जैकी यादव-
आप कुमार कुमार विश्वास को जितना जानते जायेंगे उतना ही आप इन्हें निर्लज्ज और निकृष्ट मानसिकता का व्यक्ति समझते जाएंगें।
सौरभ द्विवेदी की लाइब्रेरी के उद्घाटन के दौरान UP के DyCM ब्रजेश पाठक जी आये हुए थे, वहाँ ये भी गये हुए थे,
इन्होंने बड़ी ही निर्लज्जता से बृजेश पाठक जी का उपहास किया, यह इतने लालची व्यक्ति बन चुके हैं कि
इन्हें रुपए पैसे के अलावा दुनिया में और कुछ भी दिखाई नहीं देता है। मैं जब जब कुमार विश्वास जी पर प्रश्न उठाया हूँ तब तब ब्राह्मण वर्ग मुझे टारगेट करता है मगर
आज आप सभी ब्राह्मण समाज के लोग देखिए कि इन्होंने स्वंय के आगे किसी और ब्राह्मण समाज के व्यक्ति को कुछ समझा भी नहीं है।
देखें वीडियो-
https://x.com/askrajeshsahu/status/2030965701192888476?s=46
अभिषेक उपाध्याय-
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि “विद्या ददाति विनयं” यानि ज्ञान व्यक्ति में विनम्रता लाता है।
मगर कुमार विश्वास शर्मा के संदर्भ में विद्या कब अविद्या में बदल गई,
और ज्ञान कब अहंकार के पोस्ट डेटेड चेक में, पता ही न चला।
कुमार विश्वास के लिए ज्ञान का मूल्य वही है, जो मीका सिंह को “मौजा ही मौजा ” या फिर “ढिंका चिका” पर परफार्म करने की एवज में मिले धन और शोहरत का है।
वो एक पढ़े लिखे, ज्ञान संपन्न स्टेज परफार्मर या फिर स्टैंड अप कॉमेडियन में तब्दील हो चुके हैं!!
वे ऐसी अद्भुत क्षमता रखने वाले देश के इकलौते कलाकार हैं,
जो जयशंकर प्रसाद, महाकवि निराला, हरिवंश राय बच्चन और फैज़, फिराक़ व ग़ालिब को पढ़ते हुए भी ज़बरदस्त स्टैंडअप कॉमेडी कर सकता है,
जो कभी रामचरित मानस तो कभी वैदिक धर्मग्रंथों का पाठ करते हुए भी,
अपनी हास्य क्षमता से जॉनी लीवर, मुकरी या फिर क्रेश्टो मुखर्जी को मात दे सकता है।
उनके लिए सज्जनता, विनम्रता, आदर, सम्मान, शिष्टाचार आदि उसी तरह से अजनबी शब्द हो चुके हैं,
जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए स्त्रियों के संदर्भ में नैतिकता के प्रवचन!!
सुनिए कथित कवि की भाषा-
https://x.com/azizkavish/status/2030970807128916356?s=46
“कुमार विश्वास जी, बृजेश पाठक जी के लिए सार्वजनिक मंच पर इस तरह नहीं बोलना चाहिए था..”
आप क्या बोले हैं, आप सुनेंगे तो आपको खुद लगेगा कि ये ठीक नहीं था..
आप उन बृजेश पाठक जी के लिए बोल रहे हैं जो आपको छोटा भाई मानते हैं..
सुनिए, कुमार विश्वास जी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जी के लिए क्या कह रहे हैं..
“कैसे-कैसे लोग सुनकर निकल लिए, वो बृजेश पाठक बताओ..
मुझे लगा कुछ देकर जाएगा.. वो भी अपना नहीं देकर गया..”
कलेक्टर को इतने पैसे मिलते हैं, दरोगा को इतने मिलते हैं, और कुमार विश्वास जी को कितने मिलते हैं मैं बता दूं क्या!!”वैसे कुमार विश्वास जी, मैंने सुना है कि एक कार्यक्रम के लिए आप 30 से 40 लेते हैं.. किसका फोन आने पर आपने अपना रेट कितना कम किया है, ये भी मुझे मालूम है..
कुमार विश्वास जी आप तो ऐसे न थे..-विवेक त्रिपाठी


