परवेज अहमद-
नरपिशाच : अद्भुत! जब भी सत्ता से शक्ति, धन भी हासिल होने लगता है तब कतिपय कवियों/शायरों के शब्द “आवारा “हो जाते हैं?
एक दौर था जब इमरान प्रतापगढ़ी, सत्ता शक्ति के इसी प्रभाव में बोलते थे-
“…इलाहबाद वालो बात मेरी याद रखना, कई शदियों तलक कोई अतीक पैदा नहीं होगा” और गाते-
“बच्चा बच्चा चीख रहा है मय मुख्तार अंसारी हूँ…!”
ये गाते-गाते वह राज्य सभा चले गए क्यूंकि कांग्रेस को उनकी तुष्टि में मुसलमानो की तुष्टि महसूस हुई होगी?
अब आप डॉ. कुमार विश्वास जी…”घर का नाम ‘रामायण’और ‘महालक्ष्मी’ उड़ा ले जाने” का जुमला कसते कसते ‘नरपिशाच’ तक आ गए?
किसके लिए बोले- ‘नरपिशाच’?
मुसलमानो या कथित सेक्युलर हिन्दुओं के लिए? वैसे जानते ही होंगे आप जहां हैं, वहां मुसलमानों के मुशायरा प्रेम ने पहुँचाया है? यही कौम है जो बच्चों की स्कूली फीस की फ़िक्र छोड़ मुशायरे का चंदा देती है. जिससे लाखों रुपये और उनके ही मंच आपको मैथली शरण गुप्त जी के बराबर खड़ा कर दिया. ध्यान रखियेगा हिन्दू समाज का बहुसंख्यक हिस्सा मुशायरों/कवि सम्मेलनों में 20/25 लाख नहीं फूंकता …क्यूंकि उसे अपने बच्चो को पढ़ाना होता है. उसका टारगेट राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल होना होता है.
इसलिए वह धन और समय दोनों बर्बाद नहीं करता है. ये IIT/IIM वाले पढ़ाई के दबाव से थोड़ी मुक्ति और एंडोर्फिन हॉर्मोन ज्यादा रिलीज करने की मंशा से आपको बुलाते हैं. क्यूंकि वे सकारात्मक ऊर्जा हासिल कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढ़ने को प्रयत्नशील रहते हैं!
तो
हे “राष्ट्रकवि ” नर पिशाच शब्द आपकी प्रगति का ब्रेकर है और हाँ, जहां यह बोले उन्हें किसी को तुष्ट करने की ज़रूरत नहीं है.इसलिए राज्य सभा की राह कठिन समझिये!
बोलो : राजा राम चंद्र की जय, सीता -सीता राम!
कुमार विश्वास को लेकर आई कुछ टिप्पणियां भी पढ़ें…
देवकी नंदन मिश्रा-
BJP को कविवर के दर्द को तुरंत समझना चाहिये और राज्य सभा भेज देना चाहिये। यह कवि है और हर मंच पर पैसे लेते है तो इनसे भी फीस लीजिये और राज्य सभा का दरवाजा खोलिये। मीडिया को नरपिशाच बोलने वाला यह बेशर्म अपनी जबान को घटिया नहीं कह रहा है। शर्म आनी चाहिये इसको।
जय प्रकाश पाठक-
राम जी का सहारा लेकर,ये माननीय बनना चाह रहे हैं. केजरीवाल का साथ पकड़ा, कुछ मिला नहीं. अब भाजपा से उम्मीद बची है. कहीं mlc, mp राज्यसभा जैसा कुछ मिल जाए. इसमें कुछ बुरा भी नहीं है. मगर राजनीति में आकर सेवा करने की भावना बड़ी “दुर्लभ वस्तु हो चुकी है.
अरुण कुमार-
इन्हीं नर पिशाचों से पहचान मिली है वर्ना कौन कुमार विश्वास! सच मे इस बन्दे ने तो कालनैमि से भी तेजी से रूप बदल लिया! कोई भी रूप धारण कर लेता है कभी हिन्दू मुस्लिम एकता की कहानी सुनाता है. फिर एक अब्दुल से बेटी बचाओ का नारा दे देता है! कालनेमी से भी ज्यादा खतरनाक है!
शैलेश पांडेय-
ये वही महराज हैं जिन्होंने अपनी पिपासा शांत करने के लिए सड़क पर अपने सुरक्षाकर्मियों से एक संभ्रांत डॉक्टर को पिटवा दिया था । फिर मामला सुर्खियों में आया तो मंडूकासन करते हुए माफीवीर दल के समर्थक माफीवीर बन गए । राजनीतिक रसूख के भुक्कड़ हो चुके पलटूबाज से कोई यह पूछे कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार में आपकी पत्नी क्यों राज्यमंत्री समान पद धारित किया?
शालू-
इससे मैं सहमत हूं, आज रामकथा कहता है, और कुछ सालों पहले दुबई में मुशायरों के नाम पर हिंदुओ और मोदी का मजाक उड़ाया जाता था तो यह ठहाके लगाता था। केजरी ने इसके साथ सही किया, वो तो योगी जी ने बचाया, नहीं तो अंदर होता।
अमृत सिंह संघा-
Bhaut tej bnda hai yeh. Par hai kisi ka nhi. Baas paise ka yr hai aur limelite Mein kaise rehtea hai esea bhaut achi taraha pata hai. Aur apnea app ku bhaut qayani samjhta hai.
पप्पू सिंह-
ये किसी का नही है, जिसने भी इसकी सहायता की उसकी पीठ में छुरा घोपा दिया इसने ये भाजपा के अलावा और किसी का नही होगा.
रजनीकांत-
कुमार अविश्वास को अब दिल्ली में सब गोदरेज का कबाट बोलते है, क्यों कि “आगे से सपाट, पीछे से सपाट, ये है गोदरेज का कबाट”
प्रभाकर कुमार मिश्रा-
इनको हक़ है ऐसा बोलने का! इन नरपिशाचों के trp रूपी रुधिर से ही पैदा हुए कवि हैं।



