
अमर उजाला के साथ द हिन्दू ने भी मोदी की गिरफ्तारी को लीड बनाया है। खबर देखकर मुझे सांध्य टाइम्स की याद आई। शीर्षक के चक्कर में एक और आखिरी बार मैंने भी 50 पैसे बर्बाद किये हैं। पर आज वो मामला नहीं है और इस बारे में मैंने कल बताया भी था। बिहार में चुनाव आयोग की मनमानी एडीआर के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर भी सभी अखबारों के पहले पन्ने पर जगह नहीं बना पाई है।
संजय कुमार सिंह
आज द हिन्दू और अमर उजाला की लीड एक है। द हिन्दू का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, पंजाब नेशनल बैंक केस में सहअभियुक्त नेहल मोदी अमेरिका में गिरफ्तार। अमर उजाला में शीर्षक है, 13 हजार करोड़ के बैंक घोटाले में नीरव का भाई नेहल मोदी अमेरिका में गिरफ्तार। मैं जो नौ अखबार आज देख पाया उनमे से इन्ही दो में यह खबर लीड है। द हिन्दू ने पीएनबी केस के मारे महत्व दिया है तो अमर उजाला ने 13,000 करोड़ के घोटाले को महत्व दिया है। पर आज और भी महत्वपूर्ण खबर हैं और इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, ठाकरे भाइयों राज और उद्धव का मिलन। राजनीतिक दृष्टि से यह इतना महत्वपूर्ण है कि इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जो काम बाला साहब नहीं कर सके वह काम (देवेन्द्र) फडणविस ने कर दिखाया है। इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी-अमित शाह की राजनीति के कारण शिवसेना या उद्धव ठाकरे ने भाजपा का साथ छोड़ दिया था। इसके बाद शिवसेना के साथ जो सब हुआ और फिर महाराष्ट्र में हिन्दी के मामले में जो कुछ चल रहा है उसमें दोनों भाई एकजुट हुए हैं। देश की राजनीति पर इसका असर पड़ना तय है। इसलिए यह भी आज की बड़ी खबर है। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे लीड नहीं बनाया है लेकिन चार कॉलम की फोटो का शीर्षक यही है। यह दि एशियन एज और नवोदय टाइम्स में लीड है। दि एशियन एज का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, मराठी गौरव के लिए उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हुए, चुनावी गठजोड़ का संकेत दिया। नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, दो दशक बाद ठाकरे मिलाप। उपशीर्षक है, उद्दव ने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ की संयुक्त जनसभा।
द टेलीग्राफ ने आज धर्मशाला डेटलाइन से दलाई लामा के जन्म दिन के कार्यक्रम की खबर को लीड बनाया है। खबर के अनुसार, दलाई लामा ने इस मौके पर एकत्र 7000 से ज्यादा श्रद्धालुओं और विशिष्ट हस्तियों को आश्वस्त किया कि वे 130 साल से ज्यादा जीने की उम्मीद करते हैं। अपने 90वें जन्म दिन पर आयोजित एक भव्य समारोह में उन्होंने यह बात कही और इसलिए यह खबर भी महत्वपूर्ण है। अखबार के पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है और रविवार की खबरों की पट्टी के बाद जगह बहुत कम है। इसमें ठाकरे भाइयों के एकजुट होने की खबर तो है लेकिन मोदी की गिरफ्तारी की खबर सिंगल कॉलम में भी नहीं है। दि एशियन एज ने उद्धव और राज ठाकरे के एकजुट होने की खबर को लीड बनाया है और साथ में प्रधानमंत्री की भी खबर है। लेकिन बिहार चुनाव के खिलाफ एडीआर की याचिका की खबर यहां नहीं है। देशबन्धु और इंडियन एक्सप्रेस ने इसे लीड बनाया है। इंडियन एक्सप्रेस ने शीर्षक में बताया है कि एडीआर ने अपनी याचिका में क्या कहा है। इसके अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ याचिका में कहा गया है कि यह उचित प्रक्रिया के अनुसार नहीं है और लाखों लोग मतदाता बनने से वंचित रह जायेंगे।
आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री देश छोड़कर साढ़े तीन करोड़ से कम आबादी वाले घाना में थे और वहां की खबरें यहां पहले पन्ने पर छप रही थीं लेकिन 8 करोड़ मतदाता वाले बिहार में मतदाता सूची का ऐसा सघन पुनरीक्षण चल रहा है कि इस काम को अंजाम देने वाली सबसे निचले स्तर की सरकारी कर्मचारी एक वीडियो में कह रही है कि जो कागज वह आम लोगों से मांग रही है वह उसके पास नहीं है। इससे आप समझ सकते हैं कि चुनाव आयोग बिहार में क्या कर या करवा रहा है। इसके बावजूद खबर छापने में कंजूसी हो रही है और एक भगोड़े की गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है। बिहार की खबर आज भी सभी अखथारों मे पहले पन्ने पर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने आज दिल्ली की एक खबर को लीड बनाया है। दिल्ली के लिए यह खबर वाकई महत्वपूर्ण है। लेकिन विज्ञापन से घिरी यह खबर प्रायोजित हो तो पता नहीं है। इसके अनुसार, दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध से पहले सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा करवाई जाये। हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की लीड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के हवाले से है। उन्होंने कहा है, टैरिफ पत्र तैयार हैं, लीजिये या रहने दीजिये। खबर के अनुसार सोमवार को ट्रम्प 12 देशों को टैरिप चेतावनी भेजेंगे। हाल की वार्ता गड़बड़ाने के बाद नई दिल्ली संदेश का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने कहा है, ट्रम्प के टैरिफ के सामने मोदी का झुकना तय। यह खबर देशबन्धु में टॉप पर है लेकिन दूसरे अखबारों के पहले पन्ने पर इतनी प्रमुखता से नहीं है।
इन सब खबरों के साथ आज हिन्दुस्तान टाइम्स में एक खबर निराश करने वाली है। खबर के अनुसार देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, डीवाई चंद्रचूड़ ने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है और सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार को लिखा है कि मुख्य न्यायाधीश का आधिकारिक बंगला जल्दी खाली करवाकर कोर्ट के हाउसिंग पूल को सौंपा जाये। नेता और दलाल किस्म के लोग सरकारी बंगला खाली न करें यह तो सुना था लेकिन रिटायरमेंट से पहले, “इतिहास मेरे कार्यकाल का कैसे आकलन करेगा” की चिन्ता करने वाले पूर्व मुख्य न्यायाधीश, समय पर, एक्सटेशन के बाद भी बंगला खाली न कर पायें तो यह चिन्ता की बात है। इस तथ्य और जानकारी के बावजूद कि बहुत सारे लोगों बंगले पर कब्जा जमाये बैठे हैं और बहुतों को उनकी पात्रता से ऊपर का बंगला मिला हुआ है। सरकर और सरकारी विभागों को उनकी चिन्ता नहीं है, खबर तो नहीं ही छपती है पर इस एक बंगले की चिन्ता है और उसकी खबर भी छप गई। यह भी संभव है कि बंगला खाली हो गया हो और कागजी कार्रवाई नहीं हुई हो इसलिये खबर छपी हो फिर भी यह सामाजिक राजनीतिक स्थिति बताता है। अगर देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की यह स्थिति है तो आम नागरिक की क्या होगी। सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का दावा कर रही है और एनसीआर में एक कमरे का फ्लैट 15 हजार से कम का न मिले। रिटायरमेंट के बाद ईनाम पाने वाले जज तो पहले भी होते थे लेकिन इस सरकार में चुनाव लड़ने-जीतने वाले जज, विश्व हिन्दू परिषद की सभा में जाने वाले जज (और उनका बचाव), समय पर बंगला खाली नहीं करने वाले जज और जज के बंगले में नोट जलने जैसे मामले और इसमें कार्रवाई के लिए सरकार की जल्दबाजी जैसे मामले देखने को मिले और अमृतकाल एकदम अमृत जैसा हो गया।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने चौंकाया था, मोदी अमेरिका में गिरफ्तार। पढ़कर मुझे अपने समय के सांध्य टाइम्स और उसके शीर्षक के कारण 50 पैसे बरबाद होने की याद आई। फिर राहुल गांधी का वो सवाल भी गूंजने लगा जिसकी वजह से लोकसभा की उनकी सदस्यता छीन ली गई थी। फिर भी यह जानने की इच्छा तो थी ही कौन सा वाला चोर? पता चल गया पर यह समझ में नहीं आया कि यह खबर कल किसी अखबार की लीड हो सकती है। पूरे परिचय के बावजूद। कल मैंने बताया था कि बोफर्स के जमाने के हीरो अखबार, द हिन्दू को कैसे हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए मजबूर कर लिया गया है और कल जब देश भक्ति और हिन्दुत्व में से एक को चुनना था तो द हिन्दू हिन्दुत्व को तो नहीं चुना पर प्रत्यक्ष देशभक्ति भी नहीं कर पाया था। कल द हिन्दू की लीड थी, प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर में फैले साढ़े तीन करोड़ भारतीयों की प्रशंसा भारत के गौरव के रूप में की। कल मैंने लिखा था कि यह हिन्दू होने यानी भाजपा या प्रधानमंत्री का समर्थक होने का धर्म निभाना था। आज फिर हिन्दू की लीड ऐसी ही है।


