शीतल पी सिंह-
दिल्ली की मुस्तफाबाद की सीट ओवैसी साहब ने बीजेपी को गिफ़्ट की l!
आदिल खान(“आप”)=67637
ताहिर हुसैन(AIMIM)=33474,
अली मेहदी(काँग्रेस)=11763
तीनों को कुल वोट मिले: 112874
और
मोहन बिष्ट (भाजपा)=85215 जीत गये!

कुछ प्रतिक्रियाएं-
Rehan Ashraf Warsi –
सर एक सीट से कौन सी सरकार बन जाती? औवेसी और मजलिस की पॉलिटिक्स से शुरु से ही इक़्तेलाफ रहा है मगर एक डेमोक्रेटिक देश मे चुनाव लड़ना हर पार्टी का राइट है , उनके समर्थको का भी राइट है की वह प्रचार करें और जहां से चाहे चुनाव लड़ें, मुस्लिम वोट का हव्वा बनाया जाता रहा है की इकतरफा पड़ता है जबकि ऐसा किसी धर्म तो छोड़िये जाति पर भी कोई आरोप नहीं की इनका वोट एकतरफा फलां पार्टी को पड़ता है बाक़ी बारह तेरह परसेंट कभी भी पिच्यासी छायासी परसेंट से किसी भी फिल्ड मे मुक़ाबला नहीं कर सकते।।
Salim Javed- दिल्ली में भाजपा की जीत का असल ज़िम्मेदार इंडिया गठबंधन के दो दल, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की लड़ाई है, लेकिन समाज की बदमाशी देखिए के वो सारा ठीकरा ओवैसी पर फोड़ रहा है, बेशर्मी की इंतहा है.
Mohammad Wasim Ansari-
मनीष सिसोदिया हार गए
अरविन्द केजरीवाल हार गए
सौरभ भारद्वाज हारने वाले हैं
अवध ओझा हार गए हैं
सत्येन्द्र जैन हार गये हैं
दुर्गेश पांडेय हार गये
सोमनाथ भारती हार गए
14 सीटों पर “आप” की हार का अंतर कांग्रेस को प्राप्त वोटों से कम हैं।
इसी को कहते हैं कि “हम तो डूबेंगे सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे”
और इस तरह कांग्रेस ने पंजाब हरियाणा की हार बदला “आप” से ले लिया
खैर बीजेपी की बी टीम ओवैसी ही रहेगा 🙂
J Arvind-
नतीजे बता रहें हैं कि कांग्रेस को भी राष्ट्रीय पार्टी की तरह बड़ा दिल रखकर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए..बल्कि क्षेत्रीय पार्टी की तरह चुनाव लड़ना चाहिए. केजरीवाल ने जो गोवा, गुजरात, असम, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ किया, थोड़ी देर से सही कांग्रेस ने केजरीवाल के साथ दिल्ली में करके दिखा दिया..अब केजरीवाल अपने वजूद को बचाने के लिए सारी उम्र जूझेगा..क्योंकि छह महीने में अब केजरी की पंजाब सरकार भी गिर जाएगी.. जितना सत्यानाश कांग्रेस का केजरी ने किया है.उतना किसी और दूसरे दल ने नहीं किया..केजरी को सबसे ज्यादा नफरत कांग्रेस से ही है. कांग्रेस की सिर्फ एक चाल से केजरी अस्तित्व विहीन हो गया..


