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भड़ास4मीडिया पर पहला मुकदमा मृणाल पांडेय के सौजन्य से एचटी मीडिया ने किया था

बेकार बैठीं मृणाल पांडेय को मिल गया चर्चा में रहने का नुस्खा!

Yashwant Singh : मृणाल पांडेय ने जो लिखा कहा, उस पर बहुत लोग लिख कह रहे हैं. कोई पक्ष में कोई विपक्ष में. आजकल का जो राजनीतिक विमर्श है, उसमें अतिवादी टाइप लोग ही पूरा तवज्जो पा रहे हैं, महफिल लूट रहे हैं. सो इस बार मृणाल पांडेय ही सही. मेरा निजी अनुभव मृणाल को लेकर ठीक नहीं. तब भड़ास4मीडिया की शुरुआत हुई थी. पहला पोर्टल या मंच या ठिकाना था जो मेनस्ट्रीम मीडिया के बड़े-बड़े मठाधीश संपादकों को चैलेंज कर रहा था, उनकी हरकतों को उजागर कर रहा था, उनकी करनी को रिपोर्ट कर रहा था.

बेकार बैठीं मृणाल पांडेय को मिल गया चर्चा में रहने का नुस्खा!

Yashwant Singh : मृणाल पांडेय ने जो लिखा कहा, उस पर बहुत लोग लिख कह रहे हैं. कोई पक्ष में कोई विपक्ष में. आजकल का जो राजनीतिक विमर्श है, उसमें अतिवादी टाइप लोग ही पूरा तवज्जो पा रहे हैं, महफिल लूट रहे हैं. सो इस बार मृणाल पांडेय ही सही. मेरा निजी अनुभव मृणाल को लेकर ठीक नहीं. तब भड़ास4मीडिया की शुरुआत हुई थी. पहला पोर्टल या मंच या ठिकाना था जो मेनस्ट्रीम मीडिया के बड़े-बड़े मठाधीश संपादकों को चैलेंज कर रहा था, उनकी हरकतों को उजागर कर रहा था, उनकी करनी को रिपोर्ट कर रहा था.

मृणाल पांडेय ने हिंदुस्तान अखबार से मैनेजमेंट के निर्देश पर थोक के भाव पुराने मीडियाकर्मियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया. करीब तीन दर्जन लोग निकाले गए थे. शैलबाला से लेकर राजीव रंजन नाग तक. इस बारे में विस्तार से खबर भड़ास पर छपी. मृणाल पांडेय ने अपने सेनापति प्रमोद जोशी के जरिए भड़ास पर मुकदमा ठोंकवा दिया, लाखों रुपये की मानहानि का, जिसके लिए कई लाख रुपये दिल्ली हाईकोर्ट में एचटी मीडिया लिमिटेड की तरफ से कोर्ट फीस के रूप में जमा किया गया.

मुकदमा अब भी चल रहा है. प्रमोद जोशी एक बार भी हाजिर नहीं हुए. भड़ास पर यह पहला मुकदमा था. हम लोगों ने इसका स्वागत किया कि यह क्या बात है कि आप अपने यहां से बिना नोटिस तीन दर्जन लोगों को निकाल दो और हम खबर छाप दें तो मुकदमा ठोंक दो, सिर्फ इस अहंकार में कि हम तो इतने बड़े ग्रुप के इतने बड़े संपादक हैं, तुम्हारी औकात क्या? भड़ास4मीडिया न डरा न झुका, बल्कि कई निकाले गए लोगों की मदद करते हुए उन्हें लीगल सहायता भी उपलब्ध कराई. मृणाल पांडेय मुकदमें में खुद पार्टी नहीं बनीं. उन्होंने प्रमोद जोशी को आगे किया. एचटी मीडिया यानि शोभना भरतिया की कंपनी को आगे किया. आज भी एचटी मीडिया बनाम भड़ास4मीडिया का मुकदमा चल रहा है. हमारे बड़े भाई और वकील साब Umesh Sharma जी इस मुकदमें को देख रहे हैं, बिना कोई फीस लिए.

कहते हैं न कि कई बार चींटीं भी हाथी को धूल चटा देती है. इस मुकदमें में कुछ ऐसा ही होने वाला है. अब तो वहां न मृणाल पांडेय रहीं न प्रमोद जोशी रहे. एचटी मीडिया के ढेर सारे वकील भारी भरकम फीस कंपनी से वसूल रहे हैं और भड़ास4मीडिया से लड़ने हेतु कोर्ट से तारीख पर तारीख लेते जा रहे हैं. अपन लोग भी इंज्वाय करते हुए मुकदमा लड़ रहे हैं, कि इतनी भी जल्दी क्या है, मुकदमा चल रहा है तो क्या… मुकदमा खत्म भी हो जाए तो क्या…

लेकिन उस वाकये ने मृणाल पांडेय को मेरी नजरों से गिरा दिया. वह एक दंभी, स्वार्थी, चापलूस पसंद, अलोकतांत्रिक और आत्मकेंद्रित महिला मुझे लगी. उसे अब किसी भी प्रकार से चर्चा में रहना है… क्योंकि उसके पास अब न कोई पद है न कोई काम… ऐसे में सहारा बचा है सोशल मीडिया जिसके जरिए उसे चर्चा में रहने का एक जोरदार मौका मिला है. आजकल ब्रांडिंग इसी को कहते हैं. आप लगे रहिए मृणाल के विरोध या पक्ष में, लेकिन सच बात तो ये है कि मृणाल फिर से मशहूर हो गई… मृणाल फिर से मुख्यधारा में आ गई… ये है नए दौर की ब्रांडिंग की ताकत… कोई मारी गई महिला पत्रकार को कुतिया कह कर चर्चा में आ जाता है तो कोई पीएम को गधा बताकर ताली बटोर लेता है. साथ ही साथ उतना ही तगड़ा विरोध भी झेलता है. इस तरह चरम विरोध और समर्थन के बीच वह अपना कद काठी काफी बड़ा कर लेता है.

जैजै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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