डॉ शीतल यादव-
आज दिल्ली में मेस्सी का एक कार्यक्रम था। जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्टेडियम में पहुंचीं, तो भीड़ “AQI, AQI” के नारे लगाने लगी।
रेखा गुप्ता भारत की इंटरनेशनल स्तर पर बेइज्जती करवा रही हैं।
गगन प्रताप-
दिल्ली के स्टेडियम में Messi के कार्यक्रम के दौरान ‘AQI–AQI’ और ‘रेखा गुप्ता हाय–हाय’ के नारे गूंजे।
दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल खिलाड़ी जब दिल्ली की ज़हरीली हवा देखता होगा, तो भारत की छवि और सरकार की संवेदनशीलता के बारे में क्या सोचता होगा? शायद ये भी कि 500+ AQI के बीच भी सरकार ‘सब ठीक है’ कहने में व्यस्त है।
उमाशंकर सिंह-
ये ग़लत बात है। मेसी जैसे मेहमान के सामने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हाय हाय के नारे नहीं लगाने चाहिए थे। घर की बात घर में ही तय हो जानी चाहिए थी। जनता इतनी बार बोल चुका कि ‘पॉल्यूशन तुझको जाना पड़ेगा’ इसके बाद भी वो नहीं जा रहा तो इसमें CM का क्या क़सूर है?
गिरीश मालवीय-
दिल्ली के स्टेडियम में AQI चिल्लाती हुई भीड़ को ये पता ही नहीं होगा कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में स्थित थर्मल पावर प्लांट्स के उत्सर्जन की प्रभावी जांच पिछले 10 वर्षों के दौरान नहीं की गई है। यह चौंकाने वाला खुलासा आरटीआई से हुआ इसमें बताया गया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 300 किलोमीटर के दायरे में किसी भी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट की पूरी स्टैक-एमिशन मॉनिटरिंग नहीं की है। बता दें कि 2015 में सरकार ने नियम बनाए थे, जिसके तहत सभी थर्मल पावर प्लांट्स को नियमित रूप से उत्सर्जन रिपोर्ट देने और पूरी जांच करने का आदेश दिया गया था। थर्मल पावर प्लांट्स से अनियंत्रित उत्सर्जन दिल्ली के पीएम 2.5 स्तरों में बड़ा योगदान देता है, जो हर सर्दी में दिल्ली की खराब हवा का कारण बनता है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की एक रिपोर्ट में पाया गया कि थर्मल पावर प्लांट पराली जलाने की तुलना में 10 गुना ज्यादा पीएम 2.5 और 200 गुना ज्यादा सल्फर डाइऑक्साइड (एक अन्य हानिकारक प्रदूषक है) छोड़ते हैं। अकेले एनसीआर में, थर्मल पावर प्लांट पराली जलाने की तुलना में 16 गुना ज्यादा सल्फर डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट बताती है, “कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के उत्सर्जन के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव के बावजूद, इन पावर प्लांट पर सरकार का ज्यादा ध्यान नहीं है, जबकि पराली जलाने पर सख्ती कहीं अधिक है।”
आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया कि 1988 से लेकर अब तक विश्व भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 70% से अधिक का स्रोत केवल 100 कंपनियां रही हैं।एक्सॉनमोबिल, शेल, बीपी और शेवरॉन को 1988 से अब तक सबसे अधिक उत्सर्जन करने वाली निवेशक-स्वामित्व वाली कंपनियों में शामिल किया गया है।
यानी कोयला आधारित पावर प्लांट और बड़ी बड़ी रिफाइनरी सबसे ज्यादा प्रदूषण फैला रही है बताने की जरूरत नहीं है कि भारत में पेट्रोकेमिकल और पावर प्लांट पर काबिज दो बड़े उद्योग समूह कौन से है….?


