Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

ट्रम्प का व्यवहार मोदी के प्रति यों ही चेंज नहीं हुआ है, इसके लिए बस थोड़ा सा पीछे जाना होगा!

Sandeep Kumar Saxena-

आजकल मोदी की सबसे ज्यादा किसी व्यक्ति ने यदि नींद हराम कर रखी है, तो वो सख्श है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ( मोदी के शब्दों में दोलाल्ड ट्रम्प) ?

ट्रम्प का व्यवहार मोदी के प्रति यों ही चेंज नहीं हुआ है, इसके लिए बस थोड़ा सा पीछे जाना होगा। जब उस समय के राष्ट्रपति बाइडेन थे। मोदी जब बाइडेन से मिलने गये थे, तो एक अजीब सी परिस्थिति पैदा हो गई ?

मोदी जब अमेरिका में बाइडेन से मिल रहे थे, लगभग उसी समय डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया में जाकर यह बयान दे दिया, कि मेरा जिगरी दोस्त मोदी आया है, और वो मुझसे मिलने अवश्य आयेगा ?

अब मोदी ठहरे मोदी! उस समय राष्ट्रपति चुनाव भी नहीं हुए थे, मगर वहां का मीडिया कमला हैरिस को ऊपर बता रहा था।

मोदी ने सोचा, कि जब कमला हैरिस ही जीतनी है, तो बेकार में ट्रम्प के पास जाकर अपना समय क्यों बर्बाद करूं ?

लिहाजा मोदी ने इस बात की परवाह भी नहीं की, कि ट्रम्प ने मीडिया में उनसे मिलकर जाने का बयान पहले ही दे रखा है। मोदी ट्रम्प को धोखा देकर अमेरिका से यों ही निकल आये।

अब मोदी तो ट्रम्प की भरपूर बेइज्जती करके आ गये, उसके बाद तो ट्रम्प की वहां की मीडिया व अपोजीशन वालों ने ऐसा धोया, कि ट्रम्प बेहद अपमानित हो गये।

ट्रम्प को मोदी से इस तरह के व्यवहार की कतई आशा नहीं थी, मोदी के इस विश्वासघात से ट्रम्प न केवल भरपूर बेइज्जत हुए, बल्कि अंदर ही अंदर टूट भी गये।

अब इसे मोदी की फूटी किस्मत बोले, या भारत के बुरे दिन ? कहां मोदी कमला हैरिस पर दांव लगाकर खेल रहे थे, पर आ गये एक बार फिर डोनाल्ड ट्रम्प ?

मोदी के लिए ये किसी बुरे सपने से कम नहीं था। उन्हें भी समझ नहीं आ रहा था, कि जिस ट्रम्प को वो फुंका हुआ कारतूस समझ कर फेंक आये थे, वो तो परमाणु बम निकल आया ?

बस यहीं से मोदी के दिन खराब होना शुरू हो गये। बेइज्जती से भरे ट्रम्प ने आते ही सबसे पहला काम यह किया, कि मोदी को शपथग्रहण समारोह में खास तौर पर उन्हें नहीं बुलाने का निर्णय लिया। जबकि भारत के शत्रु देश चीन को महज चिढ़ाने की खातिर निमंत्रण भेजा गया।

मोदी को भी शायद यह भली-भांति इल्म था, इसीलिए उन्होंने निमंत्रण पत्र प्राप्ति के लिए अपने विदेशमंत्री तक को दांव पर लगा दिया। वो बेचारे निमंत्रण पत्र प्राप्ति के लिए पूरे एक सप्ताह तक अमेरिका में डेरा डाले ट्रम्प की मान-मनौव्वल करते रहे। पर तब तक दाल पकी नहीं, बल्कि जल चुकी थी।

अब तक बाल मोदी के पाले से जा चुकी थी। जो ट्रम्प, मोदी के अब तक गीत गाता आया था, वह मोदी के व्यवहार के चलते बदल चुका था। अब वह मोदी के लिए रहम के मूड में नहीं, बल्कि एक्शन के मूड में था।

यहीं कारण है, कि ट्रम्प अब मोदी से उस बेइज्जती का बदला चुन-चुनकर ले रहा है।

सबसे पहले उसने मोदी को शपथग्रहण समारोह में न बुलाकर बदला लिया। उसके बाद वह घुसपैठिए भारतीयों को जंजीरों में बांधकर भेजने की तस्वीर पूरे मीडिया जगत में साझा करके भरपूर बेइज्जती की। उसके बाद उसने भारत पर भरपूर टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी।

ट्रम्प यहीं नहीं रूक रहा, उसने अडानी की गिरफ्तारी के लिए भी भारत से सहयोग मांगकर मोदी के लिए सांप-छुछुंदर जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

अब ट्रम्प ये कह रहा है, कि भारत को 1.8 अरब की वित्तीय सहायता की क्या जरूरत ? भारत के पास तो बहुत पैसा है ? इसीलिए जो वित्तीय सहायता भारत को अब तक मिलती रही थी, उस पर भी रोक लगने जा रही है।

इसके अलावा ट्रम्प ने यह भी एलान किया, कि भारत जब अपने बाजार में सामान बेचता है, तो 28 प्रतिशत तक का टैक्स लगाता है, और जब विदेशों में सामान भेजता है, तो कोई टैक्स नहीं लगाता ?

