मोहनलालगंज की पीड़िता के परिजनों को दो कथित रिपोर्टरों ने धमकाया

लखनऊ : लगातार उलझती कड़ियों के बीच पुलिस, नेता, बिल्‍डर तथा मीडिया गठजोड़ ने मोहनलालगंज रेपकांड को और गहरा दिया है. पुलिस अब तक लगातार गलतबयानी करती नजर आ रही थी. फॉरेंसिक जांच के बाद उसके फर्जी खुलासे को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन इसी बीच शनिवार की रात पीड़िता के परिजनों के साथ जो हुआ, वो और ज्‍यादा चौंकाने वाला है. सीबीआई जांच की मांग कर रहे पीड़िता के परिजनों को धमकाने दो कथित पत्रकार भी पहुंच गए और उनसे गाली गलौज भी की.

पीड़िता के एक परिजन ने बताया कि शनिवार की रात शराब के नशे में खुद को अमर उजाला और हिंदुस्‍तान के पत्रकार बताने वाले दो लोग हजरतगंज जीपीओ पार्क स्थित गांधी प्रतिमा के पास पहुंचे तथा परिजनों के बारे में जानकारी मांगने लगे. उन लोगों ने मृतका के बच्‍चों के बारे में भी पूछताछ की. इन लोगों ने वहां सो रहे लोगों को जगा दिया. जब इनका परिचय पूछा गया तो इसमें से एक ने खुद को अमर उजाला तथा दूसरे ने हिंदुस्‍तान का पत्रकार बताया.

पीड़िता के परिजन ने आरोप लगाया कि दोनों लोग उनके समेत उनके परिजनों से गाली गलौज करते हुए धमकी दी कि यहां से उठ जाओ नहीं तो उठवा लिए जाओगे. किसी का पता नहीं चलेगा. परिजनों का आरोप था कि दोनों कथित पत्रकार यह भी कहते रहे कि सीबीआई जांच की मांग क्‍यों कर रहे हो, सीबीआई क्‍या उखाड़ लेगी. इसके बाद इन लोगों ने पुलिस को बुलाकर भी इन लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास किया. पुलिस भी इनका ही साथ देती नजर आई. परिजन का कहना है कि पत्रकारों की धमकी तथा पुलिस के रवैये के बाद परिजन डरे हुए हैं.

हालांकि इन आरोपों के बाद सवाल यह उठने लगा है कि ये दोनों कथित पत्रकार किसके इशारे पर मृतका के परिजन को धमकाने पहुंचे थे. क्‍या इनको पुलिस का शह मिला था या फिर ये किसी आरोपी की तरफ से वहां पहुंचे थे. आखिर किसी पत्रकार को पीड़िता के परिजनों की सीबीआई जांच की मांग से क्‍या नुकसान हो सकता है? इसके साथ यह भी साबित होने लगा है कि इस जघन्‍य कांड में कोई बड़ा सिंडिकेट जुड़ा हुआ है, जिसको बचाने का प्रयास पुलिस, नेता और कुछ पत्रकार कर रहे हैं.

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Comments on “मोहनलालगंज की पीड़िता के परिजनों को दो कथित रिपोर्टरों ने धमकाया

  • सलमान says:

    बेचारे दो पत्रकार दिनभर की थकान के बाद गम गलक करने बैठे थे कि इस जगत में अपने क्राइम रिपोर्टर पापा की छाया तले पल रहे एक चिर-ए-युवा पत्रकार महोदय ने शाबाशी के चककर में ये सारा खेल कर डाला। भइया अबहीं जानत नाही हैं कि उई तौ हैं एक उस अखबार के क्राइम रिपोर्टर जो महज 400-500 कापी ही छपता है, लेकिन जिस दिन उई घेरे मा अइहैं, ऊ दिन अब्‍बाजान भी ना बचा पाइहैं:::: अब्‍बजान वही जो आजकल गले में एक महंगा पट़टा बांधकर घूमत हैं।

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  • paper ki circulation ki chinta wo kare jiski majburi patrakarita ho.agar ladka sanak gaya to bhagne ke liye saher kam pad jayga…..aur filhaal aise nasediyo ke liye baap ko hath dalne ki jarurat hi nahi hai……….

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