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मनोज श्रीवास्तव ने पत्रकारिता का रोब दिखाकर अपनी पत्नी का तबादला लखनऊ नहीं कराया, बल्कि वह स्वयं वाराणसी चले गये

लखनऊ । वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव को आज यू.पी. प्रेस क्लब में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। वक्ताओं ने उन्हें उसूलों से समझौता न करने, खबरों पर पैनी नजर रखने और जल्द ही लोगों को दोस्त बना लेने वाला स्वाभिमानी पत्रकार बताया। अमर उजाला के विशेष संवाददाता स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव का परसों दिल का दौरा पड़ने से वाराणसी में निधन हो गया था। कल सुबह यहां बैकुण्ठ धाम पर उनके इष्ट मित्रों, राजनेताओं ओर पत्रकारों की भारी भीड़ के बीच अन्त्येष्टि की गयी।

लखनऊ । वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव को आज यू.पी. प्रेस क्लब में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। वक्ताओं ने उन्हें उसूलों से समझौता न करने, खबरों पर पैनी नजर रखने और जल्द ही लोगों को दोस्त बना लेने वाला स्वाभिमानी पत्रकार बताया। अमर उजाला के विशेष संवाददाता स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव का परसों दिल का दौरा पड़ने से वाराणसी में निधन हो गया था। कल सुबह यहां बैकुण्ठ धाम पर उनके इष्ट मित्रों, राजनेताओं ओर पत्रकारों की भारी भीड़ के बीच अन्त्येष्टि की गयी।

शोक सभा में आई.एफ.डब्ल्यू.जे. अध्यक्ष के. विक्रम राव ने कहा कि मनोज उन लोगों में थे जिन्होंने पत्रकारिता का रोब दिखाकर अपनी पत्नी का तबादला लखनऊ नहीं कराया, बल्कि वह स्वयं वाराणसी चले गये। डी.एन.ए. के संपादक निशीथ राय ने कहा कि समझौता न करना उनकी आदत में शामिल था। अमर उजाला के समाचार संपादक शिशिर द्विवेदी ने कहा कि वह अपना पूरा जीवन उत्सव की तरह जिये। वह कभी भी बड़े आदमी से प्रभावित नहीं होते थे। यू.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने कहा कि वह नई नस्ल के उन पत्रकारों में थे जिन्हें पढ़ने का शौक था और जो पत्रकारिता पर बात करते थे। यू.पी. प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह और सचिव जे.पी. तिवारी ने  कहा कि बहुत कम लोग इस आयु में पत्रकारिता में वह स्थान बना पाते हैं, जो मनोज ने बनाया। क्लब के उपाध्यक्ष गोविन्द पंत राजू ने कहा कि वह खबर की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान देते थे। लखनऊ श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष सिद्धार्थ कलहंस ने शिकायत की कि वह अलमस्त जीवन तो जिये लेकिन उन्होंने अपने स्वास्थ्य की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाण्डेय ने कहा कि लोगों ने मनोज को कभी उदास नहीं देखा। सुरेश बहादुर सिंह ने सुझाव दिया कि इस प्रकार की परिस्थितियों का शिकार होने वाले पत्रकार के परिवार की मदद के लिए कोई स्थायी व्यवस्था होना चाहिए। पूर्व सूचना आयुक्त और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र सक्सेना ने कहा कि मनोज की खबर पर पकड़ बहुत अच्छी थी। वरिष्ठ पत्रकार उत्सकर्ष सिन्हा ने कहा कि मनोज पढ़ने के इतने शौकीन थे कि धर्मयुग की अन्तिम प्रति तक उन्होंने सुरक्षित रखी थी।  पत्रकार सुश्री सरिता सिंह ने मनोज के साथ की गयी पत्रकारिता की यादों में खोते हुए कहा उनकी व्यक्तियों के बारे में राय सही होती  थी ओर जल्द ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेना उनका गुण था।

उपजा की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविनद शुक्ला ओर सपा नेता दीपक मिश्र ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महामंत्री पी.के.तिवारी, कोषाध्यक्ष आर.एन. बाजपेयी, लखनऊ इकाई की मंत्री विनीता रानी ‘विन्नी’’ और पत्रकार मुदित माथुर, सर्वेश सिंह, जावेद काजिम, संजय शर्मा, राकेश वर्मा, विजय शर्मा, हरीश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों ने शोक सभा में उपस्थित होकर चित्र पर फूल अर्पित किए। सभा के बाद दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी।

बी.सी. जोशी
कार्यालय सचिव

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