतर तनिक तो डर कायम रहे. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


Brajesh Rajput : कैमरा लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी है। भले ही वो मोबाइल कैमरा क्यों ना हो। ये हैं भिंड के पूर्व कलेक्टर मधुकर आग्नेय जो जनसुनवाई में सूखी फ़सल दिखाने आयी महिला पर इस बुरी तरह से बिगड़े कि एमपी में संवेदनशील सरकार के दावों की क़लई खुल गयी। हैरान करने वाला ये छोटा सा वीडियो एबीपी न्यूज़ ने 10 बजे हेडलाइन बनाकर दिखाना शुरू किया तो चार बजे कलेक्टर साहब की जिले से रवानगी के आदेश आ गये। ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की ऐसी हरकत दिल दुखा देती है। चैनल और कैमरा सलामत रहे सदियों तक।

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:Badtameez Afsar

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लीजिए साहब, एक सपाई युवा नेता ने डीएसपी को फोन पर कह दिया- ‘तेरी मां की xxx , औकात हो तो आ जाओ, मैं बूथ कब्जा कर रहा हूं’ (सुनें टेप)

यूपी में जंगलराज की कहानियों का कोई अंत नहीं है. एक पर चर्चा थमती नहीं कि दूसरी तैयार खड़ी मिलती है. एक यादव जी ने एक डीएसपी को फोन पर ऐसा ललकारा कि समाजवाद और लोकतंत्र दोनों शर्मा जाएं. नेता यादव जी ने डीएसपी को फोन पर कहा- ”औकात हो तो आ जाओ, मैं बूथ कब्जा कर रहा हूं”. बेचारे डीएसपी साहब. क्या कहते, सिवाय इसके कि ”औकात तो बहुत है पुलिस की लेकिन फिलहाल कप्तान साहब को बताता हूं कि तुम क्या कह रहे हो.” पूरी बातचीत आप सुनेंगे तो आप समझ जाएंगे कि जब इतना छोटा यादव नेता पुलिस को इस तरह धमका सकता है तो बड़ा यादव नेता किस तरह पुलिस वालों को डील करता होगा.

मामला यूपी के एटा का है जो मुलायम खानदान के अपने पसंदीदा इलाकों में से एक है. पंचायत चुनावों में सत्ता के रसूख के चलते सपा नेता बेलगाम हो गये हैं. इसकी बानगी एटा में देखने को मिली जब एटा के अलीगंज से सपा विधायक रामेशवर यादव के भतीजे और जिला पंचायत अध्यक्ष जोगेन्द्र सिंह यादव के बेटे पुष्पेन्द्र यादव ने पुलिस की वर्दी की गरिमा को तार-तार करने की कोशिश की.

एटा में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में सकीट ब्लाक के वार्ड नम्बर बीस से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे पुष्पेन्द्र यादव ने जलेसर के डिप्टी एसपी राघवेन्द्र सिंह चौहान उर्फ आरएस चौहान को पंचायत चुनाव में कुवरपुर बूथ पर चैलेंज करते हुए जमकर भद्दी भद्दी गालियां दी और खुलेआम फोन पर चैलेंज किया कि कुंवरपुर में मैं बूथ कैप्चरिंग कर रहा हूं, पुलिस में दम हो तो बूथ कैप्चरिंग रोक कर दिखाए. सीओ जलेसर आरएस चौहान फोन पर धमकी से सन्न रह गए. सपा नेता के रसूख के आगे जिले के दोनों बड़े अधिकारियों एसएसपी और डीएम ने घुटने टेक दिए और मामले को दबाने में जुटे हैं. पुलिस का इकबाल कैसे बचे. नीचे आडियो डाउनलोड करने और सुनने के लिए दिया जा रहा है : Download


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शिवराज के मंत्री ने पत्रकार को हड़काया- ”अखबार और मालिक दोनों पर केस करूंगा, ठिकाने लगा दूंगा” (सुनें टेप)

