मजीठिया मांगा तो भास्कर खुलेआम साइबर क्राइम पर उतर आया

मजीठिया वेज बोर्ड अवार्ड मांगने वाले कर्मचारियों का जानी दुश्‍मन बन गया है दैनिक भास्‍कर। कर्मचारियों के उत्‍पीड़न-परेशान करने के तमाम उपक्रमों-तिकड़मों में ताजा कारनामा आपराधिक कार्यों का जुड़ गया है। भास्‍कर खुद को अपने जन्‍म काल से ही कानून कायदे से ऊपर मानता रहा है, लेकिन अब तो सरेआम क्राइम करने पर उतर आया है। एकदम नया मामला चंडीगढ़ एडीशन में साइबर क्राइम का है और इसे आजमाया है एचआर डिपार्टमेंट के कर्मचारी सुधीर श्रीवास्‍तव के ऊपर। उनका कुसूर महज इतना है कि उन्‍होंने अपनी पगार मजीठिया वेज बोर्ड की संस्‍तुतियों के हिसाब से करवाने के लिए आवाज उठा दी। पहले तो उन्‍होंने अपने हाकिमों के समक्ष अपना वेतन बढ़ाने की डिमांड रखी। जब हाकिमों ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया और साथ ही अनेक बेबुनियाद आरोपों का पिटारा उनके सिर पर पटक दिया तो उन्‍होंने इंसाफ के लिए वर्किंग जर्नलिस्‍ट एवं नॉन जर्नलिस्‍ट एक्‍ट के दफा 17 का सहारा लेते हुए लेबर कमिश्‍नर और लेबर कोर्ट का रुख कर लिया।

एचआर के मुखिया मनोज मेहता को जब पता चला कि सुधीर श्रीवास्‍तव ने इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है तो उन्‍होंने आनन फानन में अपने एक विभागीय अधिेकारी हरीश कुमार और एक कर्मचारी विजय कुमार की मदद से सुधीर का फर्जी इस्‍तीफा उनके आफिशियल मेल से भास्‍कर के आला अधिकारियों को भेज दिया। दरअसल सुधीर के सिस्‍टम और ऑ‍िफशियल मेल का पासवर्ड एक ही है जिसकी जानकारी उनके साथ काम करने वाले सभी लोगों को थी। सुधीर ने लोकल से लेकर हेड ऑि‍फस तक के आईटी सेल को अनगिनत बार शिकायत की कि उनके सिस्‍टम और मेल का पासवर्ड अलग अलग दिया जाए, लेकिन इसकी कहीं भी और कभी भी सुनवाई नहीं हुई। सुधीर के ही सिस्‍टम से प्रिंटर व स्‍कैनर भी अटैच थे, इसीलिए सभी सहकर्मी उनके सिस्‍टम का बहुत ही अधिकार से खुला इस्‍तेमाल करते थे।

बहरहाल, इस साइबर फर्जीवाड़े के दिन यानी 20 जून को सुधीर शाम साढ़े 8 बजे हमेशा की तरह बॉयोमेटरिक यंत्र पर अंगूठा लगाकर घर के लिए निकल गए। उसके बाद एचआर प्रधान मनोज मेहता, हरीश कुमार और विजय कुमार ने अपनी क्रिमिनल करतूत को अंजाम देते हुए सुधीर का मेल खोलकर उनका फर्जी इस्‍तीफा लिखकर अपने भोपाल व दिल्‍ली के आकाओं की खिदमत में पेश कर दिया। अगले दिन 21 जून को सुधीर जब ड़यूटी के लिए भास्‍कर पहुंचे तो सिक्‍योरिटी गार्ड ने उन्‍हें गेट पर रोक लिया। कहने लगा कि आपको अंदर जाने की मनाही है। बाद में मनोज मेहता और हरीश कुमार बाहर गेस्‍ट रूम में आकर मातमपुर्सी के अंदाज में सुधीर से मिले। सहानुभूति का नाटक करते हुए कहने लगे, ‘अरे, तुमने तो इस्‍तीफा दे दिया है।‘ इतना सुनते ही सुधीर का माथा ठनका और कहा, ‘मैंने इस्‍तीफा कहां दिया है ‘, अच्‍छा तो तुम लोगों ने मेरा मेल खोलकर इस्‍तीफा डाल दिया। ठीक है, कोई बात नहीं।

कहासुनी, नोक झोंक के बाद सुधीर खिन्‍न मन से घर चले गए और बाद में पुलिस केस कर दिया। मतलब दैनिक भास्‍कर के रहनुमाओं पर साइबर क्राइम का केस। पुलिस ने पिछले दिनों कई बार दैनिक भास्‍कर के चंडीगढ़ कार्यालय में सबूत खंगालने के लिए धावा बोला और छापेमारी की। पुलिस ने फुटेज मांगा तो मनोज मेहता, हरीश कुमार और विजय कुमार ने घटना की फुटेज न होने की बात कही। साथ ही बोल दिया कि घटना की फुटेज हेड आफिस भोपाल भेज दी गई है। पुलिस ने मनोज मेहता और हरीश कुमार को साइबर क्राइम थाने तलब किया। मेहता तो भागता-छिपता फिरता रहा लेकिन हरीश साइबर क्राइम थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने तगड़ी पूछताछ की। फिर भी हरीश अपराध कबूल करने में ना-नुकुर करता रहा।

दैनिक भास्‍कर चंडीगढ़ के संपादकीय के वरिष्ठ लोग मनोज मेहता और हरीश कुमार को बचाने-महफूज रखने में जुटे रहे। इन लोगों ने एसएसपी से लेकर साइबर क्राइम थाने के इंचार्ज के चौखट के न जाने कितने चक्‍कर लगा डाले हैं। संपादकीय के लोगों का साइबर अपराधियों को बचाने में अपनी सारी ऊर्जा खपा देना शर्मनाक है।

साइबर पुलिस का डंडा चलना शुरू होते ही मनोज मेहता ने एचआर के एक नवधा मैनेजर पवन त्रिपाठी के दस्‍तखत से सुधीर श्रीवास्‍तव के खिलाफ पुलिस में एक कंप्‍लेंट दे दी। इस कंप्‍लेंट में बेबुनियाद आरोप लगाए गए। पुलिस ने कहा कि यह मसला आफिस का है, वहीं निपटा लिया जाना चाहिए। खुद को फंसता देख पवन त्रिपाठी ज्‍वाइनिंग के 4–5 दिन बाद ही इस्‍तीफा देकर चलता बन गया। पुलिस त्रिपाठी को पूछताछ के लिए बुलाने की जुगत में लगी हुई है।

इस्‍तीफे का फर्जीवाड़ा और साइबर क्राइम का उपरोक्‍त मामला मेसेज यह देता है कि मजीठिया पाने के लिए हमें ऐसे न जाने कितने गंभीर मोर्चों पर लड़ना जूझना पड़ेगा। लेकिन जब ठान लिया है कि मजीठिया लेना है, तो ऐसी कितनी भी बाधाएं, रुकावटे आएं, मालिकान व उनके कारिंदे चाहे कितनी भी बदमाशियां करें, मजीठिया लेकर रहेंगे। सुधीर श्रीवास्‍तव सरीखे लोग एक मिसाल हैं, एक प्रेरणा हैं।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Posted by Bhadas4media on Tuesday, August 27, 2019
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Comments on “मजीठिया मांगा तो भास्कर खुलेआम साइबर क्राइम पर उतर आया

  • Ashutosh mishra says:

    यही same केस तो मेरे साथ भी हुआ है 16 अगस्त को दैनिक जागरण कानपुर में ,मेरा इस्तीफा लिखकर रिलीव भी कर दिया गया है ,तब से मैं घर पर ही बैठा हूँ ।

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  • मनोज अपरेजा says:

    ये सब बकवास है सच यह है सुधीर श्रीवास्तव ने एक कर्मचारी जो पिछले आठ महीने से एब्सेंट था उसके साथ मिलकर उसको नो महिने का वेतन देता रहा और उसमें से आठ महीने तक हिस्सा लेता रहा। जब पकड़ा गया तो केस का बहाना बना कर सबको बदनाम कर रहा है कंपनी का 2 लाख रुपये की हेराफेरी की है जिसे इसने खुद स्वीकार किया है ।

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  • राजेश says:

    आठ महिने से अबसेंट कर्मचारी का वेतन कैसे निकल सकता है वो भी भास्कर मे ?
    और ऐसा कितना वेतन मिळता होगा ऊस कर्मचारी को की वो हप्ता चुका सके
    फिर भी मान लिया की ऐसा हुआ होगा तो फिर श्रीवास्तव अकेला नही होगा इस मामलेमे

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