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वेब-सिनेमा

सच यह है कि आपका मोबाइल आपको दूसरों के इशारे पर चला रहा है!

मनोज अभिज्ञान-

प सोचते हैं कि आप मोबाइल चला रहे हैं, पर सच यह है कि मोबाइल आपको चला रहा है—और वह भी दूसरों के इशारों पर। आपने फेसबुक खोला, इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल किया, कुछ वेबसाइटें देखीं—पर क्या आपने कभी सोचा कि जो आपने देखा, पढ़ा, टाइप किया, वह किसकी आंखें पढ़ रही थीं?

जब आप स्क्रीन पर थे, तब पर्दे के पीछे एक और स्क्रीन थी—जो आपकी हर हरकत को नोट कर रही थी, बिना आपकी इजाजत के। Meta ने अब प्राइवेसी की दीवार को इतने सधे हुए तरीक़े से पार कर लिया है कि चोरी भी खुल्लमखुल्ला हो रही है और शिकार को खबर तक नहीं।

Meta Pixel नाम का एक छोटा-सा कोड—जिसे करोड़ों वेबसाइटों में चुपचाप जोड़ा गया था—केवल यह नहीं कर रहा था कि वह फेसबुक को आपकी गतिविधियों के बारे में बता दे, वह वापस आकर आपके ब्राउज़र से दोबारा जुड़ रहा था, जैसे कोई जासूस जो सिर्फ़ जानकारी नहीं लेता, बार-बार लौटता है यह जाँचने कि आप क्या छिपा रहे हैं। सिर्फ़ Meta ही नहीं, रूस की Yandex नामक कंपनी भी यही कर रही थी। और इन दोनों ने एंड्रॉइड के सुरक्षा तंत्र को ऐसे चकमा दिया, जैसे कोई चोर बगैर ताले तोड़े आपकी तिजोरी खाली कर दे।

यह सब कुछ Google की नाक के नीचे हुआ—वह भी महीनों तक। और जब भांडा फूटा, तब Meta ने कहा—हमने तो रोक दिया है, अब क्या? लेकिन सवाल यह नहीं कि वे अब क्या कर रहे हैं, सवाल यह है कि उन्होंने पहले क्या किया। उन्होंने आपकी इनकम, आपके लोन, आपका ऑनलाइन शॉपिंग पैटर्न—सबकुछ चुपचाप चुरा लिया। वह भी ऐसे तरीके से जिसे डिजिटल क्राइम कहें तो गलत न होगा। इसे मैलवेयर जैसा हथकंडा कहने में भी कोई संकोच नहीं होना चाहिए। गूगल ने भले ही नाराज़गी जताई हो, लेकिन सच तो यही है कि एंड्रॉइड की सुरक्षा दीवारें इन कंपनियों ने यूँ फांद लीं जैसे वे पहले से ही घर के नक्शे जानती हों।

iPhone वालों, खुश मत होइए। अभी कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि iOS में भी ऐसा कुछ हुआ हो, लेकिन तकनीकी रूप से वह भी असंभव नहीं है। Apple अभी चुप है, पर शोधकर्ता वहाँ भी तफतीश की तैयारी में हैं।

अब आप पूछेंगे—हम क्या करें?

  • Firefox, Brave और DuckDuckGo जैसे ब्राउज़र अब केवल विकल्प नहीं, ज़रूरत हैं। ये आपको साइट-टू-साइट ट्रैकिंग से काफी हद तक बचाते हैं।
  • जहाँ मुमकिन हो, वेबसाइट का इस्तेमाल करें, ऐप का नहीं। ऐप्स आपको ट्रैक करने के लिए बनी होती हैं। टिकट बुकिंग, बीमा खरीदना या बैंकिंग—इनके लिए ऐप नहीं, वेबसाइट का उपयोग करें।
  • Meta और Yandex के ऐप्स को अलविदा कहिए। ये ऐप्स न केवल आपकी लोकेशन, बैटरी लेवल और नेटवर्क की जानकारी चुराते हैं, बल्कि आपके घर के अन्य डिवाइसों तक की भनक लगा लेते हैं।
  • डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र सेटिंग बदलें। एंड्रॉइड में Brave या Firefox को अपना डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र बना दें। हर बार Chrome खोलना खुद को खतरे में डालना है।
  • यह मत सोचिए कि फेसबुक या इंस्टाग्राम यूज़ नहीं करते तो आप सुरक्षित हैं। Meta के ट्रैकर तो आपकी परछाई में भी रहते हैं। जिन वेबसाइटों में Meta Pixel है, वहाँ से भी आपकी जानकारी बटोरी जा सकती है।

यह कहानी केवल Meta की नहीं, यह उस डिजिटल व्यवस्था की है जो आपकी सहमति को बाईपास करके आपको यूज़र नहीं, उपयोग की वस्तु मानती है। याद रखिए—जब उत्पाद मुफ्त होता है, तो उत्पाद आप होते हैं।

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