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लैंडिंग पेज से टीआरपी बटोरने वाले अर्णब अब नैतिकता पर ज्ञान दे रहे हैं!

नई दिल्ली। एक दिलचस्प विडंबना सामने आई है—रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी और उनके संगठन न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के उस ड्राफ्ट संशोधन का स्वागत किया है, जिसमें टीवी रेटिंग्स से “लैंडिंग पेज” के उपयोग को खत्म करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि रिपब्लिक टीवी ने अपनी शुरुआती सफलता इन्हीं लैंडिंग पेजेस के जरिये हासिल की थी।

क्या है लैंडिंग पेज विवाद

लैंडिंग पेज कोई विज्ञापन नहीं होता, बल्कि ऐसा टीवी स्लॉट होता है, जहां चैनल को डिफॉल्ट रूप से सेट किया जाता है—मतलब जैसे ही टीवी ऑन होता है, वह चैनल अपने आप चल पड़ता है। इस तरह दर्शकों की गिनती अपने आप बढ़ जाती है और चैनल की टीआरपी कृत्रिम रूप से ऊंची दिखने लगती है।

2017 में जब रिपब्लिक टीवी लॉन्च हुआ था, तब उसने टाइम्स नाउ जैसे पुराने दिग्गज चैनल को पहली ही हफ्ते में पछाड़ दिया था। उस समय इंडस्ट्री में चर्चा यही थी कि रिपब्लिक ने देशभर में लैंडिंग पेज और मल्टीपल एलसीएन (Logical Channel Numbers) का जाल बिछाकर यह बढ़त हासिल की थी।

अर्णब का बयान और विडंबना

अर्णब गोस्वामी ने कहा— “MIB के इस कदम का एनबीएफ स्वागत करता है। कुछ चैनलों ने लैंडिंग पेज का दुरुपयोग कर विज्ञापनदाताओं को भ्रमित किया है। अब यह खराब प्रैक्टिस खत्म होनी चाहिए।”

यह वही अर्णब हैं, जिनके चैनल रिपब्लिक टीवी पर 2020 में मुंबई पुलिस की टीआरपी स्कैम जांच के दौरान लैंडिंग पेज के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे थे। कथित तौर पर अर्णब और तत्कालीन BARC सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच की व्हाट्सऐप चैट में चैनल की टीआरपी ‘मैनेज’ करने के संकेत भी मिले थे।

लैंडिंग पेज से मिली थी उड़ान

रिपब्लिक के लॉन्च के बाद कई नेटवर्क्स ने अपने टीवी बॉक्स को इस तरह प्रोग्राम किया था कि जैसे ही टीवी ऑन हो, रिपब्लिक टीवी स्वतः चालू हो जाए। हर बार ऐसा होने पर वह एक इंप्रेशन गिना जाता था। 2020 में Acquisory द्वारा कराई गई फॉरेंसिक ऑडिट ने यह पाया कि रिपब्लिक की रेटिंग्स को कृत्रिम रूप से ऊंचा बनाए रखने के लिए BARC के नियमों में फेरबदल तक किया गया था।

अब जब ‘खेल’ खत्म, ‘नैतिकता’ की बात

आज वही रिपब्लिक टीवी और उसका संगठन NBF सरकार के इस फैसले को “पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम” बता रहे हैं। NBF ने कहा—

मगर इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि यह वक्तव्य “नैतिकता से ज्यादा अवसरवाद” का उदाहरण है। क्योंकि जिन लैंडिंग पेजेस ने रिपब्लिक को शीर्ष पर पहुंचाया, आज उन्हीं के खिलाफ अर्णब मोर्चा संभाले हैं।

मंत्रालय के नए नियम

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित संशोधनों के तहत—

  • लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को टीआरपी में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • एक ही ग्रुप के कई चैनलों के क्रॉस-होल्डिंग पर सीमा तय की जाएगी।
  • रेटिंग एजेंसियों के लिए ऑडिट और पारदर्शिता के नए मानक लागू होंगे।
  • रेटिंग सैंपल साइज 80,000 से बढ़ाकर 1,20,000 घरों तक किया जाएगा।

टीवी इंडस्ट्री में हलचल

पिछले कुछ सालों में NDTV, Zee Media और कई क्षेत्रीय चैनलों ने टीआरपी सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। विज्ञापनदाताओं ने भी अब डिजिटल एनालिटिक्स और सोशल मीडिया मेट्रिक्स पर भरोसा बढ़ाना शुरू किया, जिससे BARC की पकड़ कमजोर हुई।

अंत में… ‘फुल सर्कल’

आज जब अर्णब गोस्वामी “लैंडिंग पेज खत्म करने” की मांग का समर्थन कर रहे हैं, तो यह भारतीय टीवी पत्रकारिता के एक पूरे चक्र का समापन प्रतीत होता है। 2017 में इसी तकनीक से सफलता पाने वाला चैनल अब उसके अंत का जयघोष कर रहा है—शायद यही रिपब्लिक की “टीआरपी कर्मा” कहानी का आखिरी अध्याय है।

कह सकते हैं—जिस हथियार से बाज़ी जीती थी, अब उसी के निष्क्रिय होने पर ताली बजाई जा रही है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Parv Sinha

    November 7, 2025 at 10:49 am

    ये हथियार अब बाकी चैनल इस्तेमाल करने ही होड मे लगे हैं, इसलिए आब अपने खिलाफ इस्तेमाल न हो पाए तो ऐसा करना जरूरी है

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