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‘आजतक’ का पत्रकार मनोज सट्टेबाज की रिहाई और मेले में सट्टा चलाने के लिए थानेदार से सिफारिश कर रहा (सुनें टेप)

गाजियाबाद से एक बड़ी खबर आ रही है. एक आडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि थाना विजय नगर प्रभारी सुरेन्द्र यादव एवं चैनल ‘आज तक’ के पत्रकार मनोज के बीच हुई फोन वार्ता है. इस वायरल हुए ऑडियो में आजतक का पत्रकार मनोज हिरासत में लिये गये एक सट्टेबाज को छोड़ देने के लिए अपील कर रहा है. साथ ही वह सट्टेबाज को मेले में सट्टा चलाने देने की सिफारिश कर रहा है.

थाना प्रभारी सुरेंद्र यादव पूरी कड़ाई से मनोज की सिफारिश को नकार रहा है और कह रहा है कि उसके इलाके में जो गलत करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=zP2GlcK9w40

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बुलंदशहर आईटीआई कांड में प्रिंट मीडिया किस तरह हुआ मैनेज, सुनें ये तीन टेप

यूपी के बुलन्दशहर जिले में घटित हुए आईटीआई कांड में प्रिंट मीडिया जमकर मैनेज किया गया… बुलन्दशहर के आईटीआई में सामूहिक नकल के मामले में यूं तो दबाव बढ़ने के बाद आखिर अब पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मीडिया को कैसे मैनेज किया गया, इसका अंदाजा इन तीन आडियो टेप से लगाईये। कैसे रूपयों के दम पर दैनिक जागरण सहित तीन प्रमुख अखबारों को खरीदा गया। इतना ही नहीं बढ़िया ढंग से कलम की कलयुगी बाजीगर मैनेज भी हुए। पत्रकारिता के नाम पर दलाली का यह नमूना भर है। नकल माफिया डीएम बी.चन्द्रकला तक को गरिया रहे हैं। आडियो में नम्बर एक अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण का नाम भी है।

दरअसल दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ सुमनलाल कर्ण जोकि पहले रिपोर्टर रहे थे, वह पहले शिक्षा की बीट देखते थे। आईटीआई में उनके अच्छे संबंध हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने कई लोगों को आईटीआई भी करायी। आडियो में जिस कपिल का नाम आ रहा है वह हिन्दुस्तान अखबार में रिपोर्टर है। दरअसल 6 अगस्त को नगर के सागर आईटीआई केंद्र पर परीक्षा से पूर्व ट्रेड थ्यौरी के पेपर को आउट करके उत्तर हल किए जा रहे थे। शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर ओर सीओ ने छापा मारकर नकल का भंडाफोड़ किया और भारी मात्रा में प्रश्न पत्र व उत्तर पुस्तिकाएं बरामद कीं। मौके से पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया।

मामला मैनेज होता रहा। डीएम बी. चन्द्रकला के संज्ञान में आया तो उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी हुई। आईटीआई के प्रधानाचार्य संजय किशोर, एके पांडे ओर दुश्यंत को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पेपर आउट करने के बदले मिले 4 लाख रूपये भी प्रधानाचार्य से बरामद कर लिए। इस मामले में वीआईआईटी इंजीनियरिंग कालेज के विजय कौशिक, शिवचरन इंटर कालेज के अशोक शर्मा, महेन्द्र चौधरी ओर सुरेन्द्र शर्मा फरार हैं। आडियो टेप बता रहे हैं कि कैसे इस मामले में मीडिया को मैनेज करके मोड़ दिया जा रहा था। आडियो की बातचीत आइटीआइ के प्रधानाचार्य और इंजीनियरिंग कालेज के विजय कौशिक के बीच है। आरोपियों के मोबाइल से मिले इन आडियो टेप को इन्वेस्टीगेशन का पार्ट भी बनायेगी। टेप सुनने के लिए नीचे दिए गए तीनों यूट्यूब लिंक को एक-एक कर क्लिक करिए और सुनिए :

