लखनऊ : ताजा सूचना है कि यहां से प्रकाशित एक अखबार के अधिकारी ने लेबर डिपार्टमेंट के एक दलाल को चार लाख रुपए दिए हैं। इसी दलाल ने कुछ दिन पहले मजीठिया मामले से संबंधित आरटीआई के जवाब में गोल-मटोल कर फाइल को लौटा दिया था।

एक वरिष्ठ न्यूज रिपोर्टर ने बताया कि आज लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारी वाट्सेप्प पर ऑल इंडियाल लेवल पर मजीठिया से संबंधित मैटर को दबाने के लिए घूसखोरी का मोलतोल कर रहे हैं। उससे संबंधित मैसेज एक दूसरे को पास कर रहे हैं। लेबर डिपार्टमेंट के पास पूरी पॉवर है, मजीठिया लागू करवाने और आरोपियों को जेल भेजवाने तक की, लेकिन वे कानून के मुताबिक काम नहीं करते हैं।
रिपोर्टर ने बताया कि उसने मजीठिया के संबंध में जब लेबर डिपार्टमेंट के एक अफसर से कुछ जानना चाहा तो उसने उसके मीडिया मैनेजमेंट को बता दिया कि अब रिपोर्टर भी मजीठिया मैटर का अपडेट पूछ रहे हैं। लेबर डिपार्टमेंट के अफसर कहते हैं कि रोज प्रेस के मैटर को ही देखेंगे तो कैसे काम होगा। उनको पूरे स्टेट के फैक्ट्री-कारखानों को देखना पड़ता है। कहीं कोई लेबर प्रॉब्लम तो नहीं है। मीडिया के लोग तो बहुत पॉवरफुल हैं। बड़े वेतनभोगी हैं। सभी मीडियाकर्मी एक स्टैंडर मेंटेन करते हैं। वे पर्याप्त वेतन मिलने से खुश और संतुष्ट हैं। कोई कर्मचारी असंतुष्ट है तो शिकायत करे।
अब बात ये बनती है कि क्यों नहीं सेंट्रल या स्टेट लेबर ऑफिस के स्तर पर इन गतिविधियों की पड़ताल कराई जाए कि 2011 के बाद इन लोगों ने कितने पैसे का खेल किया है। इस समय मजीठिया मामले को सुप्रीम कोर्ट में असफल करने के लिए मीडिया प्रबंधन हर स्तर पर सक्रिय है। उसे देखते हुए मीडियाकर्मियों को भी इस समय पूरी तरह चौकन्ना रहना होगा। मीडिया कर्मियों को अपने स्थानीय श्रम कार्यालयों की गतिविधियों पर भी निगाह रखकर चलना होगा।
मजीठिया मंच फेसबुक वॉल से
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hemant sharma
April 12, 2015 at 5:21 am
case ka jitana jaldi niptaara ho accha hai.
haal naidunia
April 13, 2015 at 2:21 pm
उतरने लगी आनंद की मेहंदी,
दबाव में लगातार गलत निर्णय
कर रहे हैं पांडे
भास्कर से हाल ही में बड़ी उम्मीद से इंदौर नईदुनिया में लाए आनंद पांडे की मेहंदी उतरने लगी है… ऊंची और बड़ी बातों से अपनी मार्केटिंग कर रहे पांडे नईदुनिया में आ तो गए पर काम के दबाव से दो ही महीनों में सांसे फूलने लगी है… पांडे के दबाव में आने की एक बड़ी और है… गलत साथियों का चयन… पांडे के साथ रायपुर भास्कर में काम कर रहे मनोज प्रियदर्शी को मोटी सेलेरी देकर नईदुनिया लाया गया… भाषा ज्ञान और अंग्रेजी में कमजोरी के बावजूद उन्हें सेंट्रल डेस्क का प्रभारी बना दिया… स्वाभाविक था प्रतिभाशाली लोग परेशान होने लगे… भरे संपादकीय हॉल में जब सेंट्रल डेस्क के वरिष्ठ सहयोगी सचींद्र श्रीवास्तव