अब लोग कहेगें, कि ये तो अच्छी बात हुई, अमेरिका में सामान सस्ता मिलेगा ? इसमें ट्रम्प को क्यों आपत्ति हो रही है ? परन्तु अब ट्रम्प कह रहा है, कि वो उतना ही टैक्स खुद आयात सामान पर लगायेगा ?

ऐसा करते ही भारतीय कंपनियों का सामान अमेरिका में मंहगा हो जायेगा, और भारतीय कंपनियों की अमेरिकी कंपनियों के सामने पुंगी बजने लगेगी।

मत भूलिए, अमेरिका पूरे विश्व के लिए सबसे बढ़िया बाजार है। कोई भी देश व कोई भी कंपनी अमेरिकी बाजार को हरगिज नहीं खोना चाहेगी।

यह सभी कुछ इसीलिए घटित हुआ, कि हमारा प्रधानमंत्री मोदी बार-बार गलतियां करता है। पहले मोदी ने “एक बार फिर ट्रम्प सरकार” में भाग लेकर भारत की किरकिरी करवाई, और बाद में अपोजीशन के नेता से न मिलकर भारत को आज धर्म संकट में डाल दिया।

मोदी का सामना भी एक बे-सिर-पैर वाले व्यक्ति से पड़ा है।

ट्रम्प अकेला मोदी से बदला लें, इसमें किसी को कोई एतराज़ नहीं होगा, परन्तु वो मोदी की आड़ लेकर सम्पूर्ण भारत की बेइज्जती करें, यह हम सभी भारतीयों के लिए एक चिंता का विषय होगा।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
3 Comments

3 Comments

  1. पूर्व स्वयंसेवक

    February 23, 2025 at 6:39 am

    एक आदमी की शुरू से ‘यूज़ एण्ड थ्रो’ की भयंकर आदत रही है, सबको उपयोग करके किनारे डाल देना उसका अतिप्रिय शगल है। ज़िले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक वो यही करता आया है। उसने किसी को भी नहीं छोड़ा। अब उसने अपने शगल में वही हरकत अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कर दी मगर हर बार सफलता नहीं मिलती। और फिर गन्दा काम करने वाले को तो दण्ड अवश्य ही मिलता है, भले तुरन्त मिले या फिर बाद में। एक बात और, जब व्यक्ति बहुत ही भयानक पापी हो तथा भगवान भी उससे बहुत क्रुद्ध हों, तब तो तुरन्त दण्ड मिलता भी नहीं। आख़िर यदि कोई कम ऊँचाई से गिरेगा तो उसे कम चोट लगेगी इसलिए निःसर्ग उस दुष्ट को और उठने देती है ताकि वह ज़्यादा ऊँचाई से गिरेगा तो उसके हाथ-पैर टूट जाएँगे, बहुत चोट आएगी। किसी सामान्य धूर्त निकृष्ट पापी की दण्ड स्वरूप दुकान नष्ट हो जाएगी मगर घोर धूर्त निकृष्ट पापी का तो निःसर्ग द्वारा महल बनने दिया जाएगा, ताकि जब महल नष्ट होगा और वो अर्श से फर्श से गिरेगा तो वह उसके लिए दारुण दुःख होगा। यहाँ भी यही हुआ। आत्ममुग्ध कृतघ्न पापी निकृष्ट दुष्ट स्वार्थी व्यापारी ने अपने शगल के तहत जीवन भर सबका नुकसान किया, किसी को भी नहीं छोड़ा, अपनों को भी जमकर यूज़ करके किनारे लगाया (लाल कृष्ण आडवाणी जी, अशोक सिंघल जी, संजय जोशी जी, मायाबेन कोडनानी जी, बाबू बजरंगी आदि), अच्छे मंत्रालयों में नकारा मगर चेले बने रहने वालों को ही मंत्री व राज्यों में मुख्यमंत्री बनवाया, पार्टी में भी अच्छे नेता नहीं पनपने दिये, काला धन 100 दिनों में वापस लाने का वादा पूरा करने की बजाय उसे अन्य देशों में ट्रान्सफ़र करवा दिया, टैक्स पर टैक्स लगा-लगाके आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी, महाभारत और भगवान श्रीकृष्ण का ग़लत हवाला देकर पार्टी में कचरा भरा, श्रीअयोध्याजी में मस्ज़िद के लिए जगह दिलायी, तीर्थों को पर्यटन बनाया, कोरोना में स्वास्थ्य व चिकित्सा सम्बन्धी अव्यवस्थाओं के कारण बेहिसाब लोग मारे गये, कुम्भ के नाम पर झूठ बोल-बोलकर बेजा प्रचार किया जबकि आम आदमी के लिए व्यवस्था कुछ नहीं जिसमें बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। ईश्वर तो चिढ़े हुए थे ही, वो दुष्ट जीवन भर सबके साथ ‘यूज़ एण्ड थ्रो’ करते-करते बिल्कुल उन्मुक्त हो चुका था। अब वही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉनल्ड ट्रम्प के साथ किया। ट्रम्प को पहले तो उसका ‘यूज़ एण्ड थ्रो’ का इतिहास पता नहीं था, अपनी पराजय के बाद उसको इस आदमी की असलियत समझ में आयी। दैवयोग देखिए… अमेरिका में कोई व्यक्ति बुरी तरह चुनाव हारा हो, कार्यालय तक से बेइज़्ज़त करके भगाया गया हो, इसके बाद भी मात्र चार वर्षों के अन्दर यानी अगले चुनाव में ही वह अपनी राजनीतिक पार्टी से प्रत्याशिता की दौड़ में जीत जाए, फिर विरोधी दल के उम्मीदवार को हराकर राष्ट्रपति बन जाए, ऐसा विरला ही हुआ होगा, जोकि डॉनल्ड ट्रम्प की जीत के रूप में हो गया। अब जीवन भर के कुकर्म पककर दारुण दण्ड के रूप प्राप्त होंगे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जमकर फ़ज़ीहत हो रही है। अभी तो शुरुआत है, थका और उतरा हुआ चेहरा बहुत-कुछ बता रहा है कि अंदरखाने काफी कुछ ठीक-ठाक नहीं है।