(1) https://www.youtube.com/watch?v=GkRbaOVd6Jw

(2) https://www.youtube.com/watch?v=ZSNJMNEWzxU

(3) https://www.youtube.com/watch?v=m3G0X0ihIp0

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यूपी में जी मीडिया और राजस्थान में समाचार प्लस के संवाददाता मांग रहे पैसे (सुनें टेप)

: जी मीडिया का संवाददाता बाबा से मांग रहा है पांच लाख रुपये : समाचार प्लस राजस्थान के संवाददाता ने स्कूल संचालक से मांगे पैसे : इलाहबाद के पास है कौशाम्बी. यहां कुछ ऐसे लोग हैं जो मीडिया को बेच रहे हैं. कौशाम्बी में पत्रकार हैं अजय कुमार जो कथित तौर पर जी न्यूज़ में काम कर रहे हैं. इन महाशय ने तीन कैमरामैन भी रख लिया है. ये पूरा गिरोह मिलकर खबर के चलाने रोकने के नाम पर मोटी रकम की डिमांड कर रहे हैं. एक बाबा से रिपोर्टर अजय कुमार और उनके एक सहयोगी की बातचीत का आडियो वायरल हुआ है. इसमें अजय के सहयोगी धारा यादव ने बाबा से खबर न चलवाने के नाम पर जी मीडिया को विज्ञापन देने के लिए 500000 रुपये की मांग की. अजय कुमार पर शराब के नशे में बिजली विभाग के जेई से मारपीट की मामला मंझनपुर कोतवाली में दर्ज हो चुका है. टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=bUP6J2nn4_Y

उधर, राजस्थान के बूंदी जिले के हिण्डोली तहसील में टीपू सुल्तान नाम का एक संवाददाता है जो समाचार प्लस राजस्थान चैनल में काम करता है. आरोप है कि बूंदी शहर से लेकर हिण्डोली कस्बे के सभी निजी स्कूलों को यह धमकाता रहता है और उनसे पैसे मांगता है. यह संवाददाता स्कूल वालों पर नियम कानून तोड़कर स्कूल चलाने का आरोप लगाता है और स्टिंग करके चैनल पर चलाने की बात कहता है. इस सबका मकसद अवैध वसूली करना होता है. ऐसे ही एक केस में संवाददाता का आडियो लीक हो गया और पूरी बातचीत वायरल हो गई. इस टेप के बाद बूंदी शहर में समाचार प्लस विवादों में आ गया है. इस ऑडियो में संवाददाता टीपू सुल्तान और स्कूल संचालक के बीच बातचीत है. टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=aSMQtjoTal0

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भाजपा जिलाध्यक्ष टिकट देने के लिए दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहा (सुनें टेप)

घटना उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की है. BJP जिलाध्यक्ष जगदीश तिवारी ने एक व्यक्ति से टिकट दिलाने के बदले दो लाख रुपये रिश्वत मांगा था. घूस की उनकी बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया है. इसके बाद भाजपा ने जगदीश तिवारी को पद से हटा दिया.

भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश तिवारी को पदमुक्त कर उनकी जगह उदयन पालीवाल को प्रभारी जिलाध्यक्ष बनाया गया है. टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=0ZppDeDRRQs

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विज्ञापन के लिए दैनिक भास्कर का मार्केटिंग प्रतिनिधि धमका रहा है व्यापारी को (सुनिए टेप)

बड़े नेता, बड़े अफसर, बड़ी कंपनियां अगर खुलेआम वसूली, रिश्वतखोरी, उगाही करें तो उनके खिलाफ कार्रवाई एक लाख में एकाध मामलों में ही होती है, वह भी तब जब इनके बीच आपसी झगड़े हो जाएं. अन्यथा सब दोनों हाथ से संविधान, कानून और नैतिकता की धज्जियां उड़ाते हुए मुद्रा मोचन में लगे रहते हैं. इन डकैतों की सेहत पर असर इसलिए भी नहीं पड़ता क्योंकि पुलिस, कोर्ट और सिस्टम इनकी रक्षा में जुट जाता है, बचाने में जुट जाता है. ताजा मामला दैनिक भास्कर का है. इस अखबार के मार्केटिंग के लोग किस तरह व्यापारियों को धमकाते हैं, विज्ञापन के लिए, इसे नीचे दिए गए टेप वाले लिंक पर क्लिक करके सुना जा सकता है.

