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मोदी सरकार के पहले बजट से ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री निराश

मोदी सरकार के पहले बजट में ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के लिए कोई राहत भरी ख़बर नहीं है। इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि सरकार डिजिटल हेडएंड व सेट-टॉप बॉक्सों (एसटीबी) पर कस्टम ड्यूटी घटाएगी और सेवा कर की दर को भी कम करेगी। डिजिटलीकरण के बाकी बचे दो चरणों को देखते हुए, जिसमें बड़ी मात्रा में एसटीबी की आवश्यकता होगी ये उम्मीद जायज भी थी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। इंडस्ट्री की ओर से डिजिटल हेडएंड व सेट-टॉप बॉक्सों पर कस्टम ड्यूटी में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की मांग की गई थी।

मोदी सरकार के पहले बजट में ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के लिए कोई राहत भरी ख़बर नहीं है। इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि सरकार डिजिटल हेडएंड व सेट-टॉप बॉक्सों (एसटीबी) पर कस्टम ड्यूटी घटाएगी और सेवा कर की दर को भी कम करेगी। डिजिटलीकरण के बाकी बचे दो चरणों को देखते हुए, जिसमें बड़ी मात्रा में एसटीबी की आवश्यकता होगी ये उम्मीद जायज भी थी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। इंडस्ट्री की ओर से डिजिटल हेडएंड व सेट-टॉप बॉक्सों पर कस्टम ड्यूटी में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की मांग की गई थी।

एकमात्र राहत की बात यह रही कि 19 इंच से कम के एलसीडी व एलईडी टीवी पैनल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को समाप्त कर दिया गया है। सीआरटी टीवी निर्माताओं के लिए कलर पिक्चर ट्यूब से भी बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। अभी तक इस पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती थी। एलसीडी व एलईडी टीवी पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा देने से टेलिविज़न सेट की खरीद को बढ़ावा मिल सकता है। इस निर्णय से जहां घरों में एक टीवी हुआ करता था अब वहां एक से अधिक टीवी हो जाएंगे। इससे टीवी के दर्शकों की संख्या भी बढ़ेगी। यह ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के लिए अच्छा संकेत है।
 
डीटीएच ऑपरेटर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और डिश टीवी के सीईओ आरसी वेंकटेश ने कहा कि बजट में ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के लिए कुछ भी रोमांचक नहीं है। उन्होने कहा कि हमारी मांगों पर गौर करने के लिए शायद वित्त मंत्री के पास ज्यादा वक्त नहीं था। उन्होने आशा जताई कि मंत्रालय उनकी मांगों पर गौर करेगा वे भी अपनी मांगों के लिए दबाव डालते रहेंगे।

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