  2. संघ विरोधी

    February 24, 2025 at 7:40 pm

    संजय जोशी जी के विरुद्ध षड्यंत्र करने वाला, प्रवीण भाई तोगड़िया जी को संघ से बाहर करने वाला, अटल बिहारी बाजपेयी जी की अस्थियों को कलशों में बाँट-बाँटकर उनको मरणोपरान्त दुर्गति की ओर भेजने वाला, लालकृष्ण आडवाणी जी एवं मुरली मनोहर जोशी को जीते जी मरे जैसा कर देने वाला, काशी विश्वनाथ जी में वास्तविक शिवलिंग मिलने के बाद वहाँ का मामला ही दबा देने वाला, श्रीअयोध्याजी में बाबरी ढाँचे के बदले मस्ज़िद के लिए जगह दिलाने वाला, मथुराजी में श्रीजन्मभूमि का मामला ठण्डे बस्ते में कर देने वाला, देश भर के भ्रष्टाचारियों व अपराधियों को जेल जाने से बचाने वाला, भ्रष्टाचारियों व अपराधियों के विरुद्ध चल रहे मामलों को दबवा देने वाला, बदहाल आर्थिक नीतियों और जमकर लगाये हुए करों व बढ़ाये हुए टोल टैक्सेज़ से जनमानस की कमर तोड़कर आम लोगों को बेहाल कर देने वाला, अय्याशों-नौकरशाहों व जनता के दुःख-दर्द न समझने वाले हाई-फाई लोगों को मंत्री बनाने वाला, दूरसंचार व स्टॉक बाज़ार से लेकर सभी जगह नियामक व नियंत्रक संस्थाओं को बेकार तथा अप्रभावी करवा देने वाला… एक ही व्यक्ति है जोकि प्रधानमंत्री बना हुआ है। वर्तमान समय धारा उल्टी बहने का साक्षात उदारहण यह कि वर्तमान संघ प्रमुख मोहन राव भागवत स्वयं इस प्रधानमंत्री के सामने नतमस्तक हैं। जो कुछ भी प्रधानमंत्री कह दे, वह संघ प्रमुख कहने लगते हैं। जैसे बीते दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने कहा कि “मस्ज़िदों के नीचे शिवलिंग ढूँढ़ना बन्द करो”, यह स्वार्थी जलनखोर मोदी ने कहलवाया, मूर्ख भागवत जी ने यह कह भी दिया। भागवत जी, यह बताओ कि क्या हर मस्ज़िद के नीचे मन्दिर खोजा जा रहा है? जिनके बीचे वाकई मन्दिर है, वहीं का तो सर्वे कराया जा रहा है। इसमें आपको क्या दिक्कत? दरअसल ये लोग ख़ुद से ही ख़ुद को हिन्दुत्व का असली ठेकेदार मानते हैं।

  3. अनुरुद्ध दुबे

    February 26, 2025 at 9:11 pm

    ये बात गलत है कि हमारे प्रधानमंत्री दूरदर्शी नहीं है गलती करते हैं। यदि ट्रम्प नाराज होता तो मोदी जी की कुर्सी नहीं पकड़ता।उनके बैठने पर पीछे नहीं खड़ा होता।देश मे कई भृष्ट,देशद्रोही,लालची बुद्धिजीवी ऐसे हैं जो मौका देखते हैं मोदी जी के बारे में नीचता दिखाने लगते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन