सुशील मानव-
मुंबई की एसीबी अदालत ने पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और 5 अन्य के खिलाफ कथित शेयर बाजार धोखाधड़ी और नियामक उल्लंघनों के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
अदालत ने भष्ट्राचार निरोधक ब्यूरी (एसीबी) वर्ली को आदेश दिया कि वह माधबी पुरी बुच, ऑल टाइम मेंबर्स अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण, कमलेश चंद्र वर्श्नेय, BSE के CEO सुंदररमन राममूर्ति और पूर्व चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल के ख़िलाफ़ FIR दर्ज़ करें।
आरोप है कि एक कंपनी को 1992 के सेबी अधिनियम और उसके तहत नियमों और विनियमों के अनुपालन के बिना स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग की गई थी। इस लिस्टिंग में नियामक एजेंसियां, खास तौर से सेबी की सक्रिय मिलीभगत रही है। सेबी के अधिकारियों अपनी वैधानिक ज़िम्मेदारी निभाने में नाक़ामयाब रहे हैं। आरोप लगाया गया कि सेबी ने बाज़ार में हेरफेर को शह दिया और एक ऐसे कंपनी को लिस्टिंग की इज़ाज़त दिया जो तय मानदंडों को पूरा नहीं करती थी।
भारत की पहली महिला सेबी प्रमुख बुच पर अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग की ओर से हितों के टकराव के आरोप लगाए गए थे और इसके बाद राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा था। पूर्व सेबी प्रमुख ने शुक्रवार को अपनी तीन साल की अवधि पूरी की थी और रिटायर हो गईं।
पिछले साल अगस्त में, बुच पर इस्तीफा देने का दबाव डाला गया जब हिंडनबर्ग रिसर्च ने उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि अदाणी समूह में हेरफेर और धोखाधड़ी के दावों की गहन जांच को रोक दिया।
हिंडनबर्ग ने माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर आरोप लगाया कि उन्होंने ऑफशोर संस्थाओं में निवेश किया, जो कथित तौर पर एक फंड संरचना का हिस्सा थीं जिसमें विनोद अदानी (अदानी समूह के संस्थापक अध्यक्ष गौतम अदानी के बड़े भाई) ने भी निवेश किया था।
बुच ने इस आरोप का खंडन किया था, यह कहते हुए कि निवेश उनके नियामक में शामिल होने से पहले किए गए थे और उन्होंने सभी आवश्यकताओं का पालन किया था। बता दें हिंडनबर्ग ने हाल ही में अपने व्यवसाय को बंद करने की घोषणा की।
पुष्प रंजन-
खेल तो हुआ है। तभी पूर्व सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के विरुद्ध केस दर्ज़ करने का कोर्ट आदेश दिया गया।
भारत की पहली महिला सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच को बचाने की ज़िम्मेदारी निम्मी पर आन पड़ी है. बुच परअमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर ‘हिंडनबर्ग’ द्वारा हितों के टकराव के आरोप लगाए गए थे. बुच ने शुक्रवार को अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया, इसके अगले दिन एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी, और विनियामक उल्लंघन के संबंध में बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।
विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगर ने शनिवार को पारित आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया विनियामक चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।”
पिछले साल अगस्त में, बुच पर इस्तीफा देने का दबाव था, जब हिंडनबर्ग रिसर्च ने उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया, जिससे अदानी समूह में हेरफेर और धोखाधड़ी के दावों की गहन जांच नहीं हो पाई। हिंडनबर्ग ने माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर ऑफशोर संस्थाओं में निवेश करने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर एक फंड संरचना का हिस्सा थे, जिसमें अदानी समूह के संस्थापक अध्यक्ष गौतम अदानी के बड़े भाई विनोद अदानी ने भी निवेश किया था।
बुच ने आरोप से इनकार करते हुए कहा, कि निवेश उनके नियामक में शामिल होने से पहले किए गए थे, और उन्होंने सभी प्रकटीकरण आवश्यकताओं का अनुपालन किया था। हिंडनबर्ग ने हाल ही में अपना व्यवसाय बंद करने की घोषणा की थी। लेकिन, हिंडनबर्ग का प्रेत पीछा नहीं छोड़ रहा।
भारत में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट तब चर्चा में आई, जब इसने 24 जनवरी 2023 को देश के प्रमुख औद्योगिक घराने अदानी समूह के ख़िलाफ़ रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कहा गया था, कि अदानी समूह के मालिक गौतम अदानी ने 2020 से ही अपनी सात लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में हेरफेर के ज़रिये 100 अरब डॉलर कमा लिए हैं.
रिपोर्ट में गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे ,और कहा गया था कि वो 37 शैल कंपनियां चलाते हैं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है.
3 जनवरी, 2024 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने अदानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के अनुरोधों को खारिज कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने पूंजी बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) पर भरोसा जताया. फैसले के बाद अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया था, “…सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पता चलता है कि सत्य की जीत हुई है… मैं उन लोगों का आभारी हूं जो हमारे साथ खड़े रहे. भारत की विकास गाथा में हमारा विनम्र योगदान जारी रहेगा.”


