Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

किसान मेले का रूप लेता जा रहा भारतीय संस्कृति से सराबोर किसान आंदोलन

चरण सिंह

नई दिल्ली/गाज़ीपुर बॉर्डर किसान क्रांति गेट/सिंघु बॉर्डर/टिकरी बॉर्डर। आज की तारीख में यदि कहीं पर भारतीय संस्कृति, भाईचारे और आवोभगत देखनी हो तो नये किसान कानूनों को वापस कराने के लिए देश की राजधानी दिल्ली के चारों ओर चल रहे किसान आंदोलन में चले जाइये। किसान परिवारों से आए बच्चे, महिलाएं बुजुर्ग सब मिलकर किसान आंदोलन का संचालन कर रहे हैं। चाहे खाने की व्यवस्था हो, नास्ते की हो, चाय-कॉफी की हो, दवा की हो, सोने की हो, साफ-सफाई की हो या फिर शौचालय की हर व्यवस्था को दुरुस्त बनाने में सभी आंदोलनकारी एक बने हुए हैं। जहां किसान खाना बनाने में लगे हुए हैं वहीं महिलाएं-बच्चे सब्जियां काट रही हैं। मटर छील रही हैं। जगह-जगह चाय-कॉफी, छोले चावल, पूरी सब्जी, जलेबी, खीर की स्टाल लगे हैं।

ऐसा लग रहा है कि जैसे यह आंदोलन अब किसान मेले का रूप लेता जा रहा हो। चाहे गाजीपुर बॉर्डर किसान क्रांति गेट पर चल रहा किसान आंदोलन हो, सिंघु बॉर्डर का हो या फिर टीकरी बॉर्डर का हर आंदोलन देश को एक नया संदेश दे रहा है। आओभगत ऐसी कि जैसे किसी बारात में आये हों। आंदोलन से गुजर कर जा रहे हर व्यक्ति से खाने-पीने की अपील की जा रही है। यह आंदोलन किसान कानून को वापस कराने के लिए मोदी सरकार से तो टकरा ही रहा है साथ ही हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई की एकता की एक मिसाल बनकर भी उभरा है। इस आंदोलन में विशेष रूप से सिख समुदाय का समर्पण भाव देखते बन रहा है। आंदोलन को देखने से लगता है कि जैसे सिख समुदाय ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है।

कपड़े धोने, जूते पर पॉलिस करने यहां तक बाल कटाने और दाढ़ी बनाने तक की सेवा दी जा रही है। किसान ही दूसरे किसानों के कपड़े धुलते, जूतों पर पॉलिस करते देखे जा रहे हैं। परिवार के परिवार किसान आंदोलन में आ डटे हैं। वैसे तो आंदोलन में हर प्रदेश के आये बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आंदोलन में देखे जा रहे हैं पर अधिक संख्या सिख समुदाय की है। जिससे बात करें वह किसान कानून वापस कराने और एमएसपी खरीद पर कानून बनाकर ही घर वापस जाने की बात कर रहा है।

किसान आंदोलन के आसपास के गांवों के लोग अपने घरों से बनवाकर खीर, हलवा, पेड़ा लाकर किसानों को बांट रहे हैं। किसानों के लिए सोने की व्यवस्था जबर्दस्त है महिलाओं की व्यवस्था अलग से की गई है। कई-कई किलोमीटर कर चल रहे आंदोलन में किसान-जवान का भाईचारा देखते बनता है। यह किसानों की दरियादिली और व्यवस्था ही है कि किसान आंदोलन में पुलिस और सेना के जवानों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसान और जवान दोनों एक साथ खा-पी रहे हैं। पुलिस के जवान आंदोलन में ऐसे बैठे हैं कि जैसे कि वे भी आंदोलन का ही एक हिस्सा हों। आंदोलन में जाने से पता चलता है कि बड़े चैनल नदारद हैं। हां यूट्यूब चैनल बढ़-चढक़र हिस्सा ले रहे हैं। किसान नेता भी सोशल मीडिया को तवज्जो दे रहे हैं।

खुद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्क्ता ने आंदोलन के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का आभार व्यक्त किया है। जो लोग इस आंदोलन में आये किसानों को खालिस्तानी, नकली किसान या भाड़े के लोग बता रहे हैं। उन्हें किसान आंदोलन में जरूर जाना चाहिए। आंदोलन में जाकर पता चल जाएगा कि किसानों ने आपस ने मिलकर किस तरह से जबर्दस्त व्यवस्था कर रखी है। अपने घर-परिवार को छोडक़र किस तरह से सडक़ों पर आ लेटे हैं। इस आंदोलन से नेता, अभिनेता, पूंजीपति, व्यापारी हर वर्ग को सीख लेनी चाहिए। ऐसा लग रहा है जैसे ग्रामीण परिवेश की संस्कृति ने विस्तार रूप ले लिया हो। हां एक बात जरूर है कि सिख समुदाय से जुड़े गायकों व कलाकारों के साथ देश-विदेश में रहे प्रभावशाली लोगों इस आंदोलन में बढ़-चढक़र आर्थिक सहयोग करने की बात भी सामने आई है।

पंजाबी गायक और अभिनेता दलजीत दुसांज का नाम प्रमुखता से सामने आया है। मंचों से किसान नेता लगातार शांतिपूर्वक आंदोलन चलाने का आह्वान किसानों से कर रहे हैं। अन्ना आंदोलन में तो राजनीति पुट था पर यह आंदोलन विशुद्ध रूप से किसान आंदोलन का रूप ले चुका है। भले ही कुछ किसान नेता किसी राजनीतिक दल से जुड़े हों पर देश में इस तरह का व्यवस्थित किसान आंदोलन शायद पहले कभी हुआ हो। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के साथ ही देश के लगभग हर प्रदेश के किसान किसी न किसी रूप में आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। चाहे कोई नेता, हो, अभिनेता, हो, वकील हो, पत्रकार हो, गायक हो, लेखक हो। मतलब कोई भी हो सब किसान की भूमिका में नजर आ रहे हैं। ज्यों-ज्यों गणतंत्र दिवस करीब आ रहा है त्यों आंदोलन में तिरंगों की संख्या बढ़ती जा रही है। यदि किसान गणतंत्र दिवस तक आंदोलन में टिके रहे है तो गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलन से एक नई राष्ट्रभक्ति का संदेश जाने की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है।

चरण सिंह राजपूत

[email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन