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पुलिस के खिलाफ खबरें चलाने वाले टीवी जर्नलिस्ट मनीष सोनी को फर्जी मामले में जेल भेजा गया

अंबिकापुर के न्यूज़24 के पत्रकार मनीष सोनी को आज गिरफ्तार कर लिया गया। पत्रकारों की गिरफ्तारी के लिए यह तय किया गया था कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार द्वारा गठित एक कमेटी मामले की जांच करेगी उसके बाद तय किया जाएगा कि गिरफ्तारी होगी या नहीं। लेकिन इस मामले में पुलिस ने इस नियम का पालन नहीं किया। आज अचानक पुलिस मनीष के घर पहुंची और उन्हें थाने ले गयी। मनीष को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुराना मामला भी पुलिस ने खुन्नस में एकतरफा कार्यवाही करते हुए मनीष के खिलाफ एफआईआर किया था। तब उच्च पुलिस अधिकारियों ने दखल देकर मामले को दबवाया था। लेकिन उसी मामले में अब पुलिस अफसरों ने मनीष को अरेस्ट करा दिया। मनीष की कई खबरों से पुलिस वाले चिढ़े हुए थे।

अंबिकापुर के न्यूज़24 के पत्रकार मनीष सोनी को आज गिरफ्तार कर लिया गया। पत्रकारों की गिरफ्तारी के लिए यह तय किया गया था कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार द्वारा गठित एक कमेटी मामले की जांच करेगी उसके बाद तय किया जाएगा कि गिरफ्तारी होगी या नहीं। लेकिन इस मामले में पुलिस ने इस नियम का पालन नहीं किया। आज अचानक पुलिस मनीष के घर पहुंची और उन्हें थाने ले गयी। मनीष को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुराना मामला भी पुलिस ने खुन्नस में एकतरफा कार्यवाही करते हुए मनीष के खिलाफ एफआईआर किया था। तब उच्च पुलिस अधिकारियों ने दखल देकर मामले को दबवाया था। लेकिन उसी मामले में अब पुलिस अफसरों ने मनीष को अरेस्ट करा दिया। मनीष की कई खबरों से पुलिस वाले चिढ़े हुए थे।

कुछ महीने पहले मनीष की मां के साथ एक महिला कांस्टेबल ने बदतमीज़ी और गाली गलौज की थी। मां जब रोने लगीं तो मनीष और महिला कांस्टेबल में तीखी बहस हुई। मनीष ने RI को फ़ोन करके पूछा कि इस महिला कांस्टेबल के खिलाफ शिकायत कहां होगी। मनीष ने तुरंत तो शिकायत दर्ज नहीं कराई लेकिन आरआई ने यह बात महिला कांस्टेबल तक पहुंचा दी। इस मामले में मनीष के पास RI से बातचीत का ऑडियो भी है। महिला कांस्टेबल ने तुरंत मनीष के खिलाफ FIR दर्ज करा दिया। यानि शिकायत पत्रकार को महिला कांस्टेबल के खिलाफ करना था लेकिन महिला कांस्टेबल ने ही भनक पाने के बाद मनीष के खिलाफ एफआईआर करा दिया। महिला कांस्टेबल की शिकायत की बिना जांच किए मनीष के खिलाफ FIR हो गयी। मनीष और उसकी माँ ने जब थाने में अपनी शिकायत करानी चाही तो उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। पुलिस की एकतरफा कार्यवाही की शिकायत जब कुछ अधिकारियों से की गयी तो उनके दखल के बाद उस समय मनीष के सिर पर गिरफ्तारी की लटकी तलवार हट गई थी।

अब उसी मामले की फाइल खोलकर पुलिस के अधिकारी कुछ नई-पुरानी अदावत निकाल रहे हैं। मनीष ने ज़ी न्यूज़ संवावदाता रहते हुए पुलिस के खिलाफ कई स्टोरी की थी जिससे SP चिढ़े थे। RI अपनी चहेती कांस्टेबल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और एक पत्रकार भी इसमें दिलचस्पी ले रहा है। इस पत्रकार की वसूली को मनीष ने कोरिया संवादाता रहते एक्सपोज़ किया था और वो लिस्ट भड़ास4मीडिया में प्रकाशित की थी जिसमें कथित पत्रकार पुलिस से महीना लेने का ज़िक्र था। इस मामले में दिलचस्प बात है कि यह कथित पत्रकार बलवा के मामले में सज़ायाफ़्ता है और बताया जाता है कि उस कथित की पत्नी भी फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट के मामले में फरार है।

इस पत्रकार ने मनीष सोनी को फंसाने के लिए कोरिया SP पर भी दबाव डाला था। मनीष सोनी एक आंख से दिव्यांग हैं जबकि उक्त पत्रकार ने मनीष की दिव्यांगता को फ़र्ज़ी बताकर उसकी शिकायत की थी। sp कोरिया ने जब मामले की जाँच कराई तो मेडिकल बोर्ड के दस्तावेज मनीष ने पेश किये थे। रिपोर्ट के आधार पर Sp ने मामले को FIR के लायक नहीं माना तो इस पत्रकार ने पहले RTO फिर SP ऑफिस पहुंच के ऊपर के पुलिस अधिकारियों की धौस दिखाकर हंगामा काटा। तब SP ने धक्के देकर उसे बाहर का रास्ता दिखाया था। बताया जाता है की यह पत्रकार पुलिस अधिकारियों की शिकायत ऊपर के अधिकारियों तक पहुंचाने की धौंस दिखाकर मनमानी करता है। कुछ लोगों का यहाँ तक कहना है कि उसकी गाड़ी में तेल भी पुलिस थानों से भरवाये जाते हैं।

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