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सुख-दुख

यदि मुझसे कोई केवल एक बात बोलने को कहे जो भारत को दुनिया से अलग बनाती है, मेरा उत्तर रहेगा- ‘भारतीय महिलायें!’

नितिन त्रिपाठी-

भारत से बाहर लंबे समय से रह रहे किसी भी NRI से पूछिए वो भारत की कौन सी चीज सबसे ज़्यादा मिस करता है.
विदाउट फेल उत्तर मिलेगा – भारत में मेड्स इतनी सहजता और इतने बजट में उपलब्ध हैं.

मेड्स ही नहीं, नैनी, कुक, घरेलू टेस्ट के लिए अचार पापड़ बुकनू आदि इन सभी के लिए कोई न कोई फीमेल वर्क फोर्स एवलेबल है.

और ऑब्वियस्ली हाउस वाइव्स वह तो ऊपर लिखी सब चीजों का फ्री ऑल इन वन पैकेज हैं.

कुछ दिनों पूर्व मेरी पोस्ट पर एक महिला का प्रश्न था ऑफिस से वापस आकर उसे खाना बनाने में तीन चार घंटे लगते हैं – मैंने उसे काम कट करने के सलाह दी थी – यह मेरा काम था, तय बात है सलाह न मानना उसका काम रहा होगा. भारतीय महिलायें वर्किंग वोमेन भी होती हैं तो भी उनमें यह सेवा भाव बहुत ज़्यादा रहता ही है.

इतना ही नहीं किसी भी मंदिर चले जाइए, व्रत त्योहार ये सब में भारतीय महिलायें ही हैं जिन्होंने धर्म संस्कृति आदि को जीवित रखा है.

मुँह मुँह की बातें छोड़ दी जायें, हँसी ठिठोली छोड़ दी जाये तो विवाह के लिए हर भारतीय पुरुष की फर्स्ट चॉइस प्रायः भारतीय लड़की ही होती है – वह जिसे वह अपने घर ले जा सके. विदेश में भी आप रेयर पायेंगे कि भारतीय लड़के किसी विदेशी से विवाह करें.

यदि मुझसे कोई केवल एक बात बोलने को कहे जो भारत को दुनिया से अलग बनाती है – मेरा उत्तर रहेगा भारतीय महिलायें.

ऐसी सभी महिलाओं को नमन और उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभ कामनायें.


मणिका मोहिनी-

कई साल पहले की बात है। मेरे यहां जो घरेलू सहायिका काम करती थी, वह पास ही एक झुग्गी में रहती थी। उसके कई बच्चे थे। पति रोज़ गाली-गलौज करता था, मारता-पीटता था। अचानक उसके पति की मृत्यु हो गई। बड़ा रोना-पिट्टना हुआ। चार दिन बाद काम पर आने लगी।

कुछ दिन बाद देखा, लाल साड़ी और चूड़ियां पहन कर आई है। अपने आप बताया, ‘मैं दूसरे के घर बैठ गई।’ मैंने कहा, ‘तेरे इतने बच्चे हैं। उन्हें पालती। दूसरी शादी की ज़रूरत क्या थी? पहले उससे पिटती थी, अब यह पीटा करेगा। और करनी ही थी तो थोड़े दिन तो सबर करती।’

वह बोली, ‘अरे मेमसाब, आपको पता नहीं है। अकेली औरत खुला खज़ाना होती है। दस कुत्ते पीछे लग जाते हैं। दस कुत्तों से बचने के लिए एक कुत्ते की भौं-भौं सुनना ज़्यादा अच्छा है।’ कह कर वह खिल-खिल हंस दी।

अनेक पुरुषों से अपनी रक्षा करने के लिए किसी एक से अपनी दुर्गति करवानी पड़ती है। स्त्री ने अपने बचाव का यह रास्ता चुना।

महिला दिवस मुबारक हो।

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