राजस्थान स्थित कोटा जिले के गुमानपुरा के एक व्यापारी को विज्ञापन के लिए दैनिक भास्कर का मार्केटिंग प्रतिनिधि धमका रहा है. वो खुद बोल रहा है कि दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका दोनों डाकू हैं. इसने विज्ञापन ना देने पर उल्टी खबर छापने की धमकी दी. इससे पता चलता है कि मीडिया वाले पैसे मिलने पर चुप रहते हैं और पैसे न दिए तो उल्टी खबर दिखाने लगते हैं. इसका एक सटीक उदहारण कुछ दिन पहले भी देखा जा चुका है. कोटा के मेयर महेश के नालंदा में चल रहे अवैध काम का कवरेज करने गए पत्रकारों को मेयर के लोगों ने बंदी बना लिया. इसकी FIR भी दर्ज़ है लेकिन अख़बार में यह खबर नहीं छपी क्योंकि विज्ञापन के माध्यम से पैसा फेककर मीडिया का मुँह बंद कर दिया गया था. अब आप बताओ इसे बिकाऊ मीडिया नहीं बोलोगे तो और क्या बोलोगे.

टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=vD73IgSceOo

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अखिलेश ने रोका न होता तो आजम खान ने ‘आजतक’ के कई वर्तमान-पूर्व पत्रकारों को जेल भेजने की व्यवस्था कर दी थी

राहुल कंवल, पुण्य प्रसून, गौरव सावंत, दीपक शर्मा सहित कई पत्रकारों पर दंगा भड़काने की धाराएं लगाने की सिफारिश

यूपी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री आजम खान बुधवार को इतिहास बनाते बनाते रह गये. अगर उनका बस चला होता तो देश के 10 से ज्यादा पत्रकार दंगे कराने के जुर्म में आज जेल में होते. इनमें राहुल कंवल, गौरव सावंत, पुण्य प्रसून बाजपेई, मनीष, दीपक शर्मा, हरीश शर्मा और अरुण सिंह प्रमुख हैं. आज़म खान नगर विकास के साथ साथ संसदीय कार्य मंत्री भी हैं. मुज़फ्फरनगर दंगों पर दिखाय गये एक स्टिंग ऑपरेशन में जब उनका नाम उछला था तो संसदीय कार्य मंत्री ने बीएसपी नेता स्वामी प्रसाद मौर्या से मिलकर एक जांच समिति बना दी थी.

इस जांच समिति ने आजतक और इंडिया टुडे के 10-12 पत्रकारों पर दंगा कराने का मामला दर्ज करवाने की संस्तुति कर दी. परसों सदन में जांच समिति की रिपोर्ट पटल पर रखी जानी थी. इसकी कुछ प्रतियाँ लखनऊ के कुछ पत्रकारों को मिली हैं. इस जांच रिपोर्ट में ऊपर दिए गये पत्रकारों पर आईपीसी की धारा 153A, 195A, 295A, 200 (दंगा कराने से जुडी) के तहत मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गयी है. यही नहीं 463, 464, 465, 471 के तहत भी मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गयी. ये धाराएं स्टिंग ऑपरेशन में तथ्यों को सरकार के खिलाफ तोड़ मरोड़ कर पेश करने की हैं जबकि गांधीनगर फॉरेंसिक लैब के वैज्ञानिक विधान सभा में बयान दे चुके थे कि स्टिंग ऑपरेशन में कोई छेड़छाड़ या किसी दूसरे की आवाज़ नहीं डाली गयी. गांधीनगर के इस रिपोर्ट के अहम तथ्यों को नज़र अंदाज़ करके शुरू में कराई गयी हैदराबाद लैब की आधी अधूरी रिपोर्ट को उलेखित किया गया है.

