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प्रभातखबर के कुछ कर्मचारियों ने प्रबंधन से समझौता किए जाने से किया इनकार

एक तरफ जहां प्रभात खबर के कई कर्मचारियों ने प्रबंधन से हुये समझौते के बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट में दायर अपना मुकदमा वापस ले लिया है वहीं प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार ने प्रबंधन के सामने झुकने से साफ इंकार कर दिया है। मिथिलेश ने साफ कहा है कि वे बिना अपनी मेहनत की पाई-पाई लिये पीछे हटने को तैयार नहीं है। मिथिलेश कुमार ने खुद फोन करके जानकारी दिया है कि उनके पास भी प्रबंधन का आफर आया था मगर वह संतोषजनक नहीं था और मैं अपनी मेहनत का एक-एक पैसा लिये बिना पीछे हटने वाला नहीं हूं। मिथिलेश कुमार ने सुप्रीमकोर्ट में केस नंबर ९९८/ २०१६ दायर किया है। जिन कर्मचारियों ने अपना मुकदमा वापस लिया है उसका केस नंबर १०८ है।

एक तरफ जहां प्रभात खबर के कई कर्मचारियों ने प्रबंधन से हुये समझौते के बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट में दायर अपना मुकदमा वापस ले लिया है वहीं प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार ने प्रबंधन के सामने झुकने से साफ इंकार कर दिया है। मिथिलेश ने साफ कहा है कि वे बिना अपनी मेहनत की पाई-पाई लिये पीछे हटने को तैयार नहीं है। मिथिलेश कुमार ने खुद फोन करके जानकारी दिया है कि उनके पास भी प्रबंधन का आफर आया था मगर वह संतोषजनक नहीं था और मैं अपनी मेहनत का एक-एक पैसा लिये बिना पीछे हटने वाला नहीं हूं। मिथिलेश कुमार ने सुप्रीमकोर्ट में केस नंबर ९९८/ २०१६ दायर किया है। जिन कर्मचारियों ने अपना मुकदमा वापस लिया है उसका केस नंबर १०८ है।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार का प्रबंधन ने तबादला कर दिया तो मिथिलेश कुमार ने सीधे सुप्रीमकोर्ट में अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये गुहार लगा दी थी। इस मामले में मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और नागेश्वर राव की खंड पीठ ने मिथिलेश कुमार के पक्ष में कदम उठाते हुये उनके ट्रांसफर पर अंतरिम रोक लगा दिया था। मगर फिर भी प्रभात खबर प्रबंधन ने उन्हें ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद यह मामला ३ मई २०१७ को मिथिलेश कुमार के अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने रखा था। प्रभात खबर के कुछ अन्य कर्मचारियों ने भी कहा है कि वे फिलहाल अपना पूरा अधिकार लिये बना प्रबंधन से समझौता नहीं करने जा रहे हैं क्योकि प्रबंधन उनसे समझौते के नाम पर छलावा कर रहा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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