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लल्लनटॉप से कई इस्तीफे हुए हैं, माहौल तनावपूर्ण!

लल्लनटॉप में सिर्फ अभिनव पांडेय ने इस्तीफ़ा नहीं दिया है। बीते हफ़्ते भर से पूरे दफ़्तर का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

कई कर्मचारी दफ़्तर नहीं जा रहे हैं, और जो जा भी रहे हैं, वे सिर्फ इसलिए कि सैलरी मिल जाए, फिर इस्तीफ़ा दे सकें। जैसे ही सैलरी आई, कई लोगों ने इस्तीफ़ा दे दिया। कुछ अभी लाइन में हैं।

पिछले तीन-चार दिनों में कम से कम 4–5 पत्रकार लल्लनटॉप छोड़ चुके हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं — अभिनव पांडेय, अभिनव झा, रवि सुमन, और प्रोडक्शन टीम से एक सदस्य। कई अन्य भी इस्तीफ़ा देने की तैयारी में हैं।

असल वजह 24 जुलाई को सामने आई, जब इंडिया टुडे समूह में अप्रैजल लेटर जारी किए गए। लल्लनटॉप के कर्मचारियों को भी उसी दिन अप्रैजल लेटर मिले। लेकिन अगले ही दिन कुछ कर्मचारियों को एक और लेटर थमा दिया गया — जिसमें उनकी सैलरी घटा दी गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, एक शख़्स, जो सौरभ द्विवेदी की जगह लेने की पूरी कोशिश में हैं, ने ही यह सारा खेल रचा। कहा जा रहा है कि उन्होंने सौरभ के कान भरकर कई लोगों की सैलरी कटवा दी।

हैरानी की बात यह है कि इस बवाल के बाद सौरभ द्विवेदी, कुलदीप मिश्रा, कमलेश सिंह और अमित सोनी—चारों कहीं विदेश यात्रा पर निकल गए। शायद इसलिए ताकि उन्हें जवाबदेही से बचा जा सके और ग़ुस्साए कर्मचारियों का सामना न करना पड़े।

बढ़ते विरोध को देखते हुए सौरभ द्विवेदी ने बाद में आश्वासन दिया कि पहली बार जो अप्रैजल लेटर दिए गए थे, वही मान्य माने जाएंगे। बात वहीं शांत हो गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने दफ़्तर के माहौल में गहरी नाराज़गी और असंतोष भर दिया।

वैसे भी, मीडिया या किसी भी संस्थान में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि एक ही महीने में दो-दो बार अप्रैजल लेटर जारी किए जाएं — और उसमें सैलरी घटा दी जाए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित!

उपरोक्त खबर पर कोई भी अपना पक्ष भड़ास तक [email protected] के ज़रिए भेज सकता है!

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