भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच का कार्यकाल 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो गया है, और अब उनकी विदाई हो चुकी है। अपने कार्यकाल के दौरान, बुच पर अडानी समूह से संबंधित विभिन्न आरोप लगे थे। लेकिन उनकी विदाई पर ताजा चर्चा समारोह यानी फेयरवेल पार्टी न होने को लेकर छिड़ी है।
माधबी पुरी बुच पर कार्यकाल के दौरान प्रमुख आरोप लगे-
- हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोप (अप्रैल 2024): अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच का अडानी समूह से जुड़े ऑफशोर फंड में निवेश था, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।
- कांग्रेस के आरोप (अगस्त 2024): कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि माधबी पुरी बुच की कंसल्टेंसी फर्म, एगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड, ने छह कंपनियों से वित्तीय लाभ प्राप्त किया, जिससे सेबी की आचार संहिता का उल्लंघन हुआ।
- ICICI बैंक से भुगतान (सितंबर 2024): आरोप लगे कि सेबी प्रमुख रहते हुए भी माधबी पुरी बुच को ICICI बैंक से वित्तीय लाभ मिलते रहे, जो हितों के टकराव का मामला हो सकता है।
- कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार (सितंबर 2024): सेबी के लगभग 500 कर्मचारियों ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच का व्यवहार अनुचित है, जिससे कार्यस्थल का माहौल प्रभावित हो रहा है।
इन आरोपों के बावजूद, वित्त मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में स्पष्ट किया कि माधबी पुरी बुच के खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है।
हालांकि, इन आरोपों के बाद संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने सेबी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए माधबी पुरी बुच को 24 अक्टूबर 2024 को तलब किया था।
अंततः, माधबी पुरी बुच का तीन साल का कार्यकाल 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो गया, और सरकार ने नए सेबी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की। बुच के विदा होने के बाद अब अडानी और उनकी फर्जी शेल कंपनियों से भविष्य में अब शायद ही पर्दा उठ सके।
आवेश तिवारी-
भ्रष्टाचार की देवी, हमारी संसदीय परंपराओं, हमारे कानून और हमारी जनता की आंख में धूल झोंककर अंततः विदा हो गई।
सेबी के मेहनतकश कर्मचारियों अधिकारियों में माधबी की विदाई को लेकर खुशी का माहौल है। गजब यह रहा कि माधबी के लिए कोई विदाई समारोह भी आयोजित नहीं किया गया।
मार्च 2022 को सेबी चीफ की जिम्मेदारी संभालने के बाद बुच का 28 फरवरी (शुक्रवार) को आखिरी दिन था। सेबी ऑफिस की परंपरा के अनुसार बुच को शुक्रवार को फेयरवेल दिया जाना था।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पूर्व चेयरमैन माधबी पुरी बुच को बिना फेयरवेल के ही जाना पड़ा। तीन साल पद पर रहने के बाद इस तरह अलग होने से यही लग रहा है कि वह अभी इसके लिए तैयार नहीं थीं।
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