नई दिल्ली/मस्कट: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ओमान आगमन बेहद भव्य और आकर्षक रहा। ओमान के उप प्रधानमंत्री (रक्षा मामलों) द्वारा उनका स्वागत किया गया। इस दौरान पारंपरिक नृत्य, गार्ड ऑफ ऑनर और शाही अंदाज़ ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना प्रधानमंत्री मोदी के दाहिने कान में दिखा छोटा, चमकदार ईयरपीस, जिसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं।
कई लोगों को लगा कि यह प्रधानमंत्री का कोई नया स्टाइल स्टेटमेंट है। वैसे भी पीएम मोदी अपने पहनावे को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं—चाहे वह उनकी सलीकेदार जैकेट हों या फिर वह चर्चित बंदगला सूट, जिस पर उनका नाम कढ़ा हुआ था।
हालांकि, इस बार यह कोई फैशन एक्सेसरी नहीं थी। करीब से देखने पर स्पष्ट हुआ कि यह रीयल-टाइम ट्रांसलेशन डिवाइस है। ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठकों में आम तौर पर किया जाता है, ताकि अलग-अलग भाषाओं के बीच संवाद सहज बना रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह डिवाइस उस समय पहनी हुई थी, जब वे हवाई अड्डे पर ओमान के उप प्रधानमंत्री सैयद शिहाब बिन तारिक अल सईद से मुलाकात कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि खाड़ी देश ओमान की आधिकारिक भाषा अरबी है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह ओमान यात्रा भारत-ओमान संबंधों के लिहाज से बेहद अहम रही। इस दौरान भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत भारत के करीब 98 प्रतिशत निर्यातों को शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। वहीं, भारत ओमान से आने वाले कुछ उत्पादों—जैसे खजूर और मार्बल—पर शुल्क में कटौती करेगा।
यात्रा के अंत में प्रधानमंत्री मोदी को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने भारत-ओमान संबंधों में उनके “असाधारण योगदान” के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से सम्मानित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ट्वीट कर कहा,
“यह भारत और ओमान के लोगों के बीच स्नेह और विश्वास का प्रतीक है।”
यह खबर इंडिया टुडे की रिपोर्ट पर आधारित है।
पूर्व पत्रकार और सांसद जवाहर सरकार का ट्वीट-
“ओमान यात्रा के दौरान पीएम मोदी के कान में दिख रही ईयर-पीस क्या है? गोदी मीडिया का दावा है कि यह ‘रीयल-टाइम ट्रांसलेटर’ है, ताकि विदेशी गणमान्य लोगों की बात समझी जा सके।
लेकिन सवाल ये है—अगर बात सिर्फ समझने की है, तो जवाब देने में इतनी दिक्कत क्यों? यह ईयर-पीस ट्रांसलेटर कम और डायरेक्ट प्रॉम्प्टर ज़्यादा लगती है—ठीक टेलीप्रॉम्प्टर की तरह, जिसमें कान में निर्देश आते हैं कि क्या बोलना है।
शायद यही वजह है कि अब तक एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं। जहाँ सवाल अनियंत्रित हों, वहाँ प्रॉम्प्टर काम नहीं करता।”
जब बिना नहाए–धोए कोई रजाई से निकलकर सीधे ओमान में पहुंच जाए। तो कान में रजाई की रुई क्यों न चिपके? पता नहीं ब्रश किया कि नहीं। कुछ भी कहें, एक भिखारियत तो है बंदे में। – सौमित्र राय, पत्रकार