ने मनोज को उनके कमजोर न्यूज सेंस पर आईना दिखाया तो पांडे के प्रिय पात्र प्रियदर्शी हत्थे से उखड़ गए… दोनों में जमकर तू-तू मैं-मैं हुई… सचींद्र तब और दुखी हो गए जब बेकसूर होने के बाद भी पांडे ने उन्हें आड़े हाथ लिया… अच्छे लोगों पर नजरें जमाए बैठे भास्कर ने मौके का फायदा उठाया और काम के जानकार सचींद्र को तुरंत ऑफर दे दिया… सचींद्र ने भी जमकर शॉट मारा, पद और पैसे में प्रमोशन के साथ अपना भाग्य भास्कर से जोड़ लिया… ऐसी ही कहानी उज्ज्वल शुक्ला की है… पंडित जी ने पिछले 10 सालों से नईदुनिया से नाता जोड़ रखा था… पांडे परिवार से सार्वजनिक भिडंत होने के बाद उन्होंने सधा हुआ वक्तव्य जारी किया – यदि हाड़तोड़ मेहनत के बाद जिल्लत ही सहनी हो तो ज्यादा पैसे व बड़े पद के ऑफर को क्यों ठुकराया जाए… नईदुनिया सेंट्रल डेस्क पर ऑनलाइन एडिटिंग-पेजमेकि ंग का यह आजमाया खिलाड़ी अब भास्कर की ओर से बेटिंग कर रहा है… अब कहानी में थोड़ा आक्रामक घुमाव है… सेंट्रल डेस्क की पुरानी साथी सीमा शर्मा ने पांडे जी के पहियों से सीधा पंगा लिया… पूरे संपादकीय के सामने मनोज प्रियदर्शी का ऐसा पानी उतारा कि एकबारगी तो सभी को सांप सूंघ गया… सीमा ने तर्क के साथ अपनी बात भी रखी, तार्किक परिणाम भी निकाला… असर देखिए अब उनके नाम से, उनसे जुड़ी सारी बातें अपने आप सध जाती हैं… अब जोर का झटका धीरे से… नईदुनिया की मिट्टी में पले बढ़े मधुर जोशी ने सेलरी और थुक भरा तमाचा इस्तीफे के रूप में दे मारा… जोशी जी की सुबह अब भास्कर के उजाले में हो रही है… जानकारी के लिये बता दूं कि गजेंद्र मिटिंग से गालियां देकर नहीं गया। बस उसने पांडे की गालियां खाने से इंकार कर दिया और तमीज से बात करने की नसीहत दे डाली। जबकि पांडे को जूते लगाये जाने चाहिये थे। ऐसे ही जो जयेंद्र जी को जानता है वो सपने में भी नहीं सोच सकता कि वे गलती करें और उनको भाफी मांगना पड़े। एक मूर्ख और जाहिल को यदि किसी समझदार का हेड बनाया जाएगा तो समझदार जयेंद्र जी की तरह खुद को किनारे कर लेगा। गधे को घोड़े पर सवार होते देखना है तो अभी नईदुनिया आ जाओ।
खुफिया विभाग पर पांडे खर्च कर रहे डेढ़ लाख रुपए महीना
शोले का मशहूर पात्र हरिराम नाई आपको याद ही होगा… ठीक यही भूमिका में इन दिनों काम कर रहे हैं सेंट्रल डेस्क के मनोज प्रियदर्शी, सिटी डेस्क के नितिन शर्मा और रिपोर्टर प्रमोद त्रिवेदी… तीनों का कुल वेतन करीब डेढ़ लाख रुपए महीना है… लेकिन जिम्मेदारी है केवल सूचना संग्रह… कहां क्या हो रहा, कौन क्या कर रहा, किसने किससे कितनी देर क्या बात की, पल-पल के अपडेट पर नजर रखना और सीधे सिंहासन तक खुफियापंथी करना… जिम्मेदार पद-मोटा वेतन और काम केवल हरिराम नाई का… बस यही वजह है कि इन दिनों ये तीनों पूरी टीम के निशाने पर हैं… कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन कोई सिरफिरा कोई बड़ी खबर दे दे…