
नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को टेलीविज़न रेटिंग एजेंसियों (TRP) से जुड़ी नीति में संशोधन का दूसरा ड्राफ्ट जारी किया, जिसके तहत “लैंडिंग पेज” से मिलने वाली दर्शक संख्या (viewership) को अलग करने की तैयारी की गई है। मंत्रालय के इस कदम से टीवी उद्योग में हलचल मच गई है, क्योंकि यह फैसला न सिर्फ न्यूज़ चैनलों बल्कि पूरे टीवी व्यूअरशिप ढांचे को प्रभावित करेगा।
सबसे बड़ा सवाल: इस कदम के पीछे कौन?
ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर इस फैसले के पीछे कौन सी ताकतें हैं। लैंडिंग पेज विवाद पुराना है और इस पर प्रसारकों और TRAI के बीच मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में पिछले पांच साल से लंबित है। लेकिन हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया। रिपोर्ट में न्यूज़ चैनलों की रेटिंग में गंभीर गड़बड़ियां उजागर की गई थीं।
सरकार की मंशा साफ: विश्वसनीयता लौटाना जरूरी
सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि लैंडिंग पेज की प्रथा ने न्यूज़ मीडिया की साख को नुकसान पहुंचाया है, साथ ही आर्थिक संकट को भी बढ़ाया है। ऐसे में मंत्रालय इस विकृति को दूर करने के लिए इसे एक स्थायी नीति संशोधन के ज़रिए खत्म करना चाहता है, न कि केवल किसी कार्यकारी आदेश के ज़रिए।
अर्णब गोस्वामी से शुरू होकर उद्योगव्यापी संकट तक
2017 में जब अर्णब गोस्वामी ने रिपब्लिक टीवी लॉन्च किया था, तभी से लैंडिंग पेज को लेकर हलचल शुरू हुई थी। उस समय यह प्रथा मनोरंजन और खेल चैनलों में आम थी, लेकिन रिपब्लिक टीवी ने इसे खुलकर अपनाया, जिससे यह विवाद सुर्खियों में आया। बाद में यह तरीका अन्य न्यूज़ चैनलों ने भी अपनाया, जिससे TRP की दौड़ में भारी असंतुलन पैदा हुआ।
अब स्थिति यह है कि ज्यादातर न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स भी मान चुके हैं कि यह मॉडल आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है और केवल सरकारी हस्तक्षेप ही उनकी वित्तीय स्थिति सुधार सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां तक कि गोस्वामी ने भी फंडिंग संकट के बाद इस नीति में बदलाव का समर्थन किया है।
प्रधानमंत्री तक पहुंची चर्चा
जानकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर हुई कई बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे हैं। इन बैठकों में लैंडिंग पेज के समर्थक और विरोधी आमने-सामने आए। अंततः सरकार इस नतीजे पर पहुंची कि यह व्यवस्था न केवल मीडिया की साख को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि पूरे प्रसारण उद्योग के संतुलन को भी बिगाड़ रही है।

सरकार का रुख अब नहीं डगमगाएगा
“यह प्रसारण उद्योग की वृद्धि में मदद करने वाले संस्थान की विश्वसनीयता का सवाल है। सरकार का इरादा साफ है — लैंडिंग पेज जैसी विकृति को खत्म करना ही होगा, चाहे इससे आईपीएल जैसे बड़े प्रॉपर्टीज की रेटिंग में सुधार या गिरावट क्यों न आए।”
क्या है लैंडिंग पेज और अर्णब गोस्वामी ने कैसे इसका फायदा उठाया था? नीचे पढ़िए…



