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लखनऊ के किस पत्रकार ने पोस्टिंग कराने के नाम पर पांच लाख रुपये हड़प लिया?

Anoop Gupta : राजधानी लखनऊ का एक बहुत बड़ा पत्रकार कौन है जो बटलर पैलेस में रहता है और मायावती सरकार के दौरान हेल्थ मिनिस्टर अंटू मिश्रा से अपनी निकटता बताते हुए दो सीएमओ की पोस्टिंग कराने के लिए 5 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए थे लेकिन काम नहीं हुआ. अब इन बड़े पत्रकार जी की नैतिकता देखिये कि काम ना होने पर भी आज तक 5 लाख रुपये वापिस नहीं किए. हमारा सभी बड़े पत्रकार भाइयों से अनुरोध है कि आप सभी लोग अनुमान लगाएं कि ये साहब कौन हैं, नहीं तो मजबूर होकर ‘दृष्टान्त’ को ही ये जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी.

Anoop Gupta : राजधानी लखनऊ का एक बहुत बड़ा पत्रकार कौन है जो बटलर पैलेस में रहता है और मायावती सरकार के दौरान हेल्थ मिनिस्टर अंटू मिश्रा से अपनी निकटता बताते हुए दो सीएमओ की पोस्टिंग कराने के लिए 5 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए थे लेकिन काम नहीं हुआ. अब इन बड़े पत्रकार जी की नैतिकता देखिये कि काम ना होने पर भी आज तक 5 लाख रुपये वापिस नहीं किए. हमारा सभी बड़े पत्रकार भाइयों से अनुरोध है कि आप सभी लोग अनुमान लगाएं कि ये साहब कौन हैं, नहीं तो मजबूर होकर ‘दृष्टान्त’ को ही ये जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी.

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लखनऊ के कौन कौन बड़े पड़े पत्रकार गायत्री प्रजापति से हफ्ता लेते थे, उन बड़े बड़े पत्रकारों के नाम का खुलासा ‘दृष्टान्त’ मैगज़ीन बहुत जल्द करेगी. इन रंगे सियारों और दलाल पत्रकारों को बेनकाब करना बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि गायत्री प्रजापति के साथ साथ ये तथाकथित दलाल पत्रकार भी गुनहगार हैं. वीवीआईपी गेस्ट हाउस में कमरा नंबर 203, 205 और 211 में गायत्री प्रजापति का दलाल पिंटू सिंह से पैसा लेने जाते थे बड़े बड़े पत्रकार.

लखनऊ से प्रकाशित पत्रिका दृष्टांत के संपादक अनूप गुप्ता की एफबी वॉल से.

इस स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Raj Silvano : Hemant Tiwari toh nahi!!!
राहुल गुप्ता बदायूं : फ्रेंचकट (दो दो चुनाव करा लिए) एक का खुद अध्यक्ष बन गया, और दारु के नशे में मार खाता रहता है, क्लब का फुटपाथ तक से वसूली करता है।
Pushpendar Chaudhary : सर जो भी है आप उसे नंगा कीजिए हम आपके साथ है
Qayamraza Rahil अनूप जी बहुत बढ़िया। मगर इस पहेली को आप ही सुलझाइए।
Rajneesh Yadav : आपकी निर्भीकता अद्भुत ही प्रतीत होती है, बरकरार रखियेगा
Yashwant Singh : दो बातें हैं. एक तो ये कि जो पत्रकार पैसे लेकर पोस्टिंग कराने का धंधा करता हो वह नैतिक नहीं है. ऐसे में वह काम न होने पर पैसे न लौटाए तो इसमें कोई नैतिकता / अनैतिकता का सवाल नहीं. यह विशुद्ध बाहुबल का मामला है. जिस अधिकारी ने ट्रांसफर के पैसे दिए, अगर वह वसूली नहीं कर पा रहा तो उसके बाहुबल / भौकाल पर सवाल खड़ा होता है. जो नहीं लौटा रहा, वह सफल बाहुबली / भौकाली है. दूसरी बात, जिन सर्वज्ञात दलाल पत्रकार महोदय के बारे में आपने लिखा है, उनके कारनामे कोई एक नहीं है. वह तो पत्रकारों की लाशों का भी सौदा कर लेता है. गजेंद्र सिंह हत्याकांड उदाहरण है.

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