आजतक के एक पूर्व अधिकारी को भी जांच समिति ने बुलाया. इस पूर्व अधिकारी (पत्रकार) ने आजतक के बारे में खूब उलटे सीधे बयां दिए और बाद में आज़म खान से कहा कि बेहतर होगा वो आज के दौर में खुद अपना चैनल लें जो अप्ल्संख्यक पक्ष को रखे. इस पत्रकार ने आज़म खान के चेलों को न्यूज़ चैनल का बजट तक दिया. इसका विरोध समिति के एक विधायक ने किया. समिति के कुछ और सदस्य ने भी आज़म खान के दबाव का भीतर ही भीतर विरोध किया और कहा कि जब दंगा खत्म होने पर दंगे का कारण जानने के लिए स्टिंग किया गया है तो पत्रकारों पर दंगे के आरोप लगाना गलत होगा. और अगर इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया तो सरकार की थू थू होगी. वैसे भी पत्रकारों के उत्पीडन के कई मामले यूपी में सुर्ख़ियों पर रहे हैं.

चौकाने वाली बात ये है कि जांच रिपोर्ट में स्टिंग करने वाले पत्रकार और जिन अफसरों का स्टिंग किया गया, दोनों पर ही कारवाई करने की संस्तुति की गयी है. सूत्रों ने बताया कि आज़म को एक वरिष्ठ नेता ने समझाया कि अगर स्टिंग से अलग हटकर प्रोग्राम में उनका नाम ये कहकर उछाला गया कि उन्होंने कुछ अफसरों पर दबाव डाला है और इस बात के सबूत नहीं है तो इसके लिए दोनों चैनलों पर खंडन चलाने के निर्देश समिति को देने चाहिए. लेकिन आज़म खान ने इस सलाह को खारिज करके कहा कि वो सभी पत्रकारों पर दंगा कराने का केस चलाएँगे और विधान सभा के भीतर मानहानि का मामला बना कर सजा भी देंगे. विधान सभा के विधि सलाहकारों ने आज़म खान को फिर सलाह दी कि जो धाराएं वो पत्रकारों पर लगा रहे हैं वो अदालत खारिज करके सरकार पर उल्टा टिप्प्णी करेगी और कहीं पूरे मामले की जांच सीबीआई को चली गयी तो लेने के देने पड़ेंगे क्यूंकि सीबीआई अब मोदी की हाथ में है और आज़म खान और अखिलेश सरकार पर सुप्रीम कोर्ट मुज़फ्फरनगर दंगो को लेकर पहले से विपरीत टिप्पणी कर चुकी है.

सूत्रों के मुताबिक इस सत्र में जिद पर अड़े आज़म खान ने हफ्ते भर में जांच रिपोर्ट तैयार करवाई और स्पीकर से कह कर उसे 26 अगस्त को कार्य सूची में डलवा दिया. रात में जब मुख्य मंत्री अखिलेश यादव को पत्रकारों पर लगी दंगे की धाराएं बताई गयीं तो चौंक गए. मुख्यमंत्री ने स्पीकर से बात करके रिपोर्ट को अगले सेशन के लिए टलवा दिया. फिलहाल आज़म खान अभी अपनी बात पर अड़े हैं और पत्रकारों को जेल भेजने के लिए वो विधानसभा समिति को पत्र भी लिख चुके हैं. उधर चर्चा है कि समिति में फूट पड़ गयी है. भाजपा के विधायक ने पहले ही समिति का बहिष्कार कर दिया था. अब दो सदस्यों का कहना है कि सारे फैसले सिर्फ तीन विधायकों दिलनवाज़ खान, इरफ़ान और सुदेश शर्मा ने लिए हैं, इसलिए वे पत्रकारों को गलत फंसाने की जिम्मेदारी खुद नहीं लेना चाहते.

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com

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