मुंबई में टाइम्स समूह को छोड़ किसी ने नहीं दिया मजीठिया (देखें आरटीआई)

मुंबई। मजीठिया से बचने के लिए अखबार मालिकान अन्य तिकड़मों के साथ ही अपने स्थायी कर्मचारियों की कम संख्या दिखाकर मुंबई के श्रम विभाग को धोखा दे रहे हैं। एक पत्रकार ने पिछले दिनों सूचना के अधिकार के तहत श्रम विभाग से जानकारी मांगी थी कि मुंबई के कौन-कौन से समाचार पत्रों में मजिठिया को लागू किया गया है। श्रम विभाग से जो जानकारी मिली है उससे चौंकाने वाली सच्चाई सामने आयी। मुंबई में टाइम्स समूह को छोड़कर किसी भी समाचार पत्र ने मजीठिया लागू नहीं किया है।

इसके अतिरिक्त श्रम विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार तो कुछ समाचार पत्र मालिकों ने फर्जीवाड़े की हद कर दी है। टाइम्स समूह ने जहां श्रम आयुक्त कार्यालय में अपने स्थाया कर्मचारियों की संख्या 50 दिखायी है वहीं महाराष्ट्र के एक दिग्गज नेता के समाचार पत्र लोकमत में सिर्फ 9 स्थायी कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं। अन्य समाचार पत्रों में कार्यरत स्थायी कार्मचारियों की संख्या हैः डीएनए- 150, नवभारत प्रेस लि.- 36, प्रहार- 36, आपला महानगर- 05, हिन्दुस्तान टाइम्स- 65, दैनिक पुढारी- 35 और नवाकाळ- 35। अब ये सोचने वाली बात है कि इन बड़े-बड़े समाचार पत्रों में क्या वाकई इतने कम स्थायी कर्मचारी हैं या फिर कर्मचारियों के संबंध में सही जानकारी श्रम विभाग को नहीं दी गई है?

भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित।

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Comments on “मुंबई में टाइम्स समूह को छोड़ किसी ने नहीं दिया मजीठिया (देखें आरटीआई)

  • राहुल कुशवाहा की गिरफ्तारी के लिये गाजियाबाद में जबरदस्‍त हंगामा किया. और पुलिस से झड़क भी हुई है.
    मोदीनगर की नाबालिग लड़की ज्योति बैसला की लड़ाई में गुर्जर समाज ने कहा हैरानी इस बात की है हम समाज के लिए बड़ी बड़ी बातें करते हैं परंतु समाज की एक लड़की साथ देने में शरम आती है | 8)
    गुर्जर समुदाय के नेताओं ने महापंचायत और आंदोलन करने की घोषणा की है ।

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  • chhandrakant says:

    bhaskar ahmedabad office ne bhi nahi diya hai abhi tak majjethi ka labha apna kanun kaha gaya hai karmachari ka kai sapport nahi kar raha hai upar logo ko dara dhamkakar kam karaya jata hai bhaskar house ahmedabad office me so plz help bhaskar ahmedabad ke logo ko.

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  • Manohar Gaur says:

    Lokmat Group ke Hindi, Marathi aur English ke milakar kul 17 edition nikalate hain aur karib 4000 karmachari kam karate hain, magar sthayee karmachariyon ki sankhya hai kewal-275. Hai n amajedar bat. union ne virodh kiya to union ke saare padadhikariyon ko nikal bahar kiya (61 log, jisme 31 log sthayee hain.). mamla ab court me hai. Lokmat Group ne to koi award theek se lagoo naheen kiya hai. isko lekar bhee ek mamla manneey Industrial court me lambit hai.

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  • मुकेश कुमार says:

    मजीठीया लागु कराने वाली सरकार खुद इस समस्या से पल्ला झ़ाड़ कर तमाशबीन बनकर बैठी है तो फिर क्या कह सकते हैं । सरकार तो कोई भी अाए वो अपना उल्लू सीधे करने के अलावा अाम अादमी के कुछ भी काम करने में विश्वास नहीं करती है।
    सरकार हर एक अखबार के सारे सरकारी बेनीफिट देना बंद करके मजीठीया देने के लिए मजबुर कर ही सकती है। क्या सरकार एसी हिंमत दीखाएगी ? शायद ही……

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